मेरा प्रिय खेल खो खो पर निबंध 🏃‍♂️{नियम, इतिहास एवं अलग-अलग शब्द सीमा}| Kho Kho Khel Par Nibandh 2023

‘मेरा प्रिय खेल खो-खो’ हैं। मुझे खो-खो खेल बहुत अच्छा लगता है। मैं अपने विद्यालय में प्रतिदिन अपने दोस्तों के साथ खो-खो खेलता हूँ। क्योंकि खो-खो खेलना बहुत आसान है, और इस खेल को खेलने के लिए किसी प्रकार की चीज की आवश्यकता नहीं होती है। खो-खो का खेल हमारे देश के ग्रामीण इलाकों में बहुत पहले से खेला जाता है, लेकिन अब दिन-प्रतिदिन इसकी लोकप्रियता बढ़ती जा रही है।

Mera Priya Khel Kho Kho Par Nibandh Hindi Me, मेरा प्रिय खेल खो खो पर निबंध
मेरा प्रिय खेल खो खो पर निबंध

EssayToNibandh.com पर आज हम मेरा प्रिय खेल खो खो पर निबंध पढ़ेंगे। जो की अलग अलग शब्द सीमा के आधार पर लिखे गए हैं। आप Mera Priya Khel Kho Kho Essay In Hindi को ध्यान से और मन लगाकर पढ़ें और समझें।

खो खो खेल पर निबंध को निम्न शब्द सीमा के आधार पर लिखा गया है-

आइये! मेरा प्रिय खेल खो खो पर निबंध हिंदी को अलग अलग शब्द सीमाओं के आधार पर पढ़ें।

नोट- यहां पर दिया गया खो खो पर निबंध कक्षा(For Class) 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11, 12,(विद्यालय में पढ़ने वाले) विद्यार्थियों के साथ-साथकॉलेज के विद्यार्थियों के लिए भी मान्य हैं।

मेरा प्रिय खेल खो खो पर निबंध 5 लाइन

  1. मेरा प्रिय खेल ‘खो-खो‘ है।
  2. मैंने खो-खो में अपने विद्यालय में बहुत सारे मेडल जीते हैं।
  3. खो-खो खेलने से मेरी एकाग्रता काफी बढ़ी है।
  4. मेरे सभी दोस्तों को भी मेरे साथ खो-खो खेलना बहुत पसंद है।
  5. मेरे विद्यालय में हर सप्ताह खो-खो का खेल खिलाया जाता है, जिसमें हमारी कक्षा के सभी छात्र-छात्राएँ इस खेल में बढ़-चढ़कर भाग लेते है।

Mera Priya Khel Kho Kho Essay In Hindi 20 Line

मुझे खो-खो का खेल बहुत पसंद है। मैं प्रतिदिन अपने विद्यालय में खो-खो का खेल खेलता हूँ। मैं अपने सभी सहपाठियों के साथ मिलकर खो-खो का खेल खेलता हूँ। खो-खो का खेल खेलने में मुझे बड़ा आनंद आता है। हमारे विद्यालय में खो-खो का हर वर्ष बड़े स्तर पर प्रतियोगिता कराया जाता है, जिसमें मैं भी भाग लेता हूँ और मेडल जीतता हूँ।

हमारे विद्यालय के सभी शिक्षक भी हमें खो-खो का खेल खेलने के लिए प्रेरित करते हैं। खो-खो का खेल सभी लोग बड़े ही उत्साह और अनुशासन के साथ खेलते हैं। हम सभी 9-9 खिलाड़ियों की एक टीम बन जाते हैं, फिर खो-खो खेलते हैं।

हमारे गेम टीचर अंपायर रहते हैं, जो हमारी मतभेदों को दूर करके निष्पक्ष तरीके से विजेता टीम की घोषणा करते हैं। खो-खो का खेल खेलने से मैं दिन भर ऊर्जावान महसूस करता हूँ, स्वस्थ रहता हूँ। इस कारण मुझे खो-खो का खेल बहुत पसंद है, और मैं इसे प्रतिदिन खेलना पसंद करता हूँ।


Mera Priya Khel Kho Kho In Hindi 100 Shabd ka

‘मेरा प्रिय खेल खो-खो’ हैं। मुझे खो-खो खेल बहुत अच्छा लगता है। मैं अपने विद्यालय में प्रतिदिन अपने दोस्तों के साथ खो-खो खेलता हूँ। क्योंकि खो-खो खेलना बहुत आसान है, और इस खेल को खेलने के लिए किसी प्रकार की चीज की आवश्यकता नहीं होती है।

खो-खो का खेल हमारे देश के ग्रामीण इलाकों में बहुत पहले से खेला जाता है, लेकिन अब दिन-प्रतिदिन इसकी लोकप्रियता बढ़ती जा रही है। खो-खो का खेल खेलने से हमारा शरीर तंदुरुस्त और स्वस्थ रहता है। खो-खो खेल सभी उम्र के लोग एक खुले मैदान में खेल सकते हैं। खो-खो खेलने से हमारा शरीर दिन भर ऊर्जावान बना रहता है। जिससे हम अपने दिनचर्या के कार्यों को आसानी से कर पाते हैं।


मेरा प्रिय खेल खो खो निबंध 200 शब्द

प्रस्तावना

हमारा देश प्राचीन समय से ही विभिन्न प्रकार के खेलों से जुड़ा हुआ है, उनमें से खो-खो भी सबसे अच्छे खेलों में से एक है। जिसे, ग्रामीण इलाकों में ज्यादा लोकप्रियता हासिल है। खो-खो एक ऐसा खेल है, जिसमें सभी छात्र-छात्राएँ हंसते खेलते इस खेल को बड़ी आसानी से खेलते हैं। इस कारण मेरा प्रिय खेल खो-खो है। मैं प्रतिदिन खो-खो के खेल में भाग लेता हूँ।

खो-खो खेल से जुड़े रोचक तथ्य

  • खो-खो खेल का जन्म भारत में हुआ था।
  • खो-खो का खेल दो टीमों के बीच खेला जाता है।
  • प्रत्येक टीम के 9-9 खिलाड़ी इस खेल में भाग लेते है। खो-खो के खेल में दो अंपायर अपने-अपने स्थान पर रहकर खेल का संचालन करते हैं। इस खेल में एक रेफरी भी होता है।

निष्कर्ष

खो-खो का खेल खेलने से एकाग्रता बढ़ती है। शरीर स्वस्थ और फुर्तीला बना रहता है। इसलिए मुझे यह खेल बहुत पसंद है। खो-खो का खेल सभी बच्चों को ज़रूर खेलना चाहिए। ताकि वह भी भारत के प्राचीन खेल को जान सके। इस खेल को खेलने में बड़ा आनंद आता है। यह खेल आपके शरीर में रक्त संचरण को बढ़ाने में भी फायदा पहुंचाता है। इसलिए, सभी को खो-खो के खेल में ज़रूर भाग लेना चाहिए।


खो खो निबंध 300 शब्दों का

प्रस्तावना

वैसे तो भारत में बहुत सारे खेल खेले जाते हैं, लेकिन ग्रामीण इलाकों में सबसे ज्यादा लोकप्रिय खेलों में से एक हैं, ‘खो-खो’ का खेल जो मैदान में खेला जाता है। यह खेल पारंपरिक रूप से महाराष्ट्र और गुजरात में खेला जाता है, लेकिन अब इसकी लोकप्रियता धीरे-धीरे बाकी राज्यों में भी बढ़ रही है। ‘खो-खो का खेल’ खेलने के लिए दो खंभों की आवश्यकता होती है, और किसी भी समतल जगह पर खेला जा सकता है। खो-खो का खेल सभी उम्र के लोग खेल सकते हैं। यह खेल आपके शरीर में तंदुरुस्ती लाता है।

खो-खो खेल के नियम

  • खो-खो खेलने के लिए मैदान 111 फुट लंबा और 59 फुट चौड़ा होना चाहिए। साथ ही साथ दोनों तरफ से 10-10 फुट की जगह छोड़कर 4 फुट ऊंचे खंभे लगाए होने चाहिए।
  • खो-खो का खेल दो प्रतिद्वंदी टीमों के बीच खेला जाता है, जिसमें प्रत्येक टीम के 9-9 खिलाड़ी इस खेल में शामिल होते हैं। जिसमें से एक टीम भागती है, तो दूसरी उन्हें पकड़ती है।
  • यह खेल बहुत ही रोमांचक होता है। खो-खो में प्रत्येक चरण में 9-9 मिनट का खेल होता है। बीच-बीच में 5 मिनट का ब्रेक भी लिया जाता है।
  • पहले 9 मिनट में जो टीम धावक बनती है, वह दूसरे 9 मिनट में अनुधावक या चेज़र बन जाती है, और जो टीम पहले 9 मिनट में अनुधावक या चेज़र बनती है, वह दूसरे 9 मिनट में धावक बन जाती है। इस प्रकार यह खेल खेला जाता है।
  • धावक जो होते हैं वह खेल के मैदान में कहीं पर भी दौड़ सकते हैं, परंतु अनुधावक या चेज़र हमेशा एक ही दिशा में दौड़ सकता है। अब धीरे-धीरे यह खेल अपनी नई पहचान बना रहा है। विश्व पटल पर भी अब इस खेल की सराहना होने लगी है।

निष्कर्ष

इसलिए हम सभी को अपने जीवन में किसी न किसी प्रकार के खेल को अपनाना चाहिए, और सबसे पहले खो-खो को ही क्यों ना अपनाए? यह खेल आपको आनंद तो देता ही है, साथ साथ आपके शरीर को विभिन्न प्रकार के लाभ पहुंचाता है। आप को स्वस्थ रखता है।

हार या जीत को दिल से ना लगाना,
सब कुछ भुला के बस खेलते जाना।

मेरा प्रिय खेल खो खो पर निबंध
मेरा प्रिय खेल खो खो पर निबंध

खो खो गेम निबंध 400 शब्द का

प्रस्तावना

आज के समय में हम में से ज्यादातर लोगों का अधिकतर समय स्मार्ट फोन, टी.वी. आदि में व्यतीत होता है। मोबाइल में ही इतने सारे गेम आ गए कि हम सब बाहर निकलते ही नहीं है। लेकिन स्मार्ट फोन वाले गेम्स हमारी मानसिक शक्ति के साथ-साथ शारीरिक विकास में भी नकारात्मक प्रभाव डालता है। जबकि बाहर वाले खेल शारीरिक विकास तो करता है, साथ-साथ मानसिक विकास में भी बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

हमारा देश पारंपरिक खेलों में विख्यात रहा है। हमारे देश में इतने सारे पारंपरिक खेल हैं। जिसे, हर उम्र के, हर वर्ग के लोग खेल सकते हैं। आज के समय में खेलों के महत्व को देखते हुए आउटडोर खेले जाने वाले खेल को ज्यादा महत्व दिया जा रहा है। उन्हीं में से एक हैं, खो-खो जो मेरा पसंदीदा खेल है, जिसे मैं प्रतिदिन खेलना पसंद करता हूँ।

खो-खो खेल क्यों खेलें

किसी भी खेल में भाग लेने से शरीर का विकास तो होता ही है, साथ-साथ शरीर स्वस्थ भी रहता है, लेकिन खो-खो जैसे खेल खेलने से आपका शरीर दिन भर ऊर्जावान और तंदुरुस्त बना रहता है, साथ-साथ यह आपके शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को काफी बढ़ा देता है।

इस खेल को खेलने से आपका संपूर्ण विकास होता है, मानसिक विकास के साथ-साथ शारीरिक विकास भी। खो-खो खेल आपकी एकाग्रता को भी बढ़ाता है। एकाग्रता का जीवन में बहुत अधिक महत्व होता है। चाहे आप किसी भी फील्ड में हो। खो-खो खेलने से कभी भी हम चिड़चिड़ापन महसूस नहीं करते है, क्योंकि यह खेल बहुत ही आनंदमय तरीके से खेला जाता है, और इसे खेलने से पैरों की मांसपेशियां काफी मजबूत बनती है।

खो-खो खेल आलस्य को भी दूर भगाता है, और हमारे मन को भी बहुत शांत रखता है। इस खेल को खेलने के लिए धीरज की भी काफी आवश्यकता होती है, तो इस खेल को खेलने से हमारे अंदर धैर्य का भी विकास होता है। इसलिए, हम सभी को खो-खो खेल को अपने जीवन में अपनाना चाहिए।

निष्कर्ष

आज के समय में जीवन में खेलों के बढ़ते महत्व को देखते हुए सभी को इंडोर नहीं बल्कि आउटडोर गेम को अपने जीवन में अपनाने का ज़रूर प्रयास करना चाहिए, और इस प्रकार के खो-खो गेम को ज़रूर खेलना चाहिए। जिसे, आप उत्साह, उमंग और आनंद के साथ, बहुत आसानी से खेल सकते हैं और उसके रोमांच का आनंद उठा सकते हैं। क्योंकि, खेल जीवन का एक अहम हिस्सा बनते जा रहा है।


खो खो खेल निबंध 500 शब्द का

प्रस्तावना

खो-खो का खेल भारत के परंपरागत खेलों में से एक हैं। जिसे, अब धीरे-धीरे अपनी पहचान मिल रही है। इस खेल ने बहुत अच्छे-अच्छे खिलाड़ी देश को दिए हैं, जिन्होंने देश का नाम विश्व पटल पर रोशन किया है। अब यह खेल दूसरे देशों में भी खेला जाने लगा है, और दूसरे देशों के लोग भी अब इस खेल में भाग ले रहे हैं।

इस तरह खो-खो का खेल आज एक अच्छे मुकाम पर है। अब खो-खो के खेल से संबंधित विभिन्न प्रकार की प्रतियोगिताओं का भी आयोजन किया जा रहा है, जिसमें सभी छात्र-छात्राएं भाग ले रही हैं। भारत हर साल ‘खेलो इंडिया‘ का आयोजन करता है, जिससे खो-खो खेल को बहुत वरीयता मिली है। सभी इसमें बढ़-चढ़कर भाग ले रहे हैं।

खो-खो के खेल का सभी विद्यालयों में डिस्ट्रिक्ट लेवल पर, स्टेट लेवल पर आयोजन करवा कर इसमें भाग लेने वाले विद्यार्थियों को सर्टिफ़िकेट और प्रोत्साहन राशि देकर उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। ताकि वे आगे चलकर खो-खो के प्रसिद्ध खिलाड़ियों की तरह बन सके, और भारत का नाम रोशन कर सकें।

खेलेगा इंडिया तभी तो बढ़ेगा इंडिया

भारत में आयोजित होने वाली ‘खेलो इंडिया’ ने भी खो-खो खेल के विकास में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई हैं। इस खेल को टीवी पर देखने से या इस खेल के बारे में सुनने से अब ज्यादा से ज्यादा लोग इस खेल में अपनी रुचि दिखा रहे हैं, और उस में भाग ले रहे हैं। खो-खो का खेल दो टीमों के बीच खेला जाता है। दोनों टीम मे से 9-9 के खिलाड़ी इस खेल में भाग लेते हैं।

यह बहुत ही रोमांचक और आनंदमय खेल होता है। जिसे, खेलने वाले सभी लोग बिना किसी आपसी मतभेद के इस खेल को उत्साह के साथ खेलते हैं। इस खेल ने बहुत सारे ‘अर्जुन अवॉर्ड’ जीतने वाले खिलाड़ी दिए हैं, जिन्होंने विश्व भर में भारत का डंका बजाया है। ‘प्रो कबड्डी लीग’ की सफलता के बाद अब खो-खो के लिए भी लीग शुरू करने की तैयारी की जा रही जिससे खो-खो खिलाड़ियों को और अधिक प्रोत्साहन मिलेगा।

खो-खो खेलने के नियम

  • चूंकि यह खेल दो टीमों के बीच खुले मैदान में खेला जाता है। जिसमें, प्रत्येक टीम से 9 खिलाड़ी भाग लेते हैं।
  • एक मैच में 4 चरण होते हैं अर्थात पारियाँ होती हैं। जिसमें, प्रत्येक पारी में कुछ मिनट का समय होता है। प्रत्येक टीम दो पारियों में धावक का रोल अदा करती है, और दो पारियों में चेज़र का। प्रारंभ में केवल 3 खिलाड़ी ही सीमा के अंदर होते हैं।
  • जब यह 3 खिलाड़ी आउट हो जाते हैं, तब दूसरे तीन खिलाड़ी मैदान के अंदर आते हैं, और खेलते हैं। 
  • चेंजर टीम का एक खिलाड़ी धावक को पकड़ने के लिए खड़ा होता है, और वही बाकी आठ खिलाड़ी 30 x 30 से.मी. वर्ग में बैठे होते हैं।
  • दौड़ने वाला धावक बैठे हुए खिलाड़ियों में से किसी एक को ‘खो’ देता है। 
  • खो देने के बाद जिस खिलाड़ी को खो दिया जाता है, वह खिलाड़ी तुरंत उठकर धावक को पकड़ने के लिए दौड़ता है, और उसका स्थान पहले वाला खिलाड़ी ले लेता है।
  • इस प्रक्रिया के दौरान अगर चेज़र टीम का खिलाड़ी धावक टीम के दौड़ने वाले खिलाड़ी से स्पर्श हो जाता है, तो चेजर टीम को अंक प्राप्त हो जाएंगे।

निष्कर्ष

इसलिए हम सभी के जीवन में खेल का बड़ा महत्व है। खेल हमें शारीरिक रूप से तो तंदुरुस्ती देता है, साथ साथ यह मानसिक विकास के लिए भी काफी आवश्यक है। यह शरीर को फुर्तीला और स्वस्थ बनाए रखता है। खो-खो का खेल एकाग्रता बनाए रखने के लिए भी काफी जरूरी है।

खेल और आराम में करो खेल का चुनाव, 
खेलों द्वारा विकसित होता शरीर तथा,
स्वास्थ्य पर पड़ता है इसका अच्छा प्रभाव।

जीवन में अगर हमें कहीं पर भी आगे बढ़ना है, तो एकाग्रता की बहुत आवश्यकता होती है। एकाग्रता पढ़ाई में भी, या चाहे वह किसी भी फील्ड में हो एकाग्रता इंसान के लिए बहुत जरूरी है, इसलिए सभी को अपने जीवन में किसी न किसी रूप में खेल को अपनाना चाहिए, और खो-खो जैसे खेलों में अपना योगदान देना चाहिये।

खो-खो खेल का निबंध पर अपनी प्रतिक्रिया दीजिये👇


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बेचारा नोबिता………इसको हमेशा Test में जीरो मिलता हैं। आप इसके जैसा मत बनना। Mera Priya Khel Kho Kho Par Nibandh को अच्छे से पढ़ना और Test में अच्छे नंबर लाना।😉


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अंतिम शब्द

मेरे प्यारे दोस्तों! मुझे पूरी उम्मीद हैं की मेरे द्वारा लिखा गया खो खो पर निबंध आपको जरूर पसंद आया होगा। आप इस मेरा प्रिय खेल खो खो पर निबंध हिंदी में को अपने करीबी दोस्तों या रिश्तेदारों को ज़रूर शेयर कीजियेगा, जिनको इस निबंध की अति आवश्यकता हो।

मैंने अपनी पूरी कोशिश की हैं आपको एक बेहतर मेरा प्रिय खेल खो खो पर निबंध प्रदान करने की। और अगर फिर भी मुझसे जाने-अनजाने में कोई गलती हो तो गई हैं तो माफ़ बुल्कुल मत करना। नीचे दिए Comment Box💬 में मुझे जरूर डाँटना😥 ताकि अगली बार में गलतीयाँ न करूं। 😊

हम अगली बार फिर मिलेंगे, दुआओं में याद रखना!😊🙏

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