पर्यावरण प्रदूषण पर निबंध {प्रदूषण के प्रकार, अलग-अलग शब्द सीमा एवं रूपरेखा सहित}| Paryavaran Pradushan Par Nibandh 2023

पर्यावरण प्रदूषण पर निबंध: लगातार बढ़ता पर्यावरण प्रदूषण धरती के वायुमंडल को नुकसान पहुंचा रहा है। जिससे पर्यावरण का संतुलन बिगड़ता जा रहा है। पर्यावरण के संतुलन को बनाए रखने के लिए अगर आज के समय में कोई विशेष कदम नहीं उठाया गया तो भविष्य में आने वाली पीढ़ी हमें कभी भी माफ नहीं करेगी। और ना ही आगे चलकर धरती पर एक स्वस्थ जीवन की कल्पना की जा सकती है। पर्यावरण प्रदूषण धरती पर जीवित रहने वाले सभी जीवों को प्रभावित कर रहा हैं। उनके विकास में बाधा डाल रहे हैं। पर्यावरण प्रदूषण से पर्यावरण के सभी प्राकृतिक संसाधन आज दूषित है। जिसके परिणाम स्वरूप पृथ्वी के सभी प्राणी आज विभिन्न तरह की बीमारियों से ग्रसित है। वायुमंडल की स्वच्छ हवा में लगातार बढती अशुद्धि पर्यावरण प्रदूषण को बढ़ावा दे रहा है। नदियों, तालाबों, सागरों, महासागरों में लगातार बढ़ती अशुद्धि जल प्रदूषण का कारण बनी हुई है। वाहनों की तेज-तर्रार आवाजों ने ध्वनि प्रदूषण को काफी बढ़ा दिया है। अगर ऐसे ही पर्यावरण का प्रदूषण बढ़ता गया तो आगे चलकर धरती पर जीवन की संभावना बिल्कुल ना के बराबर हो जाएगी।

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EssayToNibandh.com पर आज हम पर्यावरण प्रदूषण पर निबंध पढ़ेंगे। जो की अलग अलग शब्द सीमा के आधार पर लिखे गए हैं। आप पर्यावरण प्रदूषण निबंध को ध्यान से और मन लगाकर पढ़ें और समझें। Paryavaran Pradushan Par Nibandh को निम्न शब्द सीमा के आधार पर लिखा गया है-

Paryavaran Pradushan In Hindi को अलग अलग शब्द सीमाओं के आधार पर पढ़ें।

नोट- यहां पर दिया गया Paryavaran Pradushan Par Nibandh In Hindi कक्षा(For Class) 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11, 12,(विद्यालय में पढ़ने वाले) विद्यार्थियों के साथ-साथ कॉलेज के विद्यार्थियों के लिए भी मान्य हैं।

Paryavaran Pradushan Par Nibandh 80 Words

धरती का पारिस्थितिक तंत्र पर्यावरण के बिना अधूरा है। पर्यावरण मानव जीवन का आधार है। मानव अपनी मूलभूत ज़रूरतों के लिए पर्यावरण पर ही आश्रित है। अगर ऐसे ही पर्यावरण का प्रदूषण बढ़ता गया तो धरती पर मानव के जीवन का अस्तित्व खत्म हो सकता है।

बढ़ते औद्योगिकीकरण और आधुनिकीकरण ने पर्यावरण के प्रदूषण को बढ़ावा देने में काफी काम किया है। ‘पर्यावरण प्रदूषण‘ आज एक वैश्विक समस्या बनकर उभर रहा है। जिसे सभी को मिलकर इसका उपाय सोचना होगा, तभी जाकर एक इतने सुंदर ग्रह को स्वच्छ बनाया जा सकता है और इसे बचाया जा सकता हैं।


पर्यावरण प्रदूषण पर निबंध 100 शब्दों में

पर्यावरण प्रदूषण का अर्थ होता है ‘प्रकृति के साथ खिलवाड़’। आज के समय में पर्यावरण प्रदूषण ना सिर्फ भारत के लिए बल्कि पूरे विश्व के लिए एक गंभीर समस्या बन गया है। पर्यावरण दूषित होने के कारण इसके गंभीर परिणाम दुनिया को झेलने पड़ रहे हैं।

मानव जाति ने जिस प्रकार प्रकृति के साथ खिलवाड़ किया है अब उसके भयावह परिणाम हम देख सकते हैं। पर्यावरण प्रदूषण के कारण लगातार धरती का तापमान बढ़ते जा रहा है। ‘ग्लोबल वार्मिंग’ के कारण कई देशों पर डूबने तक का खतरा मंडरा रहा है। तरह-तरह की गंभीर बीमारियाँ भी पर्यावरण प्रदूषण के कारण ही फैल रही है।


पर्यावरण प्रदूषण पर निबंध हिंदी में 150 शब्दों

‘पर्यावरण प्रदूषण’ वर्तमान समय में सबसे बड़े खतरे में से एक है। पर्यावरण में अवांछित हानिकारक पदार्थों के मिलन से पर्यावरण प्रदूषण होता है। मानवीय गतिविधियों की वजह से पर्यावरण प्रदूषण पर बहुत बुरा असर पड़ रहा है। पर्यावरण प्रदूषण ने पर्यावरण के संसाधनों की गुणवत्ता को कम कर दिया है, जिसके गंभीर परिणाम हमें देखने को मिल रहे हैं। 

प्राकृतिक संसाधनों का जिस तरह मानव अपने विकास के लिए लापरवाही से उपयोग कर रहा है, यह संपूर्ण धरती के लिए एक बड़ी गंभीर समस्या है। पर्यावरण प्रदूषण के कारण ही कभी इतनी वर्षा हो जाती है कि बाढ़ आ जाती है और कभी वर्षा ही नहीं होती है यानि कि सूखा पड़ जाता है। पर्यावरण प्रदूषण के कारण ही धरती इतनी गर्म होती जा रही है। वैसे तो पर्यावरण प्रदूषण कई प्रकार के होते हैं परंतु हम मुख्य रूप से तीन प्रकार के पर्यावरण प्रदूषण को जानते हैं- 

  • वायु प्रदूषण। 
  • जल प्रदूषण। 
  • ध्वनि प्रदूषण।

पर्यावरण प्रदूषण निबंध 200 शब्द में

पर्यावरण प्रदूषण क्या हैं?

हम सभी जानते हैं कि पर्यावरण मानव के जीवन में एक बड़ा महत्वपूर्ण स्थान रखता है। क्योंकि पर्यावरण के द्वारा ही मानव अपनी मूलभूत ज़रूरतों को पूरा करता है। पर्यावरण के ही कारण धरती पर जीवन संभव हो पाता है। उदाहरण के लिए जल, वायु, भोजन आदि। लेकिन जिस तरह से पर्यावरण के संसाधनों का दिन प्रतिदिन दुरुपयोग हो रहा है, पर्यावरण में हानिकारक पदार्थों की मात्रा में बढ़ोतरी हो रही है।

उससे पर्यावरण प्रदूषण काफी बढ़ गया है और पर्यावरण का पारिस्थितिक तंत्र पूरी तरह बिगड़ गया है। बढ़ते आधुनिकीकरण और औद्योगिकीकरण ने पर्यावरण को पूरी तरह नुकसान पहुंचाया है। पर्यावरण प्रदूषण ने ना सिर्फ मनुष्य अपितु धरती पर रहने वाले पेड़-पौधे, जीव-जंतु सभी के जीवन की गुणवत्ता को काफी कम किया है। जिस तरह मानव अपने जीवनयापन के लिए पेड़-पौधों को काट रहा है, जीव जंतुओं को नुकसान पहुंचा रहा है। 

जीवाश्म ईंधन का ज्यादा-से-ज्यादा उपयोग कर रहा है, इसने पर्यावरण प्रदूषण को बढ़ाने का काफी मदद कि है। पर्यावरण में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा पहले के मुकाबले काफी बढ़ चुकी है। जिसके कारण धरती का तापमान दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। तापमान बढ़ने के कारण बड़े-बड़े ग्लेशियर पिघल रहे हैं। ग्लेशियर के पिघलने से बहुत सारे देशों के डूबने का खतरा मंडराता जा रहा है और धरती के विनाश की संभावना बढ़ती जा रही है। पर्यावरण प्रदूषण ने धरती के पूरे जैविक तंत्र को नष्ट कर दिया है।


पर्यावरण प्रदूषण पर निबंध 250 शब्द

पर्यावरण प्रदूषण समस्त सृष्टि के के लिए सबसे बड़ा खतरा है। जिस तरह हमने अपने विकास की अंधी दौड़ में प्रकृति के संसाधनों का दुरुपयोग किया हैं अर्थात खिलवाड़ किया आज उसी का भयंकर परिणाम है ‘पर्यावरण प्रदूषण’। आज पर्यावरण में तमाम तरह के प्रदूषण हमें देखने को मिल जाएंगे। और आज पर्यावरण प्रदूषण एक वैश्विक मुद्दा भी इसलिए ही बनकर उभरा है क्योंकि इसके परिणाम हमें देखने को मिलने पर शुरू हो गए हैं।

पर्यावरण प्रदूषण के परिणाम

कभी अधिक बरसात का होना, कभी बरसात का नहीं होना, ओजोन परत में लगातार बढ़ते ‘छिद्र’ पर्यावरण प्रदूषण का ही परिणाम है। पर्यावरण प्रदूषण के कारण ही वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। विकास की अंधी दौड़, आधुनिक युग में हमने जिस तरह हमने पर्यावरण में पेड़-पौधों की कटाई की, जल को दूषित किया, वायुमंडल में ज़हरीली गैसें छोड़ी, ध्वनि प्रदूषण किया और पर्यावरण के पारिस्थितिक तंत्र को पूरी तरह नष्ट करने का काम किया हैं, आज उसी का भयंकर परिणाम है पर्यावरण प्रदूषण।

मृदा का अपरदन भी पर्यावरण प्रदूषण का ही गंभीर परिणाम है। पर्यावरण प्रदूषण के कारण धरती पर तरह-तरह की खतरनाक बीमारियाँ मानव जाति को परेशान कर रही है, यह सब पर्यावरण प्रदूषण का ही परिणाम है। प्रकृति में तमाम तरह के जीव-जंतु आज विलुप्त होने की कगार पर है सिर्फ और सिर्फ पर्यावरण प्रदूषण के कारण। पर्यावरण प्रदूषण वायुमंडल की शुद्ध हवा को बिल्कुल ज़हरीला कर रहा है। जिससे आगे चलकर धरती पर जीवन की संभावना की कल्पना नहीं की जा सकती है।


Paryavaran Pradushan Par Nibandh 300 Words

पर्यावरण में लगातार बढ़ती अशुद्धि ‘पर्यावरण प्रदूषण’ का ही परिणाम है। पर्यावरण प्रदूषण आज के समय में एक बहुत बड़ी समस्या बनकर उभरा है। धरती पर रहने वाले सभी मनुष्य, जीव-जंतु, वनस्पतियों को जीवन जीने के लिए एक स्वच्छ वातावरण की आवश्यकता होती है। परंतु पर्यावरण प्रदूषण के कारण यह स्वच्छ वातावरण अस्वच्छ होता जा रहा है। 

जिसके कारण धरती पर सभी जीवों के लिए जीवन कठिन होता जा रहा है। धरती का पारिस्थितिक तंत्र पर्यावरण प्रदूषण के कारण पूरी तरह बिगड़ गया है। हमारे चारों ओर फैली गंदगी, पर्यावरण में हमारे द्वारा छोड़ी गयी जहरीली गैसें, हमारे द्वारा किया गया जल प्रदूषण पर्यावरण के प्राकृतिक संसाधनों को नष्ट कर रहा है। और अब पृथ्वी के विनाश का भी कारण बनता जा रहा है। 

पर्यावरण प्रदूषण मुख्य रूप से तीन प्रकार के होते हैं- 

  1. वायु प्रदूषण। 
  2. जल प्रदूषण। 
  3. ध्वनि प्रदूषण। 

इन तीनों प्रदूषण की बढ़ोतरी में सबसे ज्यादा मानवीय कारक जिम्मेदार है।

पर्यावरण प्रदूषण के कारण

पर्यावरण के मानवीय कारणों की बात करें तो, मानव द्वारा अपने संतुष्टि को पूरा करने के लिए पेड़-पौधों की कटाई से मृदा अपरदन हो रहा है। मृदा अपरदन के कारण वायु प्रदूषण बढ़ता जा रहा है। मानव अपने आसपास फैली गंदगी को साफ नहीं कर रहा है जिससे वायु प्रदूषण के साथ-साथ जल प्रदूषण भी बढ़ रहा है। और तरह-तरह की गंभीर बीमारियां जन्म ले रही है। 

बड़े-बड़े कल कारखानों से निकलने वाली चिमनियों ने वायु प्रदूषण को बढ़ाने का काम किया है। वाहनों के परिचालन से वायु प्रदूषण के साथ-साथ ध्वनि प्रदूषण भी हो रहा है। किसानों द्वारा कीटनाशक दवाओं का उपयोग करने से वायु प्रदूषण के बढ़ रहा है।

पर्यावरण प्रदूषण के परिणाम

पर्यावरण प्रदूषण के कारण वैसे तो बहुत सारे गंभीर परिणाम देखने को मिल रहे हैं। तरह-तरह की गंभीर बीमारियां जल प्रदूषण और वायु प्रदूषण के कारण मानव जाति को इसके गंभीर परिणाम झेलने पड़ रहे है। धरती का तापमान लगातार बढ़ता जा रहा है। जिससे ग्लेशियर पिघल रहे है। और धरती के डूबने का खतरा बढ़ता जा रहा है। 

ध्वनि प्रदूषण के कारण लोगों में बहरापन बढ़ रहा है। साथ ही लोगों में तनाव, चिंता जैसी बीमारी बढ़ रही है। पर्यावरण प्रदूषण के कारण ओजोन परत नष्ट हो रही है। पर्यावरण में जल प्रदूषण के कारण धरती पर शुद्ध जल की मात्रा लगातार कम होती जा रही है। जिससे आगे चलकर धरती पर जीवन संभव नहीं हो सकता।

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Paryavaran Pradushan Par Nibandh

Paryavaran Pradushan Nibandh 400 Words

लगातार बढ़ता पर्यावरण प्रदूषण धरती के वायुमंडल को नुकसान पहुंचा रहा है। जिससे पर्यावरण का संतुलन बिगड़ता जा रहा है। पर्यावरण के संतुलन को बनाए रखने के लिए अगर आज के समय में कोई विशेष कदम नहीं उठाया गया तो भविष्य में आने वाली पीढ़ी हमें कभी भी माफ नहीं करेगी। और ना ही आगे चलकर धरती पर एक स्वस्थ जीवन की कल्पना की जा सकती है।

पर्यावरण प्रदूषण धरती पर जीवित रहने वाले सभी जीवों को प्रभावित कर रहा हैं। उनके विकास में बाधा डाल रहे हैं। पर्यावरण प्रदूषण से पर्यावरण के सभी प्राकृतिक संसाधन आज दूषित है। जिसके परिणाम स्वरूप पृथ्वी के सभी प्राणी आज विभिन्न तरह की बीमारियों से ग्रसित है। वायुमंडल की स्वच्छ हवा में लगातार बढती अशुद्धि पर्यावरण प्रदूषण को बढ़ावा दे रहा है। 

नदियों, तालाबों, सागरों, महासागरों में लगातार बढ़ती अशुद्धि जल प्रदूषण का कारण बनी हुई है। वाहनों की तेज-तर्रार आवाजों ने ध्वनि प्रदूषण को काफी बढ़ा दिया है। अगर ऐसे ही पर्यावरण का प्रदूषण बढ़ता गया तो आगे चलकर धरती पर जीवन की संभावना बिल्कुल ना के बराबर हो जाएगी।

पर्यावरण प्रदूषण के कारण

पर्यावरण प्रदूषण के वैसे तो प्राकृतिक और मानवीय दोनों कारण है लेकिन मानवीय कारणों ने पर्यावरण को दूषित करने में सबसे बड़ी भूमिका निभाई है। लगातार बढ़ती हुई जनसंख्या, औद्योगिकीकरण और शहरीकरण, बड़े-बड़े कल कारखानों की स्थापना और उनसे निकालने वाला अपशिष्ट पदार्थ सीधे नदियों-नालों में जाने से जल प्रदूषण होता है। 

कल कारखानों से निकलने वाली चिमनीयां वायु प्रदूषण को बढ़ावा दे रही है। परमाणु संयंत्रों की स्थापना से, जीवाश्म ईंधन का अधिक उपयोग करने से, मानव द्वारा अपनी आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए पेड़-पौधों की कटाई से मृदा अपरदन के साथ-साथ पर्यावरण का संतुलन भी लगातार बिगड़ता जा रहा है।

पर्यावरण प्रदूषण का प्रभाव

पर्यावरण प्रदूषण का प्रभाव अभी से ही हमें देखने को मिल रहा हैं। इसके प्रभाव आगे चलकर और भी भयानक होने वाले हैं। पर्यावरण के साथ खिलवाड़ हमें ही आगे चलकर नुकसान पहुंचाएंगे। तरह-तरह की गंभीर बीमारियां पर्यावरण प्रदूषण के कारण ही धरती पर जन्म ले रही हैं। वायु प्रदूषण के कारण धरती की हवा जहरीली हो गई है सांस लेना तक मुश्किल हो गया है। 

जल प्रदूषण के कारण धरती पर स्वच्छ जल की मात्रा लगातार घटती जा रही है। पर्यावरण प्रदूषण के कारण ही धरती का तापमान लगातार बढ़ते जा रहा है। ग्लेशियर पिघल रहे हैं। पर्यावरण प्रदूषण के कारण ओजोन परत में लगातार छिद्र बढ़ते जा रहे हैं। पर्यावरण प्रदूषण रोकने के उपाय:पर्यावरण प्रदूषण को अधिक से अधिक पेड़ लगाकर कम किया जा सकता है।

पर्यावरण हम जीवाश्म ईंधन के जगह पर सौर ऊर्जा का अधिक से अधिक मात्रा में उपयोग कर पर्यावरण प्रदूषण को कम कर सकते हैं। ध्वनि प्रदूषण को रोकने के लिए हमें जगह-जगह पेड़-पौधों को लगाना चाहिए और जहां जरूरत है वहीं पर गाड़ियों के हॉर्न को बजाना चाहिए, और ध्वनि प्रदूषण को रोकने के लिए कारखानों को एक खुली जगहों पर लगाना चाहिए। जल प्रदूषण को रोकने के लिए सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाने चाहिए।


पर्यावरण प्रदूषण पर निबंध हिंदी में 500 शब्दों | पर्यावरण प्रदूषण पर निबंध हिंदी में Class 8

मानवीय हस्तक्षेप के कारण प्रदूषण आज के समय में एक वैश्विक ज्वलंत मुद्दा बन गया है। हम सभी को पता है कि पर्यावरण का हम सभी के जीवन में क्या महत्व है। पर्यावरण के कारण ही धरती पर जीवन संभव है और हम ही पर्यावरण के संतुलन को बनाए रखने में विफल हो रहे हैं। पर्यावरण का संतुलन अगर सही नहीं रहा तो धरती पर जीवन तो बिल्कुल भी संभव नहीं रहेगा। 

पर्यावरण प्रदूषण चाहे वह किसी भी प्रकार से हो वह पृथ्वी के लिए नुकसान ही है। पर्यावरण प्रदूषण के कारण आज के समय में हम एक ऐसा जीवन जी रहे हैं जहां हमारे आसपास चारों तरफ गंदगी ही गंदगी हैं। वायु में भी गंदगी हैं, हम जो जल पी रहे हैं वह भी दूषित है। लोग पॉलिथीन और जीवाश्म ईंधन का अत्याधिक उपयोग कर रहे हैं, जिससे पर्यावरण प्रदूषण बढ़ रहा है। 

पर्यावरण का प्रदूषण वैसे तो कई प्रकार का होता है लेकिन मुख्य रूप से हम लोग तीन प्रकार के पर्यावरण प्रदूषण को जानते हैं-

1. वायु प्रदूषण

पर्यावरण की स्वच्छ हवा में लगातार बढ़ती हानिकारक तथा विषाक्त पदार्थों की बढ़ोतरी वायु प्रदूषण का कारण है। वायु प्रदूषण ना सिर्फ कल कारखानों से निकलने वाले चिमनियों के द्वारा अपितु मोटर वाहनों के द्वारा निकलने वाले काले धुएँ के कारण बढ़ती जा रही है।

वायु प्रदूषण के कारण ही वायुमंडल में लगातार कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा बढ़ती जा रही है। वायु प्रदूषण के कारण धरती की शुद्ध हवा जहरीली हवा में तब्दील होते जा रही है। जिससे धरती पर जीवन संकट में आ गया है।

2. जल प्रदूषण

जीवन के लिए ‘जल’ बहुत आवश्यक है। जल के बिना जीवन संभव नहीं। लेकिन लगातार बढ़ता जल प्रदूषण धरती पर मानव जीवन के अस्तित्व के लिए खतरा बनता जा रहा है। कल कारखानों के द्वारा अपशिष्ट पदार्थों को सीधे नदियों-नालों में प्रवाहित कर दिया जाता है।

हमारे द्वारा भी गंदगी को सीधे नदियों-नालों में प्रवाहित कर देने से समुंदरों, महासागरों, नदियों का जल दूषित होता जा रहा है। पशुओं के मल-मूत्र को नदियों में प्रवाहित करने से जल का प्रदूषण लगातार बढ़ता ही जा रहा है। स्वच्छ जल में लगातार बढ़ती रासायनिक पदार्थों की मात्रा जल प्रदूषण का कारण है।

3. ध्वनि प्रदूषण

आज की भाग-दौड़ भरी जिंदगी में वैसे ही मनुष्य को अपने लिए बहुत कम समय होता है। और वह तनाव भरी जिंदगी वैसे ही जीता है। लेकिन विभिन्न तरह के वाहनों के तेज-तर्रार शोरगुल से जीवन में तनाव, चिंता और बहरापन बढ़ता जा रहा है। (पर्यावरण प्रदूषण पर निबंध हिंदी में Class 9)

ध्वनि प्रदूषण के कारण मानव के जीवन में लगातार हलचल बनी रहती है। उनके जीवन में कभी शांति नहीं रहती है। ध्वनि प्रदूषण ने पर्यावरण के संतुलन को बिगाड़ने में काफी अहम रोल निभाया है। ध्वनि प्रदूषण के कारण जीव-जंतुओं को भी काफी नुकसान पहुंच रहा है।

पर्यावरण प्रदूषण के समाधान

  1. पर्यावरण प्रदूषण को रोकने के लिए हम सभी को मिलकर एक साथ प्रयास करने होंगे। तभी जाकर पर्यावरण प्रदूषण को कम किया जा सकता है।
  2. वनों की कटाई को रोककर अधिक से अधिक पेड़-पौधों को लगाने का प्रयास करना चाहिए। निजी वाहनों की जगह सार्वजनिक वाहनों का अधिक से अधिक उपयोग करना चाहिए। 
  3. हम सभी को कोयला, पेट्रोलियम, जीवाश्म ईंधन की जगह पर बायोगैस, सीएनजी गैस, सौर ऊर्जा की तरफ जाना चाहिए। और उनका अधिक से अधिक उपयोग करना चाहिए। 
  4. अपने घर के आस-पास के कूड़े-कचरे से सही से निपटान करना चाहिए।

पर्यावरण प्रदूषण पर निबंध हिंदी में 1000 शब्दों | पर्यावरण प्रदूषण पर निबंध हिंदी में Class 12

मनुष्य अपने जीवनयापन के लिए प्राकृतिक संसाधनों का अंधाधुंध उपयोग कर रहा है। जिससे पर्यावरण को काफी नुकसान हो रहा है और जलवायु पर इसका काफी नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। बढ़ते औद्योगिकीकरण और आधुनिकीकरण युग में मानव ने अपने विकास के लिए पर्यावरण का संतुलन तो बिगाड़ा, उनकी अवहेलना की आज के समय में यही पर्यावरण प्रदूषण उसी का भयंकर परिणाम है।

तेज़ी से बढ़ रही वनों की कटाई, जनसंख्या में बढ़ोतरी प्रकृति के साथ छेड़छाड़ पर्यावरण प्रदूषण को बढ़ावा दे रहा है। और भविष्य में इसके विकराल परिणाम हमें देखने को मिलेंगे। जिसे अगर हमने समय पर नहीं रोका तो आगे चलकर धरती पर जीवन की संभावना खत्म हो जाएंगी।

पर्यावरण प्रदूषण के प्रकार

वायु प्रदूषण

वातावरण के शुद्ध हवा में लगातार बढ़ती विषाक्त पदार्थों की अशुद्धि वायु प्रदूषण का कारण है। वायु प्रदूषण के कारण तरह तरह की गंभीर बीमारियों का सामना मनुष्य को करना पड़ रहा है। और वायु प्रदूषण ने धरती पर रहने वाले सभी प्राणियों की जीवन की गुणवत्ता को काफी कम कर दिया है। वायु प्रदूषण ने धरती के पूरे वातावरण को जहरीला कर दिया है।

जल प्रदूषण

धरती पर वैसे ही स्वच्छ जल अर्थात पीने के पानी की मात्रा बहुत कम है। और प्रतिदिन जल के दूषित होने से धरती पर जीवन की संभावना बिल्कुल ना के बराबर हो गई है। जल प्रदूषण के होने से बहुत सारे गंभीर रोगों का सामना मनुष्य के साथ-साथ जीव-जंतुओं को भी करना पड़ रहा है। कल कारख़ानों से निकलने वाले सीधे अपशिष्ट पदार्थ जल प्रदूषण का प्रमुख कारण है।

ध्वनि प्रदूषण

धरती के वातावरण में लगातार बढ़ता हुआ शोरगुल, वाहनों के तेजतर्रार आवाज ने धरती के शांत वातावरण को पूरी तरह प्रदूषित कर दिया है। जिससे पर्यावरण का संतुलन लगातार बिगड़ता जा रहा है। और पृथ्वी का पारिस्थितिक तंत्र नष्ट होते जा रहे हैं।

पर्यावरण प्रदूषण के कारण

  • पर्यावरण में प्रदूषण के प्राकृतिक और मानवीय दोनों कारण हैं। परंतु मानवीय कारणों ने पर्यावरण को बहुत अधिक प्रदूषित किया है।
  • बड़े-बड़े कल कारखानों से निकलने वाली चिमनियां जहां वायु प्रदूषण का कारण बनती है। वही यही कल-कारखाने, उद्योग अपशिष्ट पदार्थों को सीधे नदियों-नालों में प्रवाहित कर देते हैं जिससे जल प्रदूषण भी बढ़ रहा है।
  • बढ़ती हुई जनसंख्या के कारण मानव अपनी सुख-सुविधाओं के लिए पेड़-पौधों की कटाई कर रहा है। जिससे पर्यावरण का संतुलन बिगड़ गया है। और मृदा अपरदन तो होता ही है साथ-साथ जलवायु में भी परिवर्तन हो रहा है।
  • किसानों द्वारा कीटनाशक दवाओं का उपयोग करने, पराली जलाने से वायु प्रदूषण बढ़ रहा है।
  • तेज़तर्रार आवाज़ में गाड़ियों को चलाने से, रेडियो, टेलिविज़न लाउडस्पीकर को बजाने से ध्वनि प्रदूषण बढ़ रहा है।
  • मानव द्वारा अपनी सुविधाओं के लिए जीवाश्म ईंधन का अत्यधिक उपयोग से वायुमंडल  में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा बढ़ती जा रही है।
  • मोटर वाहनों से निकलने वाले काले धुएँ ने भी वायुमंडल और वायु प्रदूषण को बढ़ाने का काम किया है।

पर्यावरण प्रदूषण के प्रभाव

  1. पर्यावरण प्रदूषण के कारण वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा लगातार बढ़ती जा रही है। जिससे धरती का तापमान बढ़ता जा रहा है। ग्लेशियर पिघल रहे हैं। जिससे धरती के डूबने का खतरा बढ़ता जा रहा है।
  2. पर्यावरण प्रदूषण के कारण मनुष्य को तमाम तरह के गंभीर रोगों का सामना करना पड़ रहा है।
  3. पर्यावरण प्रदूषण ने धरती पर रहने वाले सभी जीव जंतुओं की गुणवत्ता को काफी कम कर दिया है।
  4. पर्यावरण प्रदूषण के कारण अम्लीय वर्षा की मात्रा में बढ़ोतरी हो रही है।
  5. पर्यावरण प्रदूषण के कारण जलवायु में परिवर्तन होने से कभी अधिक वर्षा होने के कारण बाढ़ आ जाती है और कभी वर्षा नहीं होने से सूखा पड़ जाता है।
  6. पर्यावरण प्रदूषण ने ओजोन परत में भी छिद्र करने का काम किया है। जिससे सूर्य से आने वाली किरणें सीधे धरती पर पड़ेगी तो वे धरती पर रहने वाले सभी जीवों को काफी हानि पहुंचाएंगी।

पर्यावरण प्रदूषण का समाधान

  • पर्यावरण को प्रदूषित होने से बचाने के लिए हम सभी को मिलकर जल्द से जल्द प्रयास करने होंगे। पर्यावरण के प्राकृतिक संसाधनों का इस तरह से सतत पोषणीय विकास करना होगा कि उनसे पर्यावरण प्रदूषित भी ना हो और वे भविष्य में आने वाली पीढ़ी भी उसका लाभ उठा सकें।
  • अधिक से अधिक पेड़ पौधों को लगाकर पर्यावरण को प्रदूषित होने से बचाया जा सकता है।
  • सरकार को भी ऐसी कठोर नियम बनाने चाहिए जिससे बड़े-बड़े कल कारखानों की चिमनियों और अपशिष्ट पदार्थों को सीधे वायु और नदियों-नालों में ना प्रवाहित कर सके।
  • हम सभी को अपने घर से निकलने वाले कचरे को सही तरीके पुनः प्रयोग में लाने का प्रयास करना चाहिए।
  • ध्वनि प्रदूषण को रोकने के लिए जहां जरूरत हो वहीं पर वाहनों की आवाज़ को लगाना चाहिए।
  • जीवाश्म ईंधन के स्थान पर अधिक से अधिक बायो गैस, सी.एन.जी. गैस, सौर ऊर्जा का उपयोग करके पर्यावरण प्रदूषण को रोका जा सकता है।
  • निजी वाहनों की जगह सार्वजनिक वाहनों का अधिक से अधिक उपयोग करना चाहिए।

उपसंहार

धरती पर अगर जीवन संभव है तो वह पर्यावरण के कारण ही। अगर हम सब ऐसे ही पर्यावरण को प्रदूषित करते गए और पर्यावरण प्रदूषण को नज़रअंदाज़ करते गए तो आने वाले समय में पर्यावरण धरती पर जीवन की परिकल्पना नहीं की जा सकती है। यह प्रत्येक व्यक्ति की ज़िम्मेदारी है कि वह अपने अपने स्तर पर पर्यावरण प्रदूषण को रोकने के लिए कार्य करते रहे। लोगों में भी जागरूकता लानी चाहिए और उन्हें भी समझाना चाहिए कि पर्यावरण प्रदूषण को कैसे कम किया जा सकता है। 

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