महात्मा गांधी पर निबंध {कविता, 3 भाषण, रूपरेखा एवं अलग-अलग शब्द सीमा सहित}| Essay On Mahatma Gandhi In Hindi 2023

महात्मा गांधी पर निबंध: महात्मा गांधी को भारत देश में “बापू” या “राष्ट्रपिता” के नाम से प्रसिद्धि प्राप्त है। इनका पूरा नाम मोहनदास करमचंद गांधी था। यह एक महान स्वतंत्रता सेनानी है। इनका जन्म 2 अक्टूबर 1869 में गुजरात के पोरबंदर में हुआ था। 30 जनवरी 1948 को इनकी गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। एक हिंदू कार्यकर्ता नाथूराम गोडसे द्वारा इनकी हत्या हुई। बाद में रविंद्र नाथ टैगोर ने बापू को “राष्ट्र का शहिद” नाम से संबोधित किया।

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EssayToNibandh.com पर आज हम ‘महात्मा गांधी पर निबंध’ पढ़ेंगे। जो की अलग अलग शब्द सीमा के आधार पर लिखे गए हैं। आप Essay On Mahatma Gandhi In Hindi को ध्यान से और मन लगाकर पढ़ें और समझें।

महात्मा गांधी का निबंध हिंदी में को निम्न शब्द सीमा के आधार पर लिखा गया है-

आइये! गांधी जयंती पर निबंध को अलग अलग शब्द सीमाओं के आधार पर पढ़ें।

नोट- यहां पर दिया गया महात्मा गांधी पर निबंध हिंदी में कक्षा(For Class) 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11, 12,(विद्यालय में पढ़ने वाले) विद्यार्थियों के साथ-साथकॉलेज के विद्यार्थियों के लिए भी मान्य हैं।

महात्मा गांधी पर निबंध 50 शब्दों में (Essay On Mahatma Gandhi In 50 Words)

1) महात्मा गांधी का जन्म 2 अक्टूबर सन 1969 में कठियावाड़ की राजकोट रियासत, पोरबंदर में हुआ था।

2) गांधीजी ने तीन शिक्षाएं दी- बुरा मत कहो, बुरा मत देखो, बुरा मत सुनो, जिन्हें बापू के तीन बंदर के नाम से भी जाना जाता है।

3) महात्मा गांधी ने हमारे देश को आजाद कराने में उच्चतम योगदान दिया था, इसलिए भारत राष्ट्र उन्हें राष्ट्रपिता या बापू के नाम से संबोधित करता है।

4) 1915 ईस्वी में इन्होंने रोलेट एक्ट का विरोध किया। 

5) 1928 ईस्वी में जब साइमन कमीशन भारत आया तो इन्होंने उसका पूर्ण रूप से बहिष्कार किया। 

आप खुद वो बदलाव बनिए,
जो आप दुनिया में देखना चाहते हैं।

महात्मा गांधी पर निबंध 100 शब्दों में (10 Lines On Mahatma Gandhi In Hindi)

1) महात्मा गांधी को पहली बार “फादर ऑफ नेशन” कहकर रविंद्र नाथ टैगोर ने संबोधित किया था। 

2) देश को आजाद कराने के लिए महात्मा गांधी ने कई सारे आंदोलन चलाए। जैसे- आत्मकथा आंदोलन, दलित आंदोलन, असहयोग आंदोलन तथा भारत छोड़ो आंदोलन आदि।

3) महात्मा गांधी के अनुसार, “कमजोर कभी माफी नहीं मांगते, क्षमा करना तो पराक्रमी व्यक्त की विशेषता है।” 

4) महात्मा गांधी एक अनुकूल राजनीतिज्ञ के साथ-साथ बहुत अच्छे लेखक भी थे।

5) महात्मा गांधी ने, हरिजन, भारतीय अधिनियम, यंग इंडिया आदि में संपादन के तौर पर काम किया। 

6) महात्मा गांधी द्वारा लिखी गई पुस्तकें निम्न है- हिंद स्वराज, दक्षिण अफ्रीका में सत्याग्रह, मेरे सपनों का भारत और ग्राम स्वराज्य।

7) “दक्षिण अफ्रीका में सत्याग्रह” नामक पुस्तक में इन्होंने अपने उन संघर्षों का वर्णन किया है, जो इन्होंने दक्षिण अफ्रीका में किया था।

8) 30 जनवरी 1948 की शाम दिल्ली स्थित बिरला भवन में मोहनदास करमचंद गांधी की नाथूराम गोडसे द्वारा बैरटा पिस्तौल से गोली मारकर हत्या कर दी थी। 

9) महात्मा गांधी के व्यक्तित्व में, मुसीबतों को सहना, प्रायश्चित करना, अहिंसा के मार्ग पर चलना, आचरण का ध्यान रखना आदि का समावेश था।

10) बाबू के नाम से विख्यात महात्मा गांधी एक युगपुरुष थे तथा वे विश्व के महान पुरुषों में से एक थे।

दुख से दूर पहुंचकर गांधी,
सुख से मौन खड़े हो।
मरते-खपते इंसानों के,
इस भारत में तूम ही बड़े हो।

महात्मा गांधी पर निबंध 150 शब्दों में (Essay On Mahatma Gandhi In 150 Words)

प्रस्तावना

महात्मा गांधी के जन्मदिवस को हर साल 2 अक्टूबर को पूरे भारत देश में मनाया जाता है। इस दिन पूरे भारतवर्ष में राष्ट्रीय अवकाश रहता है। पूरे भारत देश में बापू की उपाधि केवल राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी को भी दी गई है। महात्मा गांधी को बापू कहकर सबसे पहले रविंद्र नाथ टैगोर ने संबोधित किया था।

2 अक्टूबर को गांधी जयंती पर मनाये जाने का कारण

2 अक्टूबर को महात्मा गांधी का जन्म हुआ था, इसलिए इस दिन को विश्व अहिंसा दिवस के रूप में मनाया जाता है। गांधी जी को पूरा विश्व उनके अहिंसात्मक आंदोलन के लिए जानता है।

2 अक्टूबर को उनका जन्मदिन मनाने का क्या उद्देश्य यह है, कि उन्हें वैश्विक स्तर पर सम्मान प्रदान किया जा सके। गांधी जी कहा करते थे, कि अहिंसा एक दर्शन है, एक सिद्धांत है और एक अनुभव है।

जिसके आधार पर समाज को बेहतर बनाया जा सकता है। महात्मा गांधी के अच्छे कार्यों तथा उनके अच्छे विचारों के कारण ही उन्हें आज भी वही सम्मान दिया जाता है, जो इनके जीवन काल में दिया जाता था।

सीधा-साधा वेश था,
ना कोई अभिमान।
खादी की एक धोती पहने,
बापू की थी शान।

मोहनदास करमचंद गांधी से राष्ट्रपिता बनने का सफर

मोहनदास करमचंद गांधी अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद इंग्लैंड चले गए, अपनी बैरिस्टर की पढ़ाई करने के लिए। बैरिस्टर बनने के बाद उन्होंने वकालत की प्रैक्टिस के लिए दक्षिण अफ्रीका जाना सही समझा।

बापू की विचारधारा और लोगों के हक के लिए लड़ाई करने के उनके जज्बे और तरीके के कारण ही पूरे देश में गांधी जी को महात्मा की उपाधि से सम्मानित किया गया और बापू कहलाने का सम्मान भी प्रदान किया।

इससे पहले इन्हें मिस्टर गांधी कहकर बुलाया जाता था, लेकिन बाद में इन्हें महात्मा गांधी कहकर बुलाया जाने लगा।

निष्कर्ष

महात्मा गांधी के संघर्षों का जितना भी वर्णन किया जाए वह कम है। महात्मा गांधी ने हमेशा देश के लिए अपना सर्वस्व निछावर कर दिया। देश की आजादी के लिए लड़ाई लड़ते-लड़ते ये कई बार जेल भी गये और बहुत अपमान भी सहा।

फिर भी देश को आजाद कराने का उनका जज्बा कभी कम नहीं हुआ और अंततः उन्होंने देश को आजाद करा ही दिया। उन्होंने हमेशा देश के कल्याण के बारे में सोचा और हमेशा हिंसा के मार्ग पर खुद और दूसरों को भी चलने की प्रेरणा दी।

जिनकी सोच ने कर दिया कमाल,
देश का बदल गया सुर-ताल।
सबसे बोली सत्य-अहिंसा की बोली,
हर गली में जली विदेशी वस्तुओं की होली।

महात्मा गांधी पर निबंध 200 शब्दों में (Essay On Mahatma Gandhi In 200 Words)

महात्मा गांधी के अनुसार, “हमेशा अपने विचारों, शब्दों और कर्म के प्रति पूर्ण सामंजस्य या लक्ष्य रखें। हमेशा अपने विचारों को शुद्ध करने का लक्ष्य रखें और सब कुछ ठीक हो जाएगा।” 

प्रस्तावना

महात्मा गांधी हमारे देश की आजादी की बुनियाद है। उनके अच्छे व्यक्तित्व व सूझबूझ के कारण ही वह लोगों को आजादी के लिए एकजुट करने में सफल रहे।

सभी देशवासियों को सत्य और अहिंसा का मार्ग दिखाने वाले बापू को सर्वप्रथम “बापू” कहकर रविंद्रनाथ ने संबोधित किया था। आज भी सभी देशवासी उन्हें बापू कहकर पुकारते हैं।

अहिंसा का पुजारी,
सत्य की राह दिखाने वाला।
ईमान का पाठ पढ़ा गया हमें,
वह बापू लाठी वाला।

गांधी जी का शिक्षा के क्षेत्र में योगदान

महात्मा गांधी भारतीय शिक्षा को, “द ब्यूटीफुल ट्री” कहा करते थे। क्योंकि उनका मानना था कि- भारत में जो शिक्षा है, वह सरकार के अधीन नहीं है बल्कि वह भारतीय समाज के अधीन है।

शिक्षा के क्षेत्र में इन्होंने हमेशा अपना योगदान दिया। वह भारत के हर एक व्यक्ति को शिक्षित बनते देखना चाहते थे। गांधी जी का मूल उद्देश्य था, “शोषण विहीन समाज की स्थापना।” 

महात्मा गांधी पर कविता

सच्चाई का लेकर शस्त्र,
और अहिंसा का ले अस्त्र।
तूने अपना देश बचाया,
गोरो को था दूर भगाया।
दुश्मन से भी प्यार किया,
मानव पर उपकार किया।
गांधी! करते तुझे नमन,
तुझे चाहते प्रेम-सुमन।

प्रिय बापू का निधन

महात्मा गांधी ने पूरी ताकत लगा दी इस देश को स्वतंत्र कराने के लिए, लेकिन देश के ही एक व्यक्ति द्वारा उन्हें मार दिया गया। 30 जनवरी 1948 को दिल्ली में स्थित बिड़ला भवन में इनकी गोली मारकर हत्या कर दी गई।

इनकी हत्या के कुल 7 दोषी पाए गए। जिनमें मुख्य दोषी नाथूराम गोडसे था, जिसने इन पर गोली चलाई थी। महात्मा गांधी की हत्या से पूरा देश शोक में डूब गया। इनकी शव यात्रा 8 किलोमीटर तक निकाली गई थी। यह देश के लिए सबसे दुखद घटना थी।

सत्य का तेल अहिंसा की बाती,
की अमर-ज्योति जलती रहे।
तेरे पद-चिन्हों पर बापू,
दुनिया सारी चलती है।

निष्कर्ष

सबको अहिंसा का पाठ पढ़ाने वाले महात्मा गांधी आज हमारे बीच नहीं हैं, परंतु उनके सिद्धांत हमेशा से ही हमारा मार्गदर्शन करते आए हैं। कुछ तथ्यों के अनुसार पता लगाया गया, कि जब गांधी जी छोटे थे तो लोग उन्हें मंदबुद्धि समझते थे।

लेकिन आगे चलकर उन्होंने भारतीय शिक्षा में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया और शिक्षा के क्षेत्र में बड़ी उन्नति का प्रयास किया। उन्होंने लोगों के मन में शिक्षा के प्रति जागरूकता फैलाई तथा लोगों को शिक्षा के प्रति जागरूक कराने का प्रयास भी किया।

रविंद्र नाथ टैगोर ने सबसे पहले अपने एक पत्र में बापू को “महात्मा” कहकर संबोधित किया था। तब से पूरा संसार इन्हें मिस्टर गांधी के स्थान पर महात्मा गांधी कहने लगा।

महात्मा गांधी पर निबंध 250 शब्दों में (Essay On Mahatma Gandhi In 250 Words)

प्रस्तावना

पूरे देश को जिसने सत्य अहिंसा का पाठ पढ़ाया वह थे, महात्मा गांधी।

सन उन्नीस सौ की शुरुआत में वे प्रवासी बनकर वकालत करने दक्षिण अफ्रीका गए थे, फिर पहले विश्व युद्ध तक भारत और भारतीयों के हक के लिए लड़ने वाले नेतृत्वकर्ता बनकर उभरे।

फिर यह अपने देश वापस लौट कर आए और उन्होंने अपनी अंतिम सांस तक भारत देश की आजादी के लिए लड़ाई लड़ी।

स्वतंत्रता आंदोलन में अहिंसा की भूमिका

महात्मा गांधी ने ना केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया को अहिंसा के मायने समझाए है। उन्होंने सभी को सत्य और अहिंसा का पाठ पढ़ाया। जब भी कहीं अहिंसा का जिक्र आता तो सबसे पहले नाम आता है, महात्मा गांधी का।

जिन्होंने अहिंसा का मार्ग कभी नहीं छोड़ा। गांधीजी के अनुसार अहिंसा एक प्रकार की व्यक्तिगत आदत है जिसका अर्थ है, किसी भी परिस्थिति में अपना नियंत्रण ना खोना। परिस्थिति कैसी भी हो हमें कभी भी ना तो खुद को और ना ही किसी और को क्षति पहुंचानी चाहिए।

महात्मा गांधी द्वारा बताए गए सात घनघोर पाप

  1. काम के बिना, धन।
  2. अंतरात्मा के बिना, सुख।
  3. मानवता के बिना, विज्ञान।
  4. चरित्र के बिना, ज्ञान।
  5. सिद्धांत के बिना, राजनीति।
  6. नैतिकता के बिना, व्यापार।
  7. त्याग के बिना, पूजा।

गांधी जयंती पर भाषण

  • समस्त लोगों को मेरा प्रणाम, आज मैं आप लोगों को गांधी जयंती के इस शुभ अवसर पर कुछ जानकारी देना चाहती हूं।
  • महात्मा गांधी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 में हुआ था। महात्मा गांधी का पूरा नाम मोहनदास करमचंद गांधी है, इनके पिता का नाम करमचंद गांधी और माता का नाम पुतलीबाई था।
  • इनका विवाह मात्र 13 वर्ष की अवस्था में कस्तूरबा के साथ हुआ था।
  • यह गुजरात के रहने वाले थे।
  • इन्होंने आरंभिक शिक्षा गुजरात में हुई और फिर इन्होंने अपनी मैट्रिक की परीक्षा उत्तीर्ण की।
  • परीक्षा पूरी करने के बाद यह बैरिस्टर की पढ़ाई करने के लिए विदेश चले गए।
  • बैरिस्टर बनने के बाद यह वकालत की प्रैक्टिस करने के लिए अफ्रीका चले गए।
  • यह भारत वापस लौटे तो उन्होंने अंग्रेजों से भारत को आजाद करने के प्रयास शुरू किए।
  • इन्होंने सभी को सत्य-अहिंसा के मार्ग पर चलना सिखाया तथा आजादी के लिए सभी को एकत्रित किया।
  • इन्होंने भारत को आजादी दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
  • इनका नाम भारतीय इतिहास में सुनहरे अक्षरों में दर्ज किया गया है, क्योंकि इन्होंने अपनी विचारधारा तथा व्यक्तित्व के दम पर देश को अंग्रेजी शासन से मुक्त कराया था।
  • इन्हें महात्मा, बापू, राष्ट्रपिता जैसी उपाधियां प्राप्त है।
  • सभी लोग इन्हें प्यार से बापू कह कर बुलाते हैं।
  • हमें इनसे सत्य व अहिंसा के शिक्षा प्राप्त होती हैं।
  • इन्होंने हमें यही सिखाया है कि परिस्थितियां चाहे जैसी भी हो, हमें कभी भी सत्य अहिंसा का साथ नहीं छोड़ना चाहिए।

देश के लिए जिसने,
विलास को ठुकराया था।
त्याग विदेशी धागे जिसने,
खुद ही खादी बनाया था।
पहन काट की चप्पल जिसने,
सत्याग्रह का राग सुनाया था।
देश का था अनमोल व दीपक,
जो महात्मा गांधी कहलाया था।

निष्कर्ष

महात्मा गाँधी ने हमेशा केवल देश के कल्याण के विषय में ही सोचा। महात्मा गांधी ने भारत लौटकर देश को आजाद कराने की कसम खाई और उस कसम को पूरा करने में लग गए।

इन्होंने सभी को अहिंसा का पाठ पढ़ाया और सभी को उसी मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित किया। महात्मा जी का कहना था परिस्थिति अच्छी हो या फिर बुरी, दोनों ही स्थितियों में हमें सामान्य ही रहना चाहिए। कभी भी हमें हिंसा का मार्ग नहीं चुनना चाहिए।

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महात्मा गांधी पर निबंध 300 शब्दों में (Essay On Mahatma Gandhi In 300 Words)

प्रस्तावना

जब भी हम राष्ट्रीयता की बात करते हैं तो सबसे पहले नाम आता है उस व्यक्ति का, जिसने हमारी आजादी में महत्वपूर्ण योगदान दिया और हमारे समाज से जाति वर्ग और लिंग के आधार पर भेदभाव जैसी कुरीतियों को दूर भगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

वह और कोई नहीं बल्कि हमारे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी हैं। जिन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ आजादी की लड़ाई लड़ने के लिए लाखों लोगों को प्रेरित किया और इन्हीं प्रयासों के कारण अंग्रेजों को आखिरकार भारत को स्वतंत्र करना ही पड़ा।

महात्मा गांधी द्वारा चलाया गया असहयोग आंदोलन

महात्मा गांधी भारत में ब्रिटिश शासन को खत्म करना चाहते थे और स्वतंत्र भारत की नीव रखना चाहते थे, इसलिए उन्होंने ब्रिटिश शासन को उखाड़ फेंकने के लिए 8 अगस्त 1942 ईस्वी को ऐतिहासिक भारत छोड़ो आंदोलन का आवाहन कर दिया।

यह भारत छोड़ो आंदोलन काफी असरदार रूप में उभर कर दिखाई दिया। महात्मा जी का यह अभियान भी पूर्ण रूप से सत्य अहिंसा का पालन करता था। इसमें लोगों द्वारा किसी भी प्रकार की हिंसा नहीं दिखाई गई।

महात्मा गांधी पर कविता

गली गली भय से कांपी थी,
गांव शहर भी सहमें थे।
अंग्रेजी जल्लाद के,
सांसों तक पर पहरे थे।
200 वर्षों तक हमने,
गोरो की करी गुलामी।
पर तुमने जब अलख जगाई,
गोरी नस्ल कांपी।
बिना हथियार लड़े हो,
फिर भी भाग गया शैतान।
हे बापू तुमको मेरा प्रणाम,
हे बाप तुमको मेरा प्रणाम।

सविनय अवज्ञा आंदोलन

सविनय अवज्ञा आंदोलन की शुरुआत 1919 में असहयोग आंदोलन के साथ जलियांवाला और ग्राम कांड के विरोध में हुई थी। नमक सत्याग्रह खत्म होने के बाद सविनय अवज्ञा आंदोलन को काफी प्रतिष्ठा मिली थी।

महात्मा गांधी ने जो दांडी यात्रा की थी, वह इस आंदोलन की शुरुआत भी मानी जा सकती है। दांडी यात्रा 26 दिन की यात्रा थी। यह 12 मार्च 1930 से शुरू हुई और 6 अप्रैल 1930 तक दांडी के एक तटीय गांव में समाप्त हुई थी।

जल्द ही इसने एक बड़े अवज्ञा आंदोलन का रूप ले लिया और लोगों ने अंग्रेजों के कानूनों का विरोध करने के लिए उनको चुनौती देने के लिए भारी मात्रा में खुद से नमक बनाना शुरु कर दिया। लेकिन ये आंदोलन भी अंग्रेजी हुकूमत को रोक नहीं सका।

सविनय अवज्ञा आंदोलन का प्रभाव

महात्मा गांधी द्वारा चलाए गए इस आंदोलन ने अंग्रेजी हुकूमत की नींव हिला कर रख दी और आर्थिक रूप से, तथा प्रशासनिक तौर पर भी उसे एक बहुत बड़ा झटका दिया।

लोगों ने अंग्रेजी उत्पादों का बहिष्कार करना शुरू कर दिया और स्वदेशी का इस्तेमाल करने लगे। जिससे  ब्रिटेन से आयात होने वाले उत्पादन पर काफी प्रभाव पड़ा।

सबसे ज्यादा प्रभाव अंग्रेजी वस्त्र तथा सिगरेट पर पड़ा, क्योंकि लोगों ने खादी पहनना शुरू कर दिया। जिससे अंग्रेजों को  वस्त्र व्यापार को काफी नुकसान झेलना पड़ा था। 

सीधा-साधा वेश था,
ना कोई अभिमान।
खादी की एक धोती पहने,
बापू की थी शान।

लोगों ने तो सरकार को कर देने से भी मना कर दिया और नमक  उत्पादन भी स्वयं करना शुरू कर दिया, जिससे ब्रिटिश सरकार को आर्थिक रूप से भी नुकसान झेलना पड़ा। यह आंदोलन 8 अगस्त 1942 को शुरू हुआ था।

इस आंदोलन का इतना प्रभाव पड़ा कि जब अंतिम द्वितीय विश्व युद्ध समाप्त हुआ, तो मजबूरन अंग्रेजों  को भारत स्वतंत्र करना पड़ा और स्वतंत्रता के इस संघर्ष का अंत हुआ।

महात्मा गांधी पर भाषण (Hindi Speech On Mahatma Gandhi)

  • समस्त आदरणीय अतिथि गण और मेरे प्रिय साथियों, आज मैं गांधी जयंती के शुभ अवसर पर आप लोगों को बापू के जीवन के बारे में कुछ जानकारी देना चाहती हूं।
  • महात्मा गांधी का व्यक्तित्व हर भारतीय के लिए आदर्श है। भारत के लोग कभी भी नहीं भूल सकते बापू के योगदान को, जो उन्होंने हमारे देश को आजाद करा कर दिया है।
  • उन्होंने देश को परतंत्रता की बेड़ियों से आजाद कराया है और देश के लिए अपना संपूर्ण जीवन निछावर कर दिया। यही कारण है कि उनके महान कार्य व विचारों को याद रखने के लिए हर साल 2 अक्टूबर के दिन हम सभी लोग गांधी जयंती मनाते हैं।
  • महात्मा गांधी का जन्म 2 अक्टूबर को पोरबंदर में हुआ था। इनके पिता का नाम करमचंद गांधी था और माता का नाम पुतलीबाई था। इनके पिता राजकोट के दीवान थे। इनका विवाह 13 वर्ष की अवस्था में कस्तूरबा से हो गया था। 
  • इन्हें आगे की शिक्षा के लिए विदेश भेजा गया। इन्होंने धीरे-धीरे करके अपने भारत देश की स्थिति के बारे में जाना और निर्णय लिया कि अब हमारे देश में कोई मे गुलाम बनकर हम नहीं रहेंगे, हमारे देशवासियों को भी स्वतंत्रता से जीने का अधिकार है।
  • अब गांधीजी का केवल एक ही लक्ष्य था, भारतवर्ष को अंग्रेजों से आजाद कराना। गांधीजी एक साधारण से लड़के से कब इतने बड़े आंदोलनकारी बन गए पता ही नहीं चला।
  • उन्होंने सारे देश को अपने अभियान में एकजुट कर लिया और देश को स्वतंत्र कराने की ओर बढ़ चले। उन्होंने अहिंसा को अपनाया, उसे अपना हथियार बनाया और सत्य की राह पर चलकर देश को आजाद कराया।
  • इन्होंने लोगों के दिलों पर राज किया, जिसके कारण लोगों ने इन्हें महात्मा जी की उपाधि दी। सब लोग इन्हें प्यार से बापू कह कर बुलाते हैं।

जब दुस्साहस करेगा दुश्मन,
तो हम भी इतिहास दोहराएंगे।
वह महान महात्मा गांधी थे,
जो सदैव राष्ट्रपिता कहलाएंगे।
और हर साल इनका जन्मोत्सव हम,
बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाएंगे।

निष्कर्ष

महात्मा गांधी का पूरा जीवन संघर्ष पूर्ण था। इन्होंने अपने जीवन के हर क्षण को देश को देश को समर्पित किया। इनके साहस और बुद्धिमानी का कोई मुकाबला नहीं। यह उस दौर के महापुरुष थे। और हर युग में महापुरुष ही कहलाएंगे।

देश के प्रति उनके समर्पण की भावना की जितनी भी तारीफ की जाए वह कम ही होगी। इनके त्याग और संघर्षों को याद रखने के लिए पूरे विश्व में 2 अक्टूबर के दिन राष्ट्रीय अहिंसा दिवस मनाया जाता है। 

महात्मा गांधी पर निबंध 400 शब्दों में (Essay On Mahatma Gandhi In 400 Words)

प्रस्तावना

महात्मा गांधी को भारत देश में “बापू” या “राष्ट्रपिता” के नाम से प्रसिद्धि प्राप्त है। इनका पूरा नाम मोहनदास करमचंद गांधी था। यह एक महान स्वतंत्रता सेनानी है।

इनका जन्म 2 अक्टूबर 1869 में गुजरात के पोरबंदर में हुआ था। 30 जनवरी 1948 को इनकी गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। एक हिंदू कार्यकर्ता नाथूराम गोडसे द्वारा इनकी हत्या हुई। बाद में रविंद्र नाथ टैगोर ने बापू को “राष्ट्र का शहिद” नाम से संबोधित किया।

स्वतंत्रता के लिए चलाए गए आंदोलन

चंपारण और खेड़ा आंदोलन

1917 में चंपारण के किसानों को अंग्रेजों के द्वारा मजबूर किया गया, कि वह नील की खेती करें तथा इसे एक निश्चित कीमत पर अंग्रेजों को भेजें।

इसके विरोध में महात्मा गांधी ने अहिंसा पूर्वक एक आंदोलन की शुरुआत की, जिसमें अंग्रेजों को अन्ततः उनकी मांगों को मानने के लिए मजबूर होना पड़ा। उनके इस आंदोलन को चंपारण आंदोलन के नाम से जाना जाता है।

इसके साथ ही सन् 1948 में गुजरात के खेड़ा गांव को भीषण बाढ़ का सामना करना पड़ा, जिससे उस क्षेत्र में भयावह आकार की समस्या उत्पन्न हो गई। इतने गंभीर संकट के बाद भी अंग्रेजी सरकार लोगों को करो मैं किसी प्रकार की छूट या मदद देने के लिए तैयार नहीं थी।

तब इसके विरोध में गांधी जी ने असहयोग आंदोलन की शुरुआत की, जिसके अंत में मजबूर होकर प्रशासन को उनकी मांगें माननी पड़ी और लोगों को कर में छूट देने के लिए तैयार होना पड़ा। महात्मा गांधी के इस आंदोलन का खेड़ा सत्याग्रह के नाम से जाना जाता है।

अहिंसा का पुजारी,
सत्य की राह दिखाने वाला।
ईमामा का पाठ पढ़ा गया,
हमें वह बापू लाठी वाला।

असहयोग आंदोलन

अंग्रेजों के कर नीतियों और जलियांवाला बाग नरसंहार के कारण सन् 1920 में असहयोग आंदोलन की शुरुआत हुई। यह अंग्रेजी हुकूमत के विरोध में शुरू हुआ एक अहिंसक आंदोलन था।

गांधीजी का मानना था कि अंग्रेज भारत में शासन करने के लिए करने में सिर्फ इसलिए कामयाब हुए, क्योंकि उन्हें भारतीयों का सहयोग मिला। इसलिए उन्होंने लोगों को अंग्रेजी हुकूमत के साथ असहयोग करने को कहा।

उनकी इन्हीं बातों को मानते हुए लोगों ने अंग्रेजी सरकार के अधीन पदों, जैसे कि शिक्षक, प्रशासनिक व्यवस्था तथा अन्य सरकारी पद से इस्तीफा देना शुरू कर दिया।

इसके साथ ही लोगों ने अंग्रेजी वस्तु और वस्तुओं का बहिष्कार करते हुए स्वदेशी वस्तुओं को अपनाना शुरू कर दिया। असहयोग आंदोलन वह आंदोलन था, जिसमें ना किसी तरह के शस्त्र का उपयोग और ना ही रक्त का एक भी कतरा बहा, फिर भी इसने अंग्रेजी हुकूमत की नींव को हिला कर रख दिया ।

नमक सत्याग्रह दंडी यात्रा

दांडी यात्रा जिसे नमक कानून के नाम से भी जाना जाता है। यह महात्मा गांधी के द्वारा शुरू की गई एक यात्रा थी, जिसके अंतर्गत उन्होंने नमक पर लगने वाले भारी कर के कारण कानून का विरोध किया था।

नमक पर अंग्रेजी सरकार के एकाधिकार के विरोध में गांधी जी ने 12 मार्च 1930 को इस यात्रा का आरंभ किया था। यह यात्रा साबरमती आश्रम से शुरू होकर 26 दिन बाद 6 अप्रैल 1930 को गुजरात के एक तटीय गांव दांडी में समाप्त हुई।

जिसके अंतर्गत अंग्रेजी सरकार के नमक कानून की अवहेलना की गई और लोगों ने स्थानीय तौर पर खुद नमक बनाना और बेचना शुरू कर दिया। नमक सत्याग्रह आंदोलन एक अहिंसक आंदोलन था, जिसने पूरे विश्व का ध्यान अपनी ओर खींचा और स्वतंत्र भारत के सपने को मजबूती प्रदान करने का कार्य किया था।

सीधा साधा वेश था,
ना कोई अभिमान।
खादी की एक धोती पहने,
बापू की थी शान।

गांधी जी पर भाषण (Hindi Speech On Mahatma Gandhi)

  • महात्मा गांधी एक महान स्वतंत्रता सेनानी थे। उन्होंने अपना सारा जीवन भारत की आजादी के संघर्ष में बिताया।
  • इनका जन्म गुजरात के पोरबंदर में एक हिंदू परिवार में 2 अक्टूबर 1969 को हुआ था।
  • उन्होंने एक नेता के रूप में भारतीयों का नेतृत्व किया। इनका जीवन हमारे लिए प्रेरणा स्त्रोत है।
  • इन्होंने अपना जीवन ब्रिटिशों से लड़ने तथा भारतीयों को आजादी दिलाने में बिताया, इसलिए लोग इन्हें बापू कहते हैं।
  • आजादी की लड़ाई लड़ते-लड़ते ये कई बार जेल भी गए, लेकिन फिर भी इनका उत्साह कभी कम नहीं हुआ और उन्होंने राष्ट्रीय स्वतंत्रता के लिए अपनी लड़ाई को जारी रखा।
  • यह सही मायने में लोगों की एकता की शक्ति को समझते थे, इसलिए उन्होंने लोगों की एकता का उपयोग स्वतंत्रता आंदोलनों में किया।
  • इन आंदोलनों के माध्यम से उन्होंने 15 अगस्त 1947 को अंग्रेजों को भारत छोड़ने पर मजबूर कर दिया। 30 जनवरी 1948 को हिंदू कार्यकर्ता नाथूराम गोडसे द्वारा इन की गोली मारकर हत्या कर दी गई।
  • इन्होंने अपना सारा जीवन मातृभूमि को न्यौछावर कर दिया। उन्होंने साबित कर दिया कि सत्य और अहिंसा मे बहुत बल होता है।
  • अहिंसा से कुछ भी असंभव नहीं है। महात्मा गांधी मर कर भी सभी देश वासियों के हृदय में आज भी जिंदा है।

गांधी जी पर कविता (बापू )

संसार पूजता जिन्हें
तिलक, रोली, फूलों के हारो।
मैं उन्हें पूजता आज हूं,
बापू अब तक अंगारों से।
अंगार, आभूषण है उनका,
विद्युत पीकर जो आते हैं।
ऊंघती शिखाओं की लौ में,
चेतना नई भर लाते हैं।
उनका किरीट, जो कुछ-भंग,
करते प्रचंड, हुंकारों से।
रोशनी छिटकती है जंग में,
जिनके शोणित की धारों से।

महात्मा गांधी के विचार

  1. अपने ज्ञान पर जरूरत से अधिक यकीन करना मूर्खता है, क्योंकि सबसे मजबूत भी कमजोर हो सकता है और सबसे बुद्धिमान भी गलती कर सकता है।
  2. अहिंसा मानवता की सबसे बड़ी ताकत है। यह आदमी द्वारा तैयार विनाश के ताकतवर हथियार से अधिक शक्तिशाली व प्रभावी है।
  3. दुनिया हर किसी की जरूरत को पूरा करने के लिए पर्याप्त है, लेकिन हर किसी के लालच पूरा करने के लिए नहीं।

निष्कर्ष

महात्मा गांधी देश के ऐसे नेता थे, जिन्होंने बिना किसी हिंसा का सहारा लिए अहिंसा के बल पर देश को एक सूत्र में बांधकर स्वतंत्रता दिलाई। इनको भारत देश मैं जो स्थान प्राप्त है, वह आज तक सम्मानित है।

इन्हें बापू कहलाने का अधिकार प्राप्त है। यह दूसरों को उपदेश देने से पहले उसे स्वयं पर आजमाते थे। इनका कहना था, कि पाप से घृणा करो परंतु पापी से नहीं।

महात्मा गांधी पर निबंध 500 शब्दों में (Essay On Mahatma Gandhi In 500 Words)

प्रस्तावना

ऐसी नीति किसके द्वारा कभी भी किसी को जाने-अनजाने में चोट नहीं पहुंचाया जा सकता है, वह है अहिंसा। अहिंसा का प्रचार-प्रसार गौतम बुद्ध, महावीर स्वामी जैसे महान व्यक्तियों द्वारा किया गया।

महात्मा गांधी उन प्रसिद्ध व्यक्तियों में से एक थे, जिन्होंने हमेशा अहिंसा का पालन किया। इसी नीति था संघर्षों के द्वारा महात्मा गांधी ने भारत को अंग्रेजों से आजाद कराया था।

महात्मा गांधी के विचार इस प्रकार थे , “आप मुझे जंजीरों में पकड़ सकते हैं, यातना दे सकते हैं, यहां तक कि आप मेरे शरीर को भी नष्ट कर सकते हैं,  लेकिन आप कभी भी मेरे विचारों को कैद नहीं कर सकते।” 

सीधा-साधा वेश था,
ना कोई अभिमान।
खादी की धोती पहने,
बापू की थी शान।

जन्म और परिवार

महात्मा गांधी का पूरा नाम मोहनदास करमचंद गांधी था। इनके पिता का नाम करमचंद गांधी तथा माता का नाम पुतलीबाई था। इनका जन्म 2 अक्टूबर 1869 ईस्वी को गुजरात के पोरबंदर नामक स्थान पर हुआ था।

इनके पिता कर्मचंद गांधी राजकोट के दीवान थे। इनकी माता पुतलीबाई धार्मिक स्वभाव वाली महिला थी। इनका विवाह कस्तूरबा गांधी के साथ हुआ था।

प्रारंभिक शिक्षा

इनकी प्रारंभिक शिक्षा पोरबंदर में हुई थी। उन्होंने स्थानीय स्कूलों से ही मैट्रिक की परीक्षा उत्तीर्ण की। यह पढ़ने – लिखने में काफी रुचि रखते थे। यह सहपाठियों से बहुत कम बोलते थे।

इन्हें नकल करना या चोरी करना बिल्कुल पसंद नहीं था, इसलिए उन्होंने अपने जीवन में कभी भी किसी की नकल नहीं की और ना ही कभी चोरी की।

जब यह नवी कक्षा में थे तो इन्होंने एक बार सत्य हरिश्चंद्र नाटक देखा था, इस नाटक का इन पर इतना गहरा प्रभाव पड़ा कि इन्होंने यह निश्चय किया कि अपने जीवन में सदैव सत्य ही बोलेंगे और अहिंसा का पालन करेंगे।

बचपन में इनके मन में एक गलत धारणा बैठ गई थी कि पढ़ाई में सुलेख की जरूरत नहीं होती। लेकिन आगे चलकर जब यह दूसरे लोगों की सुंदर लिखावट देखते थे, तो इन्होंने अपनी लिखावट को सुधारने का भी प्रयास किया, लेकिन यह नहीं कर पाए।

इससे इन्होंने एक बात यह सीखी कि बुरी लिखावट अधूरी पढ़ाई की निशानी है। हमें पढ़ाई के साथ-साथ अपने लिखावट पर भी ध्यान देना चाहिए।

बापू भोले-भाले थे,
हम सबके रखवाले थे।
हमें आजादी दिलवा कर,
स्वयं कष्ट सह जाते थे।

माता द्वारा लिए गए वचन

मैट्रिक पास करने के बाद जब गाँधीजी कानून की पढ़ाई करने इंग्लैंड जाने वाले थे, तब इनकी माता ने इनसे तीन वचन लिए थे-

  1. कभी भी मांस का सेवन ना करना।
  2. शराब तथा अन्य नशीले पदार्थों से दूर रहना।
  3. सभी स्त्रियों को सम्मान करना, किसी पर भी बुरी नजर ना डालना।

बापू ने माता के तीनों वचनों को जीवन भर निभाया। गांधीजी इंग्लैंड से एक अच्छे बैरिस्टर बन कर वापस आए। स्वदेश लौटने पर गांधी जी ने राजकोट तथा मुंबई में वकालत की। 

राष्ट्र को आजाद कराने की भावना

यह तब की बात है, जब सन 1893 में महात्मा गांधी एक मुकदमे के सिलसिले में दक्षिण अफ्रीका गए थे तो वहां के लोगों द्वारा भारतीयों से गलत व्यवहार देखकर इनके मन में राष्ट्रीयता की भावना जाग गई और उन्होंने देश की स्वतंत्रता के विषय में सोचना शुरू कर दिया।

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम

भारत में स्वतंत्रता आंदोलन की भूमिका तैयार की जा रही थी। लोकमान्य तिलक के द्वारा कही गई यह बात “स्वतंत्रता हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है” सभी लोगों के हृदय में बस गयी थी।

महात्मा गांधी और तिलक दोनों के दृष्टिकोण अलग थे, परंतु उनका उद्देश्य एक ही था,”देश की स्वतंत्रता।” प्रथम विश्व युद्ध समाप्त होने के पश्चात अंग्रेज अपने वादे से मुकरने लगे।

तब भारत वासियों ने उन्हें, उनका वादा याद दिलाने के लिए आंदोलन शुरू किया। इसी बीच रौलट एक्ट और जलियांवाला बाग हत्याकांड जैसे घटती हुई। 

फिर 1920 में असहयोग आंदोलन प्रारंभ हो गया। सभी लोगों ने इस आंदोलन में सहभागिता दिखाई चौरी चौरा कांड सामने आया और गांधी जी को अपना आंदोलन वापस लेना पड़ा। फिर नमक सत्याग्रह चला।

ऐसे ही गांधीजी प्रयास करते रहे। 1942 में उन्होंने भारत छोड़ो आंदोलन चलाया। जिसके कारण सभी प्रमुख राजनेताओं को जेल में बंदी बना दिया गया। लेकिन देशभक्तों का देश को आजाद कराने के जज्बे ने आखिर देश को 15 अगस्त 1947 के दिन आखिर आजाद करवा ही दिया। 

गाँधी जयंती पर भाषण (Hindi Speech On Mahatma Gandhi)

  • गांधी जयंती एक राष्ट्रीय कार्यक्रम है, इस दिन को पूरा भारत वर्ष मनाता हैं।
  • इस दिन सभी स्कूलों तथा कॉलेजों में बापू को श्रद्धांजलि अर्पित की जाती है और उन पर भाषण प्रतियोगिता तथा निबंध प्रतियोगिता भी कराई जाती है।
  • इस दिन को पूरे विश्व में राष्ट्रीय अहिंसा दिवस के रूप में मनाया जाता है।
  • जून 2007 को संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा आंतरिक अहिंसा दिवस के रूप में गांधी जयंती को मनाया जाता है।
  • बापू के जन्मोत्सव को याद करने के लिए इस दिन पूरे राष्ट्र मैं अवकाश रहता है।
  • उनके भारतीय स्वतंत्रता के लिए किए गए अहिंसा आंदोलन से आज भी देश के राजनीतिक नेताओं के साथ-साथ देशी और विदेशी युवा नेता भी प्रभावित है।

गली-गली भय से कांपी थी,
गांव-शहर सहमे में थे।
अंग्रेजी जल्लादों के,
सांसो तक पर पहरे थे।
200 वर्षों तक हमने,
गोरों की करी गुलामी।
पर तुमने जब अलख जलायी,
गोरी नसले काफी थी।
बिना हथियार लड़े हो,
फिर भी हार गया शैतान।
हे बापू तुमको मेरा प्रणाम हे,
हे बापू तुमको मेरा प्रणाम।

निष्कर्ष

महात्मा गांधी सभी भारतीयों के लिए प्रेरणा स्रोत हैं। उनका जन्म दिवस तीसरे महत्वपूर्ण कार्यक्रम के रूप मे पूरे देश भर में मनाया जाते हैं। उनका एकमात्र हथियार अहिंसा और सच्चाई है।

वे सामाजिक समानता में भरोसा रखते थे तथा अस्पृश्यता के खिलाफ थे। इन्होंने लोगों को शांति का पाठ पढ़ाया और उन्हें समझाया कि हर लड़ाई केवल हिंसा से ही नहीं जीती जाती है। कभी-कभी बड़ी बड़ी जंग जीतने के लिए हमें अहिंसा का सहारा लेने की जरूरत होती है।

मेरे प्यारे दोस्तों! मुझे पूरी उम्मीद हैं की मेरे द्वारा लिखा गया महात्मा गांधी पर निबंध आपको जरूर पसंद आया होगा।

आप Essay On Mahatma Gandhi In Hindi को अपने करीबी दोस्तों या रिश्तेदारों को जरूर शेयर कीजियेगा, जिनको इस निबंध की अति आवश्यकता हो।

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