प्लास्टिक प्रदूषण पर निबंध {रूपरेखा, कारण, प्रभाव एवं उपाय}| Plastic Pollution Essay In Hindi 2023

प्लास्टिक प्रदूषण पर निबंध: ‘संयुक्त राष्ट्र’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक प्लास्टिक का उपयोग पिछले दो दशकों में दोगुनी बढ़ोतरी के साथ बढ़ा है। जिसके, कारण प्लास्टिक प्रदूषण भी लगातार अपनी चरम सीमा की ओर बढ़ता जा रहा है। प्लास्टिक का उपयोग बाकी के मुकाबले काफी सस्ता और सुविधाजनक है, इसलिए सभी लोग प्लास्टिक के उपयोग के प्रति आकर्षित होते हैं। 

जब मानव ने प्लास्टिक के निर्माण की कल्पना की होगी तब उसने नहीं सोचा होगा कि एक दिन प्लास्टिक ही उसके विनाश का कारण बन जाएगा। पॉलिथीन बनाने में लगे रसायन काफी हानिकारक होते हैं, जो ‘कैंसर’ जैसी गंभीर बीमारियों को भी जन्म देते हैं। बढ़ती मांगों को पूरा करने के लिए प्लास्टिक के उत्पादों का उत्पादन लगातार बढ़ता जा रहा है।

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प्लास्टिक प्रदूषण पर निबंध

EssayToNibandh.com पर आज हम प्लास्टिक प्रदूषण पर निबंध पढ़ेंगे। जो की अलग अलग शब्द सीमा के आधार पर लिखे गए हैं। आप Plastic Pollution Essay In Hindi को ध्यान से और मन लगाकर पढ़ें और समझें। प्लास्टिक प्रदूषण पर निबंध Hindi को निम्न शब्द सीमा के आधार पर लिखा गया है-

आइये! प्लास्टिक प्रदूषण को रोकने के उपाय निबंध को अलग अलग शब्द सीमाओं के आधार पर पढ़ें।

नोट- यहां पर दिया गया प्लास्टिक प्रदूषण पर निबंध कक्षा(For Class) 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11, 12,(विद्यालय में पढ़ने वाले) विद्यार्थियों के साथ-साथ कॉलेज के विद्यार्थियों के लिए भी मान्य हैं।

प्लास्टिक प्रदूषण पर लघु निबंध 50 शब्दों का (Short essay on plastic pollution in 50 words)

हम सभी अपने जीवन में किसी न किसी रूप में प्लास्टिक के उपयोग पर निर्भर हैं। लेकिन हम सभी को अब सोचने की जरूरत है कि लगातार बढ़ता प्लास्टिक का प्रदूषण धरती पर जीवन के लिए घातक बनता जा रहा है। हमें सोचने की जरूरत है कि हम किस प्रकार ‘प्लास्टिक‘ के स्थान पर इसके नए विकल्पों की तलाश के लिए आगे बढ़े और धरती को स्वच्छ बनाने की दिशा में अपना अपना योगदान दें।


प्लास्टिक प्रदूषण पर लघु निबंध 80 शब्दों का (Short essay on plastic pollution in 80 words)

प्लास्टिक प्रदूषण पर नियंत्रण आज के समय में मानव जाति की सबसे बड़ी जरूरत में से एक बन गया है। क्योंकि प्लास्टिक ने ना सिर्फ प्रकृति के साथ बड़ा खिलवाड़ किया है, बल्कि इसने भविष्य में धरती पर जीवन की भी संभावना को कम करने का काम किया है। लगातार बढ़ता प्लास्टिक प्रदूषण आज के समय में एक वैश्विक विषय बन गया है। जिस पर तमाम देशों को सोचने की जरूरत है। और इसे कम करने के लिए प्रयास करने की भी जरूरत है।


प्लास्टिक प्रदूषण निबंध 100 शब्दों में (plastic pollution essay in 100 words)

‘प्लास्टिक प्रदूषण’ लगातार पर्यावरण में बहुत तेज़ी से बढ़ते जा रहा है। प्लास्टिक प्रदूषण आज के समय में एक वैश्विक समस्या बनता जा रहा है, क्योंकि आज से कुछ साल पहले प्लास्टिक प्रदूषण को इतना महत्व नहीं दिया जाता था। लेकिन बढ़ते ‘ग्लोबल वार्मिंग’ में प्लास्टिक प्रदूषण की भूमिका को देखते हुए अब प्लास्टिक प्रदूषण पर भी गंभीर विचार किया जा रहा है। 

और इसके समाधान के लिए निरंतर प्रयास किये जा रहे हैं, क्योंकि अगर ऐसे ही प्लास्टिक प्रदूषण बढ़ता गया, तो भविष्य में ग्लोबल वार्मिंग के कारण पर्यावरण को काफी नुकसान हो सकता है, जो पृथ्वी पर जीवन के लिए बिल्कुल भी सही नहीं है।


प्लास्टिक प्रदूषण पर निबंध 150 शब्दों का (Essay on plastic pollution of 150 words)

प्लास्टिक का उपयोग आज के समय में दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। मनुष्य ने अपनी सुविधाओं के लिए प्लास्टिक का निर्माण किया था, लेकिन अब वही प्लास्टिक पर्यावरण के लिए खतरा बनता जा रहा है। इसने पृथ्वी पर पूरे जीवन को खतरे में डाल दिया है।

प्लास्टिक पृथ्वी पर मानव जीवन के साथ-साथ जीव-जंतुओं, समुद्री जीवों सभी के लिए काफी हानिकारक है। यह स्वास्थ्य पर बहुत बुरा असर डालती है। मृदा का भी अपरदन प्लास्टिक प्रदूषण के कारण ही होता है। प्लास्टिक प्रदूषण ने पूरे जल चक्र को नष्ट कर दिया है, लगातार बढ़ते प्लास्टिक प्रदूषण के कारण स्थलीय जीवों की मृत्यु में तेजी से बढ़ोतरी होती जा रही है और वो धिरे-धिरे कर के लुप्त होते जा रहे है।

पॉलिथीन को ऐसे ही खुले में फेंक देने से यह नदियों-नालों में चला जाता हैं, जिससे जल प्रदूषण बढ़ता है और ‘ग्लोबल वॉर्मिंग का भी खतरा‘ बनता है। प्लास्टिक को जला देने से इससे निकलने वाले विषैले पदार्थ वायुमंडल की स्वच्छ हवा में मिलकर हवा को जहरीला कर देते है, जो स्वास्थ्य के लिए काफी हानिकारक है।


प्लास्टिक प्रदुषण पर निबंध 200 शब्द (Plastic Pradushan Par Nibandh 200 Shabd)

प्रस्तावना

प्लास्टिक का प्रदूषण आज के समय में एक वैश्विक समस्या बन गया है, जिसने सभी को इस पर गंभीरता पूर्वक सोचने और इसके समाधान निकालने की ओर ध्यान खींचा है। प्लास्टिक प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण है प्लास्टिक की चीजों का उपयोग करना। प्लास्टिक प्रदूषण धरती पर सभी जन-जीवन के लिए हानिकारक है। और अगर ऐसे ही इसका उपयोग बढ़ता गया तो, भविष्य में इसके और भी विकराल परिणाम देखने को मिलेंगे, जो बिलकुल भी सकारात्मक नहीं होंगे।

प्लास्टिक प्रदूषण को कैसे कम किया जाये?

प्लास्टिक प्रदूषण को कम किया जा सकता है। अगर, इसके लिए आपकी नियत सही हो तो। प्लास्टिक की चीजों का इस्तेमाल कम करें, उसके स्थान पर कागज या जूट के थैलों का उपयोग करें। क्योंकि प्लास्टिक का उपयोग करने से और उसे ऐसे ही खुले में फेंक देने से कई प्रकार की गंभीर बीमारियां जन्म लेती हैं। जो, धरती पर रहने वाले सभी जीव-जंतुओं, सजीवों के लिए काफी हानिकारक है। 

निष्कर्ष

प्लास्टिक ने पूरे पर्यावरण को बहुत बुरी तरह प्रभावित किया है। जिसके, गंभीर परिणाम हमें ‘ग्लोबल वार्मिंग’ के रूप में देखने को मिल रहे हैं। अगर इसका समाधान नहीं खोजा गया तो आगे भी इसके विकराल परिणाम देखने को मिलेंगे। प्लास्टिक के निर्माण में लगे विभिन्न तरह के रसायन काफी जहरीले और खतरनाक होते हैं। इसलिए हम सबको मिलकर प्लास्टिक प्रदूषण का निराकरण करना होगा तभी जाकर इस सुंदर ग्रह को बचाया जा सकता है। क्योंकि, 

प्लास्टिक हमें हटाना है,
पर्यावरण को सुरक्षित बनाना है।


प्लास्टिक प्रदूषण निबंध 250 शब्द (Plastic Pollution Essay 250 Words)

प्रस्तावना

‘संयुक्त राष्ट्र’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक प्लास्टिक का उपयोग पिछले दो दशकों में दोगुनी बढ़ोतरी के साथ बढ़ा है। जिसके, कारण प्लास्टिक प्रदूषण भी लगातार अपनी चरम सीमा की ओर बढ़ता जा रहा है। प्लास्टिक का उपयोग बाकी के मुकाबले काफी सस्ता और सुविधाजनक है, इसलिए सभी लोग प्लास्टिक के उपयोग के प्रति आकर्षित होते हैं। 

जब मानव ने प्लास्टिक के निर्माण की कल्पना की होगी तब उसने नहीं सोचा होगा कि एक दिन प्लास्टिक ही उसके विनाश का कारण बन जाएगा। पॉलिथीन बनाने में लगे रसायन काफी हानिकारक होते हैं, जो ‘कैंसर’ जैसी गंभीर बीमारियों को भी जन्म देते हैं। बढ़ती मांगों को पूरा करने के लिए प्लास्टिक के उत्पादों का उत्पादन लगातार बढ़ता जा रहा है।

प्लास्टिक प्रदूषण के प्रभाव

क्या आप जानते हैं कि ‘एक प्लास्टिक को नष्ट होने में 400 साल से भी अधिक समय लग जाता हैं’, जो धरती पर रहने वाले सभी जन जीवन के लिए बहुत नुकसानदायक है। क्योंकि, जितना अधिक प्लास्टिक का उपयोग हो रहा है उतना ही अधिक प्लास्टिक के कचरे का ढेर भी बनता जा रहा है, और गंभीर बीमारियां धरती के लिए खतरा बनी हुई है। 

हम अपने दैनिक जीवन में उपयोग किए गए प्लास्टिक के उत्पादों को ऐसे ही खुले में कहीं पर भी फेंक देते हैं। यह नदियों, नहरों, नालों, झीलों, तालाबों यह प्लास्टिक जमा होकर जल प्रदूषण तो करते ही हैं, साथ-ही-साथ जल के बहाव को भी अवरुद्ध कर देते हैं, और जल में तरह-तरह के कीटाणुओं को भी जन्म देते हैं। जो की, गंभीर बीमारियों के कारक होते हैं। वहीं दूसरी तरफ, ‘गाय’ जैसे जानवर इसे खाकर मौत का शिकार हो जाते हैं।

निष्कर्ष

हम सभी को प्लास्टिक के उत्पादों का उपयोग करने से परहेज करना चाहिए। इसके स्थान पर प्लास्टिक के वैकल्पिक उत्पादों का प्रयोग करना चाहिये, और अपने इस धरती को बचाने के लिए प्रयास करना चाहिये। ताकि आगे चलकर भी धरती पर जीवन संभव बना रहे।


प्लास्टिक प्रदूषण पर निबंध Hindi 300 Word

प्रस्तावना

प्लास्टिक प्रदूषण वर्तमान समय में विश्व के लिए सबसे गंभीर समस्याओं में से एक हैं। जिसका समाधान मानव जाति को मिलकर करना होगा। क्योंकि, ‘ग्लोबल वॉर्मिंग’ के विनाशकारी परिणाम के सबसे प्रमुख कारणों में से एक प्लास्टिक का प्रदूषण।

मानव की बढ़ती प्लास्टिक के उत्पादों पर निर्भरता ना सिर्फ पर्यावरण के लिए नुकसानदेह है, बल्कि यह धरती पर जनजीवन को भी काफी प्रभावित कर रहा है। और आने वाले समय में अगर ऐसे ही चलता रहा तो हालात इससे काफी भयानक हो जाएंगे। और धरती पर जीवन की परिकल्पना लगभग असंभव हो जाएगी। 

क्योंकि प्लास्टिक के प्रदूषण ने धरती के पूरे चक्र को नष्ट करने का काम किया है। जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। सभी प्रकार के प्रदूषण में प्लास्टिक प्रदूषण का सबसे अहम रोल रहा है। पूरी पृथ्वी पर प्लास्टिक प्रदूषण का गंभीर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।

प्लास्टिक प्रदूषण के प्रमुख कारण

पॉलिथीन ना सड़ता हैं ना गलता हैं,
इससे गंदगी और प्रदूषण बढ़ता हैं।

हम सभी जानते हैं कि प्लास्टिक के उत्पादों का उपयोग करना बाकी के मुकाबले काफी सहूलियत भरा होता है। प्लास्टिक ने मानव जीवन को काफी आसान बना दिया है। जिससे, मानव प्लास्टिक पर काफी निर्भर हो गया है। लेकिन अब उसके गंभीर परिणाम हमें ग्लोबल वॉर्मिंग के रूप में देखने को मिल रहे हैं। प्लास्टिक के उत्पादों का उपयोग करने के बाद उसे फेंक दिया जाता है। 

लेकिन, क्या आपको पता है? कि ‘एक प्लास्टिक नष्ट होने में लगभग 400 साल से भी अधिक वक्त लेता है। तब तक वह ऐसे ही धरती पर विभिन्न प्रकार के प्रदूषण का कारण बना रहता है। प्लास्टिक के ज्यादा मात्रा में उपयोग ने धरती पर प्लास्टिक के कचरे की मात्रा को काफी बढ़ा दिया है। हम अपने दैनिक जीवन में भी प्लास्टिक के बने उत्पादों का ज्यादा से ज्यादा उपयोग करते हैं।

क्योंकि, यह काफी किफायती होता है और उपयोग करने में भी आसान होता है। लेकिन प्लास्टिक का कचरा गैर-बायोडिग्रेडेबल होता है। यदि प्लास्टिक का कचरा सैकड़ों वर्षों तक भी पानी या मिट्टी में रहे तो यह नष्ट नहीं होता है।

निष्कर्ष

अगर हमें भविष्य को सुंदर बनाना है। धरती पर जीवन बचाना है, तो प्लास्टिक का सही से निपटान करना बेहद जरूरी है।और लोगों में भी इसके प्रति जागरूकता फैलानी बहुत ज़रूरी है। ताकि वह भी इसके प्रति जागरूक हो सके।

प्लास्टिक बैग को ना कहे,
स्वच्छ भविष्य को हां कहे।

प्रदूषण निबंध का वीडियो

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प्रस्तावना

हाल ही के वर्षों में बढ़ते ग्लोबल वार्मिंग ने सभी का ध्यान प्लास्टिक प्रदूषण की ओर खींचा है। आज के समय में सभी इंसान किसी न किसी रूप में प्लास्टिक का उपयोग कर रहा है। प्लास्टिक मानव जीवन की दिनचर्या में शामिल हो गई है। जिसके फलस्वरूप प्लास्टिक के कचरे की मात्रा लगातार बढ़ती जा रही है। 

हम जहां भी देखें प्लास्टिक के कचरे का अंबार इधर-उधर फैला रहता है, जो पर्यावरण के लिए काफी हानिकारक है। साथ-साथ जन-जीवन को भी काफी नुकसान पहुंचा रहा है। और आगे चलकर भी नुकसान पहुंचाएगा। प्लास्टिक प्रदूषण पर्यावरण के लिए लगातार घातक साबित होते जा रहा है।

बढ़ता प्लास्टिक का उपयोग

पिछले दो दशकों में प्लास्टिक के उपयोग में दोगुनी मात्रा में बढ़ोतरी हुई है। पचास के दशक में विश्व में प्लास्टिक के उत्पादों का उत्पादन लगभग 1.5 मिलियन टन था। लेकिन, क्या आप यह जानते हैं? कि 2015- 16 में यह उत्पादन लगभग 322 मिलियन टन हो गया है। और धरती पर प्लास्टिक का बोझ भी लगभग 322 मिलियन टन ही है। 

यह हर साल 8.6 प्रतिशत की औसत दर से बढ़ता जा रहा है। जिसके कारण पर्यावरण को दिक्कतों का भी सामना करना पड़ रहा है। पर्यावरण में रहने वाले सभी जीव-जंतु आज प्लास्टिक के प्रदूषण से परेशान हैं। जहां देखें वहां प्लास्टिक के कचरे का अंबार लगा हुआ है। यह सब मानवीय कारणों से ही हुआ है, और इसका भुगतान पर्यावरण को करना पड़ रहा है। लेकिन पर्यावरण ने इसके परिणाम भी दिखाने प्रारंभ कर दिए हैं। 

हर साल समुद्रों से लाखों टन प्लास्टिक के कचरे को निकाला जाता है। यह प्लास्टिक समुद्री जीव-जंतुओं, समुद्री जीवन को काफी प्रभावित करते हैं। ऐसी आशंका जताई जा रही है कि अगर इसी स्तर से प्लास्टिक का उपयोग बढ़ता गया तो, वर्ष 2050 तक 900 मीट्रिक टन प्लास्टिक का कचरा समुद्र में भरा रहेगा। एक दिन ऐसा समय आएगा जब यह पूरी धरती एक प्लास्टिक के कचरे का अंबार ही बन जाएगी।

निष्कर्ष

इसलिए बढ़ते प्लास्टिक प्रदूषण को देखते हुए सिर्फ एक व्यक्ति को नहीं बल्कि हम सभी को मिलकर प्लास्टिक प्रदूषण को कम करने के लिए उचित तरीके से प्रयास करना चाहिए। यह सिर्फ एक व्यक्ति का कर्तव्य नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज, पूरे विश्व के मानव जाति का कर्तव्य है, कि पर्यावरण को हम सब सुरक्षित बनाएं। क्योंकि, पर्यावरण के बिना धरती पर जीवन संभव नहीं है।

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प्लास्टिक प्रदूषण पर निबंध 400 शब्दों में (essay on plastic pollution in 400 words)

प्रस्तावना

प्लास्टिक के उत्पादों का उपयोग मानव के दैनिक जीवन का एक अहम हिस्सा बन गया है। प्लास्टिक का इतनी विशाल मात्रा में उपयोग ना सिर्फ पर्यावरण के लिए लगातार खतरनाक बनते जा रहा है, बल्कि यह धरती पर जितने भी संजीव हैं उनके जीवन को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर रहा है। इसलिए

सहूलियत और विलासता को कम करो,
प्लास्टिक का उपयोग बंद करो।

मानव जीवन में प्लास्टिक का महत्व

मानव ने अपनी सुख-सुविधा और सहूलियत के लिए प्लास्टिक का निर्माण किया था। लेकिन, अब इसके कारण बढ़ते ग्लोबल वॉर्मिंग ने सभी को इस की ओर सोचने और प्लास्टिक को ना कहने के लिए मजबूर किया है। ना जाने आज तक मानव ने कितने लाख करोड़ टन प्लास्टिक का उपयोग किया होगा। लेकिन हर साल समुद्रों से लाखों टन प्लास्टिक के कचरे को निकाला जाता है, यह सब प्लास्टिक के उत्पादों के बढ़ते उपयोग के कारण ही हो रहा हैं। 

हम मनुष्य सुबह उठते ही ब्रश करते हैं, वह भी प्लास्टिक का ही होता है। नहाते भी है, तो प्लास्टिक की बाल्टी का उपयोग करते हैं। बोतल में पानी पीते हैं, वह भी प्लास्टिक की है। खाने का डब्बा भी प्लास्टिक का ही होता है। तो इस प्रकार मानव किसी न किसी रूप में प्लास्टिक के उत्पादों के उपयोग से जुड़ा हुआ है, और पर्यावरण को दूषित करने में अपना योगदान दे रहा है।

प्लास्टिक प्रदूषण उपाय

प्लास्टिक प्रदूषण से पर्यावरण को बचाने के लिए सबसे पहले हम प्लास्टिक के उत्पादों के स्थान पर उसके नए विकल्पों की तरफ जा सकते हैं। पॉलीथिन का उपयोग करने के स्थान पर जूट के थैलों का प्रयोग, कागज और कपडों के थैलों का उपयोग अधिक-से-अधिक मात्रा में करके प्लास्टिक पर अपनी निर्भरता को कम कर सकते हैं। प्लास्टिक के बर्तनों के स्थान पर स्टील और कांच के बर्तनों का उपयोग कर सकते हैं। 

दूसरा समाधान यह है कि प्लास्टिक का एक बार उपयोग करने के बाद उसे फेंकना नहीं चाहिए। फेंकने से तो वह तुरंत नष्ट नहीं होता है। क्योंकि उसे नष्ट होने में कई साल लग जाते हैं। इसलिए प्लास्टिक के उत्पादों का पुनः उपयोग करना चाहिए, उसकी रीसाइक्लिंग करनी चाहिए। जिससे, हजारों टन प्लास्टिक का कचरा धरती पर बोझ ना बने।

निष्कर्ष

अगर हमें धरती से इस प्लास्टिक नामक बीमारी को दूर करना है तो आज से ही हम सभी को शपथ लेनी होगी कि हम प्लास्टिक का कम से कम उपयोग करेंगे या प्लास्टिक का उपयोग ही नहीं करेंगे। और उस पर से अपनी निर्भरता को कम करेंगे। ताकि आगे चलकर हम एक स्वच्छ पर्यावरण बना सके जिससे, धरती पर जीवन संभव हो।


प्लास्टिक प्रदूषण पर निबंध 500 शब्दों में (essay on plastic pollution in 500 words)

प्रस्तावना

‘प्लास्टिक प्रदूषण’ दिन प्रतिदिन चिंता का विषय बनते जा रहा है। प्लास्टिक के उत्पादों का अत्याधिक मात्रा में प्रयोग किए जाने से पर्यावरण का जल चक्र पूरी तरह नष्ट हो गया है। पर्यावरण का पूरा जन-जीवन प्लास्टिक के प्रदूषण से प्रभावित है।

हम सभी जानते हैं कि रंग-बिरंगे प्लास्टिक के उत्पादों को बनाने में जिस रसायन का उपयोग होता है, वह कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों को जन्म देने में सक्षम होते हैं। जबकि काले रंग के पॉलिथीन या प्लास्टिक के उत्पादों को बनाने में जिस रसायन का उपयोग होता है, वह सबसे हानिकारक होता है। प्लास्टिक ने पर्यावरण के पूरे पारिस्थितिक तंत्र को बुरी तरह प्रभावित किया है।

प्लास्टिक प्रदूषण के प्रभाव

1. जल प्रदूषण

प्लास्टिक के उत्पादों को सीधे इधर-उधर फेंकने से वह नदियों, नालों, तालाबों, झीलों में चले जाते हैं। और जल प्रदूषण का कारण बनते हैं। प्लास्टिक कभी भी नष्ट नहीं होता है। इस प्रकार वह जल में कई सालों तक रहने से जल में विभिन्न प्रकार के कीटाणुओं को जन्म देते हैं। जो, स्वच्छ जल को अस्वच्छ कर देता है। प्लास्टिक पानी के बहाव को भी अवरुद्ध कर देता है।

2. समुद्री जीव-जंतुओं के लिए खतरा

बढ़ता प्लास्टिक का कचरा समुद्री जीव-जंतुओं और समुद्री जीवन को काफी नकारात्मक रूप से प्रभावित कर रहा है। हर साल समुद्रों से लाखों टन प्लास्टिक के कचरे को निकाला जाता है। समुद्र में रहने वाली मछलियां इन प्लास्टिक को खाकर बीमार पड़ती है और यह इनकी मौत का कारण बनता है।

3. जानवरों को भी प्रभावित

इधर-उधर लगा प्लास्टिक के कचरे का अंबार जानवरों को भी बुरी तरह प्रभावित करता है। वह इसे अपना भोजन समझ कर खा लेते हैं। इसे खा लेने के बाद उन जानवरों को या तो गंभीर तरह की बीमारियां अपने वश में कर लेती है, या फिर यह प्लास्टिक उनकी मौत का कारण बन जाता है।

4. मृदा अपरदन

बढ़ता प्लास्टिक का कचरा मिट्टी की गुणवत्ता को भी दूषित कर रहा है। क्योंकि, प्लास्टिक का कचरा कभी भी तुरंत नष्ट नहीं होता है। इसे नष्ट होने में सैकड़ों वर्ष लग जाते हैं। तब तक यह ऐसे ही मिट्टी में पड़े रहते हैं। जिससे विभिन्न तरह के खतरनाक रसायन उत्पन्न होते हैं जो मिट्टी की गुणवत्ता को प्रभावित करते हैं। और पेड़-पौधों को भी यह प्रभावित करते हैं।

सिंगल यूज प्लास्टिक (Single Use Plastic)

भारत हमेशा से ही प्रकृति का पुजारी रहा है। और पर्यावरण को बचाने में समय-समय पर अपनी भूमिका अदा करते आ रहा है। इसी क्रम में आगे बढ़ते हुए भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने 15 अगस्त 2019 को  ‘लाल किले’ से भारत के सभी नागरिकों से आह्वान किया था कि वह ‘सिंगल यूज़ प्लास्टिक‘ में अपना योगदान दें।

और इस आंदोलन को बड़ा बनाए और पर्यावरण को प्लास्टिक के प्रदूषण से मुक्त करने में सभी अपना योगदान दें। ताकि भविष्य में भी पर्यावरण सुरक्षित रहे और पृथ्वी पर जीवन संभव रहे। सिंगल यूज प्लास्टिक का मतलब है, कि ‘प्लास्टिक के सामानों का उपयोग ना के बराबर।’

निष्कर्ष

प्लास्टिक का सही से निपटान आज के समय में भविष्य की जरूरत बन गया है। क्योंकि प्लास्टिक प्रदूषण ने धरती को इस तरह से जकड़कर रख लिया है कि अगर आने वाले कुछ सालों में इसे कम करने की कोशिश नहीं की गई तो, प्लास्टिक का प्रदूषण मानव जाति के हाथ से निकल जाएगा और इसके गंभीर परिणाम से पर्यावरण के साथ-साथ पृथ्वी के जनजीवन का को भी झेलने होंगे। इसलिए,

प्लास्टिक हटाना है,
पर्यावरण को सुरक्षित बनाना है।


प्लास्टिक प्रदूषण पर निबंध 1000 शब्दों में (essay on plastic pollution in 1000 words)

प्रस्तावना

आओ घर-घर अलख जगाएं,
प्लास्टिक को घर-घर से भगाएं।

अगर मानव अपने साथ-साथ दूसरों के लिए थोड़ा सा भी सजग है, तो उसे प्लास्टिक के निपटान के महत्व को सही तरीके से सोचने पर गंभीरतापूर्वक विचार करना चाहिए। ‘विश्व बैंक की रिपोर्ट’ के मुताबिक हर साल औसतन समुद्र में 8 मिलियन टन प्लास्टिक के कचरे की मात्रा की जांच की गई है। मानव जीवन का प्लास्टिक के उत्पादों पर निर्भरता आगे चलकर उसी के लिए घातक साबित होने वाली है।

क्योंकि, प्लास्टिक ने तो पर्यावरण को अपनी जकड़ में ले लिया है और पर्यावरण को हानि पहुंचा रहा है। अगर इसे समय रहते नहीं रोका गया तो, पर्यावरण का विनाश हो जाएगा। और पृथ्वी पर जीवन संभव भी नहीं हो पाएगा। इसलिए आज के वर्तमान समय में सभी को प्लास्टिक के उत्पादों पर प्रतिबंध के बारे में सोचने की जरूरत है और उसका उपयोग अपने स्तर पर कम करने की जरूरत है।

प्लास्टिक प्रदूषण के कारण

  • प्लास्टिक के ज्यादातर पदार्थों का उपयोग एक बार करने के बाद हम सब उसे कहीं पर भी खुले में फेंक देते हैं, जैसे प्लास्टिक की बोतल और पॉलिथीन की बैग इत्यादि।
  • इससे भूमि का प्रदूषण तो होता ही है, साथ साथ जल का प्रदूषण भी भारी मात्रा में होता है। और जल प्रदूषण के सबसे प्रमुख कारणों में से एक है प्लास्टिक प्रदूषण।
  • मानव ने अपनी सहूलियत के लिए प्लास्टिक के उत्पादों का निर्माण किया था। प्लास्टिक अपेक्षाकृत दूसरों के मुकाबले काफी सस्ता होता है।
  • इसका उपयोग करना भी काफी आसान होता है। लेकिन जब यही प्लास्टिक तरह-तरह की गंभीर बीमारियों को जन्म देता है, तो यह पर्यावरण के लिए हानिकारक बन जाता है।
  • अधिक जागरूकता नहीं होने के कारण हम में से ज्यादातर लोगों को प्लास्टिक के पुनः उपयोग के बारे में या प्लास्टिक रीसाइक्लिंग के बारे में ज्यादा पता नहीं है।
  • इस कारण हम प्लास्टिक के उत्पादों का एक बार उपयोग करने के बाद उसे ऐसे ही खुले में कहीं पर भी फेंक देते हैं। जिससे प्लास्टिक का प्रदूषण बढ़ते ही जा रहा है।

प्लास्टिक प्रदूषण के प्रभाव

  • प्लास्टिक प्रदूषण के बहुत गंभीर परिणाम होते हैं। प्लास्टिक के प्रदूषण ने पूरे पर्यावरण को दूषित कर दिया है।
  • प्लास्टिक प्रदूषण ने जल चक्र के साथ-साथ पर्यावरण के पारिस्थितिक तंत्र को भी काफी नुकसान पहुंचाया है।
  • प्लास्टिक प्रदूषण के कारण जल प्रदूषण विशाल मात्रा में बढ़ते चले जा रहा है।
  • बढ़ती मात्रा में प्लास्टिक के उत्पादों के उपयोग से धरती पर प्लास्टिक के कचरे का अंबार लग गया है।
  • जब उन्हें जलाया जाता है तो उससे निकलने वाले हानिकारक विषैली गैस से वायु की स्वच्छ हवा भी दूषित होती है।
  • प्लास्टिक समुद्री जीव-जंतुओं को भी बुरी तरह प्रभावित करता है।
  • इधर-उधर लगे प्लास्टिक के अंबार को जानवर जब खा लेते हैं तो उससे उनकी मृत्यु भी हो जाती है।
  • प्लास्टिक के प्रदूषण के कारण धरती पर गंभीर तरह की बीमारियां जन्म लेती हैं।

प्लास्टिक प्रदूषण को रोकने के उपाय

  • प्लास्टिक प्रदूषण को रोकने के लिए हम सभी को सामूहिक रूप से प्रयास करने होंगे। प्लास्टिक के उत्पादों का उपयोग कम से कम करना होगा।
  • प्लास्टिक के बैग, या थैलों के स्थान पर ‘इको फ्रेंडली बैग’ या फिर जूट और कपड़ों के थैलों का इस्तेमाल किया जा सकता है।
  • मानव अपने दैनिक जीवन में भी प्लास्टिक के बहुत से उत्पादों जैसे प्लेट, कटोरी, चम्मच आदि का अधिक मात्रा में उपयोग करता है।
  • इन सभी को नियंत्रित करके अथवा स्टील और कांच के बर्तनों का उपयोग करके भी प्लास्टिक प्रदूषण पर काबू पाया जा सकता है।
  • प्लास्टिक के खिलौनों के स्थान पर इको फ्रेंडली खिलौनों का निर्माण करके भी प्लास्टिक प्रदूषण को कम किया जा सकता है।
  • प्लास्टिक के बने बहुत सारे उत्पादों का पुनः उपयोग किया जा सकता है या उसकी रीसाइक्लिंग की जा सकती है। इससे भी धरती पर प्लास्टिक के कचरे के अंबार को नियंत्रण किया जा सकता है।

निष्कर्ष

प्लास्टिक को ना कहे,
स्वास्थ्य के खतरों को कम करें।

यह कथन बिल्कुल सही है। प्लास्टिक को जब तक हम ना नहीं कहेंगे तब तक यह धरती पर जीवन को बुरी तरह प्रभावित करेगा। प्लास्टिक के प्रति हम सभी को जागरूकता फैलाने की जरूरत है। ताकि प्लास्टिक से होने वाली हानि को कम किया जा सके। हम सभी अपने-अपने स्तर पर जितना हो सकता है प्लास्टिक के उपयोग को कम करें। प्लास्टिक प्रदूषण रोकने के लिए सरकार को भी सख्त कानून बनाने होंगे।


प्लास्टिक प्रदूषण निबंध पर अपनी प्रतिक्रिया दीजिये👇

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बेचारा नोबिता………इसको हमेशा Test में जीरो मिलता हैं। आप इसके जैसा मत बनना। Plastic Pollution Essay In Hindi को अच्छे से पढ़ना और Test में अच्छे नंबर लाना।😉


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अंतिम शब्द

मेरे प्यारे दोस्तों! मुझे पूरी उम्मीद हैं की मेरे द्वारा लिखा गया Plastic Pollution Nibandh in Hindi आपको जरूर पसंद आया होगा। आप इस बढ़ता प्लास्टिक प्रदूषण पर निबंध को अपने करीबी दोस्तों या रिश्तेदारों को ज़रूर शेयर कीजियेगा, जिनको इस निबंध की अति आवश्यकता हो।

मैंने अपनी पूरी कोशिश की हैं आपको एक बेहतर Plastic Pollution Essay in Hindi प्रदान करने की। और अगर फिर भी मुझसे जाने-अनजाने में कोई गलती हो तो गई हैं तो माफ़ बुल्कुल मत करना। नीचे दिए Comment Box💬 में मुझे जरूर डाँटना😥 ताकि अगली बार में गलतीयाँ न करूं। 😊

हम अगली बार फिर मिलेंगे, दुआओं में याद रखना!😊🙏

2 thoughts on “प्लास्टिक प्रदूषण पर निबंध {रूपरेखा, कारण, प्रभाव एवं उपाय}| Plastic Pollution Essay In Hindi 2023”

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