नदी की आत्मकथा हिंदी निबंध {लघु एवं दीर्घ निबंध, अलग-अलग शब्द सीमा एवं रुपरेखा सहित}| Nadi Ki Atmakatha In Hindi 2023

नदी की आत्मकथा हिंदी निबंध: मैं नदी हूं। मैं प्रकृति के जीवन का एक महत्वपूर्ण अंग हूं। मेरी गति के आधार पर लोग मुझे कई नाम से जानते हैं। जैसे जब मैं सरक-सरक कर चलती हूं, तो लोग मुझे सरिता कहते हैं। जब मैं सतत प्रवाह में हो गई थी, तो सब मुझे प्रवाहिनी कहने लगे। जब मैं दो तटों के बीच बह रही थी, तो सब मुझे तटिनी कहने लगे और जब मैं तेज गति से बहने लगी, तो लोग मुझे क्षिप्रा कहने लगे। साधारण रूप से मैं नदी या नहर ही हूं। लोग चाहे मुझे किसी भी नाम से बुलाये, लेकिन मेरा हमेशा एक ही काम होता है, दूसरों के काम में आना। मैं प्राणियों की प्यास बुझाती हूं, उन्हें जीवन रूपी वरदान देती हूं।

नदी की आत्मकथा हिंदी निबंध
नदी की आत्मकथा हिंदी निबंध

EssayToNibandh.com पर आज हम नदी की आत्मकथा हिंदी निबंध पढ़ेंगे। जो की अलग अलग शब्द सीमा के आधार पर लिखे गए हैं। आप Nadi Ki Atmakatha In Hindi को ध्यान से और मन लगाकर पढ़ें और समझें। नदी की आत्मकथा पर हमारे द्वारा सात निबंध लिखे गए हैं, इन निबंध में हमने यमुना नदी, गंगा नदी की आत्मकथा को भी दर्शाया है।

आइये! Nadi Ki Atmakatha In Hindi को अलग अलग शब्द सीमाओं के आधार पर पढ़ें।

नोट- यहां पर दिया गया नदी की आत्मकथा हिंदी निबंध कक्षा(For Class) 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11, 12,(विद्यालय में पढ़ने वाले) विद्यार्थियों के साथ-साथ कॉलेज के विद्यार्थियों के लिए भी मान्य हैं।


नदी की आत्मकथा हिंदी निबंध 80 लाइन (Autobiography Of River Hindi Essay 80 Line)

1) मैं नदी हूं और प्राणियों की प्यास बुझाती हूं।

2) मैंने सदैव सभी को सब कुछ दिया है, परंतु मैंने कभी भी किसी से कुछ भी नहीं मांगा।

3) मैं अपने जीवन से बहुत खुश हूं, क्योंकि मैं प्राणियों के काम किसी न किसी रूप में अवश्य आती हूं।

4) मैं अपनी व्यथा-कथा किसी को नहीं बता सकती, क्योंकि मैं एक नारी हूं। इस जगत को देना ही मेरा धर्म है।

5) सभी जन मेरे पुत्र के समान है, मुझे लूटे या मेरी गोद में खेले यह तो उनकी इच्छा है।

स्वच्छ रहेगा देश तभी,
जब स्वच्छ रहेगी नदियां सभी।


नदी की आत्मकथा हिंदी निबंध 10 लाइन (Autobiography Of River Hindi Essay 10 Line)

1) मैं पहाड़ों में पैदा हुए नीर का एक स्रोत हूं।

2) प्रकृति ने मुझे प्राणियों के उद्धार लिए बनाया है।

3) मेरा मुख्य कार्य जल की आपूर्ति करना है।

4) कई जीव मुझ में पनपते हैं और मुझ में ही रहते हैं।

5) मेरे सामने कई बाधाएं आती हैं, लेकिन मैं उन बाधाओं का साहसपूर्वक सामना करके अपना काम पूरा करती हूं।

6) बिजली बनाने के लिए मेरे जल का उपयोग किया जाता है।

7) मेरे जल का उपयोग खेतों में सिंचाई के लिए होता है।

8) मेरे कारण फसल उगती है, चारों ओर हरियाली होती है।

9) मेरे इतने उपयोग हैं, फिर भी मनुष्य कारखाने का दूषित पानी, कचरा और प्लास्टिक मुझ में ही डालते हैं।

10) मैं इंसानों से केवल यही अनुरोध करती हूं, कि वह मेरे साफ पानी को दूषित ना करें और मुझे स्वच्छ रखने में अपनी भूमिका निभाएं।

जिसे अब तक ना समझे, वह कहानी हूं मैं।
मुझे बर्बाद मत करो, पानी हूं मैं।


नदी की आत्मकथा हिंदी निबंध 150 Words

मैं गंगा नदी हूं। मैंने कभी भी किसी का बुरा नहीं चाहा है। मैंने हमेशा लोगों की मदद की है, तो फिर लोग मुझे दूषित क्यों कर रहे हैं। मैंने आपके जीवन को जल देकर आप की प्यास बुझाई है, तो आप मुझे अशुद्ध करके पीङा क्यों पहुंचा रहे हैं। मैं सुंदर और स्वच्छ रहना चाहती हूं। आप सभी अपना योगदान दें और मुझे स्वच्छ करें।

नदियों के प्रति जागरूक हो,
नदी स्वच्छ व निर्मल हो।

मुझे धरती पर आप लोगों को जल देने के लिए भेजा गया है। मैं आपको जल देती रहूंगी लेकिन आप लोगों का यह दायित्व है कि आप मुझे दूषित ना करें। मैं ईश्वर द्वारा यहां पर भेजी गई हूं और मैं कई राज्यों और प्रांतों से होते हुए समुद्र में मिल जाती हूं।

आज सभी लोग मेरे जल का उपयोग अपने दैनिक जीवन में करते हैं। आप लोगों को मेरे जल को प्रदूषित नहीं करना चाहिए। आप लोगों को यह संकल्प लेना होगा, कि आप किसी तरह की कोई गंदगी मेरे आस-पास नहीं फैलाएंगे।

खतरे में है नदी की स्वच्छता,
फेंका जाता है कूड़ा कचरा।


नदी की आत्मकथा हिंदी निबंध 250 Words

यमुना नदी की कहानी

मैं यमुना नदी हूं। हिमालय मेरे पिता है। मैं पल-पल समुद्र की ओर चलती जाती हूं। कहीं हरी-हरी घाटियां, कहीं बर्फ की चादर ओढ़े पहाड़, कहीं गहरी खाई है, तब भी मैं नहीं रुकती। जन्म से लेकर समुद्र में मिलने तक मैं ठहरती नहीं हूं। मैं भूखे प्यासे जनों को अन्न जल का दान करने के लिए दौड़ती फिरती हूं।

नदी तो है असली सोना,
इसे नहीं अब हम को खोना।

मैं किसानों द्वारा रोपे गए बीजों को विकसित करती हूं। उन्हें फल सब्जी बनाकर लोगों का पेट भर्ती हूं। कपास पैदा करके तन को वस्त्र ओढ़ाती हूं। वृक्षों की लकङियाँ प्रदान करके भवनों का निर्माण करती हूं। सर्वत्र हरियाली उगाकर पर्यावरण को स्वच्छ बनाती हूं।

मेरे जल के बिना ना बांध बन सकते हैं और ना ही बिजली उत्पन्न हो सकती है। ना कारखाने चल सकते हैं और ना ही आधुनिक चकाचौंध में सभ्यता खड़ी हो सकती है। मैं समतल धरती में उतरने से पहले स्वच्छ और सुंदर रहती हूं, किंतु इस धरती के लोग बड़े अकृतज्ञ हैं।

इस अर्पण में कुछ और नहीं,
केवल उत्सर्ग छलकता है।
मैं दे दूं और न फिर कुछ लूँ,
इतना ही सरल झलकता है।

ये मुझे धन्यवाद देने के बजाए मुझमें कचरा डालते हैं, मुझे गंदा कर देते हैं। इनके कारण मेरा जल दूषित हो रहा है। ये नहीं समझते कि मुझे हानि पहुंचा कर ये स्वयं को हानि पहुंचा रहे हैं।


नदी की आत्मकथा हिंदी निबंध 300 Words

प्रस्तावना

मैं पहाड़ों पर पैदा हुए नीर का एक स्त्रोत हूं। मेरी उत्पत्ति पहाड़ों में बर्फ पिघलने से हुई है। प्रकृति ने मुझे प्राणियों के उद्धार के लिए बनाया है। मेरा मुख्य कार्य जीवो को नीर पूर्ति करना है। मैं यहां भी बंजर भूमि से होकर बहती हूं। मुझमें बंजर भूमि को भी हरा-भरा बनाने की क्षमता है।

नदी की कठिनाइयां

समुद्र में मिलने से पहले और पहाड़ों से निकलने के बाद मुझे काफी मेहनत करनी पड़ती है। मेरे सामने कई बाधाएं आती हैं, लेकिन मैं उन बाधाओं का साहस पूर्वक सामना करके अपना काम पूरा करती हूं। मेरे अवरोधक पदार्थ छोटे-बङे कंकङ, पत्थर, चट्टान है। लेकिन मैं आसानी से उन्हे पार कर लेती हूं। उनमें अपना रास्ता बना ही लेती हूं।

नदी की उपयोगिता

यदि मेरे उपयोग की गणना की जाए तो वह बहुत अधिक है। मेरे नीर का उपयोग बिजली पैदा करने और खेतों की सिंचाई जैसे कृषि कार्य करने के लिए किया जाता है। बिजली इंसानों के लिए एक बहुत ही महत्वपूर्ण चीज है, जिसकी वजह से इंसान इतनी तरक्की कर पाया है। मनुष्य के आधे से ज्यादा कार्य बिजली के कारण चल रहे हैं।

बिना बिजली मानव बहुत ज्यादा पिछड़ जाएगा। मेरे नीर का उपयोग सिंचाई के लिए भी किया जाता है, जिसके कारण फसलें होती है और चारों तरफ हरियाली होती है। ये फसले अनाज देती है, जिससे इस सृष्टि के लिए भोजन की आवश्यकता की पूर्ति होती है।

नदी से है पानी की आस,
नदी बचाने का करो प्रयास।

उपसंहार

मेरे इतने उपयोगी होने के बावजूद, मानव अभि भी मुझे दूषित करने की कोशिश कर रहा है। कारखाने का दूषित पानी, कचरा और प्लास्टिक मुझ में मनुष्यों द्वारा फेंका जाता है, जो मेरे पानी को दूषित कर रहा है। इसलिए मैं इंसानों को यह अनुरोध करना चाहती हूं, कि वह मेरे पानी को दूषित ना करें और मुझे साफ रखने में अपनी भूमिका निभाएँ।

Nadi Ki Atmakatha Nibandh
Nadi Ki Atmakatha Nibandh

नदी की आत्मकथा हिंदी निबंध 400 Words

भूमिका

मैं नदी हूं। मैं प्रकृति के जीवन का एक महत्वपूर्ण अंग हूं। मेरी गति के आधार पर लोग मुझे कई नाम से जानते हैं। जैसे जब मैं सरक-सरक कर चलती हूं, तो लोग मुझे सरिता कहते हैं। जब मैं सतत प्रवाह में हो गई थी, तो सब मुझे प्रवाहिनी कहने लगे। जब मैं दो तटों के बीच बह रही थी, तो सब मुझे तटिनी कहने लगे और जब मैं तेज गति से बहने लगी, तो लोग मुझे क्षिप्रा कहने लगे।

साधारण रूप से मैं नदी या नहर ही हूं। लोग चाहे मुझे किसी भी नाम से बुलाये, लेकिन मेरा हमेशा एक ही काम होता है, दूसरों के काम में आना। मैं प्राणियों की प्यास बुझाती हूं, उन्हें जीवन रूपी वरदान देती हूं।

नदी का उद्गम

जिस जगह से नदी की धारा बहती है, उसे नदी घाटी कहा जाता है। नदी का जिस स्थान पर जन्म होता है, उसे उद्गम कहते हैं। यह नदी सर-सर आवाज के साथ बहती है। पहाड़ों पर जमे हुए बर्फ पर सूर्य की किरणें पङने के कारण नदी का निर्माण होता है।

गंदे हो गए सारे नदी और नाले,
अब बनो इस के रखवाले।

यह कभी झरनों, तो कभी नेहरू, तो कभी नदी के रूप में बहती है। नदी अन्य चट्टानों से टकराकर अपना रूप धारण करती है। बहुत सारी नदियों के संगम होने पर सागर बनता है।

नदी की विशेषता

नदी का स्वभाव होता है, हमेशा आगे बढ़ते रहना। नदियों के तट पर सभी सभ्यताओं का जन्म हुआ। बहुत सारी नदियों का वर्णन पुराणों में भी किया गया है। नदियों के कारण आज बहुत से स्थान तीर्थ स्थल के नाम से जाने जाते हैं, वह तीर्थ स्थल के रूप में पूजे जाते हैं।

नदी का महत्व

नदियों के द्वारा हमें निर्मल जल प्राप्त होता है। नदी हमारी बहुत सहायक होती है और हमारी अच्छी दोस्त भी होती है। उसके साथ-साथ खेतों में सिंचाई के लिए भी बहुत सहायक होती हैं। इन नदियों में बहुत सारी मछलियां, वनस्पति और मगरमच्छ इत्यादि रहते हैं। नदियों के जल से बिजली का निर्माण भी किया जाता है।

चलो कुछ नाम करें,
नदी बचाने का काम करें।

निष्कर्ष

नदी जल का मुख्य स्त्रोत है, लेकिन आज के समय में लोग नदियों को दूषित कर रहे हैं। लोग उसमें कूडा-कचरा फेंकने लगे हैं। हम सभी लोगों को प्रकृति के इस उपहार को सुरक्षित रखना चाहिए। नदियों को साफ रखना चाहिए और उन्हें दूषित नहीं करना चाहिए।


नदी की आत्मकथा हिंदी निबंध 500 Words

नदी का जन्म

मैं नदी हूँ। मेरा जन्म पर्वत मालाओं की गोद से हुआ है। बचपन से ही मैं चंचल थी। एक स्थान पर टिक कर बैठना तो मुझे आता ही नहीं। निरंतर चलते रहना, कभी धीरे-धीरे और कभी तेजी से यही मेरा काम है। मैंने आगे बढ़ना सीखा है, रुकना नहीं। कर्म में ही मेरा विश्वास रहा है, फल की इच्छा मैंने कभी नहीं की।

नीचे गिरना सदैव पता नहीं होता नदी,
पर्वत से गिरकर सागर बन जाती है।

गृह त्याग

पर्वत मालाएं मेरा घर है, पर मैं सदा वहां कैसे रह सकती हूं? भले लड़की कभी अपने माता-पिता के घर सदा रह सकती है। उसे माता-पिता का घर तो छोड़ना ही होता है। मैं भी इस सच्चाई को जानती हूं, इसलिए मैंने भी पिता का घर छोड़ने का निश्चय कर लिया है।

जब मैंने अपने पिता का घर छोड़ा तो सभी ने मुझे अपनाना चाहा। प्रकृति ने भी मेरा पूरा साथ दिया। मैं बड़े-बड़े पत्थरों को तोड़ती, उन्हें धकेल के आगे बढ़ी। पेड़ों पर पत्ते तक मुझसे आकर्षित हुए बिना नहीं रह सके। पर्वतीय प्रदेश के लोगों की सरलता और निश्चितता ने मुझे बहुत प्रभावित किया। मैं उन्हीं के समान सरल व निश्छल बनी रही।

यह मेरी आत्मकथा कहती है।
तारीफों के पुल के नीचे,
स्वार्थ की नदी बहती है।

मार्ग में बड़े-बड़े पत्थरों और चट्टानों ने मेरा रास्ता रोकना चाहा। पर वे अपने उद्देश्य में सफल नहीं हो पाए। मेरी धारा को रोकना उनके लिए असंभव बन गया। मैं उन्हें चीरती आगे बढ़ चली।

नदी का मैदानी भागों में प्रवेश

पहाड़ों को चीर मैं मैदानी भाग में पहुंची। यहां पहुंचते ही मुझे बचपन की याद आने लगी। पहाड़ी प्रदेश में घुटनों के बल सरक-सरक कर आगे बढ़ती रही थी और अब मैदान में पहुंचकर सरपट भागती दिखाई देती हूं। मैंने बहुत से नगरों को हंसी दी है। बहुत क्षेत्र में हरियाली मेरे ही कारण हुई है।

लोगों को खुशी देती नदी

मैं ही समाज और देश की खुशहाली के लिए अपना सर्वस्व निछावर करती रही हूं। मुझ पर बांध बनाकर नहर निकाली गई। उनसे दूर-दूर तक मेरा निर्मल जल ले जाया जाता है। यह जल पीने कल कारखाने चलाने और खेतों को सींचने के काम में लाया गया।

उसी पहाड़ी से छलांग लगाती हुई,
टूट कर बूंद-बूंद हुई नदियां देखी हैं।

मेरे पानी को बिजली पैदा करने के लिए काम में लाया गया। यह बिजली देश के कोने-कोने मे प्रकाश करने और रेडियो, टीवी आदि चलाने के लिए काम में लाई गई।

अहंकार शून्य

यह सब कुछ होते हुए भी मुझ में अहंकार का लेश मात्र भी नहीं है। मैं अपने प्राणों की एक-एक बूंद समाज और प्राणी जगत के हित के लिए अर्पित कर देती हूं। अपना सर्वस्व लुटा देती हूं, इसका मुझे संतोष है। मुझे प्रसन्नता है कि मेरा अंग-अंग समाज के हित में लगा है। “वसुधैव कुटुंबकम” ही मेरा जीवन जीने का मूल मंत्र है। मैं इस भावना को अपने हृदय में संजोए यात्रा पथ पर बढ़ती।

उपसंहार

नदी का लक्ष्य तो समुद्र की प्राप्ति है।

इसे मैं भी कभी नहीं भूल पाई। समुद्र के मिलन की भावना जागृत होते ही नदी की चाल में तेजी आ जाती है। समुद्र के दर्शन से ही नदी प्रसन्न हो उठती है। नदी अपने प्रियतम की बाहों में विलीन होकर अर्थात समुद्र से मिलकर उसी में समाहित हो जाती है।


मेरे प्यारे दोस्तों! मुझे पूरी उम्मीद हैं की मेरे द्वारा लिखा गया नदी की आत्मकथा हिंदी निबंध आपको जरूर पसंद आया होगा। आप इस नदी की आत्मकथा पर निबंध रूपरेखा सहित को अपने करीबी दोस्तों या रिश्तेदारों को ज़रूर शेयर कीजियेगा, जिनको इस निबंध की अति आवश्यकता हो।

मैंने अपनी पूरी कोशिश की हैं आपको एक बेहतर नदी की आत्मकथा निबंध प्रदान करने की। और अगर फिर भी मुझसे जाने-अनजाने में कोई गलती हो तो गई हैं तो माफ़ बुल्कुल मत करना। नीचे दिए Comment Box💬 में मुझे जरूर डाँटना😥 ताकि अगली बार में गलतीयाँ न करूं। 😊

हम अगली बार फिर मिलेंगे, दुआओं में याद रखना!😊🙏

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