Jal Hi Jeevan Hai Essay In Hindi 2020 (“जल ही जीवन है”) Best Essay On Water In Hindi

Jal Hi Jeevan Hai Essay In Hindi (“जल ही जीवन है”) Essay On Water In Hindi: आज हम पढ़ने वाले है “Jal Hi Jeevan Hai” Essay In Hindi. इस हिंदी निबंध को अलग अलग शब्द सीमा के आधार पर लिखा गया हैं। आप इस Essay On Water In Hindi को अंत तक पढ़ें। ताकि आपको “जल” के बारे में अच्छी-अच्छी बातें सीखने को मिले।

Jal Hi Jeevan Hai Nibandh
Jal Hi Jeevan Hai Nibandh

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आज हम “जल ही जीवन है” पढ़ेंगे। जो की अलग अलग शब्द सीमा के आधार पर लिखे गए हैं। आप Essay on Water in Hindi को ध्यान से और मन लगाकर पढ़ें और समझें।

Water Is Life Essay In Hindi को निम्न शब्द सीमा के आधार पर लिखा गया है-

  1. जल ही जीवन है निबंध 50 शब्दों में 
  2. Jal Hi Jeevan Hain Nibandh 60 Shabd
  3. जल ही जीवन है निबंध 80 शब्द 
  4. Jal Hi Jeevan Hai In Hindi 100 Shabd
  5. Jal Hi Jeevan Hai Par Nibandh 200 शब्द
  6. Jal Hi Jeevan Hai Essay 250 Words
  7. Water Is Life Essay In Hindi 300 Shabd
  8. जल ही जीवन है पर निबंध 400 शब्दों में 
  9. Essay On Jal Hi Jeevan Hai In Hindi 500 Shabd
  10. जल ही जीवन है हिंदी निबंध 600 शब्द

आइये!

Jal Hi Jeevan Hai Essay In Hindi को अलग अलग शब्द सीमाओं के आधार पर पढ़ें।

नोट- यहां पर दिया गया Jal Hi Jeevan Hai Par Nibandh कक्षा(For Class) 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11, 12,(विद्यालय में पढ़ने वाले) विद्यार्थियों के साथ-साथ कॉलेज के विद्यार्थियों के लिए भी मान्य हैं।

Jal Hi Jeevan Hai Essay In Hindi (50 शब्दों में)

Jal Hi Jeevan Hai Nibandh 50 Shabd
Jal Hi Jeevan Hai Nibandh 50 Shabd

हमारे शरीर में 70% हिस्सा जल होता है। अतः हम जल के बिना अपने जीवन की कल्पना भी नहीं कर सकते, इसीलिए ‘जल को जीवन’ कहा जाता है।

हमें जल के महत्व को समझना चाहिए और इसका सदुपयोग तथा संरक्षण करना चाहिए। नहीं तो हमें इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।

Jal Hi Jeevan Hain Nibandh 60 Shabd

Jal Hi Jeevan Hai Nibandh 60 Shabd
Jal Hi Jeevan Hai Nibandh 60 Shabd

यदि हमारे जीवन में भोजन से भी अधिक महत्वपूर्ण कुछ है तो वह है ‘जल’ क्योंकि भोजन के बिना हम 7 दिन तक जिंदा रह सकते हैं किंतु जल के बिना हम मुश्किल से 2 से 3 दिन ही जिंदा रह सकते हैं।

बिना जल के जीवन कि कल्पना भी नहीं की जा सकती।

जल ही जीवन है निबंध 80 शब्द

Jal Hi Jeevan Hai Nibandh 80 Shabd
Jal Hi Jeevan Hai Nibandh 80 Shabd

यदि मात्रा के हिसाब से देखा जाए तो हमारे शरीर में सबसे महत्वपूर्ण तत्व होता है जल क्योंकि यह हमारे शरीर में लगभग 70% होता है।

जल भोजन से भी अधिक महत्वपूर्ण है क्योंकि भोजन के बिना हम 7 से 10 दिन तक जिंदा रह सकते हैं, किंतु जल के बिना हम 3 दिन से अधिक जिंदा नहीं रह सकते और भोजन को पचाने के लिए भी हमें जल अति आवश्यक है। इसीलिए जल को जीवन की संज्ञा दी गई है।

Jal Hi Jeevan Hai In Hindi 100 Shabd

Jal Hi Jeevan Hai Nibandh 100 Shabd
Jal Hi Jeevan Hai Nibandh 100 Shabd

जल पृथ्वी पर उपलब्ध तत्वों में एक महत्वपूर्ण तत्व है जिसके होने से जीवन संभव है, नहीं तो पृथ्वी पर जीवन का नामोनिशान नहीं होता। जल के बिना किसी भी प्रकार के जीवन की संभावना न के बराबर है।

‘जल का महत्व’ पृथ्वी पर जीवन के शुरुआत से है। प्राचीन समय में जब मानव सभ्यता अपने शुरुआती दौर में थी, तब लोग जल संसाधनों के पास ही अपनी बस्ती बनाते थे।

भारत की भी बात की जाए तो भारत की प्राचीन तथा प्रसिद्ध ‘सिंधु घाटी सभ्यता’ भी ‘सिंधु नदी’ के पास ही थी और इसीलिए उसे सिंधु घाटी सभ्यता कहा जाता है।

Jal Hi Jeevan Hai Essay 200 Words

Jal Hi Jeevan Hai Nibandh 200 Shabd
Jal Hi Jeevan Hai Nibandh 200 Shabd

कहा जाता है कि आप भोजन के बिना 21 दिन तक जिंदा रह सकते हैं जल के बिना 100 घंटे, यानी लगभग तीन से चार दिन और वायु के बिना 5 मिनट।

अर्थात हमारे जिंदा रहने के लिए वायु के बाद जल सर्वाधिक उपयोगी वस्तु है। जल हमारे शरीर का लगभग 70% होता है। और यह हमारे शरीर को विभिन्न तरीकों से काम करने में मदद करता है और

शरीर के तापमान को संतुलित रखने में भी मदद करता है तथा भोजन के पचाने में भी मदद करता है। हमारे जोड़ों को चिकनाई प्रदान करता है तथा हमारे शरीर से बेकार पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करता है।

जल का महत्व: जल अनेक तरह से महत्वपूर्ण है। यह पृथ्वी के तापमान को नियंत्रित करने में मदद करता है और जल बहुत सारी चीजों का घर भी है।

जितना जीवन सतह पर है उससे कहीं अधिक जीवन समुद्र में है। दुनिया का सबसे बड़ा जीव ‘व्हेल मछली’ भी जल में ही रहती है।

अतः यदि जल न होगा तो इन सभी चीजों का सबसे पहले जीवन संकट में पड़ जाएगा और यह सब सबसे पहले पृथ्वी पर से समाप्त हो जाएंगे।

इसलिए हमें इसकी महत्ता को समझना चाहिए और प्रकृति के इस अति महत्वपूर्ण उपहार का हमें सम्मान करना चाहिए।

Jal Hi Jeevan Hai Par Nibandh 250 शब्द

Jal Hi Jeevan Hai Nibandh 250 Shabd
Jal Hi Jeevan Hai Nibandh 250 Shabd

‘जल को जीवन की संज्ञा दी गई है’ और यह कोई अतिशयोक्ति नहीं है बल्कि इसे इसकी उपयोगिता के आधार पर यह संज्ञा दी गई है।

पृथ्वी पर मौजूद जितने भी प्राणी हैं चाहे वह मनुष्य हो या पशु या फिर कोई भी जानवर सभी के जीवित रहने के लिए जल की आवश्यकता होती है।

जल नहीं होगा तो हमें भोजन भी प्राप्त नहीं होगा।

जल की उपयोगिता:

जल हमारे लिए उपयोगी हैं इसमें कोई और राय नहीं है। यह हमारे अस्तित्व के लिए जरूरी तो है ही, साथ-ही-साथ हम सुबह उठने से लेकर रात में सोने तक इसका प्रयोग करते हैं।

अब तो इसकी महत्ता और बढ़ गई है क्योंकि हम इससे बिजली उत्पादन भी करते हैं जो कि ऊर्जा का एक अक्षय स्रोत है।

जल से ही सभी प्राणियों को भोजन प्राप्त होता है और जल कई प्राणियों के लिए घर भी है।

जल संचय:

यू कहने को तो पृथ्वी के 70% हिस्से में जल भरा है किंतु यह आश्चर्यजनक बात है कि उसमें से बहुत ही कम भाग हमारे उपयोग के लायक़ है। उसमें भी जो उपयोग के लायक़ जल है उसका बड़ा हिस्सा बर्फ़ के रूप में जमा हुआ है।

अर्थात हमारे पास बहुत ही कम मात्रा में जल उपलब्ध है। फिर भी हम देखते हैं कि जल की भारी मात्रा में बर्बादी होती हैं। क्योंकि लोगों में या तो जानकारी का अभाव है या वह इसे नजरअंदाज कर रहे हैं।

यह लापरवाही हमें भारी पड़ सकती है। हमें ‘जल संचय’ व संरक्षण करना चाहिए नहीं तो हमारा अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा।

Water Is Life Essay In Hindi 300 Shabd

Jal Hi Jeevan Hai Nibandh 300 Shabd
Jal Hi Jeevan Hai Nibandh 300 Shabd

जल ही जीवन है, यदि ऐसा कहा जाए तो इसमें कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। विश्व में जितने भी प्रकार के जीव जंतु है सबके लिए जल अमृत के समान है।

पृथ्वी के 70% हिस्से पर जल है और पृथ्वी पर सभी जीव जंतुओं का एक बड़ा हिस्सा जल में भी निवास करता है, उन सभी जीवों के लिए जल न सिर्फ पीने के लिए उपयोगी है बल्कि जल उनका घर भी है।

इसलिए उनके लिए तो जल और भी अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है। अगर उनको जल से बाहर निकाल दिया जाए तो वे तुरंत सभी मर जाएंगे। क्योंकि उनके शरीर की बनावट जल में रहने के लिए ही बनी हैं हवा में नहीं।

नारी जीवन के लिए तीन सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकताएं हैं। भोजन, जल, तथा वायु। इनमें से कोई एक भी नहीं रहेगा तो हम जीवित नहीं रहेंगे।

किंतु इसमें भी जल का महत्व बाकी दोनों से अधिक है, यदि जल नहीं होगा तो भोजन होने की संभावना भी ना के बराबर है क्योंकि जल के बिना हमारा भोजन चक्र ही समाप्त हो जाएगा। ना पेड़-पौधे होंगे और ना कोई जानवर।

मानव इतिहास की भी यदि बात की जाए तो यह पता चलता है कि मानव वही अपना बसेरा बनाता था जहां से जल संसाधन नज़दीक होते थे। हमारे पूर्वज जल के महत्व को समझते थे।

आज भी यदि देखा जाए तो दुनिया के लगभग जितने भी बड़े-बड़े शहर हैं, वह सब किसी न किसी नदी के आसपास बसे हुए हैं।

आज जल की बर्बादी हो रही है और हमें इस बर्बादी को रोकना होगा नहीं तो हमारा अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा और साथ-ही-साथ हम बाकी जीवों के अस्तित्व को भी खतरे में डाल देंगे।

दुनिया भर की सरकारों को इसके प्रति जागरूक होना होगा तथा इसके रोकथाम के लिए सार्थक कदम उठाने होंगे लोगों को जागरुक करना होगा व कुछ कठोर नियम बनाने होंगे ताकि जल की बर्बादी को रोका जा सके।

जल ही जीवन है पर निबंध 400 शब्दों में

Jal Hi Jeevan Hai Nibandh 400 Shabd
Jal Hi Jeevan Hai Nibandh 400 Shabd

जल का महत्व कौन नहीं जानता हम सब के लिए ‘जल जीवन के समान है’। चाहे जानवर हो या मनुष्य या फिर पेड़ पौधे हम सबके लिए जल बराबर मात्रा में यानी कि जीवन के अस्तित्व के लिए आवश्यक है।

जलीय जीव की बात की जाए तब तो यह और भी अधिक आवश्यक हो जाता है। जल इन चीजों के लिए न सिर्फ पीने के लिए आवश्यक है बल्कि यह इन जलीय जीवों का घर भी है तथा वे इस में सांस भी लेते हैं।

जल की उपयोगिता:

जल कितना उपयोगी है। यह किसी को बताने की आवश्यकता नहीं है। हम सुबह उठने से लेकर शाम को सोने तक जल का उपयोग करते हैं।

हम इसे घर से लेकर के खेतों में प्रयोग करते हैं, सड़क बनाने में प्रयोग करते हैं, बड़ी-बड़ी फैक्ट्रियों में प्रयोग करते हैं।

किंतु सबसे महत्वपूर्ण उपयोग है पीने का तथा फसलों की सिंचाई का, क्योंकि इन दोनों के बिना हमारा अस्तित्व नहीं रहेगा।

हम न तो खाने के बिना रह सकते हैं और ना ही पानी पीने के बिना, और भोजन का उत्पादन बिना पानी के नहीं हो सकता।

अतः यह हमारे अस्तित्व के लिए बहुत ही उपयोगी है।

जल का दुरुपयोग:

जल जो कि हमारे लिए इतना उपयोगी है लेकिन इसके प्रति, इसके संरक्षण के प्रति हमारी जो उदासीनता है वह बहुत ही घातक है।

यह दुर्भाग्य है हमारा कि हम इसका सदुपयोग करने के बजाय इसका दुरुपयोग कर रहे हैं । एक आंकड़े के अनुसार हमारे घरों में 65% जल यूं ही बह जाता है।

खेतों में आवश्यकता से अधिक जल का उपयोग किया जाता है, उसका कोई उपयोग नहीं हो पाता। हमें इसके प्रति जागरूक होना चाहिए तथा सोच-समझ करके इसका उपयोग करना चाहिए।

जल का संरक्षण:

आज पूरा विश्व हमारी लापरवाही के कारण जल संकट से जूझ रहा है, वातावरण तबाह हो रहा है लोग व पशु-पक्षी मर रहे हैं।

कहीं सुखा है तो कहीं बाढ़। बारिश समय पर नहीं हो रही है या फिर हो ही नहीं रही है और कहीं तो इतनी अधिक हो रही है कि लोगों को घर छोड़कर के भागना पड़ रहा है।

अतः अब यह आवश्यक हो जाता है कि हम जागरूक हों तथा औरों को भी जागरूक करें और जल संरक्षण के लिए सार्थक प्रयास करें।

इसमें सरकारों को भी आगे आना पड़ेगा, लोगों को जागरूक करना होगा तथा इसके संरक्षण लिए कुछ कड़े नियम भी बनाने होंगे।

Essay On Jal Hi Jeevan Hai In Hindi 500 Shabd

Jal Hi Jeevan Hai Nibandh 500 Shabd
Jal Hi Jeevan Hai Nibandh 500 Shabd

दुनिया के लगभग 70 प्रतिशत हिस्से पर पानी है और सिर्फ 30 प्रतिशत पर ही सारे जंगल, पहाड़, जानवर, मानव है।

दुनिया में जितना जल है, उसका 97 प्रतिशत खारा है अर्थात सिर्फ 3 प्रतिशत मीठा जल यानि पीने योग्य जल है, उस 3 प्रतिशत में भी 2 प्रतिशत जल हिमनदों में बर्फ के रूप में जमा हुआ है।

यानि दुनिया के 30 प्रतिशत हिस्से पर निवास कर रहे जीवों के पास सिर्फ 1 प्रतिशत उपयोग के लायक जल है। जबकि ये इतना उपयोगी है कि जीवन और मरण का निर्णय कर सकता है।

जल के बिना पृथ्वी से जीवन का अस्तित्व समाप्त हो सकता है।

जल ही जीवन है:

‘जल ही जीवन है’ यह एक कहावत मात्र नहीं है बल्कि ये यथार्थ है। क्योंकि यदि हम ध्यान से देखें तो समझ में आएगा कि हमारा जीवन कहीं न कहीं जल के चारों ओर ही चक्कर लगाता है।

प्रत्येक जीव के जिन्दा रहने के लिए 3 मूलभूल आवश्यकताएं हैं भोजन, जल एवं वायु।

इन तीनों में सबसे महत्वपूर्ण जल है क्योंकि इसके बिना आप भोजन नहीं प्राप्त कर सकते। और फसलों में भी जल देने की आवश्यकता होती है।

यदि हवा में जल की मात्रा नमी के रूप में न हो तो, हवा शुष्क हो जाएगी तथा शुष्क हवा में सांस लेने में भी परेशानी होगी।

अब जब हम देखते हैं कि जल हमारे जीवन के लिए इतना अधिक उपयोगी है तो हम इसे जीवन की संज्ञा दे ही सकते हैं इसमें कोई अतिश्योक्ति न होगी।

जल संकट:

विश्व आज भयंकर जल संकट से जूझ रहा है। एक रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया में तीसरा विश्वयुद्ध जल के लिए होगा और इसे व्यर्थ ही नहीं कहा जा रहा, इसके पीछे एक वैध कारण भी है।

दुनिया भर में 75 प्रतिशत से ज्यादा लोग पानी की कमी के कारण संकटों से जूझ रहे हैं। और यदि उनके यहाँ जल पहुँच भी रहा है तो वो प्रदूषित है।

प्रदूषित जल में आर्सेनिक, लौहांस आदि की मात्रा अधिक होती है, जिसे पीने से तरह-तरह की स्वास्थ्य संबंधी व्याधियां उत्पन्न हो जाती हैं।

‘विश्व स्वास्थ्य संगठन’ के एक अध्ययन के अनुसार दुनिया भर में 86 प्रतिशत से अधिक बीमारियाँ असुरक्षित व दूषित जल पीने की वजह से हो रही हैं।

दूषित जल के कारण हज़ारों जल में रहने वाली प्रजातियां विलुप्त होने के कगार पर हैं ।

जल संकट को दूर करने के प्रयास:

विश्व तेज़ी से जल संकट की ओर अग्रसर है किन्तु ऐसा नहीं है कि इसे दूर करने के लिए सार्थक प्रयास नहीं किये जा रहे।

दुनिया भर की सरकारें, हज़ारों सामाजिक संगठन इसके लिए प्रयासरत हैं। इस संकट से अनेक मोर्चों पर लड़ा जा रहा है।

लोगों को जागरूक किया जा रहा हैं, ताकि वे जल की बर्बादी तथा प्रदूषण न करें इसके लिए हर साल 22 मार्च को विश्व जल दिवस मनाया जाता है।

जिसका मुख्य उद्देश्य लोगों को जागरूक करना है। वहीं दूसरी ओर सरकार पर दवाब बनाया जा रहा कि वे पेड़ों की अवैध कटाई को रोकने के लिए उचित कदम उठाएं।

दुनिया भर की सरकारें भी इसके लिए सार्थक प्रयास कर रही हैं लेकिन इस प्रयास में और गति लाने की आवश्यकता है।

जल ही जीवन है हिंदी निबंध 600 शब्द

Jal Hi Jeevan Hai Nibandh 600 Shabd
Jal Hi Jeevan Hai Nibandh 600 Shabd

प्रस्तावना:

जल मानव सभ्यता की शुरुआत से ही महत्वपूर्ण रहा है। यदि प्राचीन सभ्यताओं की बात की जाए तो उनमें से अधिकतर किसी न किसी जल संसाधनों के पास ही बसे थे।

‘भारत की सिंधु घाटी सभ्यता’ हो या ‘हड़प्पा’ दोनों ही सभ्यताएं नदी के पास ही बसी थी। सिंधु घाटी सभ्यता ‘सिंधु नदी’ के पास बसी थी इसलिए इसे सिंधु सभ्यता कहा गया।

आज भी हम देखते हैं कि विश्व के प्रमुख शहर किसी ने किसी नदी या समुद्र के पास बसे हैं। प्राचीन समय में हवाई यात्रा संभव नहीं थी इसलिए जल ही लोगों की सबसे पहली पसंद थी क्योंकि यह सुगम और कम खर्चीला था।

जल जितना हमारे लिए आवश्यक है, उतना ही अन्य जीवों के लिए भी आवश्यक है और उनके अस्तित्व के लिए भी जल महत्वपूर्ण है।

जलीय जीव जल में ही रहते हैं और देखा जाए तो सतह पर रहने वाले जीवों से कहीं अधिक मात्रा जलीय जीवों की हैं।

सबसे बड़ा जीव ‘व्हेल मछली’ है जो कि एक जलीय जीव है। जल पृथ्वी के तापमान को भी नियंत्रित करता है। वातावरण में यदि पर्याप्त नमी नहीं होगी तो भी अनेक प्रकार की बीमारियां होगी। नमी वायु में व्याप्त जल ही तो है।

जल का महत्व:

पृथ्वी पर 70 प्रतिशत हिस्से में पानी है लेकिन यह आश्चर्यजनक बात है कि सिर्फ 3 प्रतिशत पानी ही पीने योग्य यानि मीठा जल है, उसमें भी और आश्चर्य की बात है कि उस 3 प्रतिशत में 2 प्रतिशत बर्फ़ के रूप में जमा हुआ है। अर्थात पृथ्वी पर सिर्फ और सिर्फ 1 प्रतिशत जल ही उपयोग के लायक़ है।

उसी में सारे पशु-पक्षी, जल के जीव, और मनुष्य सब को उपयोग करना है और इस उपयोग को टाला नहीं जा सकता क्योंकि यदि हमने ऐसा करने की कोशिश भी की तो हम मारे जाएंगे।

पीने के अलावा हम बहुत सारे कार्य करते हैं जिसमें जल की मुख्य भूमिका होती है जैसे खेती। पानी के बिना खेती नहीं हो सकती और खेती के बिना हमें भोजन प्राप्त नहीं होगी।

अर्थात यहाँ भी जल का बहुत अधिक महत्व है। भोजन का उपयोग जिन्दा रहने के लिए हैं किन्तु जल का प्रयोग अनेकों प्रकार से करते हैं जिसमें विद्युत उत्पादन प्रमुख है।

जल संकट:

दुनिया जलवायु परिवर्तन के संकट से घिरी हुई है। प्रकृति के मौसम चक्र में लगातार परिवर्तन आ रहे हैं। कहीं आवश्यकता से अधिक बारिश हो रही हैं, कहीं बिलकुल भी नहीं हो रही।

इससे दुनिया भर में जल संकट के काले बादल मंडरा रहे हैं। और इस वजह से फसल के उत्पादन पर भी असर पड़ रहा है जिससे खाने-पीने की चीज़ों की कीमतें आसमान छू रही हैं और लोग भुखमरी से मर रहे हैं।

जल संकट निदान:

जल संकट आज एक बड़ी समस्या बन चुकी है पीने लायक़ पानी ख़त्म हो रहा हैं। सतह के नीचे तो लगभग समाप्त ही हो चुके हैं।

और इसके अनेकों कारणों में से एक है जंगलों की अंधाधुंध कटाई। दुनिया भर में सरकारों की मदद से विकास कार्य के नाम पर प्राकृतिक जंगलों की सफाई की जा रही है।

जिससे जलवायु परिवर्तन हो रहा और इस वजह से बारिश में अनियमितता दिखती है। जिसके कारणवश दुनिया भर में जल संकट छाया हुआ है।

इसे रोकने के उपाय भी इस संकट के कारण में ही छिपा है और वो है जंगलों की पुनः स्थापित करना, जंगलों की अवैध कटाई को रोकना इत्यादि।

इस बारे में लोगों को जागरूक करने की भी आवश्यकता है तथा इस समस्या के निदान हेतु सरकारों को कठोर नियम भी बनाने चाहिए।

निष्कर्ष:

इससे पहले की बहुत देर हो जाए हमें इसके बारे में सोचना होगा तथा अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए जल के उपयोग को न्यूनतम करने के प्रयास करने चाहिए, क्योंकि

“जल ही जीवन है।”

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