Essay On Pollution In Hindi 2022 | प्रदूषण पर निबंध हिंदी में | प्रदूषण रोकने के उपाय निबंध

प्रदूषण पर निबंध | Essay On Pollution In Hindi को आज हम पढ़ेंगे। ये Pradushan Nibandh अलग अलग शब्द सीमाओं के आधार पर लिखा गया हैं। Pradushan Ki Samasya Par Nibandh हिंदी में लिखा हुआ हैं।

Essay On Pollution In Hindi
Essay On Pollution In Hindi

EssayToNibandh.com पर आज हम प्रदूषण पर निबंध पढ़ेंगे। जो की अलग अलग शब्द सीमा के आधार पर लिखे गए हैं। आप Essay On Pollution In Hindi को ध्यान से और मन लगाकर पढ़ें और समझें। Pradushan Ki Samasya Par Nibandhको निम्न शब्द सीमा के आधार पर लिखा गया है-

Table of Contents

आइये! Pradushan Essay In Hindi को अलग अलग शब्द सीमाओं के आधार पर पढ़ें।

नोट- यहां पर दिया गया प्रदूषण पर निबंध कक्षा(For Class) 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11, 12,(विद्यालय में पढ़ने वाले) विद्यार्थियों के साथ-साथ कॉलेज के विद्यार्थियों के लिए भी मान्य हैं।

Essay On Pollution In Hindi 80 Words

प्रदूषण क्या हैं?

जब हमारे पर्यावरण में ज़हरीले पदार्थ मिल जाते हैं तब हम उसे प्रदूषण कहते हैं। प्रदूषण न केवल वायु को प्रदूषित करता है बल्कि पर्यावरण के अन्य घटक जैसे मिट्टी, पानी तथा वहां रह-रहे अन्य जीवों को भी हानि पहुँचाता है। और अगर प्रदूषण के कारणों की बात करें तो, इसका मुख्य कारण मानव द्वारा किए गए कृत्य हैं। आज मानव अपनी सुख-सुविधाओं और विकास के लिए तरह-तरह की तकनीकों को उत्पन्न कर रहा हैं। जो किसी न किसी रूप में हमारे पर्यावरण के लिए हानिकारक है और इसे प्रदूषित करते है।


Pradushan Nibandh 100 Shabd

प्रदूषण’ हमारे पर्यावरण को बहुत हानि पहुँचाता है। वैसे तो प्रदूषण तरह-तरह के होते है पर, अगर मुख्य प्रदूषण की बात करें यह पांच प्रकार के हैं। जैसे- की वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण, ध्वनि प्रदूषण, मृदा प्रदूषण, थर्मल प्रदूषण। पर इनमें सबसे मुख्य और खतरनाक वायु प्रदूषण है। जिसका सबसे बड़ा कारण आज के कल-कारख़ानों से निकालता जहरीला धुआँ है।

आज हालात यह है कि जिस हवा में हम सांस लेते हैं उसमे कई तरह के ज़हरीली गैसें मौजूद हैं। जैसे- CO(Carbonmonoxide), N2O(Nitrous oxide), और CH4(Methane) इनकी वजह से मनुष्यों को सांस संबंधी बीमारियाँ होती है। आज मानव को यह समझना होगा कि पर्यावरण का संरक्षण हमारी ज़िम्मेदारी है और बड़े पैमाने पर पर्यावरण संरक्षण करना है।


Pradushan Ki Samasya Par Nibandh 150 Shabdo ka

प्रदूषण का अर्थ

जब हमारे पर्यावरण के संघटकों का प्राकृतिक संतुलन बिगड़ जाता है तो वह प्रदूषण कहलाता है। प्रदूषण हमारे पर्यावरण के लिए बहुत खतरनाक है। आज प्रदूषण एक विश्व स्तरीय समस्या बन गया है, इससे निजात पाना या इस समस्या का हल निकालना बहुत अत्यधिक आवश्यक हो गया है, अन्यथा हमारे पृथ्वी पर जीवों का अस्तित्व भी नष्ट होने की संभावना है।

प्रदूषण की वजह से हमारे पर्यावरण में चल रहे कई प्राकृतिक चक्र जो पृथ्वी पर जीवन का अस्तित्व बनाए रखने के लिए अति आवश्यक हैं, वह असंतुलित हो जाते हैं जो की पृथ्वी पर जीवों के अस्तित्व के लिए हानिकारक है। और कहीं ना कहीं प्रदूषण का मुख्य कारण मानव द्वारा खुद की सुख सुविधाओं के लिए उत्पन्न की गई तकनीकी ही हैं। इनमें सबसे प्रमुख उद्योगों और ऑटोमोबाइल से निकलने वाला धुआँ है। प्रदूषण पर्यावरण के हर संगठन को प्रभावित करता है फिर चाहे वह जल हो, वायु हो, वनस्पति हो, या जीव-जंतु हो।


Pradushan Essay In Hindi 200 Word

प्रस्तावना

जब हमारे पर्यावरण में किसी भी तरह के दूषित पदार्थों का प्रवेश होता है जो कि पर्यावरण के संतुलन को बिगाड़ देता है उसे ‘प्रदूषण’ कहते हैं। जब मानव द्वारा निर्मित ऐसे अवशेष जिसका पुनर्चक्रण संभव ना हो वह हमारे प्रकृति में प्रवेश करते हैं जहां वे प्रकृति के अवशेषों में मिल जाते हैं तब प्रदूषण होता है।

प्रदूषण का प्रभाव

जैसा कि हम सभी जानते हैं पृथ्वी पूरे ‘ब्रह्मांड’ में एक मात्र ऐसा ग्रह है जहां पर जीवन संभव है और इसका सारा श्रेय हमारे पर्यावरण को जाता है, जिसका संरक्षण भी यहां रह रहे जीवों की ज़िम्मेदारी है। आज प्रदूषण के कारण हमारा पर्यावरण बहुत दूषित हो गया है। जिसकी वजह से हमारे पर्यावरण में चल रहे कई प्राकृतिक चक्र जो कि जीवन के अस्तित्व के लिए सुचारु रूप से चलते रहना बहुत जरूरी हैं वह असंतुलित हो गए हैं। जिसके कारण पृथ्वी पर जीवन का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है।

प्रदूषण के कारण

प्रदूषण का कारण हर वो कार्य या क्रिया है जिसकी वजह से हमारे पर्यावरण में मौजूद किसी भी संघटक का प्राकृतिक संतुलन बिगड़ जाता है। आज मानव द्वारा किए गए कार्यों, पर्यावरण प्रदूषण का प्रमुख कारण है। जिनमें वाहनों और उद्योगों से निकलने वाला धुआँ सबसे प्रमुख है।

उपसंहार

यदि हमें अपने आप को तथा इस पृथ्वी के सभी जीवों को संकट से बचाना है तो हम सब को मिलकर इसके विरुद्ध खड़ा होना पड़ेगा। हमें अपनी आदतों को सुधारना होगा नहीं तो हमें ‘प्रदूषण’ नाम के दानव से हमें कोई नहीं बचा पाएगा।

प्रदूषण पर निबंध
प्रदूषण पर निबंध

Pradushan Par Nibandh 250 Shabd ka

प्रस्तावना

जब हमारे पर्यावरण के किसी बन भी अंग में अवांछित और हानिकारक पदार्थ मिल जाते हैं जो पर्यावरण पर दुष्प्रभाव डालते हैं इसी दुष्प्रभाव को प्रदूषण कहते हैं। ‘प्रदूषण‘ पर्यावरण के सभी अंगों जैसे की जल, वायु, भूमि आदि अंगों के भौतिक, रासायनिक, और जैविक लक्षणों को हानि पहुँचाते हैं।

प्रदूषण के कारण

अगर प्रदूषण के कारणों की बात करें तो बहुत सारे कारण हैं परंतु प्रदूषण के कुछ मुख्य कारण निम्नलिखित हैं-

  1. उद्योग एवं वाहनों से निकलने वाला जहरीला धुआँ तथा रासायनिक अवशेष।
  2. जल निकायों में मानव मल, कचरे, गंदे पानी, तथा ज़हरीले रसायनों का सीधा विसर्जन।
  3. कृषि में उपयोग होने वाले उर्वरक रसायन तथा कीटनाशक।
  4. उद्योगों तथा शहरों का तेज़ी से विकास।
  5. खनन तथा खदान संबंधी क्रियाकलापों से।
  6. वृक्षों तथा वनों की अंधाधुंध कटाई।

प्रदूषण के प्रभाव

प्रदूषण के कुछ प्रमुख प्रभाव जो आमतौर पर देखे जाता है, निम्नलिखित हैं-

  • मनुष्य पशुओं तथा पक्षियों को गंभीर स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
  • उपजाऊ भूमि की कमी।
  • कई तरह के प्राकृतिक चक्र में असंतुलन जिसके कारण कई इलाकों में तीव्र वर्षा तो वही किसी इलाके में तीव्र सूखा देखने को मिलता है।
  • ओजोन परत का क्षरण।
  • अम्लीय वर्षा में बढ़ोतरी, जिसके कारण फ़सलों, वनस्पतियों तथा ऐतिहासिक इमारतों को नुकसान पहुँच रहा है।

प्रदूषण के रोकथाम के तरीके

प्रदूषण के रोकथाम के कुछ मुख्य तरीके निम्नलिखित हैं-

  1. उद्योगों में अच्छी गुणवत्ता के कच्चे माल का उपयोग तथा मशीनों का सही रखरखाव।
  2. सी.एन.जी. या विद्युत वाहनों का उपयोग तथा वाहनों की उचित देखभाल तथा मरम्मत।
  3. पेड़ों की अंधाधुंध कटाई पर रोक।
  4. पॉलिथीन या प्लास्टिक से बनी किसी भी चीज का पूरी तरह से त्याग।

उपसंहार

हमें प्रदूषण को हर हाल में ख़त्म करना होगा। 

“आओ मिलकर कसम ये खाये, प्रदूषण को हम दूर भगाये।” 

जैसी बातें बच्चों के मस्तिष्क में बचपन से ही डालना होगा ताकि वे एक जिम्मेदार नागरिक बनकर प्रदूषण कम कर सकें।


Pradushan Par Nibandh Hindi Mein 300 Shabdo me

प्रस्तावना

जब हमारे पर्यावरण में कुछ ऐसे हानिकारक तत्व मिल जाते हैं या मिलाए जाते हैं जो इसकी प्राकृतिक संरचना को असंतुलित कर देते हैं तब प्रदूषण जन्म लेता है या इसे प्रदूषण कहते है। और हमारा वातावरण प्रदूषित हो जाता है। आज प्रदूषण सबसे ख़तरनाक और विश्व स्तर की समस्या बन गयी है। ये न केवल किसी विशेष व्यक्ति या देश की समस्या नहीं है बल्कि ये इस गृह पर रह रहे सभी जीवों की समस्या बन गयी है।

प्रदूषण के प्रकार

वैसे तो प्रदूषण कई प्रकार के होते है पर मुख्यतः प्रदूषण के पांच प्रकार हैं- 

  1. जल प्रदूषण 
  2. वायु प्रदूषण
  3. ध्वनि प्रदूषण
  4. मृदा प्रदूषण 
  5. ऊष्मीय/ थर्मल प्रदूषण। 

लेकिन दो और ऐसे प्रदूषण के प्रकार है जो इन दिनों तेज़ी से बढ़े है जो कि परमाणु प्रदूषण और दृश्य प्रदूषण हैं।

1. वायु प्रदूषण

वायु प्रदूषण तब होता है जब कोई हानिकारक तत्व जैसे की गैस, कण, जैविक तत्व हवा में अधिक मात्रा में मिल जाते है और वायु की प्राकृतिक संरचना को बिगाड़ देते है तो यह वायु प्रदूषण होता है।

2. जल प्रदूषण

जल प्रदूषण यानी कि जल की गुणवत्ता में ऐसी कोई भी भौतिक या रासायनिक बदलाव जिसका दुष्प्रभाव सीधे उसको इस्तेमाल कर रहे, पीने वाले, या उसमें रह रहे जीवों पर पड़ता है। यह जल प्रदूषण कहलाता है।

3. ध्वनि प्रदूषण

जब पानी का लेवल एक साधारण लेवल से बढ़ जाता है जो सुनने में अप्रिय लगता है और जिसे सुनने से मन चिड़चिड़ा हो जाता है उसे ध्वनि प्रदूषण कहते है।

4. मृदा प्रदूषण

जब मिट्टी में ऐसे अवांछित पहुंच जाएं जिनके कारण मिट्टी का प्राकृतिक संतुलन बिगड़ जाए तो उसे मृदा प्रदूषण कहते हैं। मृदा प्रदूषण के कारण मिट्टी की गुणवत्ता और उपजाऊ क्षमता में भारी गिरावट आती है।

5. थर्मल/ ऊष्मीय प्रदूषण

किसी भी तरह की प्रक्रिया द्वारा पानी की गुणवत्ता का घटना, जो पर्यावरण में मौजूद पानी के तापमान को बदल देता है। थर्मल प्रदूषण कहलाता है।

उपसंहार

ऐसा ही नहीं है की केवल प्रदूषण ही बढ़ा है जैसे-जैसे प्रदूषण बढ़ा है, इससे निपटने के अलग-अलग तरीके भी विकसित होते गए हैं। हमें बस अपने प्रयासों में तेज़ी लानी है।

प्रदूषण पर निबंध वीडियो में

प्रदूषण पर निबंध 400 शब्द का

प्रस्तावना

हमारा पर्यावरण तब प्रदूषित होता है जब प्रदूषक, प्राकृतिक परिवेश में दाखिल होकर पर्यावरण के घटक को दूषित करके उनके प्राकृतिक संतुलन को बिगाड़ देते हैं। हम बिना सोचे-समझे अपने प्रकृति की सीमाओं को लांघकर कर इसका संतुलन बिगाड़ देते हैं जिसकी वजह से गंभीर समस्याएं पैदा होती हैं।

प्रदूषण के कारण

  • प्रदूषण का सबसे मुख्य कारण तो मानव द्वारा किए जा रहे विभिन्न प्रकार के क्रियाकलाप है।
  • उद्योगों और वाहनों से निकलने वाला ज़हरीली और हानिकारक धुआँ या गैसें। उद्योगों एवं कारख़ानों से हानिकारक रसायन पर्यावरण में बिना उपचारित किए छोड़ दिए जाते हैं।
  • नदी, झील, समुद्र या किसी अन्य जल निकायों में तरह-तरह के मल, नालियों का पानी, कचरा तथा अन्य अवशेष पदार्थों का बिना किसी उपचार के सीधे जल निकायों में छोड़ने की वजह से जल प्रदूषण होता है।
  • फसलों की अच्छी पैदावार के लिए भारी मात्रा में खाद का इस्तेमाल, कीटों से बचाने के लिए अधिक मात्रा में कीटनाशकों का प्रयोग।
  • वृक्षों की अंधाधुंध कटाई जिसके कारण जंगल का क्षेत्र कम हुआ है जिसकी वजह से कई प्रजातियाँ लुप्त हो चुकी है या लुप्त होने की कगार पर है। जंगल CO2 जैसी हानिकारक गैसों को सोख कर हमें भारी मात्रा में शुद्ध ऑक्सीजन प्रदान करता है इसके साथ-ही-साथ ये कई प्राकृतिक संसाधनों को भी सहेज कर रखते हैं।

प्रदूषण की समस्याओं का समाधान

पर्यावरण प्रदूषण की वजह से जानवरों और इंसानों दोनों के ही जीवन को नकारात्मक रूप से प्रभावित किया है। वर्तमान पर्यावरणीय मुद्दों को नियंत्रित करने का एकमात्र तरीका है की हम संरक्षण विधियों को सख़्ती से लागू करें और साथ ही साथ विकास की ऐसी रणनीति बनाना जिससे प्राकृतिक संसाधनों का उचित उपयोग हो और कम से कम प्रदूषण हो। 

लोगों को ऊर्जा का संरक्षण करना चाहिए। जब आप कमरे में न हों तो सभी विद्युत यंत्रों और लाइट बंद कर दें। पौधों की अंधाधुंध कटाई पर रोक लगाई जाए और ज्यादा से ज्यादा मात्रा में पेड़ लगाने की कोशिश हो। पॉलिथीन का प्रयोग पूरी तरह से वर्जित हो क्योंकि यह आसानी से नष्ट नहीं होता है, नष्ट होने के दौरान हानिकारक पदार्थ छोड़ता है इसका हमारे पर्यावरण पर दुष्प्रभाव पड़ता है।

उपसंहार

“प्रदूषण की समस्या एक दीमक की तरह है,
जो पर्यावरण को धीरे-धीरे खोखला बनाती जा रही है।।”

हमें प्रकृति के नियमों के बारे में अपने ज्ञान को गहरा करना चाहिए या प्रकृति के नियमों को समझना होगा और प्रदूषण जैसी गंभीर समस्याओं से निपटने के लिए मानव को इसकी ज़िम्मेदारी लेनी होगी। वाहनों का कम से कम उपयोग करने की कोशिश करें और या ज्यादा से ज्यादा इलेक्ट्रिक वाहनों का प्रयोग करें। प्राकृतिक संसाधनों का सीमित मात्रा में उपयोग करना होगा।


प्रदूषण निबंध 500 शब्दों में

प्रस्तावना

आज प्रदूषण इतना आम हो गया है कि किसी छोटे बच्चे को भी इसके बारे में पता होता है। असल में अगर प्रदूषण शब्द का मतलब की बात करें तो जब किसी भी चीज में कोई बाहरी आकर उसका संतुलन बिगाड़ दे तो उसे प्रदूषण कहते हैं। 

इसी तरह जब हम पर्यावरणीय प्रदूषण की बात करते हैं तो जब हमारे पर्यावरण के किसी घटक में कोई ऐसा पदार्थ मिल जाता है जो इसके संतुलन को बिगाड़ देते हैं तो इस घटना को पर्यावरण प्रदूषण कहते हैं और उस पदार्थ जिसके वजह से प्रदूषण हुआ है उसे प्रदूषक कहते हैं।

प्रदूषण के प्रकार

आज प्रदूषण इतना बढ़ गया है कि प्रदूषण के सभी प्रकारों पर बात करना संभव नहीं है। वे कारण जो प्रदूषण के लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदार हैं, वे मुख्यतः चार है जो की निम्न हैं-

  1. जल प्रदूषण
  2. वायु प्रदूषण
  3. मृदा या भूमि प्रदूषण
  4. ध्वनि प्रदूषण

1. जल प्रदूषण

जल के गुणों में ऐसा रासायनिक, भौतिक या जैविक बदलाव जिसके परिणामस्वरूप उस जल को इस्तेमाल कर रहे सभी जीवों पर दुष्प्रभाव पड़े, इसे जल प्रदूषण कहते है।

2. वायु प्रदूषण

जब कोई पदार्थ हवा में मिलकर उसके प्राकृतिक संतुलन को बिगाड़ दे तो, इसे वायु प्रदूषण कहते है।

3. मृदा या भूमि प्रदूषण

जब मिट्टी में किसी पदार्थ के मिलने की वजह से उसका प्राकृतिक संतुलन बिगड़ जाता है और मिट्टी विषैली तथा बंजर हो जाती है तब, उसे मृदा प्रदूषण कहते है।

4. ध्वनि प्रदूषण

जब ध्वनि का स्तर मामूली स्तर से बढ़कर ऐसे स्तर पे पहुंच जाता है जिसे सुनने से चिड़चिड़ापन तथा अन्य स्वस्थ समस्याएं होती है, उसे ध्वनि प्रदूषण कहते है।

प्रदूषण का प्रभाव

  • प्रदूषण जीवन की गुणवत्ता को लगातार घटा रहा है। इसकी वजह से आज ना केवल मनुष्य को बल्कि पशुओं तथा वनस्पतियों को भी तरह-तरह के रोग लग जाते हैं।
  • कार्बनडाइऑक्साइड का लगातार बढ़ता हुआ स्तर ग्लोबल वार्मिंग का सबसे मुख्य कारण है जिसकी वजह से हमारे पृथ्वी का तापमान बढ़ रहा है और जिसकी वजह से समुद्र का स्तर भी बढ़ रहा है जो की एक चिंता का विषय है।
  • इसी तरह से उद्योगों से छोड़े जाने वाले रसायन, जल को प्रदूषित कर रहे हैं जिसकी वजह से पीने लायक़ पानी की कमी हो रही है। और हम सभी जानते हैं कि बिना पानी के जीवन संभव नहीं है।
  • आजकल ठोस वस्तुओं को यूं ही ज़मीन पे फेंक दिया जाता है जो नष्ट तो हो जाते हैं परंतु यह मिट्टी को जहरीला बना देते हैं। और अगर आगे इसी दर से चलता रहा तो है हमारे पास उपजाऊ भूमि भी नहीं बचेगी जिस पे हम फसल उगा सके और अपना पेट भर सके।

प्रदूषण का समाधान

“बेहद आवश्यकता पड़ने पर ही करें सार्वजनिक वाहनों का उपयोग,
और प्रदूषण को रोकने में दें सभी दें अपना सहयोग।”

वायु प्रदूषण कम करने के लिए हमें यात्रा के लिए पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करना चाहिए, CNG या विद्युत वाहनों का इस्तेमाल करना चाहिए। हमें त्योहारों पर पटाखों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। इससे वायु प्रदूषण के साथ-साथ ध्वनि प्रदूषण को भी कम कर सकते है। और सबसे महत्वपूर्ण हमें ज्यादा से ज्यादा संख्या में पेड़ लगाने चाहिए यह हमें हर तरह के प्रदूषण से निजात पाने में कहीं न कहीं मदद करता है।

उपसंहार

अब जैसा कि हमें प्रदूषण के सभी तरह के प्रभाव तो ज्ञात हो गये है। अब हमें ये जानना भी बहुत जरूरी हो गया है कि इससे निजात कैसे पाई जाए तथा इस विश्व स्तरीय समस्या का समाधान कैसे किया जाए।


प्रदूषण रोकने के उपाय निबंध 600 शब्द

प्रस्तावना

बढ़ा प्रदूषण जोर।
इसका कहीं न छोर।।
संकट ये अति घोर।
मचा चतुर्दिक शोर।।

प्रदूषण का अर्थ

दूषित, जहरीले और हानिकारक पदार्थों की पर्यावरण में मौजूदगी को प्रदूषण कहते हैं जो सभी जीवों को प्रभावित करता है। प्रदूषण एक मुख्य वैश्विक समस्या है। हालांकि शहरी इलाके गाँवों के मुकाबले ज्यादा प्रदूषित है। जिससे यह पता चलता है कि जहां ज्यादा लोग होते हैं वहां ज्यादा प्रदूषण होता है पर ऐसा भी नहीं है कि जहां लोग नहीं रहते हैं वहां प्रदूषण नहीं है। जैसे कि अंटार्कटिक क्षेत्र में भी पेस्टिसाइड यानी कीटनाशक के अंश पाए गए हैं।

प्रदूषण के प्रकार

प्रदूषण के मुख्य तीन प्रकार निम्न हैं- 

  1. जल प्रदूषण 
  2. वायु प्रदूषण 
  3. मृदा प्रदूषण

1. वायु प्रदूषण

ज्यादातर मामलों में वायु प्रदूषण हमें खुली आँखों से दिखाई नहीं देता फिर भी यह बहुत खतरनाक होता है। और कई मामलों में यह हमें दिखाई पड़ता है। जैसे चिमनियों तथा वाहनों से निकलने वाला धुआँ। यह लोगों में सांस संबंधी बीमारियों के खतरे को बढ़ावा देता है। वैसे तो वायु प्रदूषण के प्राकृतिक कारण भी हैं जैसे ज्वालामुखी से निकलने वाली राख लेकिन ज्यादातर वायु प्रदूषण का कारण प्राकृतिक नहीं होता। 

वाहन और कारखाने नाइट्रोजन ऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड और हाइड्रोकार्बन सहित अन्य आम और खतरनाक प्रदूषकों का उत्पादन करते हैं। ये रसायन सूर्य के प्रकाश के साथ प्रतिक्रिया करते हैं, जिससे स्मॉग, घना कोहरा या धुँध पैदा होती है। स्मॉग भूरा या भूरा नीला हो सकता है, ये इस बात पे निर्भर करता है कि प्रदूषक कौन से हैं।

2. जल प्रदूषण

कुछ प्रदूषित पानी ऐसा होता है जो मैला दिखता है, बदबू मारता है और इसमें तरह-तरह का कचरा तैरता रहता है। कुछ प्रदूषित पानी साफ दिखता है, लेकिन हानिकारक रसायनों से भरा होता है जिन्हें आप देख या सूंघ नहीं सकते। प्रदूषित पानी पीने या किसी तरह के इस्तेमाल के लिए असुरक्षित होता है। जो लोग प्रदूषित पानी पीते हैं या उसका किसी तरह से इस्तेमाल करते हैं, वे खतरनाक रसायनों के संपर्क में आते हैं जो उन्हें कुछ समय में या वर्षों बाद बीमार कर सकते हैं।

जल प्रदूषण के कुछ प्राकृतिक स्रोत हैं। उदाहरण के लिए तेल और प्राकृतिक गैस। यह भूमिगत स्रोतों से महासागरों और झीलों में रिसाव कर सकते हैं जिसकी वजह से जल प्रदूषित हो जाता है। बहुत सारी मानव गतिविधियाँ भी है जो जल प्रदूषण में योगदान करती है। कारख़ानों से निकलने वाले रसायन और तेल को कभी-कभी डंप किया जाता है या किसी जल निकाय में यूं ही बहा दिया जाता है। इन रसायनों को अपवाह (run-off) कहा जाता है। अपवाह (run-off) में मौजूद रसायन जलीय जीवों के लिए विषैले वातावरण बना देते हैं।

3. भूमि या मृदा प्रदूषण

ऐसे प्रदूषक जो पानी की गुणवत्ता को बेकार करते हैं वे भी भूमि को ही नुकसान पहुँचाते हैं। कभी-कभी खनन, खतरनाक रसायनों के रिसाव से मिट्टी को दूषित छोड़ देता है। कृषि क्षेत्रों में कीटनाशकों और उर्वरकों के अधिक इस्तेमाल से भी मिट्टी प्रदूषित होती है। जिससे पौधों, जानवरों और कभी-कभी लोगों को नुकसान पहुंचाता हैं।

प्रदूषण का समाधान

कचरे को कम करके, रीसाइक्लिंग नीतियों को लागू करके, खतरनाक कृषि रसायनों पर प्रतिबंध लगा के और सुरक्षित अक्षय ऊर्जा विकसित करके प्रदूषण को नियंत्रित किया जा सकता है। प्रदूषण के इस चरम स्तर को कम करने के लिए ‘वनीकरण’ यानी कि ज्यादा से ज्यादा संख्या में पेड़ लगाना सबसे कारगर तरीका है। 

हमें प्रदूषण के तीव्र स्तर को कम करने के लिए एक साथ मिलकर प्रयास करना शुरू करना होगा क्योंकि अगर इसे नियंत्रित नहीं किया गया तो यह सभी जीवों को प्रभावित करेगा। इसके लिए पानी बचाना, ऊर्जा बचाना और पेड़ लगाना हमारा मकसद होना चाहिए क्योंकि पर्यावरण की रक्षा करना यानी सभी तरह के जीवों की रक्षा करना है।

उपसंहार

विपद न यह लघु-काय।
पर अब जग-समुदाय।।
मिलजुल करे उपाय।
तब यह टले बलाय।।

यदि प्रत्येक व्यक्ति को सांस लेने के लिए स्वच्छ हवा, पीने के लिए साफ पानी और सार्वजनिक भूमि का आनंद लेने का अधिकार है, तो इसी तरह पर्यावरण की रक्षा करना प्रत्येक व्यक्ति की ज़िम्मेदारी है।

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बेचारा नोबिता………इसको हमेशा Test में जीरो मिलता हैं। आप इसके जैसा मत बनना। प्रदूषण निबंध को अच्छे से पढ़ना और Test में अच्छे नंबर लाना।😉


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मेरे प्यारे दोस्तों! मुझे पूरी उम्मीद हैं की मेरे द्वारा लिखा गया Pradushan Par Nibandh Hindi Mein आपको जरूर पसंद आया होगा। आप इस प्रदूषण पर निबंध को अपने करीबी दोस्तों या रिश्तेदारों को ज़रूर शेयर कीजियेगा, जिनको इस निबंध की अति आवश्यकता हो।

मैंने अपनी पूरी कोशिश की हैं आपको एक बेहतर Essay On Pollution In Hindi प्रदान करने की। और अगर फिर भी मुझसे जाने-अनजाने में कोई गलती हो तो गई हैं तो माफ़ बुल्कुल मत करना। नीचे दिए Comment Box💬 में मुझे जरूर डाँटना😥 ताकि अगली बार में गलतीयाँ न करूं। 😊

हम अगली बार फिर मिलेंगे, दुआओं में याद रखना!😊🙏

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