Latest Soil Pollution Essay In Hindi 2020 | भूमि/ मृदा प्रदूषण पर निबंध हिंदी में

भूमि/ मृदा प्रदूषण पर निबंध हिंदी में | Soil Pollution Essay In Hindi, Land Pollution Essay In Hindi | भूमि प्रदूषण पर निबंध | भूमि प्रदूषण निबंध | मृदा प्रदूषण पर निबंध।

Soil Pollution Essay In Hindi
Soil Pollution Essay In Hindi

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आज हम भूमि प्रदूषण पर निबंध पढ़ेंगे। जो की अलग अलग शब्द सीमा के आधार पर लिखे गए हैं। आप Soil Pollution Essay In Hindi को ध्यान से और मन लगाकर पढ़ें और समझें।

Bhoomi Pradooshan Par Nibandh को निम्न शब्द सीमा के आधार पर लिखा गया है-

  1. Land Pollution Hindi Essay 80 Word
  2. Soil Pollution Hindi Nibandh 100 Shabd
  3. मृदा प्रदूषण 150 शब्दों का निबंध 
  4. Soil Pollution Essay In Hindi 200 Words
  5. Land Pollution Essay In Hindi 250 Shabd
  6. भूमि प्रदूषण पर निबंध 300 शब्दों का
  7. भूमि प्रदूषण निबंध 400 शब्द
  8. मृदा प्रदूषण पर निबंध 500 शब्दों में 
  9. मृदा प्रदूषण का निबंध 600 शब्द का

आइये! 
Land Pollution Essay In Hindi को अलग अलग शब्द सीमाओं के आधार पर पढ़ें।

नोट- यहां पर दिया गया मृदा प्रदूषण Par Nibandh कक्षा(For Class) 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11, 12,(विद्यालय में पढ़ने वाले) विद्यार्थियों के साथ-साथ कॉलेज के विद्यार्थियों के लिए भी मान्य हैं।

Land Pollution Hindi Essay 80 Word

Land Pollution Hindi Essay 80 Word
Land Pollution Hindi Essay 80 Word

‘प्रदूषण’ आज विश्व में एक बहुत बड़ी समस्या है। प्रदूषण के बहुत से प्रकार है उसमें से एक प्रकार है ‘भूमि प्रदूषण’। भूमि प्रदूषण शहरों में विकराल रूप धारण कर चुका है, क्योंकि बड़े शहरों में कल कारख़ानों से निकलने वाले कचरे का अधिकांश भाग गैर-जैवीय होता है जो कि जल्दी सड़ता-गलता नहीं है। और यह दिन प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है जिसके कारण अनेकों प्रकार की समस्याओं की उत्पत्ति हो रही है। हमें इसके रोकथाम के लिए उचित कदम उठाने चाहिए।

Soil Pollution Hindi Nibandh 100 Shabd

Soil Pollution Hindi Nibandh 100 Shabd
Soil Pollution Hindi Nibandh 100 Shabd

मृदा प्रदूषण अथवा भूमि प्रदूषण एक ऐसी समस्या है जिसे लेकर विश्व भर की सभी शक्तियाँ चिंतित हैं। मृदा या मिट्टी हमारे लिए अति महत्वपूर्ण है क्योंकि हम इसी पर अपना जीवन-यापन करते हैं तथा इसी पर हम अपना खाद्य पदार्थ उगाते हैं। यदि यह प्रदूषित हुई तो, इससे दुनिया भर में रह रहे सभी प्रकार की जीवों पर असर होगा और उनका जीवन संकट में पड़ जाएगा।

भूमि प्रदूषण के मुख्य कारण वैसे तत्व हैं जो जल्दी से सड़ते-गलते नहीं हैं और लंबे समय तक भूमि पर पड़े-पड़े उसको प्रदूषित करते हैं जिससे उस भूखंड की मिट्टी में मौजूद सारे सूक्ष्म जीव मर जाते हैं जो मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने में सहायक होते हैं।

मृदा प्रदूषण 150 शब्दों का निबंध 

मृदा प्रदूषण 150 शब्दों का निबंध
मृदा प्रदूषण 150 शब्दों का निबंध

‘भूमि’ हमारे पर्यावरण की एक महत्वपूर्ण अंग है और इसका प्रदूषण भूमि प्रदूषण या मृदा प्रदूषण कहलाता है ।

भूमि प्रदूषण का अर्थ- भूमि में कुछ ऐसे तत्व उपस्थिति जो उसकी गुणवत्ता के लिए लाभकारी नहीं है। ऐसे तत्व मिट्टी की गुणवत्ता को कम कर देते हैं जिससे उसमें किसी भी प्रकार के जीव जंतुओं के लिए जिंदा रह पाना लगभग असंभव हो जाता है।

वहां की मिट्टी बंजर हो जाती है क्योंकि वहां पर ना तो इस प्रकार के जीव जंतु रह सकते हैं और ना ही कोई पेड़-पौधा उग सकता है।

भूमि प्रदूषण के बहुत से कारण हैं, जिसमें मुख्य कारण है-

  1. कल-कारखानों से निकलने वाला ठोस कचरा तथा
  2. किसानों द्वारा खेतों में प्रयोग होने वाला कीटनाशक

ये दो कारण पृथ्वी के बहुत बड़े भू-भाग को प्रदूषित कर चुके हैं। यदि हम अभी भी नहीं जागे तो यह समस्या एक विकराल रूप धारण कर लेगी जिसे रोक पाना हमारे लिए असंभव हो जाएगा।

Soil Pollution Essay In Hindi 200 Words

Soil Pollution Essay In Hindi 200 Words
Soil Pollution Essay In Hindi 200 Words

प्रस्तावना:

भूमि प्रदूषण विश्व के उन गंभीर समस्याओं में से एक है जिससे आज दुनिया जूझ रही है। भूमि प्रदूषण के कारण मिट्टी की उर्वरता कम हो जाती है जिससे फसलों के उत्पादन पर प्रभाव पड़ता है। बढ़ते औद्योगिकीकरण तथा कीटनाशकों के प्रयोग से यह समस्या और भी बढ़ती ही जा रही है।

भूमि प्रदूषण का अर्थ:

भूमि प्रदूषण तब होता है जब मिट्टी में कुछ ऐसे तत्व मिल जाते हैं (वह चाहे जैविक हो या अजैविक) जो मिट्टी की उपजाऊ शक्ति क्षीण कर देते हैं।

जिससे किसी भी प्रकार के जीव का वहां जीवित रह पाना लगभग असंभव हो जाता है। मिट्टी में मिली उस प्रदूषण-कारी तत्व को ‘प्रदूषक’ कहते हैं।

भूमि प्रदूषण के घातक परिणाम:

प्रदूषण मिट्टी के साथ मिलकर पूरे भूखंड को प्रदूषित कर देता है जिससे प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से कई खतरनाक बीमारियों की संभावना बढ़ जाती है।

यह अधिकतर गरीब लोगों को सबसे पहले निशाना बनाती है, क्योंकि गरीब लोगों के पास वैसे साधन नहीं होते जो अमीरों के पास होते हैं।

उपसंहार:

आज दुनिया का एक बड़ा भाग भूमि प्रदूषण के कारण अनेकों प्रकार के रोगों से ग्रसित हो चुका है जिसमें कैंसर जैसी खतरनाक बीमारियाँ भी हैं।

हमें इसे जल्द से जल्द रोकना होगा नहीं तो समस्या विकराल रूप धारण कर लेगी और हम सब इसकी चपेट में आ जाएंगे।

Land Pollution Essay In Hindi 250 Shabd

Land Pollution Essay In Hindi 250 Shabd
Land Pollution Essay In Hindi 250 Shabd

प्रस्तावना:

भूमि पर्यावरण की एक आधारभूत और महत्वपूर्ण अंग है। यह एक स्थिर इकाई है और इसे बढ़ाया नहीं जा सकता। भूमि प्रदूषण आज एक वैश्विक संकट के रूप में उभरा है। यह सिर्फ हमारे लिए ही अहितकारी नहीं है बल्कि पर्यावरण के लिए भी खतरे की घंटी है।

पृथ्वी के सिर्फ 30% हिस्सा ही भूमि है और उसमें भी उपजाऊ भूमि की मात्रा बहुत कम है ऐसे में भूमि प्रदूषण जैसी समस्या पृथ्वी पर जीवन के अस्तित्व के लिए खतरा बन सकती है।

बढ़ती जनसंख्या के लिए भोजन उपलब्ध कराने हेतु जिस प्रकार धड़ल्ले से खेतों में रसायनों का प्रयोग हो रहा है वह बहुत ही हानिकारक है और हमें इसे हर हाल में रोकना चाहिए।

भूमि प्रदूषण के कारण:

भूमि प्रदूषण बहुत सारे कारणों से होती है पर इसमें दो मुख्य कारण है।-

  1. पहला कारण: कल कारखानों से निकलने वाला ठोस कचरा और
  2. दूसरा प्रमुख कारण: खेतों में प्रयोग होने वाला खतरनाक रासायनिक कीटनाशक व खाद। यह सिर्फ कीटों को नहीं मारता बल्कि पूरी भूमि को प्रदूषित और जहरीला कर देता है।

कारखानों से निकलने वाले ठोस अपशिष्ट जल्दी सड़ते नहीं हैं और लंबे समय तक यूं ही पड़े रहते है जिससे वह भूखंड बंजर हो जाता है।

उपसंहार:

ऐसा नहीं है कि भूमि प्रदूषण को रोका नहीं जा सकता। इसके लिए हमें बस चाहिए एक मजबूत इच्छाशक्ति  और कुछ सार्थक प्रयास, जैसे कीटनाशकों के प्रयोग को कम करना और औद्योगिक कचरे का नवीनीकरण करना।

यदि हम ऐसा करेंगे तो निश्चित रूप से हम भूमि प्रदूषण को रोक पाएंगे और इसे आने वाले भविष्य को सुंदर बना पाएंगे।

भूमि प्रदूषण पर निबंध 300 शब्दों का 

भूमि प्रदूषण पर निबंध 300 शब्दों का
भूमि प्रदूषण पर निबंध 300 शब्दों का

प्रस्तावना:

‘भूमि प्रदूषण’ अर्थात मिट्टी में कुछ ऐसे तत्वों का मिलना जो भूमि की उर्वरता को खत्म कर दे। भूमि प्रदूषण एक गंभीर समस्या बन चुकी है जिसका समाधान ढूंढना अति आवश्यक हो गया है क्योंकि इससे न सिर्फ धरती बंजर हो रही है बल्कि इससे गंभीर बीमारियों का भी संकट बढ़ गया है। और लोग इसकी चपेट में आकर बीमार पड़ रहे हैं।

आज भूमि प्रदूषण के कारण दुनिया भर में लाइलाज बीमारियों से ग्रसित लोगों की संख्या दिन-प्रतिदिन बढ़ती ही जा रही हैं। इन गंभीर बीमारियों में एक कैंसर सबसे ज्यादा फैल रहा है, जिसका इलाज है भी तो वह इतना महंगा कि गरीब आदमी करा ही नहीं सकता।

भूमि प्रदूषण के कारण:

भूमि प्रदूषण के बहुत सारे कारण हैं कुछ छोटे स्तर पर प्रभाव डालते हैं तो कुछ कारण बहुत ही गंभीर समस्या उत्पन्न कर रहे हैं।हमारे घर से निकलने वाले कचरे में ‘प्लास्टिक’ बड़े पैमाने पर होता है और यह प्लास्टिक जल्दी नष्ट नहीं होता।

यह लंबे समय तक मिट्टी में पड़ा रहकर उसे प्रदूषित करता है और उसे जहरीला बना देता है जिससे वहां पर किसी भी प्रकार के पेड़-पौधों का उगना लगभग नामुमकिन हो जाता है।

प्लास्टिक न सिर्फ पेड़-पौधों पर असर डालता है बल्कि उसमें रहने वाले छोटे-छोटे सूक्ष्म जीवों पर भी असर डालता है और उस भूखंड को बंजर बना देता है

औद्योगिक कचरा, औद्योगिक कचरे में बड़े पैमाने पर ठोस व रासायनिक तत्व होते हैं जो कि प्रदूषक का काम करते हैं और पानी के साथ मिलकर भूमि प्रदूषण को बढ़ाते हैं।

उपसंहार:

इस बात में कोई शक नहीं कि भूमि प्रदूषण एक गंभीर व बड़ी समस्या है, लेकिन ऐसा नहीं है कि इसका कोई समाधान नहीं है। यदि हम थोड़े जागरूक हो जाएं तथा अन्य लोगों को भी जागरूक करके घरेलू कचरे व औद्योगिक कचरे में कुछ कमी ला पाए तो छोटे-छोटे प्रयास एक सार्थक परिणाम देने में सफल होंगे।

भूमि प्रदूषण निबंध 400 शब्द

भूमि प्रदूषण निबंध 400 शब्द
भूमि प्रदूषण निबंध 400 शब्द

प्रस्तावना:

भूमि प्रदूषण का अर्थ है- मिट्टी में कुछ ऐसे तत्व का मिल जाना जिससे उस भूखंड की उपयोगिता खत्म हो जाए।

जल प्रदूषण तथा वायु प्रदूषण के बाद भूमि प्रदूषण सबसे गंभीर समस्या है जिससे दुनिया जूझ रही है। भूमि प्रदूषण का पर्यावरण पर बहुत बुरा असर पड़ रहा है।

भूमि प्रदूषण न सिर्फ भूमि पर असर डाल रहा है बल्कि यह भयानक बीमारियों के रूप में भी सामने आ रहा है, जिससे दुनिया को आर्थिक रूप से तो हानि हो ही रही है साथ-साथ हजारों-लाखों लोगों की जानें भी जा रही हैं।

भूमि प्रदूषण के प्रकार:

यदि कारणों के हिसाब से देखा जाए तो भूमि प्रदूषण को दो भागों में बाँटा जा सकता है।-

  • पहले भाग में हम प्रकृति द्वारा हो रहे प्रदूषण को रख सकते हैं और
  • दूसरे भाग में मानव गतिविधियों के कारण हो रहे प्रदूषण को रख सकते हैं।

प्राकृतिक भूमि प्रदूषण:

प्रकृति में बहुत सारे ऐसे तत्व मौजूद हैं जो भूमि की उर्वरता शक्ति को क्षीण कर देते हैं। दुनिया के कई भागों में धरती से निकलती हानिकारक गैस व रसायन से पृथ्वी का एक बड़ा भूखंड बंजर हो गया है।

उसमें किसी प्रकार के पेड़-पौधे या अन्य जीवों का अस्तित्व नहीं है। जीवित ज्वालामुखी क्षेत्रों में प्राकृतिक भू-प्रदूषण सबसे ज्यादा होता है।

मानवकृत भूमि प्रदूषण:

प्रकृति द्वारा हो रहा प्रदूषण एक सीमित मात्रा में है। लेकिन मानव निर्मित प्रदूषक, भूमि प्रदूषण के मुख्य कारण हैं और इनमें विभिन्न प्रकार के ठोस तत्व या रसायन होते हैं, जो कार्बनिक और अकार्बनिक दोनों प्रकार के होते हैं। वे या तो अकेले ही मिट्टी को प्रदूषित करते हैं या फिर किसी अन्य प्राकृतिक तत्वों के साथ मिलकर भूमि प्रदूषण करते हैं।

मानव निर्मित भूमि प्रदूषण आमतौर पर औद्योगिक या शहरी स्रोतों, औद्योगिक गतिविधियों और कृषि कीटनाशकों से आने वाले कचरे के अनुचित तरीके के प्रबंधन के कारण होता है।

भूमि प्रदूषण रोकने के प्रयास:

भूमि प्रदूषण रोकने के लिए हमें संकल्प की आवश्यकता है। कुछ ऐसे ही दृढ़ संकल्प जैसे निम्नलिखित पंक्तियों से प्रदर्शित किये गए है-

‘धरती को हरियाली को,
हिम से पूरित प्याली को।
तनिक न घटने देंगे हम,
ओजोन परत की जाली को।’

यदि हम ऐसे ही संकल्प के साथ प्रयास करेंगे तो हम निश्चित ही भूमि प्रदूषण नाम की समस्या को जड़ से समाप्त कर पाएंगे।

उपसंहार:

नि:संदेह भूमि प्रदूषण एक गंभीर समस्या है और इसके कई कारण हैं। लेकिन इसे कम किया जा सकता है यदि दृढ़ संकल्प के साथ प्रयास किए जाएँ।

हम सब को एक साथ मिलकर इसके लिए प्रयास करना चाहिए। लोगों को जागरूक करना चाहिए ताकि घरेलू कचरा कम से कम हो।

मृदा प्रदूषण पर निबंध 500 शब्दों में 

मृदा प्रदूषण पर निबंध 500 शब्दों में
मृदा प्रदूषण पर निबंध 500 शब्दों में

असंबाधं बध्यतो मानवानां यस्या उद्वतः प्रवतः समं बहु ।
नानावीर्या ओषधीर्या बिभर्ति पृथिवी नः प्रथतां राध्यतां नः ॥२॥

उपरोक्त श्लोक अथर्ववेद के भूमि सूक्त का है जिसका भावार्थ कुछ इस प्रकार है-

“वह धरती माँ जो अपने पर्वत, ढलान और मैदानों के माध्यम से मनुष्यों तथा समस्त जीवों के लिए निर्बाध स्वतंत्रता (बाहरी और आंतरिक दोनों) प्रदान करती है।, वह कई पौधों और विभिन्न क्षमता के औषधीय जड़ी-बूटी को जन्म देती है उन्हें परि-पोषित करती है, वह हमें समृद्ध करे और हमें स्वस्थ बनाये।”

इस श्लोक में पृथ्वी को माँ का दर्जा दिया गया है और बताया गया है कि पृथ्वी हमारा ठीक उसी तरह ध्यान रखती है जैसे एक माँ अपने बच्चे का रखती है

वेदों-पुराणों में भूमि की महिमा बताई गयी है और रामायण में भी जन्मभूमि को स्वर्ग से बढ़कर बताया गया है और ये हमारा कर्त्तव्य है कि हम इसको गन्दा न करें।

लेकिन आज इसके उलट हो रहा। हम लोग माता समान पृथ्वी को प्रदूषित कर रहे। दुनिया भर में भूमि प्रदूषण की वजह से भूमि अपनी उपजाऊ शक्ति खो रही है।

भूमि प्रदूषण के मुख्य कारक:

भूमि प्रदूषण के कई कारक हैं लेकिन कुछ ऐसे अपशिष्ट हैं जो भूमि के प्रदूषण में सबसे अधिक योगदान करते हैं-

1. प्लास्टिक:

प्लास्टिक की खोज ने मानव जीवन को आसान तो बना दिया। और यह एक ऐसा पदार्थ है जो सड़ता-गलता नहीं है और इस वजह से इसमें रखा गया सामान लम्बे समय तक सुरक्षित रह सकता है।

लेकिन इसकी यही खूबी आज प्रदूषण का मुख्य कारण बन चुकी है। आज दुनिया भर में प्लास्टिक पर रोक लगाने की मांग की जा रही हैं।

2. कीटनाशक:

खेतों में प्रयोग होने वाला कीटनाशक यूँ तो फसल को हरा-भरा करने में मदद करते है। लेकिन इसका एक दूसरा पक्ष भी है जो भूमि प्रदूषण का कारण है। और

वो दूसरा पक्ष ये है कि, यह नष्ट नहीं होता और लम्बे समय तक जमीन में पड़ा रहता है जिससे भूमि की गुणवत्ता समाप्त हो जाती है।

भूमि प्रदूषण के दुष्प्रभाव:

भूमि प्रदूषण में मिट्टी में आर्सेनिक और लीड जैसे तत्व की मात्रा बढ़ जाती है, जिससे दुनिया भर में लोगों को भयानक बीमारियाँ हो रही हैं।

कीटनाशकों और अन्य रसायनों के प्रयोग से पूरा क्षेत्र बंजर होता जा रहा और यह रसायन, भोजन के माध्यम से हमारे शरीर में जा रहा जिससे हमारा शरीर अंदर से खोखला होता जा रहा है।

मृदा प्रदूषण को रोकने के उपाय:

भूमि प्रदूषण एक गंभीर समस्या है और यह जल प्रदूषण व वायु प्रदूषण का भी कारण है। इसे ख़त्म करने का एक ही उपाय है कि लोगों को जागरूक किया जाए और इस काम को युद्ध स्तर पर करना होगा नहीं तो यह समस्या जिस गति से बढ़ रही है उस हिसाब से आने वाले समय में इसे रोकना असंभव हो जाएगा।

उपसंहार:

महात्मा गाँधी जी ने कहा था कि,

“बेहतर साफ-सफाई से ही भारत के गांवों को आदर्श बनाया जा सकता है।”

इस कथन को हमें एक कदम और आगे ले जाना होगा। हमें सिर्फ साफ-सफाई पर नहीं बल्कि कचरे के उत्पादन को भी कम करने पर ध्यान देना होगा।

इसके लिए ज़रूरी है कि हम कोई चीज़ उतना ही खरीदें जितनी हमें आवश्यकता है। अन्यथा ये प्रदूषण मानव पतन का कारण बनेगा।

मृदा प्रदूषण का निबंध 600 शब्द का

मृदा प्रदूषण का निबंध 600 शब्द का
मृदा प्रदूषण का निबंध 600 शब्द का

रामायण में कहा गया है कि “जहाँ हम जन्म लेते हैं वो भूमि स्वर्ग से भी महान होती है।” इसी को ‘मैथिली शरण गुप्त’ जी ने भी अपनी कविता में दुहराई है। वे कहते हैं-

‘स्वर्ग से भी श्रेष्ठ जननी जन्मभूमि कही गई।

सेवनिया है सभी को वहा महा महिमामयी।।’

लेकिन दुर्भाग्यवश आज हम विकास और आधुनिकता की अंधी दौड़ में इस तरह संलग्न हो गए हैं कि अपनी स्वर्ग से बढ़कर मातृभूमि जिसकी हमें सेवा करनी चाहिए उसे हम नर्क बनाते जा रहे हैं।

आज भूमि प्रदूषण विकराल रूप धारण कर चुका है और यह प्रदूषण नामक दानव दिन-प्रतिदिन और विशाल होता जा रहा है जिसका जनक और कोई नहीं बल्कि हम मनुष्य ही हैं, वही मनुष्य जो स्वयं को पृथ्वी पर सबसे श्रेष्ठ समझता है।

भूमि प्रदूषण क्या है?:

भूमि प्रदूषण वह दंश है, वह कष्ट है जो हमने अपनी माता स्वरूप भूमि को उपहार में दिया है। भूमि प्रदूषण अर्थात् भूमि में कुछ ऐसे तत्वों का मिल जाना जिसके कारण एक भूखंड की उपयोगिता समाप्त हो जाए। वहां फिर किसी पेड़-पौधे का उगना भी लगभग असंभव हो जाए फिर खेती की तो बात ही नहीं उठती।

भूमि प्रदूषण समस्या:

हमने पूरी पृथ्वी पर कचरे का अंबार खड़ा कर दिया है। एक रिपोर्ट के अनुसार दुनिया में आज लगभग 2.01 अरब मैट्रिक टन कचरे का उत्पादन हर साल हो रहा है और यह 2050 तक 3.40 मैट्रिक टन होने का अनुमान है।

ये आँकड़े बताते हैं कि समस्या कितनी बड़ी और भयावह है। और आने वाले समय में यह समस्या और भी बड़ी होने वाली है। 2.01 अरब मैट्रिक टन कचरे में अधिकांश भाग प्लास्टिक होता है जो सदियों तक सड़ता-गलता नहीं है।

लम्बे समय तक मिट्टी में प्लास्टिक पड़े रहने पर मिट्टी की उपजाऊ शक्ति क्षीण हो जाती है, और उसकी गुणवत्ता पूर्णतया समाप्त हो जाती है।

भूमि प्रदूषण के कारण:

भूमि प्रदूषण के ऐसे तो अनेकों कारण हैं लेकिन तीन मुख्य कारण हैं जिसके कारण सर्वाधिक भूमि प्रदूषण  होता है-

1. औद्योगिक कारण-

औद्योगिक क्रांति के बाद दुनिया भर में हजारों लाखों फैक्ट्रियां खुली। इन फैक्ट्रियों से निकलने वाला कचरा प्रदूषण का मुख्य कारण बना, जिसमें भूमि प्रदूषण भी सम्मिलित है।

2. घरेलू कारण-

उद्योगों के खुलने के बाद बड़े पैमाने पर चीजों का उत्पादन शुरू हो गया। जिसके लिए आवश्यक था कि लोग उन चीजों को खरीदें। तो इसके लिए अनावश्यक रूप से से सामान की खपत को बढ़ाया गया।

लोगों को जरूरत के हिसाब से नहीं बल्कि शौक के लिए सामान खरीदने के लिए प्रोत्साहित किया गया और जिसका परिणाम भारी मात्रा में घरेलू कचरा के उत्पादन के रूप में सामने आया।

3. कृषि कारण-

ऐसे तो कृषि हमारे अस्तित्व के लिए आवश्यक है क्योंकि हम बिना खाए रह नहीं सकते और खाने के लिए खेती करनी ही होगी। लेकिन बढती जनसंख्या को भोजन उपलब्ध कराने के लिए कृत्रिम तरीका अपनाया गया।

अनेक प्रकार के खाद और कीटनाशक का आविष्कार किया गया। ये आविष्कार छोटी अवधि में तो कारगर साबित हुई लेकिन लम्बे समय में इसने मिट्टी की उर्वरता छीन ली और भूमि प्रदूषण का कारण बनी।

भूमि प्रदूषण को रोकने के प्रयास:

पहले जब समस्या छोटी थी तब इस पर किसी ने ध्यान नहीं दिया लेकिन अब समस्या बड़ी हो गई है। अब बुद्धिजीवियों को बुद्धि आई तो इसके लिए लोगों को जागरूक किया जा रहा है।

चीजों को पुनः प्रयोग में लाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है ताकि कम से कम कचरा उत्पादन हो। इसी के लिए हर साल 22 अप्रैल को ‘विश्व पृथ्वी दिवस’ मनाया जाता है।

उपसंहार:

‘पृथ्वी’ हमारा घर है इस पर हम जन्म लेते हैं, इसी पर अपना जीवन व्यतीत करते हैं और इसी पर मृत्यु को प्राप्त होते हैं। अतः ये हमारा कर्तव्य है कि हम इसे सुंदर बनाकर रखें, इसकी हरियाली बनी रहे इसके लिए हमें सार्थक प्रयास करने चाहिए।

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बेचारा नोबिता………इसको हमेशा Test में जीरो मिलता हैं। आप इसके जैसा मत बनना। Land Pollution Essay In Hindi को अच्छे से पढ़ना और Test में अच्छे नंबर लाना।😉


यह भी पढ़ें (संबंधित लेख और निबंध):
😊👉 Pradushan par Nibandh
😊👉 Plastic Pollution Essay in Hindi
😊👉 Water Conservation Essay In Hindi


अंतिम शब्द:
मेरे प्यारे दोस्तों! मुझे पूरी उम्मीद हैं की मेरे द्वारा लिखा गया Land Pollution Hindi Nibandh आपको जरूर पसंद आया होगा।

आप इस मृदा प्रदूषण पर निबंध को अपने करीबी दोस्तों या रिश्तेदारों को ज़रूर शेयर कीजियेगा, जिनको इस निबंध की अति आवश्यकता हो।

मैंने अपनी पूरी कोशिश की हैं आपको एक बेहतर भूमि प्रदूषण निबंध प्रदान करने की। और अगर फिर भी मुझसे जाने-अनजाने में कोई गलती हो तो गई हैं तो माफ़ बुल्कुल मत करना। नीचे दिए Comment Box💬 में मुझे जरूर डाँटना😥 ताकि अगली बार में गलतीयाँ न करूं। 😊

हम अगली बार फिर मिलेंगे।

दुआओं में याद रखना!😊🙏

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