Hindi Bhasha Par Nibandh 2022 (भाषण, दोहे और कविता सहित)

Hindi Bhasha Par Nibandh: हमारी राष्ट्रीय भाषा हिंदी ने हमें संपूर्ण विश्व में एक नई पहचान दिलाई है। हिंदी के विकास व विस्तार को बढ़ावा देने के के लिए हर वर्ष भारत में 14 सितंबर को हिंदी दिवस मनाया जाता है। यह विश्व में बोली जाने वाली प्रमुख भाषाओं में से एक है। हिन्दी हमारे देश का स्वाभिमान है, इसलिए हमें सदैव इस पर गर्व होना चाहिए।

Hindi Bhasha Par Nibandh,
hindi bhasha per nibandh,
hindi bhasha par nibandh hini, me
Hindi Bhasha Par Nibandh

Table of Contents

हिंदी भाषा पर 5 पांच लाइन का निबंध

  1. हिंदी हमारी राष्ट्रभाषा है। यह भारत में सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा है।
  2. 1947 में स्वतंत्रता प्राप्ति के तुरंत बाद संविधान सभा द्वारा इसे अपनाया गया।
  3. विश्व में प्रमुख रूप से बोली जाने वाली भाषाओं में से एक हमारी हिंदी भाषा है। 
  4. विश्व की प्राचीन समृद्ध और सरल भाषा होने के साथ-साथ यह विश्व में सबसे ज्यादा बोले जाने वाली दूसरी भाषा है।
  5. हिंदी के प्रति अपना प्रेम और सम्मान प्रकट करने के लिए हम हर साल 14 सितंबर को हिंदी दिवस मनाते हैं। 

हिंदी सीमा तोड़ कर,चली विश्व के द्वार।
वैज्ञानिक आधार पर, प्रसिद्धि मिली अपार।।

Hindi Bhasha Ka Nibandh 100 Words

हिंदी भारत की संवैधानिक राजभाषा है। 14 सितंबर 1949 को आधिकारिक रूप से हिंदी को राष्ट्रभाषा के रूप में स्वीकारा गया था। हमारे देश के अतिरिक्त पाकिस्तान, फिजी, मॉरीशस, अमेरिका, ग्याना, सूरीनाम, जर्मनी, नेपाल आदि देशों में भी काफी हद तक लोग हिंदी बोलना व सीखना पसंद करते हैं।

एकमात्र हिंदी ऐसी भाषा है जो कि सबसे अधिक तेजी से प्रसारित होने वाली भाषाओं में अपना स्थान बना चुकी है। हिंदी भाषा के बोले जाने में लगभग 94 प्रतिशत की दर से वृद्धि हो रही है। 

हिंदी भाषा बोली से,
बोलचाल आसान।
शालीन मधु वाणी से,
पिघल जाता पाषाण।।

हिन्दी भाषा का शब्दकोश काफी बड़ा है। यह भाषा वैज्ञानिक तथ्यों पर भी खरी उतरती है। इस भाषा के मूल शब्दों में लगभग ढाई लाख से अधिक शब्द है। कंप्यूटर व मोबाइल आने के बाद इस क्षेत्र में भी हिंदी का विस्तार काफी तेजी से हो रहा है।

आज के समय में हिंदी भाषा की इतनी अधिक मांग है, कि दुनिया के सबसे बड़े सर्च इंजन गूगल ने भी वर्ष 2009 में हिंदी भाषा को अपना लिया और गूगल के कारण हिंदी भाषा का सबसे तेजी से विस्तार हुआ है। 

राष्ट्र एक भाषा भी,
सिवा हिंदी ना विकल्प।
भाषा में ना बटे देश,
ना हो कलंकित कल्प।।

Matrubhasha Ka Mahatva Par Nibandh 150 Words

हिंदी भाषा देश की सबसे अधिक लोगों द्वारा बोली जाने वाली भाषा है। यह भाषा सभी लोग आसानी से सीख सकते हैं। इस भाषा का अपना विचार उन्नति शील साहित्य है। यह भाषा देश के नागरिकों के कर्तव्य, आचार-व्यवहार तथा संस्कृति को व्यक्त करती है।

ऐसी ही अन्य खूबियों के कारण संविधान निर्माताओं ने हिंदी भाषा को राष्ट्रभाषा के रूप में चुना। संघीय स्तर पर राजभाषा के रूप में अंग्रेजी का वर्चस्व आज भी कायम है। 

साहित्य इसका महान,
जग में है पहचान।
युगों का बखान,
इसमें मिलता सारा ज्ञान।।

अंग्रेजी राज्य स्तर पर ही नहीं, बल्कि उच्च शिक्षा के स्तर पर भी छाई हुई है। भले ही हमारी सारी पढ़ाई-लिखाई और सारे कार्य अंग्रेजी में ही होते हैं, लेकिन भारत के लोगों की मूल भाषा तो हिंदी ही है।

यदि भारत में रहकर भी आपको हिंदी नहीं आती, तो यह अत्यंत लज्जा का विषय होगा।भारत में अनेक भाषाएं और बोलियां बोली जाती हैं, इसलिए हमारे देश की एक कहावत है- , “कोस-कोस पर बदले पानी और चार कोस पर वाणी ।” इसका अर्थ है, कि हमारे देश में एक कोस की दूरी पर पानी का स्वाद बदल जाता है और चार कोस पर भाषा यानी वाणी भी बदल जाती है।

जहां सारा अचरज है,
पढ़कर ग्रंथ पुराण।
लौकिक है ज्ञान इसमें,
वांचता हर सुजान।।

लेकिन इन सभी भाषाओं में सबसे अधिक बोली जाने वाली यदि कोई भाषा है, तो वह भाषा है, हिंदी भाषा।यह एक ऐसी भाषा है, जिसमें त्रुटि ना के बराबर है। आज के समय में हिंदी भाषा इंटरनेट की दुनिया में काफी तेजी से विकास कर रही है।

इंटरनेट पर लाखों वेबसाइट, ब्लॉक, ईमेल, सर्च इंजन और एस. एम. एस. आदि सभी हिंदी में सुविधा प्रदान करवा रहे हैं।

Meri Priya Bhasha Hindi Par Nibandh 200 Words

हिंदी की उन्नति के लिए किए जा सकने वाले प्रयास

  • लोगों को यह मानसिकता बदलनी चाहिए की अंग्रेजी ही आधुनिक समाज का आधार है।
  • लोगों को खासकर माता-पिता को यह सोच बदलनी चाहिए कि यदि बच्चे हिंदी मीडियम में पढ़ेंगे तो कमजोर हो जाएंगे और जीवन में कभी भी सफल नहीं हो पाएंगे।
  • लोगों को यह समझना होगा कि ज्ञान ग्रहण करने की क्षमता और एकाग्रता पर निर्भर करता है, ना की किसी शिक्षा की भाषा पर।
  • लोगों को यह पता होना चाहिए कि हिंदी हमारी मातृभाषा है।
  • अंग्रेजी की ही तरह इसका भी अत्यधिक महत्व है।
  • कहीं ऐसा ना हो कि भारत के लोग अपनी मातृभाषा को भी ढंग से बोलना ना भूल जाए।
  • सरकार को भी इस क्षेत्र में प्रयास करने चाहिए कि अंग्रेजी मीडियम में भी हिंदी को अंग्रेजी के बराबरी का स्थान मिलना चाहिए।

कानों में रस घोल दे,
हिंदी कविता गीत।
सरस प्यार के बोल से,
लेती सबको जीत।।

इंटरनेट युग में हिंदी

इंटरनेट जानकारी का एक बहुत बड़ा साधन है। लेकिन शुरुआत में इंटरनेट पर हिंदी की उपलब्धता ज्यादा नहीं थी। पिछले कुछ वर्षों में भारत और विश्व में इंटरनेट काफी तेजी से विकसित हुआ। आज के समय में हिंदी भाषा ने भी इंटरनेट पर काफी तेजी से कब्जा जमा लिया है।

वर्तमान समय में हिंदी भाषा समाचार पत्र से लेकर हिंदी ब्लॉग्स तक अपनी पहचान बना चुकी है। गूगल और विकिपीडिया काफी बड़ी वेबसाइट है, लेकिन आज यह बड़ी वेबसाइटें भी हर व्यक्ति तक हिंदी भाषा को पहुंचाने में प्रयासरत है।

हिंदी के दिन प्रतिदिन बढ़ते महत्व को समझते हुए इंटरनेट पर ट्रांसलेटर, सर्च इंजन, सॉफ्टवेयर आदि को विकसित किया गया। जिससे लोगों के लिए हिंदी भाषा को जानना और भी आसान हो जाए।

आज के समय में इंटरनेट पर हर महत्वपूर्ण जानकारी हिंदी में मिल जाती है, जिसके कारण हिंदी और भी लोकप्रिय होती जा रही है। आज हर कोने में हिंदी की पहचान कायम हो रही है।

हिंदी के पक्षधर हो,
भारत के सब लोग।
बोलचाल के संग में,
लिपि का उपयोग।।

Hindi Bhasha
Hindi Bhasha

Matrubhasha Hindi Par Nibandh 250 Words

प्रस्तावना

राष्ट्रभाषा का अर्थ होता है, राष्ट्र की भाषा। दूसरे शब्दों में कहें, तो जिस भाषा का प्रयोग देश की हर भाषा के लोग आसानी से कर सकते हैं, बोल सकते हैं और लिख सकते हैं, वही राष्ट्रभाषा कहलाती हैं। हिंदी हमारी देश की राष्ट्रभाषा है और वह हमारे देश का गुरूर है।

अगर छोड़ते अपनी भाषा,
है यह हिंदी का अपमान।
लिखे और बोले अपनी भाषा,
है यह हिंदी की शान।।

हिंदी भाषा का विकास

संपूर्ण विश्व में कुल 3000 भाषाएं बोली जाती हैं, उसमें से हिंदी भी एक भाषा है। आकृति के आधार पर हिंदी भाषा एक योगात्मक भाषा है। भारत में 4 भाषा के परिवार मिलते हैं। भारत में सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा हिंदी भाषा है, जिसे राष्ट्रभाषा का दर्जा प्राप्त है।

भारत मां के भाल पर,
जो सजी हुई बिंदी हैं।
वही भारत मां की बेटी,
वही हमारी हिंदी है।।

हिंदी भाषा के क्षेत्र

पहले समय में भारत के अंतर्गत आने वाले उत्तर भारत क्षेत्र को हिंदी भाषी माना जाता था। जिसमें बिहार, उत्तर प्रदेश मध्य प्रदेश आदि मुख्य रूप से शामिल थे।

यहां पर अधिक जनसंख्या भी थी, जिसके कारण हिंदी भाषा का विस्तार पूरे भारत में तेजी से हुआ और यह लोगों की लोकप्रिय भाषा बनती चली गई। आज के समय में यह भाषा विश्व स्तर पर सराहना बटोर रही है।

विदेशी भी इस भाषा को काफी पसंद करते हैं और वर्तमान समय में हिंदी भारत के लगभग सभी राज्य में बोली जाती है। भारत के अलावा नेपाल, दक्षिण अफ्रीका, मॉरीशस, अमेरिका, जर्मनी, न्यूजीलैंड, सिंगापुर आदि में भी लाखों की संख्या में लोग हिंदी बोलना पसंद करते हैं।

एक राष्ट्र एक भाषा हो,
एक इसकी पहचान हो।
बहुत हुआ अब तय कर लो,
हिंदी में हिंदुस्तान हो।

हिंदी के विस्तार क्षेत्र में बाधाएं

अधिक होने के बाद भी हिंदी और अंग्रेजी से पीछे हैं ऐसा इसलिए है क्योंकि लोगों का मानना है यदि अंग्रेजी को महत्व दिया तो हम भी तो देश पिछड़ जाएगा अंग्रेजी देश की अधिकतर जनता के लिए कठिन है।

इसलिए जिन्हें अंग्रेजी आती है वह आम जनता पर अपना रौब झाड़ते हैं एक यह भी कारण है कि क्षेत्रीय लोग यह सोचते हैं कि यदि हिंदी अधिक बढ़ी तो क्षेत्रीय भाषा पिछड़ जाएगी जबकि यह दोनों ही विचार गलत है।

हिंदी में कभी भी क्षेत्रीय भाषाओं को पीछे नहीं धकेला बल्कि हमेशा सभी से मेलजोल करके चली है यदि हिंदी का विकास होता है तो क्षेत्रीय भाषाओं का भी विकास होगा।

तू-तू, मैं-मैं हो रही,
फोन-फोन पर आज।
कुछ भी हो हिंदी का,
हिंदी का जीभ-जीभ पर राज।।

निष्कर्ष

भारत की भूमि पर हम सभी ने जन्म लिया है। हमारी मातृभाषा से प्रेम करना और इसके विकास पर बल देना हमारा पहला कर्तव्य है। यदि हमें समुचित रूप से हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाना है, तो इसे दिल से अपनाना होगा।

Hindi Bhasha Par Nibandh Hindi Me 300 Words

प्रस्तावना

हमारी राष्ट्रीय भाषा हिंदी ने हमें संपूर्ण विश्व में एक नई पहचान दिलाई है। हिंदी के विकास व विस्तार को बढ़ावा देने के के लिए हर वर्ष भारत में 14 सितंबर को हिंदी दिवस मनाया जाता है। यह विश्व में बोली जाने वाली प्रमुख भाषाओं में से एक है। हिन्दी हमारे देश का स्वाभिमान है, इसलिए हमें सदैव इस पर गर्व होना चाहिए।

राजभाषा की वर्तमान स्थिति

वर्तमान समय में हिंदी की स्थिति अत्यंत दयनीय है। भले ही हिंदी राष्ट्रभाषा है, मगर आज के समय में योग उसे केवल नाम के लिए मातृभाषा मानते हैं। असल में तो कोई भी हिंदी बोलना नहीं चाहता।

यदि कोई कभी कोई खुद को स्मार्ट व आकर्षक दिखाना चाहता है या फिर किसी व्यक्ति को खुद की ओर आकर्षित करना चाहता है, तो वह उसके सामने अंग्रेजी बोलता हैं।

हिंदी बोलने में उसे शर्म का अनुभव होता है, यही स्थिति है आज के समय में हिंदी भाषा की। लोग हिंदी मीडियम स्कूलों से दूर भागते हैं और अपने बच्चों का एडमिशन भी अंग्रेजी मीडियम स्कूल में ही करवाना पसंद करते हैं।

सभी प्रत्येक वर्ष 14 सितंबर को हिंदी भाषा को बढ़ावा देने के लिए हिंदी दिवस मनाते हैं, फिर भी जितनी निष्ठा से हिंदी को अपनाने का कार्य करना चाहिए, हम वह नहीं करते।

अगर हर व्यक्ति या सोच ले कि हमें हमारी मातृभाषा से प्रिय अन्य कोई भाषा नहीं, तो निश्चित ही हिंदी की बिगड़ती स्थिति को सुधारा जा सकता है। 

हिंदी हमारी राष्ट्रभाषा है,
इसका करो विकास।
हिंदी में सब काम करो,
ऐसा करो सब प्रयास।।

हिंदी भाषा पर भाषण

  • जैसा कि आप सभी जानते हैं कि हिंदी हमारी राष्ट्रीय भाषा है।
  • उत्तर भारत में विशेषकर इस भाषा का प्रयोग होता है, हिंदी भाषा हमारे देश में सामान्य संचार की भी भाषा है।
  • दक्षिण भारतीय लोग ठीक से हिंदी को समझने में असमर्थ थे, इसलिए उन्होंने अंग्रेजी को सहयोगी राष्ट्रीय भाषा के रूप में मांगा।
  • हिंदी भाषा उत्तर की भाषा है।
  • 1947 ईस्वी में स्वतंत्रता प्राप्ति के तुरंत बाद संविधान सभा द्वारा अपनाया गया।
  • लेकिन भारत में अभी भी लाखों लोग ऐसे हैं जो हिंदी भाषा को ठीक से नहीं जानते।
  • ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि इसमें कुछ संस्कृत के शब्द भी शामिल कर दिए गए, जिससे यह कठिन हो गई।
  • हमें हिंदी भाषा को सरल बनाना होगा और इस कठिन संस्कृत संस्करणों से मुक्त करना होगा।
  • ताकि सभी लोग इसे आसानी से समझ व पढ़ सकें।

हिंदी पुरातन भाषा है,
जिसमें भाव अपार।
सहज शब्द, सरस इतनी,
की सीख रहा संसार।।

हिंदी राष्ट्रभाषा के रूप में

भारत एक विशाल देश है और यहां विभिन्न प्रांतों में विभिन्न भाषाएं बोली जाती हैं, उनमें से मातृभाषा किसे बनाया जाए यह प्रश्न सबसे बड़ा था। 

1947 की स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात विचारवान संविधान निर्माताओं ने इस विषय में गंभीर विचार किया और वह इस निर्णय पर पहुंचे कि हिंदी ही एक ऐसी भाषा है, जो सर्वथा राष्ट्रभाषा के महत्वपूर्ण पद पर सुशोभित होने के काबिल है।

कुछ लोगों का यह प्रश्न था कि हिंदी भाषा को ही राष्ट्रभाषा क्यों बनाया जाए? तब कुछ कारण सामने है, कि यह भारत के अधिकतर क्षेत्र में बोली जाती है और इस भाषा को सीखना व पढ़ना काफी आसान है। ऐसे ही और भी कारण थे जिनकी वजह से हिंदी को राष्ट्रभाषा स्वीकार आ गया।

साहित्य इसका महान,
जग में है पहचान।
युगों का बखान,
इसमें मिलता सारा ज्ञान।।

निष्कर्ष

अब वह समय आ गया है, जब भारत को अपने आत्मगौरव का ध्यान करना शुरू करना होगा। भाषा की दृष्टि से भी हमें इस विदेशीपन को दूर करना होगा। हिंदी हमारी मातृभाषा है और उसका सम्मान करना हमारा कर्तव्य है।

अब हिंदी विदेशों में भी जानी जाती है, जिससे हमारे देश का गर्व और ज्यादा बढ़ गया हैं।

Hindi Hamari Rashtrabhasha Par Nibandh 400 Words

प्रस्तावना

वैसे तो संसार में अंग्रेजी भाषा सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषा है, परंतु अब हिंदी ने भी संसार में अपनी एक नई पहचान बना ली है। आज यदि कोई भाषा ऐसी है जो अंग्रेजी के बाद पूरे विश्व में लोगों को पसंद है, तो वह भाषा है हिंदी।

हिंदी भाषा भारत की राष्ट्रभाषा है। इस भाषा का भी अपना एक इतिहास है, राष्ट्रभाषा बनने के लिए इसमें भी काफी संघर्ष किया। हिन्दी भाषा की अपनी कुछ खासियत है। इतनी सम्मानित भाषा होने पर भी आज यह खतरे में है और अब अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रही है। 

अब तो मिलना चाहिए,
हिंदी को सम्मान।
पूर्ण राष्ट्रभाषा बने,
ऐसा लो संज्ञान।।

हिंदी को राजभाषा बनाने के लिए संघर्ष व इतिहास

महात्मा गांधी और दयानंद सरस्वती जैसे महान लोगों ने हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने के लिए बहुत सारे आंदोलन किए। हिंदी भाषा को राष्ट्रभाषा बनाने के लिए पहला प्रयास महात्मा गांधी जी ने हिंदी साहित्य सम्मेलन (1918) में किया था।

वहां उन्होंने कहा था, हिंदी जनमानस की भाषा है। महात्मा गांधी के इस कथन ने लोगों की विचारधारा पर गहरा प्रभाव डाला और काफी विचार-विमर्श के बाद सन 1949 में 14 सितंबर को इसे राजभाषा बना दिया गया।

जब 26 जनवरी 1950 को हमारा संविधान लागू हुआ तो उस संविधान के अनुसार, हिंदी को राजभाषा का दर्जा दिया गया। संविधान के भाग 17 के अध्याय की धारा 343(1) मे निहित है। संविधान में यह भी वर्णित है, कि राष्ट्र की राजभाषा हिंदी और देवनागरी लिपि है।

हिंदी भाषा पर कविता

हिंदी से यह हिंद बना है,
हिंदी से यह हिंदुस्तान।
हिंदी से तुम प्यार करो तो,
बढ़ जाएगी इसकी शान।
हिंदी भाषा सबसे न्यारी,

हिंदी भाषा सबसे प्यारी।
सह ली बहुत उपेक्षा इसने,
अब तो रख लो इसका मान।
हिंदी से यह हिंद बना है,

हिंदी से यह हिंदुस्तान।
आजाद हुए थे इसके बल पर,
शान मिली थी इसके बल पर।
बहुत हो गया बहुत सुन लिया,

अब ना हो इसका अपमान।
हिंदी से यह हिंद बना है,

हिंदी से यह हिंदुस्तान।

हिंदी के ऊपर मंडराता खतरा

वर्तमान समय में हिंदी के ऊपर खतरा बढ़ता जा रहा है। हिंदी हमारी राष्ट्रभाषा है, फिर भी ज्यादातर लोग हिंदी बोलने में शर्म महसूस करते हैं। लोग अंग्रेजी के पीछे इस कदर भाग रहे हैं, कि हिंदी का अस्तित्व खत्म हो रहा है।

चाणक्य ने एक बात कही थी कि, “कोई भी राष्ट्र तब तक पराजित नहीं होता, जब तक वह अपनी संस्कृति व मूल्यों की रक्षा कर पाता है।” लेकिन आज तो भारतवासी अपनी मातृभाषा बोलने मात्र से कतराते हैं और अंग्रेजी बोलने में उन्हें गर्व महसूस होता है।

आज सभी लोग अपनी सभ्यता व संस्कृति को छोड़कर अंग्रेजी तौर-तरीकों को अपना रहे हैं। हमारे देश के ही लोग आज के समय में अपने बच्चों को अंग्रेजी माध्यम से शिक्षा दिलवाना चाहते हैं, उन्हें अपने बच्चों को हिंदी माध्यम में पढ़ाने में संकोच होता है।

लोगों चाहते हैं कि भले ही हिंदी कम आए पर अंग्रेजी में उनको मास्टर डिग्री ही चाहिए। इसी मानसिकता ने भारत में हिंदी की स्थिति को बिगाड़ कर रख दिया है और इसके ऊपर संकट मंडरा रहा है।

हालांकि अब लोग इस विषय को गंभीरता से ले रहे हैं और हिंदी का महत्व भी समझने लगे हैं, जो कि हमारे देश के लिए अच्छा संकेत है। हम चाहे तो इसके विकास के लिए और बेहतर प्रयास भी कर सकते हैं। 

हिंदी रस रसना चखे,
करें दिलों पर राज।
मधुर-मधुर से भाव से,
हिंदी है सरताज।।

हिंदी भाषा की विशेषताएं

हिंदी भाषा की निम्नलिखित विशेषताएं हैं।-

  1. हिंदी भाषा में अन्य भाषाओं के शब्द भी समाहित है।
  2. कम समय में ही इस भाषा को लिखना और पढ़ना सीखा जा सकता है।
  3. इस भाषा को संस्कृत की बेटी भी कहा जाता है।
  4. इस भाषा को समझना अत्यंत ही सरल है।
  5. इस भाषा का साहित्य क्षेत्र काफी विस्तृत है।
  6. इस भाषा की सबसे बड़ी विशेषता यह है, कि इसे जैसे लिखा जाता है वैसे ही पढ़ा भी जाता है।

हिंदी भाषा पर भाषण

  • आदरणीय अतिथि गण एवं प्यारे दोस्तों, आप सभी को मेरी ओर से नमस्कार।
  • आज मैं आपके सामने हिंदी भाषा के महत्व के बारे में कुछ शब्द कहने के लिए उपस्थित हूं और यह आशा करती हूं, कि मेरी द्वारा बताई गई बातें आपके लिए लाभकारी सिद्ध हो।
  • जैसा कि आप सभी जानते हैं, कि वर्तमान समय में भारत मे हिंदी भाषा की क्या स्थिति है।
  • हिंदी को राष्ट्रभाषा का अधिकार तो प्राप्त है, फिर भी लोगों द्वारा उसे तिरस्कृत किया जाता है।
  • लोगों के मन में यह धारणा बैठ गई हैं कि यदि उन्नति, स्टैंडर्ड और तरक्की चाहिए, तो हमें अंग्रेजी भाषा को अपनाना होगा।
  • अंग्रेजी बोलने वाले लोगों को सभी ज्यादा मॉडर्न मानते हैं और जो लोग हिंदी बोलते हैं अक्सर उन्हें अनपढ़ कहकर बुलाया जाता है।
  • भारत के लोगों की यही धारणा हमारी राष्ट्रभाषा पर खतरा बनती जा रही हैं और धीरे-धीरे करके हिंदी का पतन होने लगा है।
  • भारत में अंग्रेजी को भी हिंदी के समान ही दर्जा दिया गया था, इसी के परिणाम स्वरूप आज हिंदी के उत्थान के लिए हम हर साल 10 सितंबर को हिंदी दिवस मनाते हैं।
  • साथ ही साथ हिंदी सप्ताह का भी आयोजन होता है, जिसमें निबंध प्रतियोगिता, भाषण, काव्य-गोष्ठी, वाद-विवाद आदि प्रतियोगिताओं का आयोजन होता है।
  • ऐसा करने से लोगों में एक बार फिर से हिंदी के प्रति रुचि बढ़ने लगती है और लोगों में हिंदी के विकास की भावना जागृत होती है। 

नमन फेसबुक को करूं,
नमन फोन श्रीमान।
जिसके कारण बढ़ गया,
जन में हिंदी मान।।

निष्कर्ष

हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने में जिन लोगों ने संघर्ष किया। हमें उनका सम्मान करना चाहिए और अपनी राष्ट्रभाषा की गरिमा को बरकरार रखना चाहिए। आज हिंदी हमारे कारण संकट में है।

इसलिए हमारा फर्ज है, कि अब उसके विकास में हम योगदान दें और पूरे विश्व में इसका प्रचार-प्रसार करें। क्योंकि हम सभी हिंदी भाषी हैं, इसलिए हमें इस भाषा पर गर्व होना चाहिए।

Rashtra Bhasha Par Nibandh 500 Words

प्रस्तावना

सभी देशों कि अपनी एक राष्ट्रीय भाषा होती है, जो कि उस देश का गौरव व सम्मान होती है। किसी भी देश की पहचान उसकी भाषा व संस्कृति से होती है। भाषा एक ऐसी कड़ी है जिसके द्वारा लोग विचारों का आदान-प्रदान आसानी से कर पाते हैं।

भारत में जो भाषा सबसे अधिक बोली जाती है, वह हिंदी भाषा है। हिंदी भाषा को भारतीय राष्ट्रभाषा का दर्जा प्राप्त है, वही विश्व में दूसरा स्थान प्राप्त है। हिंदी ना केवल लोगों को एक दूसरे से जोड़े रखने का भी काम करती हैं बल्कि विदेश में भी हिंदी भाषा का अध्ययन किया जाता है।

विदेशों से लोग भारत हिंदी सीखने आते हैं। हिंदी में संस्कृत भाषा के काफी शब्दों का समावेश है। हिंदी एक प्रकार से संस्कृत भाषा का ही सरलतम रूप है।

हिंदी का परचम उड़ा,
कुछ गगन की ओर।
हिंदी की बिंदी सजी,
आभा दिनकर भोर।।

हिंदी के विकास के उपाय

हिंदी भाषा के विकास के लिए हम निम्नलिखित उपायों को अपना सकते हैं। जैसे-

  • अगर केंद्रीय सरकार के कार्यालयों में यदि नियुक्त होना चाहता हैं, तो उसे हिंदी भाषा का ज्ञान होना आवश्यक है।
  • जिले की अदालतों में सारी कार्यवाही हिंदी भाषा में करना अनिवार्य करवा देना चाहिए, ताकि हिंदी की आवश्यकता को लोगों को समझ आएं।
  • महाविद्यालयों में शिक्षा का माध्यम हिंदी में कर देना चाहिए।
  • उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान तथा दिल्ली आदि में परस्पर राजकीय पत्र व्यवहार हिंदी में ही प्रारंभ होना चाहिए।
  • सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण कार्य हिंदी भाषी लोगों और हिंदी प्रेमियों का है, क्योंकि अपने दैनिक जीवन में स्थान नहीं देंगे तब तक हिंदी के महत्व को लोग समझ नहीं पाएंगे।

हिंदी भाषा पर कविता

हिंदी हमारी आन है, हिंदी हमारी शान है।
हिंदी हमारी चेतना, वाणी का शुभ वरदान है।
हिंदी हमारी वर्तनी, हिंदी हमारा व्याकरण।
हिंदी हमारी संस्कृति, हिंदी हमारा आचरण।
हिंदी हमारी वेदना, हिंदी हमारा गान।
हिंदी हमारी आत्मा है, भावना का साज़ है।
हिंदी हमारे देश की, हर तोतली आवाज है।
हिंदी हमारी अस्मिता, हिंदी हमारा मान है।
हिंदी निराला, प्रेमचंद की, लेखनी का गान है।
हिंदी में तुलसी, सूर, मीरा, जायसी की शान है।
हिंदी हमारा शब्द, स्वर-व्यंजन, अमिट पहचान है।
हिंदी हमारी चेतना, वाणी का शुभ वरदान है।

स्वतंत्रता से पूर्व हिंदी की स्थिति

ब्रिटिश शासन से पहले हिंदी संपर्क भाषा के रूप में थी, लेकिन क्योंकि तब मुगल शासन था, इसलिए राजकाज की भाषा फारसी  या फिर उर्दू थी। फिर भी निम्न स्तर पर हिंदी का उपयोग हिसाब-किताब के लिए किया जाता था।

सन् 1830 तक ईस्ट इंडिया कंपनी ने फारसी और हिंदी को राजभाषा के रूप में यथावत रखा और 20 नवंबर 1831 को कानून बनाकर बंगाल, उड़िया, गुजराती, असमिया आदि को तो संबंधित प्रांतों में राजभाषा बना दिया गया।

किंतु हिंदी प्रदेशों में फारसी के स्थान पर हिंदी के बजाय उर्दू को राजभाषा बना दिया गया, जिसके कारण लोगों ने आंदोलन छेड़ा था ताकि उर्दू के बजाय देवनागरी लिपि में हिंदी को राजभाषा बनाया जाए। 

अट्ठारह सौ सत्तावन (1857) ईसवी के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के बाद हिंदी को संपर्क भाषा वह राष्ट्रभाषा के रूप में बराबर स्थान मिला। हिंदी को राष्ट्रभाषा का दर्जा देने के लिए बीसवीं शताब्दी के मध्य में आंदोलन चला, किंतु भाषाई राजनीति के कारण भारतीय संविधान में हिंदी को राजभाषा का दर्जा मिला।

हिंदी सीमा तोड़ कर,
चली विश्व के द्वार।
वैज्ञानिक आधार पर,
प्रसिद्धि मिली पार।।

हिंदी भाषा का महत्व

भारत में धीरे-धीरे करके हिंदी भाषा का प्रचलन बढ़ रहा है और इसने राजभाषा से राष्ट्रभाषा का रूप ले लिया। आज के समय में हमारी राष्ट्रभाषा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी प्रसिद्धि हासिल है।

हिंदी भाषा विदेशों में भी अत्याधिक पसंद की जाती है और इस भाषा को विदेशों में भी प्रसिद्धि प्राप्त करने का यही कारण है कि यह भाषा हमारे देश की संस्कृति व संस्कारों का प्रतिबिंब है। 

एक हिंदुस्तानी होने के नाते यह हमारा कर्तव्य है कि हमें कम से कम अपनी राष्ट्रभाषा तो आनी ही चाहिए, साथ ही साथ इसका सम्मान करना इसकी प्रतिष्ठा को बनाए रखना भी हमे आना चाहिए।

आज के समय में तो दुनिया के कोने-कोने से लोग भारत हिंदी भाषा को सीखने के लिए आ रहे हैं, तो फिर हम तो भारतीय हैं। जो भाषा हमारे गर्व का कारण है,  हमें उस भाषा को तुच्छ नहीं समझना चाहिए। 

हिंदी अपनी आन है,
भारत मां की शान।
इसके ही सम्मान से,
बड़े हमारा मान।।

हिंदी भाषा पर भाषण

  • आदरणीय अतिथिगण एवं मेरे प्यारे दोस्तों, आप सभी को मेरा नमस्कार।
  • आज मैं आप सभी को हिंदी भाषा से संबंधित कुछ रोचक तथ्य, इसका महत्व इसके राष्ट्रभाषा बनने तक के सफर के बारे में कुछ बातें बताऊंगी।
  • जैसा कि आप सभी जानते हैं कि हमारे देश में बहुत सारी भाषाएं बोली जाती हैं।
  • मगर हर देश की एक राष्ट्रभाषा होती है, जिससे उस देश को पहचाना जाता है।
  • वैसे ही भारत में भी एक ऐसी भाषा है, जिसे राष्ट्रभाषा का दर्जा प्रदान किया गया है और वह भाषा है हिंदी। यह विश्व की दूसरी बड़ी भाषा है और या भारत में सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा है।
  • हमारे भारतीय संविधान ने 14 सितंबर 1949 को भारत की राजभाषा के रूप में हिंदी भाषा को स्वीकारा।यह भाषा देवनागरी लिपि में लिखी गई है।
  • हिंदी भाषा की अनेक विशेषताओं के कारण ही इसे राष्ट्रभाषा बनने का सम्मान प्राप्त हुआ।
  • इस भाषा की सबसे बड़ी विशेषता यह है, कि इसे जैसा लिखा जाता है वैसे ही पढ़ा भी जाता है।
  • हमारे देश में हिंदी भाषा का सबसे ज्यादा महत्व है।
  • यह भारत की प्रमुख भाषा है।
  • यह भाषा सभी देशवासियों को एक सूत्र में बांधने का कार्य करती है।
  • हिंदी भाषा को समझना व सीखना अत्यंत ही सरल है और इसके साहित्य का क्षेत्र भी काफी विशाल है।
  • हिंदी भाषा के गुणों की कोई सीमा नहीं है।
  • यह भाषा हमारे देश का सम्मान है और हमें हमेशा इसकी प्रतिष्ठा व मान सम्मान का ख्याल रखना चाहिए।

मीठा झरना सा झरे,
बहता रस अनमोल।
आनंदी टब सा भरे,
हिंदी के मधु बोल।।

निष्कर्ष

हिंदी हमारी शान है और इसकी विशेषताएं भी अनगिनत है। इस भाषा का महत्व ना केवल भारत बल्कि विदेशों में भी देखने को मिलता है। इतनी गुणवान होने के बाद भी आज के समय में यह अपने ही देश में अपने सम्मान को होने की कगार पर है।

यदि हम चाहते हैं कि हिंदी सदैव राजभाषा के रूप में विराजमान रहे, तो हमें इसके प्रचार-प्रसार को बढ़ावा देना होगा और सभी महत्वपूर्ण कार्यों में हिंदी को प्राथमिकता देनी होगी। 

Leave a Comment