Best 9* Paryavaran Sanrakshan Par Nibandh हिंदी में (पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, विश्व पर्यावरण संरक्षण दिवस, पर्यावरण संरक्षण दिवस)

Paryavaran Sanrakshan Par Nibandh | Paryavaran Sanrakshan Essay In Hindi | Paryavaran Sanrakshan: पर्यावरण संरक्षण पर निबंध (पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, विश्व पर्यावरण संरक्षण दिवस, पर्यावरण संरक्षण दिवस)

Best 9* Paryavaran Sanrakshan Par Nibandh हिंदी में (पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, विश्व पर्यावरण संरक्षण दिवस, पर्यावरण संरक्षण दिवस)
Paryavaran Sanrakshan Par Nibandh

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आज हम पर्यावरण संरक्षण पर निबंध पढ़ेंगे। जो की अलग अलग शब्द सीमा के आधार पर लिखे गए हैं। आप Paryavaran Sanrakshan Essay In Hindi को ध्यान से और मन लगाकर पढ़ें और समझें।

Paryavaran Sanrakshan Par Nibandh को निम्न शब्द सीमा के आधार पर लिखा गया है-

  1. Paryavaran Ka Sanrakshan Nibandh 80 Shabd
  2. Paryavaran Sanrakshan Essay In Hindi 100 Words
  3. Paryavaran Sanrakshan 150 Shabo Ka
  4. पर्यावरण संरक्षण 200 शब्दों का निबंध 
  5. पर्यावरण संरक्षण पर निबंध 250 शब्दों में
  6. Paryavaran Ka Sanrakshan Par Nibandh 300 Shabd 
  7. Environmental Protection Essay in Hindi 400 Words
  8. पर्यावरण संरक्षण निबंध 500 शब्द 
  9. पर्यावरण संरक्षण के उपाय 600 शब्दों में

आइये! 
Paryavaran Sanrakshan Nibandh को अलग अलग शब्द सीमाओं के आधार पर पढ़ें।

नोट- यहां पर दिया गया Environmental Protection Essay in Hindi कक्षा(For Class) 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11, 12,(विद्यालय में पढ़ने वाले) विद्यार्थियों के साथ-साथ कॉलेज के विद्यार्थियों के लिए भी मान्य हैं।

Paryavaran Ka Sanrakshan Nibandh 80 Shabd

Paryavaran Ka Sanrakshan Nibandh 80 Shabd
Paryavaran Ka Sanrakshan Nibandh 80 Shabd

‘पर्यावरण की रक्षा करना,
जीवन की सुरक्षा करना।’

अगर पृथ्वी पर जीवन की रक्षा करनी है तो ‘पर्यावरण को बचाना ही होगा। पर्यावरण जीवन की आधारशिला है। पर्यावरण सभी प्रकार से पृथ्वी की रक्षा करता है।

पर्यावरण के बिना पृथ्वी पर जीवन संभव नहीं है। इसलिए पर्यावरण की रक्षा का प्रयास सभी को अपने-अपने स्तर पर करना चाहिए। और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली चीजों का कम से कम उपयोग करना चाहिए।

मानव अपनी समस्त क्रियाकलापों के लिए पर्यावरण पर ही निर्भर है। पर्यावरण में ऐसे सभी तत्व मौजूद हैं जो पृथ्वी पर रहने वाले सभी जीवों की आवश्यकताओं को पूरा कर सकते हैं।

मानवीय हस्तक्षेप पर्यावरण को प्रदूषित कर रहा है इसलिए पर्यावरण का संरक्षण करना सभी का दायित्व है।

Paryavaran Sanrakshan Par Nibandh 100 words

Paryavaran Sanrakshan Essay In Hindi 100 Words
Paryavaran Sanrakshan Essay In Hindi 100 Words

‘पर्यावरण’ पृथ्वी पर जीवन के लिए बेहद आवश्यक है। पर्यावरण के बिना पृथ्वी पर जीवन संभव नहीं है। पर्यावरण के कारण ही पृथ्वी पर सभी मनुष्य, जीव-जंतु, वनस्पतियों का अस्तित्व संभव है।

पर्यावरण के पांच तंत्र जिसे ‘पंचतंत्र’ भी कहा जाता है, इसके बिना जीवन के अस्तित्व की कल्पना भी नहीं की जा सकती है। जल, पृथ्वी, आकाश, हवा और अग्नि।

पर्यावरण का अर्थ- हमारे चारों ओर फैले वातावरण को ही पर्यावरण कहा जाता है।

हम अपनी छोटी से छोटी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए पर्यावरण और प्रकृति पर ही निर्भर हैं। लेकिन लगातार बढ़ती मानवीय लालसा और प्राकृतिक दोहन के कारण पर्यावरण का संतुलन लगातार बिगड़ता जा रहा है। जिसके गंभीर परिणाम हमें देखने को मिल ही रहे हैं।

Paryavaran Sanrakshan 150 Shabo Ka

Paryavaran Sanrakshan 150 Shabo Ka
Paryavaran Sanrakshan 150 Shabo Ka

‘पर्यावरण’ पृथ्वी के चारों ओर ढकी एक मोटी चादर के समान है, जो पृथ्वी पर जीवन की रक्षा करता है। साथ-साथ जीवन जीने के लिए आवश्यक तत्व को बनाए रखने में मदद करता है।

प्राचीन समय में पर्यावरण बहुत ही स्वच्छ था। प्राचीन समय में भी मनुष्य अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए पर्यावरण पर ही निर्भर था और आज भी पर्यावरण पर ही निर्भर है।

लेकिन जिस आधुनिकता और औद्योगिकीकरण के युग में प्राकृतिक संसाधनों का अंधाधुंध उपभोग मानव अपने विकास के लिए कर रहा है। वह एक तरह से पर्यावरण के साथ खिलवाड़ हो रहा है।

जिसके गंभीर परिणाम हमें आज देखने को मिल ही रहे हैं और आने वाले भविष्य में भी इसके और अधिक भयावह परिणाम हमें देखने को मिलेंगे।

अमेरिका की एक महान वैज्ञानिक मार्गरेट मीड (Margaret Mead) ने कहा था “हमारा कोई समाज नहीं होगा अगर हम पर्यावरण को नष्ट करते हैं।”

पर्यावरण संरक्षण आज के समय में एक जरूरत बन गया है, क्योंकि अगर हमने अभी से ही पर्यावरण के संरक्षण पर ध्यान दिया नहीं दिया तो, भविष्य में पृथ्वी पर जीवन संभव नहीं होगा। और मानव एक प्राकृतिक धरोहर से भरपूर ग्रह से हमेशा के लिए अपने अस्तित्व को नष्ट कर देगा।

पर्यावरण संरक्षण 200 शब्दों का निबंध 

पर्यावरण संरक्षण 200 शब्दों का निबंध
पर्यावरण संरक्षण 200 शब्दों का निबंध

प्रस्तावना:

पर्यावरण मनुष्य के जीवन में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। पर्यावरण के बिना वह अपने अस्तित्व की कल्पना भी नहीं कर सकता। पर्यावरण और प्रकृति एक दूसरे के पूरक हैं। दोनों के बिना पृथ्वी पर जीवन संभव नहीं है।

जिस प्रकार लगातार पर्यावरण में प्रदूषण बढ़ता जा रहा है, इससे भविष्य में पृथ्वी पर मानव जीवन असंभव हो जाएगा। इसलिए हम सभी को पर्यावरण संरक्षण के विषय पर गंभीरता पूर्वक विचार करना होगा। इसके संरक्षण के तरीकों के बारे में सोचना होगा। तभी जाकर पर्यावरण के प्रति हम अपना कर्तव्य निभा सकते हैं।

पर्यावरण प्रदूषण के लिए जागरूकता:

बढ़ता पर्यावरण प्रदूषण आज के समय में एक वैश्विक मुद्दा बन गया है। और बने भी क्यों ना? जिस तरह से मानव आधुनिकता की दौड़ भाग भरी जिंदगी में प्राकृतिक संसाधन से भरपूर पृथ्वी जैसे सुंदर ग्रह के संतुलन के साथ खिलवाड़ किया है।

वहीं पर्यावरण ने इसके गंभीर परिणाम मानव जाति को दिखाने शुरू कर दिए हैं। भविष्य में इसके और भी विकराल रूप  स्वाभाविक रूप से देखने को मिलेंगे।

निष्कर्ष:

मनुष्य अपनी मूलभूत आवश्यकताओं को पर्यावरण के जरिए ही पूरा करता है। अगर पर्यावरण हमें अपने संसाधनों का उपभोग करने की इजाज़त दे रहा है तो हमारा पर्यावरण के प्रति जो कर्तव्य हैं। उसे समझते हुए पर्यावरण का संरक्षण करने की ओर ध्यान देना चाहिए।

हमें ज्यादा से ज्यादा पेड़-पौधे लगाना चाहिए।क्योंकि-

‘चारों तरफ हरियाली लाये,
इसी हरियाली से पर्यावरण में ख़ुशहाली लाये।’

पर्यावरण संरक्षण पर निबंध 250 शब्दों में

पर्यावरण संरक्षण पर निबंध 250 शब्दों में
पर्यावरण संरक्षण पर निबंध 250 शब्दों में

प्रस्तावना:

आज के समय में पर्यावरण का संरक्षण एक गंभीर सवाल है। जिसका जवाब हम सभी के पास है लेकिन हम उसपर अमल करना नहीं चाहते हैं।

पर्यावरण क्या हैं?- हमारे चारों ओर फैले वातावरण व प्रकृति के सौंदर्य जो पृथ्वी पर जीवन के अस्तित्व के लिए आवश्यक हैं, और उसे बनाए रखता है उसी को ही पर्यावरण कहा जाता है।

पर्यावरण संरक्षण का तात्पर्य है- पर्यावरण को किस प्रकार सुरक्षा किया जाए।

बढ़ता पर्यावरण प्रदूषण:

पर्यावरण है तभी जीवन संभव है। लेकिन आज के आधुनिकता भरी जिंदगी में विडंबना देखिए, हम लगातार अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए, अपनी लालसा में वही पर्यावरण का दोहन कर रहे हैं और इसकी उपेक्षा कर रहे हैं। बिना कुछ सोचे समझे कि आने वाले समय में इसके दुष्परिणाम क्या होंगे।

मनुष्य अपने जीवन के लगभग सभी क्रियाकलापों को पूरा करने के लिए पर्यावरण पर ही आश्रित है वह भी प्राचीन समय से ही। क्योंकि पर्यावरण के पंचतंत्र के बिना पृथ्वी पर मानव जीवन बिल्कुल भी संभव नहीं है।

लेकिन मनुष्य अपने विकास के लिए लगातार ‘वायुमंडल’ को अस्वच्छ करता आ रहा है और उसने पृथ्वी के पूरे पारिस्थितिक तंत्र को लगभग नष्ट कर दिया है। जिसमें सभी जीव-जंतु और वनस्पति मौजूद होते हैं।

विकास की अंधी दौड़ में हमने अपना विकास तो किया हैं लेकिन कुछ अभिशाप भी अपने लिए खुद ही लेकर आ गए। पर्यावरण का संतुलन बिगड़ने से आज जलवायु में तमाम तरह के परिवर्तन हो रहे हैं।

निष्कर्ष:

पर्यावरण सुरक्षित रहेगा तभी हम सुरक्षित रहेंगे, इसलिए तो कहा जाता है-

‘आओ हम सब मिलकर पर्यावरण बचाए,
सभी का जीवन सुरक्षित बनाये।’

क्योंकि पर्यावरण पर ही जीवन आश्रित है। अतः पर्यावरण संरक्षण हम सभी का कर्तव्य है।

Paryavaran Ka Sanrakshan Par Nibandh 300 Shabd

Paryavaran Ka Sanrakshan Par Nibandh 300 Shabd
Paryavaran Ka Sanrakshan Par Nibandh 300 Shabd

प्रस्तावना:

‘पर्यावरण को सुरक्षित बनाओगे,
तभी तो इस जीवन को खुशहाल बनाओगे।’

यह सिर्फ एक पंक्ति नहीं यही पृथ्वी पर मानव जीवन का सार है। क्योंकि परि + आवरण = ‘पर्यावरण’। पर्यावरण पृथ्वी को आवरण के रूप में चारों ओर से ढका हुआ है।

जिसके सभी तत्व मानव जीवन के लिए अत्यंत उपयोगी है। पृथ्वी पर अगर मानव का अस्तित्व पनप रहा है तो वह पर्यावरण के कारण ही ही संभव है।

अगर भविष्य को बचाना है तो पर्यावरण का संरक्षण करना ही होगा। ‘पर्यावरण ही जीवन का आधार है’। अभी भी हम पर्यावरण को स्वच्छ और सुंदर बना सकते हैं जिससे पर्यावरण को बचाया जा सके और पृथ्वी पर जीवन को भी।

पर्यावरण संरक्षण के उपाय:

हम अपने दैनिक जीवन में ऐसे बहुत से कार्य करते हैं जिससे पर्यावरण के संसाधनों का नुकसान होता है। साथ-ही-साथ पर्यावरण प्रदूषित भी होता है। जिसे हम रोक सकते हैं।

  1. हम निजी वाहनों के स्थान पर सार्वजनिक वाहनों का अधिक से अधिक उपयोग करें तो वायु प्रदूषण को रोका जा सकता है।
  2. हम पेड़ों को काटने के स्थान पर अधिक से अधिक पेड़ोंको लगाए जिससे पर्यावरण का संतुलन बना रहे।
  3. हम अपने आसपास चारों तरफ साफ-सफाई रखें। कचरे को सीधे ऐसे ही ना फेंके। कचरे का सही से निपटान करें। इससे भी प्रदूषण को रोका जा सकता है।
  4. जब जल की जरूरत हो तब उतना ही जल का उपयोग करें इससे भी जल को संरक्षित किया जा सकता है। और कचरे और अपशिष्ट पदार्थों को सीधे नदियों-नालों में ना प्रवाहित करें इससे जल प्रदूषण को भी रोका जा सकता है।
  5. कार्बन उत्सर्जन करने वाले उपकरणों का कम से कम उपयोग करें इससे वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा को सीमित किया जा सकता है। और पर्यावरण का संतुलन ठीक किया जा सकता है।
  6. एकल प्रयोग प्लास्टिक के थैलों के स्थान पर जूट के थैलों का उपयोग करें।

निष्कर्ष:

पर्यावरण के महत्व को देखते हुए पर्यावरण का संरक्षण हम सभी की प्राथमिक ज़िम्मेदारी होनी चाहिए। क्योंकि जिस तरह से प्रकृति ने अपनी विकराल रूप दिखाने प्रारंभ कर दिए हैं। अगर हम पर्यावरण का इसी प्रकार दोहन करते रहे तो भविष्य में इसके और भी विकराल रूप से मानव जाति को सामना करना पड़ेगा।

Environmental Protection Essay in Hindi 400 Words

Environmental Protection Essay in Hindi 400 Words
Environmental Protection Essay in Hindi 400 Words

प्रस्तावना:

पर्यावरण का संतुलन लगातार बिगड़ता जा रहा है। यह बात हम नहीं बल्कि दुनिया की सभी वैश्विक संस्थान एवं बडे-बडे पर्यावरण वैज्ञानिक कह रहे हैं।

इस बढ़ते असंतुलन से पृथ्वी पर जीवन की संभावना कम होते जा रही है। इसका सबसे बड़ा कारण है मानव का पर्यावरण में हद से ज्यादा हस्तक्षेप।

क्योंकि प्राचीन समय से ही मानव का पर्यावरण से जुड़ाव रहा है। अपनी मूलभूत आवश्यकताओं के लिए मानव पर्यावरण पर काफी आश्रित रहा है और वह पर्यावरण के प्रति अपना कर्तव्य का पालन कर रहे है।

लेकिन औद्योगिकीकरण की दौड़ में मानव पर्यावरण से आवश्यकताओं को पूरा करने के स्थान पर पर्यावरण का अंधाधुंध दोहन करने लगा, परिणामस्वरूप पर्यावरण में दोष शुरू हो गए है।

पर्यावरण के पास भरपूर प्राकृतिक संसाधन है, लेकिन एक बार महात्मा गांधी जी ने कहा था-

‘मनुष्य की आवश्यकता के लिए पर्यावरण के पास पर्याप्त क्षमता है,
लेकिन मनुष्य के लालच के लिए नहीं।’

पर्यावरण में बढ़ता दोष और उसके दुष्परिणाम:

  • पर्यावरण में आज जितने भी दोष है उसका सबसे बड़ा कारण मानव है। जिस तरह से पर्यावरण लगातार प्रदूषित होता जा रहा है, स्वच्छ हवा के बिना जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती है।
  • स्वच्छ जल के बिना पृथ्वी पर जीवन संभव नहीं है। ध्वनि प्रदूषण ने पृथ्वी के पूरे शांत वातावरण में असंतुलन पैदा कर दिया है। 
  • लगातार पृथ्वी का तापमान बढ़ रहा है,  जिससे ‘ग्लेशियर’ पिघल रहे हैं और समुद्र का जल स्तर बढ़ने के कारण कई देशों के डूबने का खतरा बन गया है। 
  • अगर बात पिछले एक दशक की करें तो पिछले एक दशक में पृथ्वी के तापमान में दोगुनी बढ़ोतरी हुई है। यह सब पर्यावरण के साथ खिलवाड़ का ही नतीजा है। 
  • बाढ़, सूखा, महामारी जैसी तमाम तरह की आपदाएँ आज के समय में आम हो गई है। हर तरफ पर्यावरण के असंतुलन, जंगलों में पेड़-पौधों की कटाई के कारण जंगली जानवर विलुप्त होते जा रहे हैं। 
  • जिससे प्रकृति का पारिस्थितिक तंत्र पूरी तरह नष्ट होता जा रहा है। ‘ओज़ोन परत’ में छिद्र लगातार बड़ा होता जा रहा है जो कहीं से भी धरती पर जीवन की संभावना के लिए ठीक नहीं है। 
  • ओज़ोन परत धरती पर सूर्य से आने वाली विकिरण किरणों को रोकती है। बढ़ता वायु प्रदूषण के कारण ‘अम्लीय वर्षा’ की मात्रा बढ़ती जा रही है। 
  • अम्लीय वर्षा के अत्याधिक मात्रा में होने से फसलों और मनुष्य को भी हानि हो रही है। अम्लीय वर्षा मिट्टी की गुणवत्ता को कम कर रही हैं, जिससे भूमि बंजर होती जा रही है। 
  • अम्लीय वर्षा अत्याधिक मात्रा में होने से समुद्री जीव-जंतु भी प्रभावित हो रहे हैं।

निष्कर्ष:

पूरे सौरमंडल के नौ ग्रहों में अगर किसी ग्रह पर जीवन संभव है तो वह पृथ्वी पर ही है। अतः यह अति आवश्यक है कि इसकी सुरक्षा की जाए अन्यथा हमें कोई और ठिकाना ढूँढना पड़ेगा जो कि निकट भविष्य में संभव प्रतीत नहीं होता। और इसलिए कहा गया है –

‘अगर धरती की करनी है सुरक्षा,
तो उससे पहले करनी होगी पर्यावरण की रक्षा।’

पर्यावरण संरक्षण निबंध 500 शब्द 

पर्यावरण संरक्षण निबंध 500 शब्द
पर्यावरण संरक्षण निबंध 500 शब्द

प्रस्तावना:

‘पर्यावरण जीवन की आधारशिला है’। पर्यावरण में हमारी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए बहुत कुछ है। परंतु हमारे स्वार्थ को पूरा करने के लिए नहीं।

जिस तरह मनुष्य ने अपनी जीवन शैली में बदलाव किया हैं, विकास की अंधी दौड़ में पर्यावरण के दुष्परिणामों की चिंता किए बगैर प्राकृतिक संसाधनों का अधिक से अधिक मात्रा में दोहन करता चला गया है।

अब उसके दुष्परिणाम के संकेत हमें मिलने प्रारंभ हो गए हैं। और भविष्य में इसके गंभीर परिणाम हमें और भी देखने को मिलेंगे। अगर हम इसी तरह पर्यावरण के संरक्षण के प्रति जागरूक नहीं रहे, अपने कर्तव्य को नहीं समझे तो पर्यावरण पूरी तरह नष्ट हो जाएगा। और तब पृथ्वी पर जीवन संभव नहीं होगा क्योंकि पर्यावरण ही पृथ्वी पर जीवन को संभव बनाता है।

पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले प्रमुख तत्व निम्न हैं-

1. बढ़ती आबादी:

पृथ्वी पर लगातार बढ़ती आबादी के कारण मानव अपनी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए अधिक से अधिक मात्रा में प्राकृतिक संसाधनों का दोहन कर रहा, जो पर्यावरण में असंतुलन पैदा कर रहा है।

अपनी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए मनुष्य पक्षियों, जीव-जंतुओं के अस्तित्व व आश्रय को नष्ट कर रहा है, जिससे पूरा पारिस्थितिक तंत्र बिगड़ रहा है। इससे धरती का तापमान भी लगातार बढ़ते ही जा रहा है।

2. वायु प्रदूषण:

आधुनिकीकरण की दौड़ में मनुष्य लगातार स्वच्छ हवा को जहरीला करता जा रहा है। कल-कारखानों से निकलने वाले चिमनियों ने वायु प्रदूषण को बढ़ाने में बहुत बड़ी भूमिका निभाई है।

वाहनों से निकलने वाले काले धुएँ के कारण पृथ्वी की हवा जहरीली होती जा रही है जिससे आने वाले समय में पृथ्वी पर जीवन संभव नहीं हो सकता है।

मनुष्य लगातार पेड़-पौधों की कटाई कर रहा है जिससे वायु प्रदूषण की मात्रा लगातार बढ़ती जा रही है।

‘वाहनों के धुएँ के प्रदूषण को दूर भगाए,
पर्यावरण को स्वच्छ बनाये।’ 

3. जल प्रदूषण:

पृथ्वी पर स्वच्छ जल अर्थात पेयजल की मात्रा बहुत कम है। और लगातार बढ़ता जल प्रदूषण के कारण इसकी मात्रा और कम होती जा रही है।

कल-कारख़ानों से निकलने वाले अपशिष्ट पदार्थ सीधे नदियों-नालों में प्रवाहित कर दिए जाते हैं। मनुष्य अपने मल-मूत्र, कचरे को सीधे ही कहीं पर भी फेंक देता है।

जिससे जल प्रदूषण बढ़ता ही जा रहा है। पेड़-पौधों की कटाई के कारण जलवायु परिवर्तन होने के कारण वर्षा भी नहीं हो रही है जिससे पर्यावरण का संतुलन भी बिगड़ता जा रहा है।

4. ध्वनि प्रदूषण:

पृथ्वी पर लगातार बढ़ता ध्वनि प्रदूषण भी पर्यावरण में असंतुलन पैदा कर रहा है। वाहनों, लाउडस्पीकर, रेडियो से निकलने वाली आवाज़ मनुष्य के जीवन में अशांति पैदा करते हैं।

इसके साथ-साथ यह पर्यावरण में रहने वाले जीव-जंतुओं को भी नुकसान पहुँचाता है। इससे भी पारिस्थितिक तंत्र को नुकसान पहुंच रहा है।

5. वनों की कटाई:

मानव अपनी ज्यादातर आवश्यकताओं के लिए पेड़-पौधों पर निर्भर है। बढ़ती आबादी के कारण घर बनाने, सड़क बनाने के लिए, फैक्ट्रियों को लगाने के लिए ‘भूमि’ की आवश्यकता होती है।

जिसके लिए जंगलों की अंधाधुंध कटाई की जा रही है। इससे ‘मृदा अपरदन’ के साथ-साथ जलवायु परिवर्तन भी हो रहा है और पर्यावरण में असंतुलन भी पैदा हो रहा है। जीव-जंतु भी विलुप्त होते जा रहे हैं।

निष्कर्ष:

हम सभी की यह ज़िम्मेदारी है कि हम पर्यावरण का संरक्षण करें और इस प्राकृतिक सौंदर्य से भरे ग्रह को बचाने की कोशिश करें। इसके महत्व को समझते हुए भी अगर हम इसे नज़रअंदाज़ करते हैं तो यह मानव जाति की सबसे बड़ी गलती होगी।

हमें ज्यादा से ज्यादा लोगों के बीच पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलानी होगी। जिससे वे भी पर्यावरण के महत्व को समझकर पर्यावरण को बचाने में अपनी भूमिका अदा कर सकें।

पर्यावरण संरक्षण के उपाय 600 शब्दों में

पर्यावरण संरक्षण के उपाय 600 शब्दों में
पर्यावरण संरक्षण के उपाय 600 शब्दों में

प्रस्तावना:

जीवित व्यक्ति के लिए पर्यावरण में हर एक चीज मौजूद है, जो उसकी जरूरत को पूरा कर सकती है। चारों ओर फैला वातावरण ही पर्यावरण है।

पर्यावरण जीवन के अस्तित्व के लिए बेहद आवश्यक है। हमारे समाज में वैसे भी प्रकृति को भगवान का दर्जा प्राप्त है। प्राचीन समय से ही हम प्रकृति की सेवा करते आ रहे हैं।

क्योंकि प्रकृति का हमारे जीवन में विशेष महत्व रहा है। अपनी आवश्यकताओं के लिए मनुष्य हमेशा से ही प्रकृति पर निर्भर रहा है। पर्यावरण के कारण ही मनुष्य पृथ्वी पर जीवित है।

पर्यावरण पृथ्वी की पूरी पारिस्थितिक तंत्र को बनाए रखने में मदद करता है। पेड़-पौधे जिससे हम सांस लेते हैं वह भी पर्यावरण के कारण, जल जिसे हम पीते हैं वह भी पर्यावरण के कारण, अग्नि, आकाश सभी पर्यावरण के कारण ही है।

लेकिन मानव ने अपने विकास के लिए प्रकृति में असंतुलन पैदा करना शुरू कर दिया जिसके विनाशकारी परिणाम हमें आज देखने को मिल रहे हैं। और भविष्य में इसके और भी भयंकर परिणाम हमें देखने को मिलेंगे।

प्राचीन समय में हम जड़ी-बूटियों के लिए प्रकृति पर निर्भर थे, अभी बहुत सारी दवाईयों के लिए हम प्रकृति पर ही निर्भर है। लेकिन बढ़ता पर्यावरण दोष जीवन के अस्तित्व के लिए काफी खतरनाक है।

पर्यावरण दोष के कारण:

पर्यावरण में लगातार बढ़ता प्रदूषण, वायुमंडल में हानिकारक गैसों की बढ़ोतरी के कारण पृथ्वी की हवा लगातार ज़हरीली होती जा रही है।

बढ़ती आबादी की मांगों को पूरा करने के लिए मनुष्य जीवाश्म ईंधन का अधिक-से-अधिक उपभोग कर रहा है। अपने विकास के लिए मनुष्य पर्यावरण को लगातार प्रदूषित कर रहा है।

क्लोरोफ्लोरोकार्बन उत्सर्जन करने वाले उपकरण का उपयोग करने से पर्यावरण को काफी नुकसान हो रहा है। पेड़-पौधों की कटाई ने पूरे पारिस्थितिक तंत्र को नष्ट कर दिया है।

जलवायु में इतना बड़ा परिवर्तन आया है कि ज्यादातर जगह पर भयंकर सूखा पड़ रहा है। ‘ग्रीन हाउस प्रभाव’ के कारण पृथ्वी का तापमान लगातार बढ़ता रहा है।

पर्यावरण दोष के दुष्परिणाम:

पर्यावरण में वायु प्रदूषण और जल प्रदूषण के कारण पृथ्वी पर गंभीर बीमारियाँ जन्म ले रही है। जिसका सामना मानव जाति को करना पड़ रहा है।

जलवायु परिवर्तन के कारण वर्षा में कमी आई है। वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा बढ़ने के कारण पृथ्वी का तापमान बढ़ता जा रहा है।

तापमान बढ़ने के कारण ग्लेशियर पिघल रहे हैं। पर्यावरण में प्रदूषण के कारण ओज़ोन परत को भी काफी नुकसान पहुंच रहा है।

पृथ्वी का पारिस्थितिक तंत्र नष्ट होता जा रहा है, जीव-जंतु विलुप्त होते जा रहे हैं। पृथ्वी पर जीवन की संभावना खत्म हो रही है। यह सब पर्यावरण प्रदूषण के कारण ही है।

पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986:

भारत में ‘पर्यावरण संरक्षण अधिनियम’ को 1986 में संसद से पारित किया गया जिसमें पर्यावरण की रक्षा और संरक्षण के प्रयास का प्रावधान था। जिसे 1984 में मध्य प्रदेश के भोपाल गैस त्रासदी के बाद पारित किया गया।

इसे लागू करने का मूल लक्ष्य यह था कि ‘किस प्रकार पर्यावरण की रक्षा की जाए, पर्यावरण के ख़तरों की रोकथाम की जाए।’ ताकि भविष्य में आने वाली पीढ़ी भी पृथ्वी पर जीवन जी सके।

कार्बन उत्सर्जन को कम करना:

पर्यावरण के खतरों को देखते हुए ‘संयुक्त राष्ट्र’ भी लगातार हर साल पर्यावरण के संरक्षण के लिए जागरूकता फैलाता है।

इसलिए हर साल 5 जून को ‘विश्व पर्यावरण दिवस’ (World Environment Day) मनाया जाता है। ताकि लोगों में पर्यावरण की जागरूकता बढ़े और  पर्यावरण के संरक्षण के प्रति अपनी ज़िम्मेदारी को समझें।

इसी के तहत वर्ष 2015 में फ्रांस में 178 देशों ने ‘पेरिस समझौता’ किया था। पेरिस समझौते के तहत सभी का लक्ष्य 2030 तक कार्बन उत्सर्जन को कम करना है। ताकि पृथ्वी के तापमान में बढ़ती बढ़ोतरी को कम किया जा सके। भारत इसमें अग्रणी देशों में से एक रहा है।

विश्व पर्यावरण संरक्षण दिवस:

विश्व पर्यावरण संरक्षण दिवस (World Environmental Protection Day) हर वर्ष 26 नवंबर को मनाया जाता है। इस दिवस को मनाने का मुख्य उद्देश्य पर्यावरण का संतुलन बनाए रखना और पर्यावरण संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करना व इसके संदर्भ में सकारात्मक कदम उठाना है। 

विश्व पर्यावरण संरक्षण दिवस ‘संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम’ (यूएनईपी-यूनाईटेड नेशंस एन्वायरनमेंट प्रोग्राम) द्वारा प्रतिवर्ष आयोजित किया जाता है।

निष्कर्ष:

‘बदलें हम तस्वीर जहाँ की,
सुन्दर सा एक दृश्य बनायें,
संदेश ये हम सब तक फैलाएं,
आओ पर्यावरण बचाएं।’

यह हम सभी की ज़िम्मेदारी है कि हम पर्यावरण के संसाधनों का इस तरह से सतत पोषणीय विकास करें और पर्यावरण का संरक्षण भी करें जिससे भविष्य में आने वाली पीढ़ी भी उसका लाभ उठा सके। और हमें अभी से ही पर्यावरण संरक्षण पर अपनी अपनी जिम्मेदारी को समझते हुए इसे महत्व देना शुरू कर देना चाहिए।

‘पर्यावरण को नुकसान अगर तुम पहुँचाओगे,
जीवन के लिए धरती को नर्क बनाओगे।’

अपने साथ-साथ लोगों में भी पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलानी चाहिए। पर्यावरण के साफ-सफाई के लिए सभी को जागरूक करना चाहिए ताकि इस प्राकृतिक धरोहर से भरपूर इतने सुंदर ग्रह पर जीवन को बचाया जा सके।

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बेचारा नोबिता………इसको हमेशा Test में जीरो मिलता हैं। आप इसके जैसा मत बनना। पर्यावरण संरक्षण पर निबंध को अच्छे से पढ़ना और Test में अच्छे नंबर लाना।😉


यह भी पढ़ें (संबंधित लेख और निबंध):
😊👉 Essay on Tree in hindi
😊👉 Global Warming Essay In Hindi
😊👉 Jal Hi Jeevan Hai Essay In Hindi


अंतिम शब्द:
मेरे प्यारे दोस्तों! मुझे पूरी उम्मीद हैं की मेरे द्वारा लिखा गया Paryavaran Sanrakshan Par Nibandh in Hindi आपको जरूर पसंद आया होगा।

आप इस पर्यावरण संरक्षण पर निबंध को अपने करीबी दोस्तों या रिश्तेदारों को ज़रूर शेयर कीजियेगा, जिनको इस निबंध की अति आवश्यकता हो।

मैंने अपनी पूरी कोशिश की हैं आपको एक बेहतर Environmental protection essay in hindi प्रदान करने की। और

अगर फिर भी मुझसे जाने-अनजाने में कोई गलती हो तो गई हैं तो माफ़ बुल्कुल मत करना। नीचे दिए Comment Box💬 में मुझे जरूर डाँटना😥 ताकि अगली बार में गलतीयाँ न करूं। 😊

हम अगली बार फिर मिलेंगे।

दुआओं में याद रखना!😊🙏

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