रक्षाबंधन निबंध हिंदी में 2021 | मेरा प्रिय त्योहार Raksha Bandhan Nibandh

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आज हम Raksha Bandhan Nibandh पढ़ेंगे। जो की अलग-अलग शब्द सीमा के आधार पर लिखे गए हैं। आप रक्षा बंधन पर निबंध हिंदी में को ध्यान से और मन लगाकर पढ़ें और समझें।

मेरा प्रिय त्योहार रक्षाबंधन को निम्न शब्द सीमा के आधार पर लिखा गया है-

  1. Raksha Bandhan Essay 5 Line
  2. Raksha Bandhan Nibandh 10 Line
  3. Raksha Bandhan Nibandh In Hindi 120 Words
  4. Essay On Raksha Bandhan In Hindi In 150 Words
  5. Raksha Bandhan Nibandh In Hindi 200 Words
  6. Essay On Raksha Bandhan In Hindi In 250 Words
  7. About Raksha Bandhan In Hindi 300 Words
  8. Essay On Raksha Bandhan With Heading 400 Words In Hindi
  9. Importance Of Raksha Bandhan In Hindi 500 Words
  10. मेरा प्रिय त्योहार रक्षाबंधन 600 Words
  11. रक्षाबंधन त्योहार पर 700 शब्दों का निबंध

आइये! 

रक्षा बंधन निबंध हिंदी में को अलग अलग शब्द सीमाओं के आधार पर पढ़ें।

नोट- यहां पर दिया गया raksha bandhan nibandh कक्षा(For Class) 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11, 12,(विद्यालय में पढ़ने वाले) विद्यार्थियों के साथ-साथ कॉलेज के विद्यार्थियों के लिए भी मान्य हैं।

Raksha Bandhan Nibandh
Raksha Bandhan Nibandh

Short Essay | Raksha Bandhan Essay 5 Line

1. रक्षाबंधन का त्योहार श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है।
2. इस दिन सभी बहने अपने अपने भाइयों को राखी बांधती हैं। 
3. इस दिन भाई अपनी बहनों को रक्षा का वचन देते हैं। 
4. इस दिन घरों में ढेर सारे पकवान बनाए जाते हैं। 
5. इस दिन लोग नए कपड़े पहनते हैं।  


Raksha Bandhan Nibandh 10 Line, 100 शब्दों में

  1. रक्षाबंधन हिंदुओं का प्रमुख त्योहार है।
  2. रक्षाबंधन को राखी का त्यौहार भी कहा जाता है।
  3. यह भाई-बहन के अटूट रिश्ते का त्योहार है।
  4. यह त्यौहार सावन माह की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है।
  5. इस दिन मैंने अपने भाई को राखी बनती है और भाई अपनी बहनों को रक्षा का वचन देते है।
  6. इस दिन बहने सुबह से खाली पेट रहती है, वे अपने भाई को राखी बांधने के बाद ही कुछ खा सकती है।
  7. इस दिन भाई बहनो को उपहार देते है।
  8. बहने अपने भाई के लंबी आयु की व कुशलता कामना करती है।
  9. महीने भर पहले से ही बाजारो में सुन्दर राखियां बिकने लगती है।
  10. इस त्यौहार को भारत में तो मनाया जाता ही है साथ ही साथ विदेशी में भी मनाया जाता है।

Essay On Raksha Bandhan In Hindi In 150 Words

रक्षाबंधन भाई बहनो का वह त्यौहार है, जो हिन्दुओं में प्रचलित है। पर इसे भारत के सभी धर्मो के लोग समान उत्साह व भाव से मनाते है। पूरे भारत में इस दिन का माहौल देखने लायक होता है।

यह ऐसा विषेश दिन है, जो केवल भाई बहनों के लिए बना है। यूं तो भारत में भाई-बहनों के बीच प्यार और कर्तव्य की भूमिका किसी एक दिन की मोहताज नहीं है। पर रक्षाबंधन के धार्मिक व ऐतिहासिक महत्व के कारण यह दिन अत्यंत महत्वपूर्ण है।

यह त्यौहार भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक है। रक्षाबंधन पर बहने भाई की दाहिनी कलाई पर राखी बांधी है, उनका तिलक करती है और उनसे अपनी रक्षा का संकल्प लेती है। आजकल राखी देश की रक्षा पर्यावरण की रक्षा हितों की रक्षा आदि के लिए भी बांधी जाने लगी है।


Raksha Bandhan Nibandh In Hindi 200 Words

प्रस्तावना:

रक्षाबंधन का ऐतिहासिक महत्व रक्षाबंधन का इतिहास हिंदू पुराण कथाओं में है। वामनाअवतार नामक पौराणिक कथा में रक्षाबंधन का प्रसंग मिलता है।

रक्षाबंधन की कथा इस प्रकार है:

राजा बलि ने यज्ञ संपन्न कर स्वर्ग पर अधिकार का प्रयत्न किया। तो देवराज इंद्र ने भगवान विष्णु से प्रार्थना की। विष्णु जी वामन बनकर राजा बलि से भिक्षा मांगने पहुंच गए।

गुरु के मना करने पर भी बलि ने तीन पग भूमि दान कर दी। वामन भगवान ने तीन पग में आकाश, पाताल और धरती नाप कर राजा बलि को रसताल में भेज दिया। उसने अपनी भक्ति के बल पर विष्णु जी से हर समय अपने सामने रहने का वचन ले लिया।

लक्ष्मी जी इससे चिंतित हो गई। नारद जी की सलाह पर लक्ष्मी जी बलि के पास गई और रक्षा सूत्र बांधकर उसे अपना भाई बना लिया। बदले में विष्णु जी को अपने साथ ले आई। इस दिन श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि थी।

“आया राखी का त्यौहार,
छाई खुशियों की बहार,
एक रेशम की डोरी से बांधा,
बहन ने भाई की कलाई पर प्यार।”

उपसंहार:

आज यह त्यौहार हमारी संस्कृति की पहचान है और हर भारतवासी को इस त्यौहार पर गर्व है।यह बहनों के भाइयों के प्रति प्रेम को दर्शाता है और भाई भी पूरे वर्ष इसी दिन की प्रतीक्षा करते हैं।


Essay On Raksha Bandhan In Hindi In 250 Words

परिचय:

“बहना ने भाई की कलाई से प्यार बांधा है,
प्यार के दो तार से संसार बांधा है।”

सुमन कलपुर के इस लोकप्रिय गीत ने इस दो पंक्ति में राखी के महत्व का वर्णन किया है। आज महिलाओं द्वारा देश की सुरक्षा में तैनात सैनिकों को सीमा पर जाने पर राखी बांधी जाती है, क्योंकि वह बाहरी शक्तियों से हमारी रक्षा करते हैं। राखी का त्यौहार भावात्मक रूप से भाई-बहन के प्रेम व स्नेह का प्रतीक है।

रक्षाबंधन किस किस स्थान पर मनाया जाता है?:

राखी का त्यौहार मुख्य रूप से भारत और नेपाल में मनाया जाता है। इसके अतिरिक्त मलेशिया और अन्य देशों में (जहां भारतीय निवास करते हैं) मनाया जाता है।

स्कूल में राखी का त्यौहार:

राखी का त्यौहार अपने घर के अतिरिक्त स्कूल में उतने ही प्यार से मनाया जाता है। यह विद्यालयों में राखी के अवकाश से 1 दिन पहले आयोजित किया जाता है। इसमें बालकों की कलाई पर बालिकाएँ रंग बिरंगी राखी बांधती है। यह सच में एक आकर्षक दृश्य होता है।

राखी के पर्व पर भाई बहन क्या-क्या कर सकते हैं?:

1. भाई बहन जहां भी निवास कर रहे हो, राखी के समय पर एक दूसरे से मिल सकते हैं और निश्चित रूप से ही मिलना चाहिए।
2. राखी के त्योहार को और खास बनाने के लिए भाई-बहन कहीं बाहर घूमने जा सकते हैं।
3. अपने जीवन में एक-दूसरे के महत्व को बताने के लिए वे एक-दूसरे को अपनी-अपनी पसंद का उपहार दे सकते हैं।
4. किसी पुरुष द्वारा महिला के प्रति भाई का फर्ज निभाने पर राखी के अवसर पर वह महिलाओं उसे राखी बांध सकती हैं।

निष्कर्ष:

भाई बहन का रिश्ता खट्टा-मीठा होता है। जिसमें वे आपस में झगड़ते हैं, पर एक-दूसरे से बात किए बिना नहीं रह सकते। राखी का यह त्यौहार उनके जीवन में एक-दूसरे के महत्व को बताने का कार्य करता है। अतः हम सभी को परंपरागत तरीके से यह त्यौहार मनाना चाहिए।


About Raksha Bandhan In Hindi 300 Words

रक्षाबंधन से संबंधित कहानियां:

राखी अस्तित्व में कैसे आई? और त्योहार रक्षाबंधन पर पांच अलग-अलग कहानियां है-

“राखी कर देती है, सारे गिले-शिकवे दूर। इतनी ताकतवर होती है, कच्चे धागे की पावन डोर।”

  1. रक्षाबंधन की उत्पत्ति प्राचीन काल से होती है, जब देवताओं और राक्षसों के बीच युद्ध के दौरान राक्षसों से बचाने के लिए इन्द्र की बहन ने उनकी कलाई के चारों ओर भगवान विष्णु द्वारा दिए गए धागे को बांध दिया था।
  2. एक अन्य कहानी का मानना है, कि राक्षसों ने युद्ध जीता और स्वर्ग पर कब्जा कर लिया। भगवान इंद्र इस बात से नाखुश थे। उन्होंने देवताओं के गुरु बृहस्पति से शिकायत की, जिन्होने एक रक्षा सूत्र तैयार किया और उसे सुरक्षा के लिए पहनने को कहा।
  3. संरक्षण का वादा महाभारत में भी देखा गया था। ऐसा माना जाता है कि एक बार भगवान कृष्ण ने अपनी अंगुली काट ली थी और उन्हें रक्तस्त्राव हो रहा था। यह देखकर द्रौपदी ने अपनी साड़ी का एक हिस्सा फाड़ दिया और उसे भगवान श्री कृष्ण के अंगुली के चारों ओर बांध दिया है। ऐसा माना जाता है कि कौरव द्वारा चीर हरण के दौरान कृष्ण ने द्रौपदी को बचाया था। “यह लम्हा कुछ खास है, बहन के हाथों में भाई का हाथ है। ओ बहना तेरे लिए मेरे पास कुछ खास है। तेरे सुकून के खातिर मेरी बहना, तेरा भाई हमेशा तेरे साथ है।”
  4. भाई के वादे और समर्पण की सबसे महत्वपूर्ण कहानी सम्राट हुँमायू की है। जो अपनी सेना के साथ मेवाड़ गया था। जब उस क्षेत्र पर शासन करने वाली रानी कर्णावती ने उनसे मदद मांगी थी। मेवाड़ पर बहादुर शाह द्वारा दो बार हमला किया गया था, जिससे रानी कर्णावती अत्यंत चिंतित थी। रानी कर्णावती ने अपने क्षेत्र की रक्षा के लिए हुमायूं को पत्र में राखी भेजकर सहायता मांगी थी।सम्राट जो एक सैन्य अभियान के बीच था, सब कुछ छोड़ कर उसे बचाने के लिए चला गया।
  5. एक और कहानी यह है कि राखी ने सिकंदर द ग्रेट की जान बचाई थी। जब उसने भारत पर आक्रमण किया था तो उसकी पत्नी रोक्साना ने कटोच राजा पोरस को राखी भेजी थी और उसने उसकी और उसके पति की रक्षा करने की कसम खाई थी। इसलिए युद्ध के मैदान में जब वह सिकंदर को मारने वाला था, तो उसने राखी देखी और उसे नहीं मारा था।

Essay On Raksha Bandhan With Heading 400 Words In Hindi

प्रस्तावना:

रक्षाबंधन का शाब्दिक अर्थ है- रक्षा करने वाला बंधन अर्थात धागा। इस त्यौहार में बहने अपने भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधती हैं और बदले में भाई जीवन भर उनकी रक्षा करने का वचन देते हैं।

रक्षाबंधन को राखी या सावन के महीने में पड़ने के कारण से श्रावणी या सलोनी भी कहा जाता है। यह सावन माह की पूर्णिमा में पढ़ने वाला हिंदू और जैन धर्म का प्रमुख त्योहार है।

“सूरज की तरह चमकते रहो,
फूलों की तरह महकते रहो,
यही दुआ है इस बहन की आज,
मेरे भाई तुम सदा खुश रहो।”

श्रावणी पूर्णिमा में रेशम के कपड़े से बहन द्वारा भाई की कलाई पर बंधन बांधे जाने की रात ही रक्षाबंधन कहलाती है। एक बार की बात है, देवताओं और असुरों में युद्ध शुरू हुआ युद्ध में हार के परिणाम स्वरुप भगवान ने अपना राजपाट खो दिया।

राजपाट पुनः प्राप्त करने की इच्छा से देवराज इंद्र देवगुरु बृहस्पति से मदद की गुहार करने लगे, तत्पश्चात देवगुरु बृहस्पति ने श्रावण मास की पूर्णिमा के प्रातःकाल में निम्नलिखित मंत्र से रक्षा विधान संपन्न किया।

“येन बद्धो बली राजा दानवेंद्रो महाबलाः।
तेन तवमाभिवधानाम नाम् रक्षे मा चल मा।।”

इस पूजा से प्राप्त सूत्र को इन्द्रणी ने इन्द्र के हाथ पर बांध दिया।जिससे युद्ध में इन्द्र को विजय प्राप्त हुई और उन्हे अपना हारा हुआ राजपाट वापस मिल गया। तब से रक्षाबंधन का त्यौहार मनाया जाने लगा।

रक्षाबंधन का सरकारी प्रबन्ध:

भारत सरकार द्वारा रक्षाबंधन के अवसर पर डाक सेवा पर छूट दी जाती है। इस दिन के लिए विशेष रूप से ₹10 वाले लिफाफे की बिक्री की जाती है। इस 50 ग्राम के लिफाफे में बहने एक साथ चार पाँच राखी भाई को भेज सकती है।

जबकि सामान्य 20 ग्राम के लिफाफे में एक राखी ही भेखी जा सकती है। यह प्रास्ताव डाक विभाग द्वारा बहनों को भेंट है। इसलिए यह सुविधा केवल रक्षाबंधन तक ही सुरक्षित है। दिल्ली में बस ट्रेन और मेट्रो में राखी के अवसर पर महिलाओं से टिकट नहीं लिया जाता है।

“साथ पले और साथ बङे हुए,
खूब मिला बचपन में प्यार।
भाई बहन का प्यार बढ़ाने,
आया राखी का त्यौहार।”

निष्कर्ष:

उपयुक्त पौराणिक कथा से स्पष्ट है कि रेशम के कपड़ों को केवल बहन ही नहीं अपितु गुरु भी अपने यजमान की सलामती की कामना करते हुए बांध सकते हैं।


Importance Of Raksha Bandhan In Hindi 500 Words

परिचय:

वर्तमान समय में आपसी रंजिश दूर करने के लिए कई राजनेताओं द्वारा एक दूसरे को राखी बांधी जा रही है। साथ ही लोग पर्यावरण की रक्षा करने के लिए पेड़-पौधों को भी रक्षाबंधन के अवसर पर राखी बांधते हैं।

प्राचीन समय में ब्राह्मणों का गुरु द्वारा हेरलो और यजमान को राखी बांधी जाती थी। पर अब राखी का स्वरूप पहले की अपेक्षा अधिक संशोधित हो गया है।

“वह बचपन की शरारते, वह झूलों पर झूलना।
वो मां का डाँटना, वो पापा का लाड-प्यार।
पर एक चीज और इन सब में खास है, वह है मेरी प्यारी बहन का प्यार।”

रक्षाबंधन समारोह की पारंपरिक विधि:

इस समारोह पर बहने सुबह स्नान करके पूजा की थाल सजाती हैं। पूजा की थाल में कुमकुम, राखी, रोली, अक्षत, दीपक और मिठाई रखी जाती है। तत्पश्चात घर के पूर्व दिशा में भाई को बैठाकर उसकी आरती उतारी जाती है, सिर पर अक्षत डाला जाता है, माथे पर कुमकुम का तिलक किया जाता है, अंत में मीठा खिलाया जाता है। भाई के छोटा होने पर बहने भाई को उपहार देती हैं। बड़े भाई अपनी बहनों को उपहार देते है।

मार्डन मे रक्षाबंधन के तरीके का मोङ प्रारूप:

पुराने समय में हर घर की छोटी बेटी द्वारा पिता को रक्षा सूत्र बांधा जाता था। इसके साथ ही गुरुओं द्वारा अपने यजमान को भी रक्षा सूत्र बांधा जाता था। पर अब बहने ही भाई की कलाई पर राखी बांधती है।

इसके साथ ही समय की व्यस्तता के कारण राखी के पर्व की पूजा विधि में बदलाव आया है, अब लोग पहले की अपेक्षा इस पर्व में कम सक्रिय नजर आते हैं। राखी के अवसर पर भाई के दूर रहने के कारण बहने कोरियर के द्वारा अपने भाई को राखी भेज देती हैं।

“बहनों को भाइयों का साथ मुबारक,
भाइयों को बहनों का प्यार मुबारक,
रहे यह सुख हमेशा आपकी जिंदगी में,
सब को राखी का त्योहार मुबारक।”

दिखावे के कारण महंगे मोतियों में बदलती राखी:

रक्षाबंधन में सबसे महत्वपूर्ण रेशम का धागा है, जिसे महिलाएं भावपूर्णण होकर भाई की कलाई पर बांधी है। आज बाजार में कई प्रकार की राखियां उपलब्ध है, जिसमें सोने व चांदी की राखियां भी शामिल है। रेशम के सामान्य अवस्था से बनाया प्यार का बंधन धीरे-धीरे दिखावे में तब्दील हो रहा है।

जैन धर्म में रक्षाबंधन क्यों और कैसे मनाते हैं?:

जैन धर्म में रक्षाबंधन का दिन बहुत शुभ माना जाता है। इस दिन एक मुनि ने सात सौ मुनियों के प्राण बचााए थे, इस कारण जैन धर्म से संबंध रखने वाले लोग इस दिन हाथ में सूत का डोर बांधते हैं।

“वो राखी पर तुम्हारा टीका लगाना,
कुमकुम में डूबी उंगली से मेरा माथा सजाना,
खिलाना मुझे मिठाई प्यार से,
बांध के धागा कलाई पर अपने प्यार को जताना।”

राखी के महत्व से जुड़ी प्रसिद्ध पौराणिक कथा:

राखी का इतिहास बहुत पुराना है। राखी की प्रचलित कहानियों में द्वापर की यह कहानी सबसे प्रचलित है। एक बार श्रीकृष्ण की अंगुली कट जाने पर द्रोपति ने अपनी साड़ी के एक कोने को फाड़कर कृष्ण के हाथ पर बांध दिया था, द्रोपति के सबसे मुश्किल समय में श्रीकृष्ण ने उस साड़ी के एक टुकड़े का कर्ज़ द्रौपदी का चीर हरण होने से बचाकर निभाया। वह साड़ी का टुकड़ा श्री कृष्ण ने राखी समझकर स्वीकार किया था।

रक्षाबंधन के महत्व को बचाने के लिए आवश्यक:

स्वयं को नए जमाने का दिखाने के लिए हम शुरुआत से हमारी सभ्यता को पुराना फैशन कह कर भुलाते आये हैं। हमने हमारी पूजा विधि बदली है। अपनी संस्कृति की रक्षा हेतु हमें हमारे पर्व के रीति-रिवाजों में परिवर्तन नहीं करना चाहिए और राखी के पर्व की महत्ता को समझते हुए हमें इस पर्व को पूरी विधि के अनुसार करना चाहिए।

निष्कर्ष:

हमारे पूर्वजों द्वारा बनाए गए त्योहारों, उपवास व त्यौहार की विधि विधान हमारी सभ्यता संस्कृति के रक्षक है। यह सब हमारी पहचान है, इसलिए हमें इसे बदलने का प्रयास नहीं करना चाहिए।


मेरा प्रिय त्योहार रक्षाबंधन | 600 Words

रक्षाबंधन का महत्व:

“भाई बहन के प्यार का बंधन,
है इस दुनिया में वरदान।
इसके जैसा दूजा कोई न रिश्ता,
चाहे ढूंढ लो सारा जहान।”

रक्षाबंधन हिंदू धर्म में सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक माना जाता है। रक्षाबंधन का नाम रक्षा की प्रतिज्ञा को दर्शाता है। इस शुभ दिन पर बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधती हैं।

राखी के धागे को पवित्र माना जाता है क्योंकि यह भाई और उसकी बहन को दिए गए वचन की याद दिलाता है, वह उसकी रक्षा तब तक करेगा, जब तक कि वह जिंदा है अर्थात जब तक उसकी मृत्यु नहीं हो जाती।

इस अवसर पर बहने अपने भाइयों के अच्छे स्वास्थ्य और भलाई के लिए प्रार्थना करती हैं और बदले में अपने भाइयों से उपहार प्राप्त करती हैं। इस त्योहार के महत्व का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है, कि भारतीय समाज के एक परिभाषित चरित्र भाई-बहन के बीच के रिश्ते को यह मजबूत करता है।

रक्षाबंधन प्राचीन काल से चला आ रहा एक त्यौहार है। कई पौराणिक कहानियां है, जो इस रिवाज के इर्द-गिर्द घूमती है। भारतीय इतिहास में कई कहानियां हैं, जब कहा जाता है कि भाइयों ने विपरीत परिस्थितियों के दौरान अपनी बहन की रक्षा के लिए कदम बढ़ाया।

हिंदू कैलेंडर के अनुसार रक्षाबंधन सावन माह की पूर्णिमा को मनाया जाता है। सावन माह को हिंदुओं के बीच एक शुभ काल माना जाता है और इस पूरे समय हर सोमवार को भगवान शिव की पूजा की जाती है।

“रेशम की डोरी फूलों का हार,
सावन में आया राखी का त्यौहार।”

इस त्योहार का इतना महत्व है कि डाक विभाग कम लागत पर विशेष लिफाफे जारी करता है, जिसमें राखी को अपने दूर के भाइयों को भेजा जा सके। भारतीय रेलवे इस त्यौहार के महत्व को संजोने के लिए विशेष ट्रेनें चलाता है।

भले ही राखी बांधने में केवल कुछ ही मिनट लगते हैं, लेकिन तैयारी कई दिन पहले ही हो जाती है। बहने त्योहार से पहले अपने भाइयों के लिए विशेष राखी चुनती हैं। एक भाई किसी भी समय अपनी बहन तक पहुंचने का प्रबंध करता है, उस पल के लिए जहां उसकी बहन पवित्र धागा बांधने के लिए खाली पेट उसका इंतजार करती है।

सुबह शुरू होने वाले अनुष्ठान के लिए परिवार का हर सदस्य जल्दी उठता है। एक विशेष थाली पूजा समारोह के लिए तैयार की जाती है और खूबसूरती से रोली, चावल के दानों, दिया व मिठाइयों और राखियों से सजाया जाता है। यह त्योहार भाई बहनों को एक साथ बड़े होने के महत्व का एहसास कराने में मदद करता है।

रक्षाबंधन का इतिहास:

भारत में रक्षाबंधन की सबसे लोकप्रिय कहानियों में से एक मुगल काल से जुड़ी है। जब राजपूतों और मुगलों के बीच संघर्ष हुआ था। लोककथाओं मे यह है, कि चित्तौड़ की महारानी कर्णावती ने अपने राज्य में शंकट देखा, तो उन्होंने मुगल सम्राट हुमायूं को राखी भेजी और गुजरात के बहादुर शाह के हमले के खिलाफ अपनी रक्षा के लिए मदद मांगी। कर्णावती ने जो धागा भेजा था, उसके अनुसार हुमायूं ने उसकी रक्षा के लिए तुरंत अपनी सेना को चित्तौड़ भेज दिया।

ऐसा माना जाता है कि द्रौपदी ने एक बार अपनी साड़ी की एक पट्टी उतारी और कृष्ण की कलाई पर बांधी। जिससे कृष्ण ने एक युद्ध के मैदान से खून बहाना बंद कर दिया।तब कृष्ण ने उन्हें अपनी बहन घोषित कर दिया।बदले में श्रीकृष्ण ने द्रोपति की रक्षा की जब पांडवों के सामने द्रोपदी के साथ कौरवों ने दुर्व्यवहार किया था।

रक्षाबंधन देवी संतोषी के जन्म के संबंध में भी अपनी कड़ियाँ जोड़ता है। देवी लक्ष्मी और राजा बलि के रिश्ते के ही समान ही प्रकृति के कई अन्य दंत कथाओं से भी इसका संबंध है। यह मान्यता है, कि रक्षाबंधन भगवान यम व उनकी बहन यमुना के कारण भी शुरू हुआ था। यमुना ने यम को राखी बांधी और अमरत्व की शुभकामना दी।

“बंधन यह तो प्यारा है,
सारे जग में मिसाल है।
जो भी बंधन बंधन में,
वह ह्रदय विशाल हैं।”

त्योहारों के साथ जो भी कहानियां या मिथक जुड़े हैं, वह पूरे उत्साह के साथ आधुनिक रुझानों के साथ मनाया जाता है। राखी का महत्व आम लोगों या उनके परिवारों तक ही सीमित नहीं है, यहां तक कि राजनेता भी इस त्योहार को एक महत्वपूर्ण परंपरा मानते हैं। हर साल हजारों राखी राष्ट्रपति प्रधानमंत्री और देश भर की प्रमुख हस्तियों को भेजी जाती है।


रक्षा बंधन पर 700 शब्दों का निबंध

भारत के प्रमुख त्योहारों में रक्षाबंधन भी सम्मिलित है। मुझे तो सारे यह त्योहार पसंद है, लेकिन उन सब में से मेरा सबसे पसंदीदा त्योहार है रक्षाबंधन।यह मेरा प्रिय त्योहार इसलिए है क्योंकि यह त्यौहार ऐसा है, जो हर साल केवल भाई और बहन के बीच स्नेह, प्रेम का विश्वास के प्रतीक को दर्शाता है। रक्षाबंधन हिंदुओं का महत्वपूर्ण त्योहार है, परंतु यह जैन धर्म के लोगों के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।

“कच्चे धागे से बनी पक्की डोर है राखी,
प्यार और मीठी शरारतों की होड़ है राखी,
भाई की लंबी उम्र की दुआ है राखी,
बहन के प्यार का पवित्र धुआँ है राखी।”

यह त्यौहार भाई बहन द्वारा बनाया जाता है।बहने इस दिन अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधती हैं और उनके मंगल की कामना करती हैं। भाई भी अपनी बहनों की सदा रक्षा करने का वचन देते है।

रक्षाबंधन का अर्थ है– ‘रक्षा करने वाला सूत्र’ अर्थात ‘धागा।’ इस दिन भाई-बहन एक दूसरे की रक्षा करने का वचन एक दूसरे को देते हैं। इस दिन सभी लोग जल्दी उठते हैं और नए कपड़े पहनते हैं। बहने पूजा की थाली तैयार करती है, जिसमें वे राखी, दिया, मिठाई, अक्षत और हल्दी रखती हैं। भाई अपनी बहन की पसंदीदा वस्तु खरीद कर लाते हैं, ताकि जब उनकी बहने उन्हें राखी बांधे तो वह उन्हें तोहफा दे सके।

भाई और बहन दोनों एक साथ एक स्थान पर बैठकर अनुष्ठान करते हैं।बहने रंगीन, पवित्र धागे को बांधती हैं और अपने भाइयों की आरती उतारती है। बहने बड़े ही प्यार से अपने भाइयों को मिठाई खिलाती हैं। भाई अपनी बहनों को उनका मनचाहा उपहार देते हैं।

“राखी का आया,
खुशियों की बहार लाया।
आज ये यह दुआ करते हैं,
भैया खुश रहो तुम हरदम।”

यह एक पारंपरिक त्योहार है।रामायण और महाभारत में भी इसका उल्लेख है। पहले के समय में बहन एक पवित्र धागा अपने भाई की कलाई पर बांधती थी और युद्ध में उसकी कुशलता के लिए ईश्वर से प्रार्थना करती थी। सभी लड़कियां उन सभी लड़कों को राखी बांध सकती हैं, जिन्हें वो अपना भाई मानती है।

यह त्यौहार भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक है। इसका रक्तसंबंध से भी बढ़कर महत्व है। जहां आदर, सम्मान और रक्षा की भावना हो, वहां यह त्योहार मनाना गलत नहीं है। इस दिन विवाहित स्त्री अपने भाई से मिलने, उसे राखी बांधने के लिए अपने मायके जाती हैं।

“लड़ना-झगड़ना है इस रिश्ते की शान,
रूठ कर मनवाना ही तो है इस रिश्ते का मान,
भाई बहन में बसती है एक दूजे की जान,
करता है भाई पूरे बहनों के अरमान।”

सभी भाई-बहन पूरे साल इस त्यौहार के आने की प्रतीक्षा करते हैं। इस त्यौहार की सबसे खास बात यह है, कि यह त्यौहार सभी उम्र के लोगों के लिए है। यह मायने नहीं रखता की आप बच्चे हैं या वयस्क। सभी उम्र के भाई बहन इस रक्षाबंधन के त्योहार को मनाते हैं।

यह त्यौहार भाई बहन के रिश्ते को और अधिक मजबूत करता है। रक्षाबंधन हिंदू कैलेंडर के हिसाब से मनाया जाता है। यह सावन के महीने में पड़ता है और यह त्यौहार सावन महीने के आखिरी दिन मनाया जाता है।यह शुभ त्यौहार आमतौर पर केवल अगस्त महीने के आसपास आता है।

“यह लम्हा कुछ खास है,
ओ बहना तेरे लिए मेरे पास कुछ खास है,
तेरे सुकून के खातिर मेरी बहना,
तेरा भाई हमेशा तेरे पास हैं।”

जैसा कि हम सभी जानते हैं, कि रक्षाबंधन सभी भाइयों और बहनों के हृदय में एक विशेष स्थान रखता है। एक भाई और बहन का बंधन एक बहुत विशेष और अनोखा बंधन होता है। एक दूसरे के प्रति उनकी देखभाल, चिंता, प्रेम और विश्वास की कोई सीमा नहीं। उनके द्वारा साझा किया गया प्यार किसी भी तुलना से परे हैं।

भाई बहन का रिश्ता ऐसा अटूट रिश्ता है कि चाहे वे आपस में एक दूसरे से कितना भी लड़े परंतु आवश्यकता पड़ने पर हमेशा एक दूसरे के समर्थन में खड़े होते हैं। भाई बहन छोटी-छोटी बातों पर एक दूसरे से बहुत लड़ते हैं। दूसरे शब्दों में, वे एक बंधन साझा करते हैं जो चिढ़ा व प्यार से भरा होता है। इनका एक दूसरे के प्रति प्यार एकजुटता व विश्वास इनके अटूट रिश्ते का प्रतीक है।

“भाई बहन के प्यार का बंधन,
है इस दुनिया में वरदान,
इसके जैसा दूजा ना कोई रिश्ता,
चाहे ढूंढ लो सारा जहान।”

परिवार केे सदस्य इस अवसर के लिए तैयार रहते हैं। आमतौर पर जातीय परिधान में। हम रंगीन राखियों और उपहारों से भरे बाजारों को देखते हैं। हर साल फैशनेबल और ट्रैंडी राखी बाजार के चक्कर लगाती हैं।

महिलाएं अपने भाइयों के लिए उत्तम राखी की खरीददारी करती हैं और पुरुष अपनी बहनों के लिए उपहार खरीदते हैं। इसलिए रक्षाबंधन सबसे सुखद त्योहारों में से एक है।


अंतिम शब्द:

मेरे प्यारे दोस्तों! मुझे पूरी उम्मीद हैं की मेरे द्वारा लिखा गया Raksha Bandhan Nibandh आपको जरूर पसंद आया होगा।

आप इस Raksha Bandhan Par Nibandh In Hindi को अपने करीबी दोस्तों या रिश्तेदारों को ज़रूर शेयर कीजियेगा, जिनको इस निबंध की अति आवश्यकता हो।

मैंने अपनी पूरी कोशिश की हैं आपको एक बेहतर KD प्रदान करने की। और अगर फिर भी मुझसे जाने-अनजाने में कोई गलती हो तो गई हैं तो माफ़ बुल्कुल मत करना। नीचे दिए Comment Box💬 में मुझे जरूर डाँटना😥 ताकि अगली बार में गलतीयाँ न करूं। 😊

हम अगली बार फिर मिलेंगे।

दुआओं में याद रखना!😊

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