Best Anushasan Par Nibandh (अनुशासन निबंध 2020) Essay On Discipline In Hindi

Anushasan Par Nibandh (अनुशासन निबंध) Essay On Discipline In Hindi: ‘अनुशासन’ यह सुनते ही मेरे दिमाग में एक और शब्द आता है और वह है ‘जिंदगी में सफलता’ अगर आप अनुशासन का पालन करते हो तो निश्चित है कि आपको सफलता एक न एक दिन ज़रूर मिल जाएगी, क्योंकि भगवान के घर देर है परंतु अंधेर कभी नहीं है। 

Anushasan Par Nibandh
Anushasan Par Nibandh

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आज हम अनुशासन पर निबंध पढ़ेंगे। जो की अलग अलग शब्द सीमा के आधार पर लिखे गए हैं। आप Essay On Discipline In Hindi को ध्यान से और मन लगाकर पढ़ें और समझें।

Anushasan Par Nibandh को निम्न शब्द सीमा के आधार पर लिखा गया है-

  1. अनुशासन पर निबंध 50 शब्द
  2. अनुशासन पर निबंध 100 शब्दों में 
  3. अनुशासन का हिंदी निबंध 150 शब्दों का 
  4. Anushasan Par Nibandh 200 Shabdo me
  5. अनुशासन निबंध 250 शब्द
  6. Essay On Discipline In Hindi 300 Words
  7. Anushasan Par Nibandh Hindi Mein 400 Shabd
  8. Anushasan Par Lekh 500 Word
  9. Best Anushasan Essay In Hindi 600 Shabd

आइये!

Anushasan Par Lekh को अलग अलग शब्द सीमाओं के आधार पर पढ़ें।

नोट- यहां पर दिया गया Anushasan Par Nibandh कक्षा(For Class) 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11, 12,(विद्यालय में पढ़ने वाले) विद्यार्थियों के साथ-साथ कॉलेज के विद्यार्थियों के लिए भी मान्य हैं।

अनुशासन पर निबंध 50 शब्द

अनुशासन हमारे व्यक्तित्व के लिए सर्वाधिक महत्वपूर्ण गुण है जो दुनिया के प्रत्येक व्यक्ति में होनी चाहिए। यदि हमारे

अंदर अनुशासन नहीं है तो हम जीवन में बहुत कुछ नहीं पा सकेंगे और यदि पा भी लिया तो बहुत जल्द गँवा भी बैठेंगे।

‘अनुशासन एक संस्कार है’ जो बचपन से ही दिया जाना चाहिए।

अनुशासन पर निबंध 100 शब्दों में

Anushasan Par Nibandh 100 Shabd
Anushasan Par Nibandh 100 Shabd

अनुशासन एक ऐसी चीज है जो व्यक्ति को नियंत्रण में रखती है। यह हमारे विकास में सहायक होता है। हम हर जगह हर किसी न किसी रूप में अनुशासन का पालन कर रहे होते हैं। लेकिन इसके मायने व्यक्तिगत तौर पर किसी व्यक्ति की विचारधारा के अनुसार बदलता रहता है। 

यही बात समाज पर भी लागू होती है। अलग-अलग समाज में अनुशासन का अर्थ भी अलग-अलग होता है। लेकिन इसका मुख्य उद्देश्य एक ही होता है, वह हैं व्यक्ति को शासन के अधीन रखना। चाहे बाहर, यानी किसी देश या संगठन या फिर किसी संस्थान की, या फिर स्वयं की ही क्यों न हो।

अनुशासन का हिंदी निबंध 150 शब्दों का

Anushasan Par Nibandh 150 Shabd
Anushasan Par Nibandh 150 Shabd

“आत्म-ज्ञान की तलवार से काटकर अपने ह्रदय से अज्ञान के संदेह को अलग कर दो, अनुशासित रहो।” यह दिव्य वचन हैं स्वयं भगवान श्री कृष्ण के जो कि उन्होंने अर्जुन से कहे थे। 

अनुशासन से ही ज्ञान की प्राप्ति हो सकती है।एक अनुशासन-हीन व्यक्ति को कभी भी आत्म-ज्ञान की प्राप्ति नहीं हो सकती।

अपनी वाणी, आहार, विचार तथा इन्द्रियों को नियंत्रण में रखना ही अनुशासन है।

अनुशासन से अभ्यास की शक्ति मिलती है और जब अनुशासन तथा अभ्यास दोनों मिलता है तब व्यक्ति में आत्मविश्वास का उदय होता है।

यही बात ‘रोबर्ट कियोसाकी’ ने अपनी पुस्तक “रिच डैड पुअर डैड” में भी कही है। पुरे पुस्तक में उन्होंने अनुशासन और विशेषकर आत्म-अनुशासन पर विशेष जोर दिया है।

रोबर्ट अपनी पुस्तक में ऐसे कई लोगों का उदाहरण देते हैं जो एक समय में अमीर व लोकप्रिय हुआ करते थे लेकिन उन लोगों ने अनुशासनहीनता की वजह से सब कुछ गवा दिया। 

Anushasan Par Nibandh 200 Shabdo me

Anushasan Par Nibandh 200 Shabd
Anushasan Par Nibandh 200 Shabd

अनुशासन अंग्रेजी शब्द डिसिप्लिन ‘Discipline’ का हिंदी पर्याय है डिसिप्लिन शब्द डिसायपल (disciple) शब्द से निकला है, जिसका अर्थ ‘शिष्य’ होता है। और यदि अंग्रेजी के हिसाब से देखें तो अनुशासन का अर्थ होगा “शिष्य से गुरू की

आज्ञा के अनुसरण करने की अपेक्षा”, या फिर “गुरु की आज्ञा का पालन करना”।

जर्मनी के सिद्ध शिक्षा शास्त्री ‘फ्रीड्रिक विलियम अगस्त फ्रोबेल’ ने कहा था कि बच्चों को दमनकारी अनुशासन से बचाना चाहिए।

क्योंकि उनका मानना था कि ‘आत्मानुशासन ही सर्वोत्तम अनुशासन है’। उन्होंने कहा- “बालकों को आत्म क्रिया करने की पूर्ण स्वतन्त्रता मिलनी चाहिए, जिससे बालक में स्वयं ही अनुशासन में रहने की आदत पड़ जाये”

‘महात्मा बुद्ध’ का मानना था कि यदि आप अपने आप को नियंत्रण में रखते हैं तो आपको वह क्षमता हासिल होगी जिसे बहुत ही कम लोग हासिल कर पाते हैं। 

और यह आत्म नियंत्रण आपको तभी मिलेगा जब आप अनुशासन में होंगे तथा नियमित होकर अपनी कार्यकुशलता को बढ़ाने पर काम करेंगे ना की व्यर्थ में ही अपना समय खराब व्यर्थ करेंगे। 

आत्मानुशासन सबसे बड़ा साधना है और यह कठिन भी है क्योंकि हमारा मन बहुत चंचल होता है और अनुशासन के लिए आपके पास धैर्य होना अति आवश्यक होता है। @essaytonibandh

अनुशासन निबंध 250 शब्द

Anushasan Par Nibandh 250 Shabd
Anushasan Par Nibandh 250 Shabd

‘अनुशासन समाज की रीढ़ की हड्डी है’। जिस प्रकार रीढ़ की हड्डी के बिना हमारा शरीर खड़ा नहीं रह सकता और ना ही सही ढंग से कार्य कर सकता है। ठीक उसी प्रकार अनुशासन के बिना हमारा समाज भी तितर-बितर हो जाएगा और आज की उत्पादकता कम हो जाएगी।

अनुशासनहीनता का सीधा-सीधा असर हमारी कार्य कुशलता पर पड़ता है। यदि व्यक्ति अनुशासित नहीं है तो वह समाज के ऊपर एक बोझ है। 

उदाहरण के तौर पर समझते हैं कि एक चोर अनुशासन हीन होता है क्योंकि व शासन के अधीन कार्य नहीं करता है। वह समाज को तो नुकसान पहुंचाता ही है, साथ-ही-साथ सरकार को उसे पकड़ने तथा जेल में रखकर उसे भोजन कराने में जो पैसा लगाती है उसका भार भी आम जनता पर ‘कर’ के रूप में पड़ता है।

ऐसा नहीं है कि सभी अनुशासनहीन व्यक्ति ही अपराधी प्रवृत्ति के हो, वह आम आदमी भी हो सकता है और किसी पद पर बैठा हुआ पदाधिकारी भी। किंतु, हर परिस्थिति में वह समाज को नुकसान ही पहुंचाता है। आज इसका भार समाज को उठाना पड़ेगा। 

अतः यहां बहुत ही महत्वपूर्ण हो जाता है कि हम अपने बच्चों को बचपन से ही अनुशासन का पाठ सही ढंग से पढ़ायें तथा अनुशासन के महत्व को उनके दिमाग में बैठा दें, ताकि आगे चलकर वह एक अनुशासित व जिम्मेदार नागरिक बनकर देश की तरक्की व विकास में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे सकें। और

यह ‘अनुशासन का पाठ‘ जो आप बचपन से पढ़ाएंगे, उसके व्यक्तिगत जीवन में भी सफलता आने में मददगार साबित होगा।

Essay On Discipline In Hindi 300 Words

Anushasan Par Nibandh 300 Shabd
Anushasan Par Nibandh 300 Shabd

अनुशासन दो शब्दों से मिलकर बना है। पहला शब्द है ‘अनु’ इसका अर्थ होता है ‘किसी के अधीन’ और दूसरा शब्द है ‘शासन’

अतः अनुशासन का शाब्दिक अर्थ हुआ ‘शासन के अधीन रहना’। शासन का मतलब है आप जिस भी जगह पर रह रहे हैं, जिस संस्थान में काम कर रहे हैं, वहां के कानून के नियम।

यह व्यक्तिगत तौर पर भी लागू होता है अर्थात आप अपने लिए कुछ दैनिक नियम बना लें तथा उसके अनुरूप अपने कार्यों को करें तो यह भी एक प्रकार का अनुशासन है जिसे ‘आत्मानुशासन’ कहा जाता है।

आत्मअनुशासन का पालन करके आप अपने मन को शांत कर सकते हैं।

भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने कहा था कि “अनुशासन देश को जीवित रखता हैं”

हमारे शरीर में रक्त का क्या महत्व होता है? यह आप सब भली-भांति जानते हैं ठीक उसी प्रकार अनुशासन का देश के शासन प्रक्रिया में महत्व होता है।

इसीलिए कहा गया है-

बिना अनुशासन रे मना, सफल ना होते काम ।
जीवन स्तर नीचे गिरे, जिसे न सकता कोई धाम।।

अर्थात अनुशासन के बिना कोई भी काम सफल नहीं होता तथा इसके बिना हमारा जीवन स्तर भी नीचे गिर जाता है जिसे कोई  सम्भाल  नहीं सकता।

इसका अर्थ यह हुआ कि सफलता पाने की राह में अनुशासन का एक बहुत बड़ा योगदान है और बिना अनुशासन के हम सफलता भी नहीं पा सकते और दूसरी बात, अनुशासन के बिना हमारा जीवन स्तर नीचे गिर

जाता है और जिसका जीवन स्तर नीचे हो वह कभी महान नहीं बन सकता।

जो व्यक्ति अनुशासित है वह व्यक्ति जीवन के हर क्षेत्र में अग्रसर होकर अपना योगदान भी देगा और वह जीवन में सफल भी होगा।

यही बात एक परिवार के लिए, एक संगठन के लिए और एक देश के लिए भी लागू होती है। और अनुशासन स्वयं भी सीखा जाता है इसे कभी दबाव में नहीं सीखा जा सकता।

Anushasan Par Nibandh Hindi Mein 400 Shabd

Anushasan Par Nibandh 400 Shabd
Anushasan Par Nibandh 400 Shabd

बिना कार्य के पूर्ण भये, जो ना चैन से सोय।
सफल वह मानव है सदा, जो अनुशासन में होय।।

अर्थात जो मनुष्य अपने कार्य को पूर्ण करने से पहले चैन की नींद नहीं सोता है और जो अनुशासन में रहता है, वह सदैव सफल होता है। इन दो पंक्तियों से ज्यादा शायद ही कोई शब्द या वाक्य अनुशासन के महत्व की व्याख्या कर सकता है।

योगवासिष्ठ के अनुसार मनुष्य को सज्जनों तथा शास्त्र के अनुसार अपने चरित्र के आचरण को करना चाहिए और इसे ही पुरुषार्थ कहते हैं और अनुशासन के बिना पुरुषार्थ की कल्पना भी नहीं की जा सकती।

हमारे जीवन में अनुशासन का महत्व:तिब्बत के प्रसिद्ध बौद्ध धर्मगुरु ‘दलाई लामा’ कहते हैं कि “मनुष्य में करुणा, सहिष्णुता, क्षमा और आत्म-अनुशासन ये चार गुण अवश्य होने चाहिए”

‘दलाई लामा’ कहते हैं-

“करुणा, सहिष्णुता, क्षमा और आत्म-अनुशासन की भावना ऐसे गुण हैं जो हमें अपने दैनिक जीवन को शांत मन के साथ ले जाने में मदद करते हैं।” 

अर्थात यदि हमें अपने मन को शांत रखना है तो इन चार गुणों में से प्रत्येक गुण का पालन करना ही पड़ेगा नहीं तो हमारा मन कभी भी शांत नहीं रह पाएगा। और मनुष्य को कार्य कुशल होने के लिए अपने मन को शांत रखना ही चाहिए।

अनुशासन का महत्व एक सैनिक से अधिक और कौन बता सकता है? सैनिक के लिए अनुशासन तो इतना महत्वपूर्ण होता है कि यदि एक छोटी सी भी गलती हो जाए तो उसे कड़ी-से-कड़ी सजा दी जाती है।

ताकि वह आने वाले समय में ऐसी गलती भूलकर भी ना करें, विशेषकर जब वे युद्ध भूमि में हों। क्योंकि यदि वे युद्ध भूमि में ऐसी गलती को दोहराते हैं तो उन्हें अपने जीवन से भी हाथ धोना पड़ सकता है और देश को पराजय का भी सामना करना पड़ सकता है।

अतः उनके लिए अनुशासन ही सर्वोपरि होता है।

अनुशासन क्या नहीं है?:

जब शासन की बात आती है तब लोग अक्सर इसे मानसिक ग़ुलामी की तरह देखते हैं लेकिन ऐसा नहीं है। अनुशासन का अर्थ मानसिक ग़ुलामी नहीं हैं, बल्कि अनुशासन का अर्थ है कि आप अपने काम के प्रति कितनी रूचि रखते हो।

उदाहरण के तौर पर देखें तो यातायात नियमों का पालन करना हर नागरिक का कर्तव्य है और यही अनुशासन है, किंतु देश का युवा इसे एक बंधन के रूप में देखता है जो कि गलत है।

यातायात नियम बंधन नहीं है यह हमारी सुरक्षा के लिए बनाये गये नियम है जिसके अनुरूप यदि हम चलेंगे तो सुरक्षित अपने गंतव्य स्थान तक पहुंचा सकेंगे।

Anushasan Par Lekh 500 Word

Anushasan Par Nibandh 500 Shabd
Anushasan Par Nibandh 500 Shabd

अनुशासन क्या हैं?:

किसी भी कार्य को नियमबद्ध तरीके से करने को ‘अनुशासन’ कहते हैं। अर्थात आप जो भी कार्य कर रहे हैं उस कार्य को एक खास नियमावली (नियमों का संग्रह) का पालन करके करें। यह उस कार्य की सफलता के लिए अत्यंत आवश्यक है।

यदि आप अनुशासन में रहते हैं तो आपकी कार्यकुशलता बढ़ जाती है और इस प्रकार सफलता की संभावना भी बढ़ जाती है।यह सभी जगह लागू होता है चाहे आप छात्र हो, शिक्षक हो या व्यक्तिगत जीवन में हो, या फिर सार्वजनिक जीवन में।

अनुशासन का पाठ बच्चों को सबसे पहले पढ़ाना चाहिए क्योंकि यही अनुशासन आगे चलकर के उनके व्यवहार में और उनके

आचरण में झलकता है। व्यवहार आपके आचरण का प्रतिबिंब होता है और आचरण अनुशासन का प्रतिबिंब होता है।

कोई व्यक्ति अनुशासित है या नहीं यह उसके व्यवहार से पता लगाया जा सकता है।

अनुशासन की आवश्यकता:

अनुशासन किसी भी संस्था, संगठन, देश, तथा स्वयं व्यक्ति के लिए अति आवश्यक होता है। यदि किसी संस्था, संगठन या देश में लोग अनुशासित नहीं है तो वह देश, संगठन अथवा संस्था ज्यादा समय तक नहीं टिक पाएगा।

जैसा कि मैंने पहले कहा है कि अनुशासन किसी खास नियमावली के पालन को कहते हैं, अर्थात यदि देखा जाए तो किसी भी देश का संविधान का पालन करना वहां के नागरिकों के लिए अनुशासन है। विद्यालय की नियमावली का पालन करना वहां के छात्रों तथा शिक्षकों के लिए अनुशासन है।

मान लीजिए एक देश है जहां पर लोग अनुशासनहीन है, कोई नियम-कानून नहीं है। तो उस देश की दशा क्या होगी? 

जरा कल्पना कीजिए?

में बताता हूँ, यदि ऐसा होगा तो कोई भी व्यक्ति वहां के कानून का सम्मान नहीं करेगा जिससे वहां अपराध दर

बढ़ जाएगी, दुर्घटनायें बढ़ जाएगी। स्थिति और भी भयावह हो सकती हैं।

एक विद्यालय है जिसके छात्र उद्दंड हैं, कोई भी अनुशासन का पालन नहीं करता है। कल्पना कीजिए कि उच्च विद्यालय की

दशा क्या होगी?

वहां पर छात्र आपस में लड़ाई-झगड़े करेंगे, शिक्षकों की बात नहीं मानेंगे और पढ़ाई होने की संभावना न के बराबर होगी।

अनुशासन के लाभ:

किसी महान पुरुष में कहां है कि “अनुशासन की कमी, प्रतिभावान लोगों को भी असफल बना देती है।”

जो व्यक्ति जीवन में सफलता की ऊँचाइयों पर पहुंचें है उन सब में एक बात एक समान मिलती है और वह हैं ‘अनुशासन’। चाहे वह व्यक्ति दुनिया का सबसे बड़ा निवेशक वॉरेन बफे‘ हो या दुनिया का सबसे अमीर व्यक्ति बिल गेट्स हो या फिर महात्मा गांधी‘ तथा ‘नेल्सन मंडेला ही क्यों न हो।

इन सब में एक बात जो बिलकुल मिलती-जुलती थी वह थी आत्म-अनुशासन। अनुशासन के बहुत लाभ यहां आपको नियमित बना देता है जिससे आप का कार्यभार कम हो जाता है।

यह आपके स्वास्थ्य को भी सुदृढ़ करता है क्योंकि जब आप नियमित रूप से भोजन करते हैं, नियमित रूप से व्यायाम करते हैं तो आपका शरीर स्वस्थ हो जाता है और मन भी शांत रहता है जिससे कार्य के प्रति आपकी एकाग्रता बढ़ जाती है और कार्य के सफल होने की संभावना भी बढ़ जाती है।

यदि कोई अपने जीवन में कोई भी लक्ष्य निर्धारित करता है तो उसके लिए अनुशासन का कोई विकल्प नहीं होना चाहिए। अनुशासन अपने आप में सर्वश्रेष्ठ विकल्प है।

Best Anushasan Essay In Hindi 600 Shabd

Anushasan Par Nibandh 600 Shabd
Anushasan Par Nibandh 600 Shabd

अनुशासन हमारे जीवन में बहुत महत्व रखता है। एक अनुशासित व्यक्ति अपने निर्धारित लक्ष्यों तक जितनी सरलता से पहुंच सकता है, इतनी आसानी से एक बिना अनुशासन वाला व्यक्ति कभी भी नहीं पहुंच पाएगा और यदि वह पहुंच भी गया तो फिर जल्द ही खो देगा।

यह बात एक बहुत ही लोकप्रिय किताब ‘रिच डैड पुअर डैड’ में कही गई है। लेखक कहते हैं की एक अनुशासनहीन व्यक्ति को यदि करोड़ों रुपए भी दे दिए जाएं तो वह उसे कुछ ही समय में शून्य कर देगा।

यह सिर्फ कहने की बात नहीं है ऐसे बहुत से उदाहरण हैं, जिसमें बहुत ही मशहूर खिलाड़ी तथा अभिनेता जो एक समय में बहुत ही अमीर हुआ करते थे लेकिन वह अपनी अनुशासनहीनता की वजह से सब कुछ खो बैठे।

‘अनुशासन का अर्थ’ होता है एक खास नियमावली का पालन करना हैं, वह नियमावली आप स्वयं भी बना सकते हैं अथवा जिस संस्थान में आप हैं उसके पहले से कुछ नियमावली होंगे उसका सही से पालन करना।

हमारे जीवन में अनुशासन का महत्व:

अनुशासन हमारे जीवन के हर एक कदम पर, हर एक क्षेत्र में आवश्यक होता है। चाहे आप छात्र हैं, शिक्षक हैं या फिर कोई व्यापारी, हर जगह अनुशासन की आवश्यकता होती है।

जीवन के अलग-अलग क्षेत्र में इसका अर्थ बदल जाता है किंतु इसका जो मूल स्वरूप है वह हर जगह एक ही होता है।

छात्र जीवन में अनुशासन का महत्व:

एक छात्र के लिए अनुशासन का अर्थ होता है नियमित रूप से अध्ययन करना, अपने अध्यापक की बात को ध्यान से सुनना तथा उसका पालन करना।

यदि वह ऐसा करता है तो उसे परीक्षा के एक रात पहले, रात भर जग कर पढ़ना नहीं पड़ेगा। क्योंकि वह साल भर नियमित रूप से पढ़ा है इसलिए उसके लिए मात्र एक बार देख लेना भर काफी होता है।

शिक्षक के लिए अनुशासन का महत्व:

एक शिक्षक के लिए अनुशासन का अर्थ होता है, वह जो भी पढ़ा रहा है उसका सही ज्ञान रखना तथा उसे पहले स्वयं क्रियान्वित करके देख लेना। यदि शिक्षक ऐसा नहीं करता है तो वह अपनी बात को सही ढंग से छात्रों को नहीं समझा पाएगा। जिससे छात्रों के बीच में उसकी छवि खराब हो सकती है।

एक शिक्षक के लिए अनुशासन विशेष महत्व रखता है। क्योंकि वह छात्रों को अनुशासन के बारे में बताता है और यदि वह स्वयं अनुशासन का पालन नहीं करेगा तो छात्र उसकी बातों को अनदेखा कर देंगे।

व्यापारी के लिए अनुशासन का महत्व:

एक व्यापारी के लिए अनुशासन का अर्थ होता है कि अपने ग्राहकों के जरूरतों का ध्यान रखना, नियमित रूप से अपने व्यापार की समीक्षा करने तथा अपने व्यापार को बढ़ाने के लिए उचित अध्ययन करना।

यदि वह ऐसा नहीं करता है तो उसके ग्राहक तथा बाजार की आगामी आवश्यकताओं के बारे में उसे उचित जानकारी नहीं होगी तो उसके अनुरूप अपने व्यापार को नहीं ढाल पाएगा जिससे उसे भारी नुकसान का सामना करना पड़ सकता है।

अनुशासन एक ऐसा मौलिक गुण है जो लगभग सभी जीवों में प्राकृतिक रूप से पाया जाता है। एक शेर यदि शिकार करने जाता है तब उसे अनुशासित होकर एकाग्र होकर अपने शिकार पर ध्यान रखना पड़ता है और यदि वह ऐसा नहीं करता है तो शिकार उसके हाथ से छूट जाएगा और शेर को धोखा मिल जाएगा।

वहीं यदि एक हिरण अनुशासित नहीं रहेगी तो वह बड़ी ही आसानी से किसी शिकारी जानवर के हाथ लग जाएगी और उसे इसकी कीमत अपने जीवन को खोकर चुकानी पड़ेगी।

अतः हमें ध्यान रखना होगा कि यदि हमें जीवन में सफल होना है तो हर हाल में अनुशासन का पालन करना ही होगा नहीं तो सफलता ज्यादा दिन तक नहीं टिकेगी और हमें मुँह की खानी पड़ेगी।

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