Global Warming Essay In Hindi | ग्लोबल वार्मिंग पर निबंध 2022

ग्लोबल वार्मिंग आज के समय में पूरे विश्व के लिए एक चुनौती बनी हुई है, जिसका समाधान हम सभी को मिलकर ही स्थाई रूप से निकालना होगा।

Global Warming Essay In Hindi
Global Warming Essay In Hindi

EssayToNibandh.com पर आज हम Global Warming Essay In Hindi पढ़ेंगे। जो की अलग अलग शब्द सीमा के आधार पर लिखे गए हैं। आप ग्लोबल वार्मिंग पर निबंध को ध्यान से और मन लगाकर पढ़ें और समझें। Global Warming Par Nibandh In Hindi को निम्न शब्द सीमा के आधार पर लिखा गया है-

Table of Contents

आइये! ग्लोबल वार्मिंग पर निबंध को अलग अलग शब्द सीमाओं के आधार पर पढ़ें।

नोट- यहां पर दिया गया Global Warming Essay In Hindi कक्षा(For Class) 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11, 12,(विद्यालय में पढ़ने वाले) विद्यार्थियों के साथ-साथ कॉलेज के विद्यार्थियों के लिए भी मान्य हैं।

Short Essay On Global Warming In Hindi (80 Words)

ग्लोबल वार्मिंग की समस्या पूरे विश्व के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। जिस तरह से लगातार ग्लोबल वार्मिंग के दुष्परिणाम से धरती को सामना करना पड़ रहा है। धरती का पूरा जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है, जलवायु बुरी तरह प्रभावित हो गई है, पारिस्थितिक तंत्र काफी खराब हो गया है।

लगातार धरती का तापमान बढ़ते जा रहा है। जो की कहीं से भी धरती पर जन जीवन के अस्तित्व के लिए ठीक नहीं है। धरती को बचाने के लिए सभी को मिलकर एक साथ प्रयास करने होंगे। तभी जाकर धरती पर जीवन की कल्पना को संभव बनाया जा सकता है।


ग्लोबल वार्मिंग एस्से इन हिंदी 100 वर्ड्स में

ग्लोबल वार्मिंग आज के समय में विश्व की सबसे बड़ी समस्या में से एक है। ग्लोबल वार्मिंग के कारण पृथ्वी पर रहने वाले सभी जीव जंतुओं के साथ-साथ मानव को भी इसके भयानक रूप से सामना करना पड़ रहा है। धरती का तापमान लगातार बढ़ते जा रहा है।

प्रत्येक प्राणी इससे प्रभावित हो रहे हैं, इस समस्या से निपटने के लिए प्रतिदिन हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। लेकिन ग्लोबल वार्मिंग की समस्या कम होने का नाम ही नहीं ले रहे। ग्लोबल वार्मिंग ने पर्यावरण को पूरी तरह प्रभावित किया है। पर्यावरण का संतुलन लगातार बिगड़ता जा रहा है, जिससे धरती पर जीवन की संभावना भी प्रभावित होते जा रही है।


Global Warming Essay In Hindi 150 Words

ग्लोबल वार्मिंग आज के समय में पूरे विश्व के लिए एक चुनौती बनी हुई है, जिसका समाधान हम सभी को मिलकर ही स्थाई रूप से निकालना होगा। धरती की सतह के तापमान में लगातार बढ़ोतरी हो रही है, जो ग्लोबल वार्मिंग को दर्शाती है। धरती पर ग्लोबल वार्मिंग का सबसे बड़ा कारण है, कार्बन डाइऑक्साइड और मीथेन जैसी ग्रीनहाउस गैस।

जिसका, सीधा प्रभाव ग्लेशियर के पिघलने, जलवायु में परिवर्तन, तापमान में वृद्धि, समुद्र के जल स्तर में तेज़ी से बढ़ोतरी के रूप में देख सकते हैं, और आने वाले समय में इसके विकराल परिणाम से संपूर्ण मानव जाति के साथ-साथ पृथ्वी पर रहने वाले सभी जीवों को सामना करना पड़ेगा। धरती का वायुमंडल पूरी तरह बिगड़ गया है। 

ग्लोबल वार्मिंग को बढ़ाने में सबसे बड़ा कारण है मानवीय गतिविधियाँ। मानव ने अपनी सुख सुविधाओं के लिए पर्यावरण का इतना दोहन किया, तरह-तरह की गैसों से वायुमंडल को असंतुलित किया, कि आज ग्लोबल वार्मिंग के रूप में एक चुनौती पूरी दुनिया के सामने खड़ी है।


Nibandh On Global Warming In Hindi 200 Words

प्रस्तावना

ग्लोबल वॉर्मिंग क्या हैं?- पृथ्वी के तापमान में लगातार बढ़ते स्तर को ही ग्लोबल वॉर्मिंग कहते हैं।

ग्लोबल वॉर्मिंग आज संपूर्ण विश्व के लिए एक गंभीर समस्या बनकर उभर रहा है। इसे अभी भी नज़रअंदाज़ किया गया और इसका समाधान निकालने की कोशिश नहीं की गई, तो आगे चलकर यह समस्या और भी विकराल हो जाएगी। इसके गंभीर प्रकोप से नहीं बचा जा सकेगा। धरती के वातावरण में लगातार होते परिवर्तन का कारण है- ग्रीन हाउस गैसों का वातावरण में बढ़ता प्रभाव। दिन प्रतिदिन ग्लोबल वार्मिंग दुनिया को अपने जकड़ में ले रहा है।

ग्लोबल वार्मिंग के दुष्परिणाम

इससे धरती का तापमान तो बढ़ ही रहा है, साथ-साथ धरती का जलवायु भी पूरी तरह बदल गया है। वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा में बढ़ोतरी होने के कारण ग्लेशियर पिघलता जा रहे हैं। ग्लेशियर के पिघलने के कारण समुद्र का जल स्तर भी लगातार बढ़ते जा रहा है, जिससे समुद्री तटों वाले देशों को अस्तित्व की चिंता सता रही है। साथ-साथ बहुत सारी आपदाएं अब आम हो चली है। चक्रवात, सुनामी, ज्वालामुखी विस्फोट, भूकंप अब कभी भी अपना प्रकोप धरती पर दिखाते है।

निष्कर्ष

इस समस्या को जड़ से मिटाया जा सकता है, और धरती पर जीवन की संभावना को बरकरार रखा जा सकता है। इसके लिए सभी को एक साथ मिलकर आगे आना होगा। सभी लोगों में ग्लोबल वार्मिंग के प्रति जागरूकता फैलानी होगी। उनको इसके दुष्परिणाम के बारे में बताना होगा। तभी जाकर इसे कम करना संभव हो पाएगा अन्यथा नहीं।

ग्लोबल वार्मिंग पर निबंध
ग्लोबल वार्मिंग पर निबंध

Global Warming Nibandh In Hindi 250 Words

प्रस्तावना

ग्लोबल वार्मिंग का आसान शब्दों में अर्थ है तापमान का बढ़ना। ग्लोबल वार्मिंग के कारण लगातार धरती की सतह गर्म होते जा रही है। धरती की सतह का गर्म होने का सबसे बड़ा कारण है, वायुमंडल में लगातार कार्बन डाइऑक्साइड गैस की मात्रा का बढ़ना। वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा बढ़ने का सबसे बड़ा कारण है, लगातार वृक्षों की अंधाधुंध कटाई और मानव द्वारा किए जाने वाले अनावश्यक कार्य जो पर्यावरण के संतुलन में नहीं है।

ग्लोबल वार्मिंग को करना है दूर,
तो कुदरत की चिंता करना ज़रुर।

ग्लोबल वार्मिंग के प्रभाव

ग्लोबल वार्मिंग का प्रभाव बहुत खतरनाक हैं। लगातार बड़े-बड़े ग्लेशियर पिघलते जा रहे हैं, जिससे समुद्र का जल स्तर बढ़ते जा रहा है, और तटीय देशों के डूबने का खतरा लगातार बढ़ते जा रहा है। धरती की जलवायु पूरी तरह बदल चुका है। जब चाहे तब चक्रवात, तूफान से धरती प्रभावित हो रही है। धरती पर गर्मी इतनी पड़ रही है, कि सारे रिकॉर्ड तोड़ते जा रही है। 

ग्लोबल वार्मिंग के कारण वर्षा भी बुरी तरह प्रभावित हुई है। बाढ़, सूखा जैसी खतरनाक आपदाएं अब आम हो चली है। ग्लोबल वार्मिंग ने ‘ओजोन परत’ में भी छिद्र करने की मात्रा में काफी बढ़ोतरी की है। जो, आने वाले समय में धरती के वातावरण के लिए बिल्कुल भी सही नहीं है। बिन मौसम बरसात और ठंडी के मौसम में भी कमी देखी गई है।

निष्कर्ष

ग्लोबल वार्मिंग के प्रभाव को पूरी तरह अचानक खत्म नहीं किया जा सकता है, लेकिन इसके प्रभाव को कम करने की कोशिश ज़रूर की जा सकती है। जिससे, इसके भयावह प्रभाव से बचा जा सके, और आने वाली पीढ़ी भी धरती पर अपना जीवनयापन अच्छे से कर सके।


ग्लोबल वार्मिंग पर निबंध 300 शब्दों में

प्रस्तावना

आज विश्व में चारों तरफ ग्लोबल वार्मिंग की चर्चा है। क्योंकि, ग्लोबल वार्मिंग के कारण ही धरती का तापमान लगातार बढ़ते जा रहा है। जिससे, धरती पर जीवन की संभावना कम होती जा रही है, जो धरती पर रहने वाले सभी जीवों के लिए बिल्कुल भी अनुकूल नहीं है।

ग्लोबल वार्मिंग ने धरती के पारिस्थितिक तंत्र को भी प्रभावित किया है। जिससे, धरती का जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। अगर अभी भी जल्द से जल्द ग्लोबल वॉर्मिंग को कम करने के लिए प्रयास नहीं किए गए तो, भविष्य में धरती पर जीवन की कल्पना को छोड़ ही दीजिए। क्योंकि,

ग्लोबल वार्मिंग एक खतरा है तू मान,
पर्यावरण की सुरक्षा करना हे तेरा काम।

ग्लोबल वार्मिंग का सही मायनों में अर्थ

ग्लोबल वार्मिंग का सही मायनों में अर्थ होता है प्रकृति में लगातार परिवर्तन, जिससे धरती का तापमान लगातार बढ़ रहा है।  जो, प्रकृति के नियम के अनुसार बिल्कुल भी नहीं है। इसे ही ‘ग्लोबल वॉर्मिंग‘ कहते हैं।

इन सभी परिवर्तनों में मानवीय क्रियाओं ने सबसे ज्यादा पर्यावरण को प्रभावित किया है। यह वातावरण को बहुत ज्यादा गर्म कर देती है, जिससे धरती का पूरा पर्यावरण प्रभावित होता है। इससे लगातार अंटार्कटिक और हिमालय जैसे पर्वतों के ग्लेशियर पिघलते जा रहे हैं। 

समुद्र का जल स्तर बढ़ते जा रहा है। ग्लोबल वॉर्मिंग ने धरती के जलवायु को भी बुरी तरह प्रभावित किया है। अगर ऐसे ही धरती पर ग्लोबल वार्मिंग का प्रभाव बढ़ते गया, तो वह दिन दूर नहीं जब धरती पर जीवन पूरी तरह नष्ट हो जाएगा और पृथ्वी पर से जीवन का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा।

निष्कर्ष

ऐसा डेवलपमेंट है बेकार,
जिससे मानव जीवन को हो खतरे बरक़रार।

ऊपर दी गई पंक्ति बिल्कुल सही है। क्योंकि, मानव ने अपनी औद्योगिकीकरण की इस दौड़ में जिस तरह प्रकृति के साथ खिलवाड़ किया, उसके संसाधनों का अपव्यय किया उसके गंभीर परिणाम ग्लोबल वार्मिंग के रूप में आज पूरी दुनिया को झेलने पड़ रहे हैं। इसने ना सिर्फ धरती पर हो रहे परिवर्तनों में बड़ी भूमिका निभाई अपितु धरती पर जीवन को भी काफी प्रभावित किया है।

ग्लोबल वार्मिंग की समस्या पर वीडियो

Global Warming Par Nibandh In Hindi 400 Shabdo Ka

प्रस्तावना

ग्लोबल वार्मिंग पूरे विश्व के लिए एक गंभीर समस्या बनकर उभर रहा है। ग्लोबल वार्मिंग के कारण धरती के तापमान में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है। दिन प्रतिदिन हमारे वातावरण का तापमान बढ़ते जा रहा है, जिससे पर्यावरण का पारिस्थितिक तंत्र बुरी तरह प्रभावित हुआ है।

ग्लोबल वार्मिंग ने पूरे विश्व को एक चुनौती दी है। जिसका, सामना हम सभी को मिलकर करना होगा। ग्लोबल वार्मिंग का मुख्य कारण है, वायुमंडल में लगातार कार्बन डाइऑक्साइड गैस की मात्रा का बढ़ना। ग्लोबल वार्मिंग ने धरती पर जीवन के अस्तित्व को नकारात्मक रूप से प्रभावित किया है और अगर ऐसे ही चलता गया तो आगे भी इसके विकराल रूप से मानव जाति को सामना करना पड़ेगा।

ग्लोबल वार्मिंग के कारण

ग्लोबल वार्मिंग के कारणों की बात करें तो इसके बहुत सारे मानवीय कारण है और कुछ प्राकृतिक कारण भी है, जिसने ग्लोबल वार्मिंग को धरती पर बढ़ाने में काफी काम किया है। ग्रीन हाउस गैसों जैसे मीथेन, कार्बन डाईऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड आदि गैसों की वायुमंडल में बढ़ती मात्रा ने ग्लोबल वार्मिंग को बढ़ाने में काफी बड़ी भूमिका निभाई है।

मानव समुदाय विलासिता के इस दौर में अंधाधुन पेड़ों की कटाई कर रहा है, जिससे वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा बढ़ रही है। इसने भी ग्लोबल वार्मिंग को काफी बढ़ाया है। कल कारखानों से निकलने वाली विषाक्त पदार्थों, चिमनीओं ने भी ग्लोबल वार्मिंग को पूरी तरह प्रभावित किया है और ग्लोबल वार्मिंग की समस्या को उत्पन्न करने में भूमिका निभाई है। जीवाश्म ईंधन का भी अत्याधिक मात्रा में उपयोग करने से प्रकृति बुरी तरह प्रभावित हुई है, जिससे भी ग्लोबल वार्मिंग जैसी समस्या धरती पर उत्पन्न हो रही है।

ग्लोबल वार्मिंग के प्रभाव/ Global Warming Ke Khatre

ग्लोबल वॉर्मिंग के प्रभावों की बात करें, तो इसका धरती पर प्रभाव काफी नकारात्मक है। जिसने, धरती पर रहने वाले तमाम जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। ग्लोबल वार्मिंग के कारण धरती का जलवायु परिवर्तित हो गया है, जिससे फसलें भारी मात्रा में बर्बाद हो रही है, सूखा पड़ रहा है, बाढ़ की समस्या आम हो गई है। चक्रवात, तूफान, सुनामी, भूकंप जैसी समस्याओं से इस धरती को सामना करना पड़ रहा है।

ग्लोबल वार्मिंग के कारण धरती की सतह बहुत गर्म हो गई है, जिससे ग्लेशियर पिघल कर समुद्र में मिल रहे हैं। इससे समुद्र का जलस्तर बढ़ते जा रहा है, जो धरती पर जीवन के लिए कहीं से भी सकारात्मक नहीं है। ग्लोबल वार्मिंग ने ओजोन परत को भी नकारात्मक रूप से प्रभावित किया है और इसे नुकसान पहुंचाया हैं। ओजोन परत में बढता छिद्र कहीं से भी धरती पर जनजीवन के लिए ठीक नहीं है।

निष्कर्ष

ग्लोबल वार्मिंग को अगर काबू में लाना है,
तो जन जन में इसके लिए जागरूकता फैलाना है।

ग्लोबल वार्मिंग की खतरनाक समस्या पर काबू सिर्फ और सिर्फ जन जन मे जागरूकता फैलाकर ही किया जा सकता है। लोगों को ग्लोबल वार्मिंग के नकारात्मक प्रभाव के बारे में बताना होगा। सभी लोगों को मिलकर एकजुट होकर इस समस्या से निपटना होगा। तब जाकर धरती को ग्लोबल वॉर्मिंग के खतरनाक प्रभाव से बचाया जा सकता है।


Global Warming Par Nibandh 500 Shabd Me

प्रस्तावना

बढ़ा दिया पृथ्वी का तापमान,
बिगड़ गया पृथ्वी का संतुलन,
यह देख पृथ्वी को आया क्रोध।

तकनीक की इस दौर में मानव ने अपने लिए नई-नई तकनीकों का विकास कर आज के युग में काफी विकसित हो गया है। अपनी सुख-सुविधाओं के लिए मानव ने प्रकृति का बहुत अनावश्यक रूप से दोहन किया है। बिना इसके परवाह किए कि, जो प्रकृति धरती पर जीवन की देन है, वही प्रकृति के साथ वह खिलवाड़ कर रहा है।

लेकिन अब इसके दुष्परिणाम धरती को ग्लोबल वॉर्मिंग के रूप में चुनौती दे रहे हैं, जिसने पर्यावरण के संतुलन को बिगाड़ने में काफी बड़ी भूमिका निभाई। यही प्रकृति के असंतुलन के कारण पृथ्वी पर जनजीवन बहुत प्रभावित हुआ। हम सभी को समझना होगा कि,

ग्लोबल वार्मिंग पर आपको कोई भी कुछ नहीं कहेगा,
सिवाय आपके आने वाली पीढ़ी के।

ग्रीन हाउस गैसें क्या है?- कार्बन डाइऑक्साइड, मीथेन, हीलियम, नाइट्रोजन, हाइड्रोजन, सल्फर डाइऑक्साइड आदि से ग्लोबल वार्मिंग लगातार बढ़ती जा रही है। आज पृथ्वी का तापमान पिछले दशक के मुकाबले दोगुनी तेज़ी से बढ़ रहा है। धरती की सतह पहले के मुकाबले काफी गर्म हो गई है। अब प्रकृति के नियम में बहुत बदलाव आ गए हैं, मानव ने उसके साथ काफी छेड़छाड़ की है।

जिसका, परिणाम ग्लोबल वार्मिंग को के रूप में पूरी दुनिया को झेलना पड़ रहा है। ग्लोबल वार्मिंग की समस्या को बढ़ाने में सबसे बड़ी भूमिका ग्रीन हाउस गैसों की रही है। ग्रीन हाउस गैस जैसे कार्बन डाइऑक्साइड, मीथेन, हीलियम, नाइट्रोजन, हाइड्रोजन, सल्फर डाइऑक्साइड है। सभी वायुमंडल में अपनी निश्चित मात्रा में उपस्थित है। इन गैसों के आवरण को ही ग्रीन गैस कहा जाता है।

ग्रीन हाउस गैस पृथ्वी की सुरक्षा कवच की तरह होता है। जब ग्रीनहाउस गैस में परिवर्तन होता है, और असंतुलित होती है तब इसके गंभीर परिणाम ग्लोबल वार्मिंग के रूप में धरती को झेलने पड़ते हैं। आज की विकास की अंधी दौड़ में मानव ने ग्रीन हाउस गैसों को असंतुलित कर दिया है। वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा काफी बढ़ चुकी है, जिससे धरती का तापमान बढ़ते जा रहा है और अंटार्कटिका और हिमालय जैसे पर्वतों के बड़े-बड़े ग्लेशियर पिघलता जा रहे हैं, जो धरती पर जनजीवन के लिए कहीं से भी ठीक नहीं है।

ग्लोबल वार्मिंग के प्रभाव को कैसे कम किया जा सकता है?

ग्लोबल वार्मिंग का प्रभाव काफी खतरनाक है, जिसे कम करना काफी आवश्यक है-

जीवाश्म ईंधनो जैसे कोयला, पेट्रोलियम आदि का उपयोग कम करना होगा। अधिक से अधिक मात्रा में वृक्षों को लगाया जा सकता है। वृक्ष वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित करके ऑक्सीजन गैस को प्रदान करते हैं, जो धरती पर जीवन के लिए बेहद जरूरी है। साथ ही साथ वृक्ष वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा को नियंत्रित करते हैं।

ग्लोबल वार्मिंग के प्रभाव को कम करने के लिए हमें धरती का प्रदूषण भी कम करना होगा। परिवहन के साधनों को कम करके भी ग्लोबल वार्मिंग को कम किया जा सकता है। हमें ऊर्जा के नए विकल्पों की तलाश करनी होगी, जिससे ग्लोबल वार्मिंग जैसी समस्या से बचा जा सके। जो ऊर्जा के स्रोत पर्यावरण के लिए हानिकारक नहीं है- जैसे सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा आदि।

लोगों में भी ग्लोबल वार्मिंग के प्रति जागरूकता फैलाने होगी। इसे कम करने के लिए जागरूक करना होगा तथा इसके नकारात्मक प्रभाव के बारे में बताना होगा। तभी जाकर सभी लोग मिलकर इस समस्या का सामना करके इसे कम कर सकते हैं। ग्रीन हाउस उत्सर्जन करने वाले उपकरणों का मानव कम से कम उपयोग करके ग्लोबल वार्मिंग की समस्या से बच सकता है।

निष्कर्ष

धरती पर अगर जनजीवन को सामान्य बनाना है। अगर भविष्य में भी आने वाली पीढ़ी धरती पर अपना जीवन यापन कर सके, वे भी धरती पर जीवन के अस्तित्व को देख सके। तो हमें आज से ही ग्लोबल वार्मिंग को कम करने के लिए मिलकर प्रयास करने होंगे। ताकि धरती पर जीवन की संभावना ख़त्म ना हो।


Global Warming Essay In Hindi 600 Words

प्रस्तावना

विकसित राष्ट्र की कल्पना है बेकार,
प्रदूषण के लिए औद्योगीकरण है जिम्मेदार।

ग्लोबल वार्मिंग धरती के वातावरण को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर रहा है। इससे ना सिर्फ धरती पर रहने वाले मनुष्य बल्कि धरती पर रहने वाले प्रत्येक जीव-जंतु, प्राणी भी इससे प्रभावित हो रहे हैं। उनको नुकसान पहुंच रहा है, उनके आश्रय स्थान समाप्त होते जा रहे हैं विलुप्त हो रहे हैं। तमाम तरह की आपदाएं किसी भी देश या समाज को खत्म करने के लिए काफी है।

आपदाएं अब इस धरती पर आम हो चली है। ग्लोबल वार्मिंग का प्रभाव निरंतर बढ़ते जा रहा है, जिसका स्वयं मानव ही जिम्मेदार है। उन्होंने अपनी गतिविधियों के जरिए प्राकृतिक संसाधनों का इस तरह दोहन किया कि अब इसके दुष्परिणाम ग्लोबल वॉर्मिंग के रूप में हमें देखने को मिल रहे हैं। वायुमंडल में विषाक्त गैसों की बढ़ोतरी ने ग्लोबल वार्मिंग को बढ़ाने में काफी बड़ी भूमिका निभाई है।

ग्लोबल वार्मिंग के कारण

ग्लोबल वार्मिंग के वैसे तो बहुत से मानवीय कारण है, परंतु प्राकृतिक कारण ने भी ग्लोबल वार्मिंग को बढ़ाने में काफी बड़ी भूमिका निभाई है।

प्राकृतिक कारण

ग्लोबल वार्मिंग के कारण धरती के जलवायु में बहुत अधिक परिवर्तन हो गया है। जलवायु परिवर्तन में सबसे ज्यादा जिम्मेदार ग्रीन हाउस गैस रही है। ग्रीन हाउस गैसे कार्बन डाइऑक्साइड ने धरती पर रहने वाले सभी जीवो को काफी प्रभावित किया है। वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा लगातार बढ़ती जा रही है, जिससे धरती का तापमान भी लगातार बढ़ते जा रहा है।

पिछले दो दशकों में वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा में दोगुनी बढ़ोतरी हुई है, जिससे तापमान में भी दुगनी बढ़ोतरी हुई है। पृथ्वी का तापमान, 3 डिग्री से बढ़कर 8 डिग्री तक हो गया है। पहले जहां बर्फ़ की मोटी मोटी चादर लगी रहती थी, अब वही चादर टूटकर समुंद्र में मिल रहे हैं, जिससे समुद्र का जलस्तर भी बढ़ते जा रहा है। जो मानव जीवन के विनाश के लिए काफी है।

मानवीय कारण

मानवीय कारण ही ग्लोबल वार्मिंग की समस्या को बढ़ाने के लिए जिम्मेदार हैं। ग्लोबल वार्मिंग को बढ़ाने में मानव का बड़ा हाथ है। इसके गंभीर परिणाम से सामना भी मानव जाति को ही करना पड़ेगा। विकास और आधुनिकीकरण की इस अंधी दौड़ में मानव ने जिस तरह प्रकृति के संसाधनों का दोहन किया, उनके दुष्परिणामों की चिंता किए बगैर वह कहीं से भी ठीक नहीं है।

पर्यावरण से मानव ने लगातार छेड़छाड़ की। सीमित मात्रा में उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों का सतत पोषणीय विकास नहीं किया। पेड़ पौधों की अंधाधुंध कटाई की, जिससे जीवों के आश्रय स्थान भी समाप्त हुए। CFC गैस के उत्सर्जन वाले उपकरण का अंधाधुन उपयोग किया अपनी विलासिता के लिए, जिससे धरती का तापमान बढ़ते जा रहा है।

रसायानिक उर्वरकों का सीमित मात्रा से अत्यधिक उपयोग ने ग्लोबल वार्मिंग को बढ़ाने में भूमिका निभाई। मानव अपनी क्रियाओं को पूरा करने के बाद सभी प्रकार के कचरे को ऐसे ही सीधे खुले में फेंक देता है, जिससे वायु प्रदूषण और जल प्रदूषण होता है। इसने भी ग्लोबल वार्मिंग की समस्या को उत्पन्न किया।

ग्लोबल वार्मिंग के दुष्परिणाम और रोकथाम

ग्लोबल वार्मिंग के दुष्परिणाम बेहद ही विकराल है। अगर ऐसे ही ग्लोबल वार्मिंग का प्रभाव बढ़ता गया तो 1 दिन धरती पर जीवन अपना अस्तित्व खो देगा। धरती पर गर्मी इतनी बढ़ रही है, और ठंडी का कार्यकाल इतनी छोटी हो रही है। क्योंकि, धरती का तापमान पिछले अपने सारे रिकॉर्ड तोड़ते जा रहा है। जलवायु काफी परिवर्तित हो गई है।

जब चाहे तब चक्रवात, तूफान, भूकंप, ज्वालामुखी विस्फोट,सूनामी, सूखे जैसी समस्याएं धरती को अपनी जकड़ में ले लेती है। बड़े-बड़े ग्लेशियर पिघल कर टूट कर समुद्र में गिर रहे हैं, जिससे समुद्र का जल स्तर भी बढ़ते जा रहा है। जीव जंतु विलुप्त होते जा रहे हैं, जिससे पारिस्थितिक तंत्र पूरी तरह प्रभावित हो रहा है। पारिस्थितिक तंत्र धरती पर जीवन के लिए बेहद जरूरी है।

जो पर्यावरण का संतुलन बनाए रखते हैं। ग्लोबल वार्मिंग के कारण ‘ओजोन परत’ का क्षरण भी दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। जो, कहीं से भी धरती पर जीवन के लिए ठीक नहीं है। कैंसर जैसी समस्याएं धरती को अपनी जकड़ में ले लेंगे। इन सभी समस्याओं का समाधान सिर्फ एक है- जन-जन में जागरूकता फैला कर उन्हें ग्लोबल वार्मिंग की समस्या के बारे में बता कर इसके प्रभाव को कम किया जा सकता है।

निष्कर्ष

धरती का बढ़ता तापमान रोकिये |
पृथ्वी को सुरक्षित कीजिये ||

धरती पर अगर जीवन बचाना है तो आज से ही हम सभी को शपथ लेनी होगी, कि सभी धरती पर जीवन को बचाने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे। ग्लोबल वार्मिंग से धरती को बचाएंगे और अपने जीवन के अस्तित्व को धरती पर जिंदा रखने का प्रयास करेंगे और लोगों में भी यह जागरूकता फैलाएंगे।


ग्लोबल वार्मिंग की समस्या निबंध पर अपनी प्रतिक्रिया दीजिये👇

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बेचारा नोबिता………इसको हमेशा Test में जीरो मिलता हैं। आप इसके जैसा मत बनना। Global Warming Essay In Hindi को अच्छे से पढ़ना और Test में अच्छे नंबर लाना।😉


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अंतिम शब्द

मेरे प्यारे दोस्तों! मुझे पूरी उम्मीद हैं की मेरे द्वारा लिखा गया Global Warming Par Nibandh In Hindi आपको जरूर पसंद आया होगा। आप इस ग्लोबल वार्मिंग पर निबंध को अपने करीबी दोस्तों या रिश्तेदारों को ज़रूर शेयर कीजियेगा, जिनको इस निबंध की अति आवश्यकता हो।

मैंने अपनी पूरी कोशिश की हैं आपको एक बेहतर Global Warming Essay In Hindi प्रदान करने की। और अगर फिर भी मुझसे जाने-अनजाने में कोई गलती हो तो गई हैं तो माफ़ बुल्कुल मत करना। नीचे दिए Comment Box💬 में मुझे जरूर डाँटना😥 ताकि अगली बार में गलतीयाँ न करूं। 😊

हम अगली बार फिर मिलेंगे, दुआओं में याद रखना!😊🙏

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