वर्षा ऋतु पर निबंध {महत्व, फायदे, नुकसान, रूपरेखा एवं अलग-अलग शब्द सीमा सहित}| Varsha Ritu Essay In Hindi 2023

वर्षा ऋतु पर निबंध: वर्षा ऋतु हम सभी के लिए एक प्यारा ऋतु होता है। वर्षा ऋतु भारत के चार मुख्य ऋतुओं में से एक है। आमतौर पर यह जुलाई के महीने में आता है और सितंबर के महीने तक रहता है। यह ग्रीष्म ऋतु के गर्म दिनों के बाद आता है। यह अपने साथ साथ पृथ्वी पर मौजूद प्रत्येक जीवित जीव के लिए एक आशा और राहत ले आती है। यह अपने प्रकृति के तापमान को भी कम करती है जिसके कारण लोगों को गर्मी बहुत राहत मिलती है। ग्रीष्म ऋतु में जो नदी और तालाब सूख जाते हैं, वे फिर से वर्षा ऋतु आने पर के पानी से भर जाते हैं, और जल निकायों को है जैसे नया जीवन मिल जाता है। यह बागों और मैदानों को उनकी ख़ूबसूरती लौटा देती है जो गर्मी के कारण नष्ट हो गई थी। बारिश हमारे पर्यावरण को एक नई सुंदरता देती है, हालांकि यह भी दुखद तथ्य है कि यह सिर्फ तीन महीने तक रहता है।

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EssayToNibandh.com पर आज हम वर्षा ऋतु पर निबंध पढ़ेंगे। जो की अलग अलग शब्द सीमा के आधार पर लिखे गए हैं। आप Varsha Ritu Par Nibandh को ध्यान से और मन लगाकर पढ़ें और समझें। वर्षा ऋतु पर निबंध को निम्न शब्द सीमा के आधार पर लिखा गया है-

आइये! Varsha Ritu Essay In Hindi को अलग अलग शब्द सीमाओं के आधार पर पढ़ें।

नोट- यहां पर दिया गया बारिश पर निबंध कक्षा(For Class) 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11, 12,(विद्यालय में पढ़ने वाले) विद्यार्थियों के साथ-साथ कॉलेज के विद्यार्थियों के लिए भी मान्य हैं।

Rainy Season Essay In Hindi For Class 3 (10 Lines)

1) वर्षा ऋतु वह ऋतु होता है जब किसी क्षेत्र में अधिकांश वार्षिक वर्षा होती है।

2) वर्षा ऋतु बहुत ही सुहाना होता है।

3) वर्षा ऋतु आने पर तापमान में थोड़ी गिरावट दर्ज की जाती है जिससे तापमान अनुकूल बना रहता है।

4) हवा की गुणवत्ता मे सुधार आ जाता है।

5) वर्षा ऋतु आने पर चारों तरफ हरियाली नजर आती है।

6) वर्षा ऋतु आने पर बांध नदी तालाब सभी जलमग्न हो जाते हैं।

7) बारिश के साथ ही हवा में मिली गंदगी धूल जाती हैं।

8) वर्षा ऋतु पर के किसानों के लिए खुशी लाती है और साथ ही साथ उनके आर्थिक स्थिति को भी सुधारती है।

9) लगातार बारिश के कारण कभी-कभी वर्षा ऋतु बाढ़ का कारण बन सकता है।

10) बारिश अपने साथ-साथ कई संक्रामक रोग जैसे कि मलेरिया, डायरियाँ आदि को भी साथ लेकर आती है।


वर्षा ऋतु पर निबंध For Class 2 | वर्षा ऋतु पर निबंध 50 शब्द

वर्षा ऋतु को उस ऋतु के रूप में परिभाषित किया जाता है। जब किसी भी क्षेत्र की औसत वर्षा (ज्यादातर वर्षा) होती है। बारिश का मौसम गर्मियों की लंबी अवधि के बाद आता है जो गर्मी से राहत देता है और वातावरण को ठंडा और खुशनुमा बनाता है।

बारिश के मौसम में पौधे, पेड़ और घास बहुत हरे और आकर्षक दिखते हैं। बारिश के मौसम में नदी, नालों को भरपूर पानी मिलता है। बारिश के मौसम में भारी बारिश के कारण वातावरण स्वच्छ और ताजा हो जाता है।


वर्षा ऋतु पर निबंध 100 शब्द

वर्षा ऋतु साल का वह दौर होता है जिसमें नियमित रूप से बारिश होती है। वर्षा ऋतु वनस्पतियों, जीवों के साथ-साथ किसी भी क्षेत्र में कृषि संबंधी गतिविधियों लिए बहुत ही आवश्यक है। वर्षा ऋतु का इंतजार सभी को होता है और खासकर किसानों को क्योंकि उनकी फसल की पैदावार बारिश पर ही निर्भर करती है।

बारिश के मौसम में प्रकृति अधिक सुहाना जाता है। और यही हुआ वह ऋतु है जब हमें इंद्रधनुष, नाचते हुए मोर, कूदते और टर्र-टर्र करते मेंढक दिखाई देते हैं। हालांकि, बारिश की अधिकता हमारे जीवन में कई व्यवधान भी ला सकती है और फ़सलों को नुकसान पहुंचा सकती है जो किसानों और देश की अर्थव्यवस्था के लिए बिल्कुल भी अच्छा नहीं है।


Varsha Ritu Nibandh 150 Words | वर्षा ऋतु पर निबंध 150 शब्द In Hindi

साल का वह समय जब ज्यादातर क्षेत्रों में बारिश होती है उसे वर्षा ऋतु कहते हैं। आमतौर पर अवधि दो से चार महीने होती है अलग-अलग इलाकों के हिसाब से इसकी अवधि अलग अलग होती है। बारिश का मौसम पर्यावरण में प्राकृतिक सुंदरता को बढ़ाता है। सभी पेड़ और पौधे नई हरी पत्नियों से ढँक जाते हैं और खेत शानदार दिखने वाली हरी मखमली घास से ढक जाते हैं।

किसानों के लिए वर्षा ऋतु का बड़ा ही महत्व होता है क्योंकि उन्हें अपनी फ़सलों की अच्छी उपज के लिए अधिक पानी की आवश्यकता होती है। बड़ी संख्या में किसान अपने परिवार की खाद्य आवश्यकता को पूरा करने के लिए वर्षा पर निर्भर रहते हैं। लेकिन से ज्यादा बारिश से बाढ़ आती है तो वही बारिश न होने से सूखा पड़ता है। यह अपने साथ-साथ हमारे लिए कुछ असुविधाओं को भी अपने साथ लाता है। यह दस्त, पेचिस, टाइफाइड और अन्य पाचन तंत्र के साथ कई और बीमारियों भी का कारण बनता है।


वर्षा ऋतु पर निबंध 200 शब्द In Hindi | वर्षा ऋतु पर निबंध हिंदी में 20 लाइन

प्रस्तावना

वर्षा ऋतु आमतौर पे जुलाई के महीने में शुरू होता है और सितंबर तक चलता है। हालाँकि जुलाई और अगस्त महीना सबसे अधिक वर्षा वाले महीने होते हैं। इससे गर्मी के अत्यधिक गर्म दिनों से राहत मिलती है और गर्मी के दिनों की गर्मी और धूल भी कम हो जाती है। गर्मी के दिनों के मुकाबले वर्षा ऋतु में वातावरण के तापमान में दो से 10 डिग्री तक कि गिरावट आती है।

भारतीय कृषि में वर्षा ऋतु का महत्व

इसे मानसून का मौसम भी कहा जाता है। यह हमारे कृषि भाईयों का जीवन है। कई अर्थशास्त्रियों और भूगोलवेत्ताओं ने भारतीय कृषि को ‘मानसून का जुआ’ कहा है। यदि मानसून की हवा विफल हो जाती है, तो भारत में शून्य वर्षा होती है, जिसका सीधा प्रभाव कृषि पर पड़ता है।

वर्षा ऋतु से नुकसान

वर्षा ऋतु के कुछ नुकसान भी हैं। कभी-कभी मूसलाधार और लगातार बारिश से मिट्टी और पुराने ईंट के घर गिर जाते हैं, नदियों में पानी इतना बढ़ जाता है कि बाढ़ जैसे हालात हो जाते है। जिसके बाद मलेरिया, हैजा और त्वचा रोग जैसी महामारियां होती हैं। इतना ही नहीं है ये फसलों और लोगों के जीवन को भी बहुत नुकसान पहुँचाता हैं।

उपसंहार

बारिश हमारे कृषि और आम जीवन के लिए भी बहुत आवश्यक है। और न सिर्फ कृषि के लिए बल्कि आम लोगों के लिए भी वर्षा अति आवश्यक है। बेशक इससे नुकसान तो होता है लेकिन इतने नुकसान होने के बाद भी हम बारिश के बिना जीवित नहीं रह सकते।

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वर्षा ऋतु पर निबंध 250 शब्द | बारिश पर निबंध

प्रस्तावना

वर्षा ऋतु साल का वह समय होता है जब ज्यादातर जगहों पे बारिश होती है। आमतौर पर वर्षा ऋतु कम से कम 1 महीने तक रहता है। वर्षा ऋतु रोमांच से भरा होता है। वर्षा ऋतु चिलचिलाती हुई गर्मी (ग्रीष्म ऋतु) के बाद आती है। वर्षा ऋतु में हवा की गुणवत्ता अच्छी हो जाती हैं, पेड़ पौधे एवं वनस्पतियों का तेज़ी से विकास होता है और भूजल के स्तर में बढ़ोतरी होती है। बारिश किसानों के जीवन और कृषि अर्थव्यवस्था में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है क्योंकि अच्छी बारिश देश भर में फ़सलों की अच्छी खेती में मदद करती है।

वर्षा ऋतु से उत्पन्न समस्याएं

नदियों में पानी का बहाव तेज हो जाता है और उनका दायरा भी बढ़ जाता है जिसकी वजह से कई जानवर ऊँचे इलाकों पर चले जाते हैं। मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी होती है और मिट्टी का कटाव भी बढ़ जाता है। इन सबके साथ-साथ वर्षा ऋतु अपने साथ बीमारी बीमारियों को भी लेकर आती है जैसे मलेरिया रोगियों में उन क्षेत्रों में वृद्धि आती है जहां तापमान ज्यादा होने के साथ-साथ बारिश भी होती है।

उपसंहार

वर्षा ऋतु में बारिश मुख्य रूप से दिन के समय होने वाली गर्मी के कारण होती है। इसलिए बारिश मुख्य रूप से मानसून के क्षेत्रों में देर शाम या शाम को होती है। कई बड़े त्योहार जैसे कि गणेश पूजा, रक्षा बंधन और 15 अगस्त बारिश के मौसम में आते हैं। बारिश का मौसम प्रकृति की प्राकृतिक सुंदरता को बढ़ जाती है, क्योंकि भारी बारिश के बाद सब कुछ तरो-ताज़ा हो जाता है।


वर्षा ऋतु पर निबंध 300 शब्द | वर्षा ऋतु पर निबंध For Class 7

प्रस्तावना

वर्षा ऋतु, ग्रीष्म ऋतु के बाद आती है। इस ऋतु में आकाश बादलों से भरे होते हैं। ये ऋतु मनुष्यों, पशु, पक्षियों, पेड़ों-पौधों के लिए राहत भरा होता है। इस ऋतु में नदी, तालाब तथा सभी जल निकाय पानी से लबालब भरे होते हैं। इस दौरान चारों तरफ हरियाली दिखाई देती है। बारिश वातावरण को ठंडा कर देती है, जिससे हम अच्छा महसूस करता हैं।

वर्षा ऋतु के दौरान आकाश आमतौर पर बादल छाए रहते है, वो भी अलग-अलग रंगों के जो देखने में बहुत अच्छे लगते हैं। कभी-कभी तो बिजली और गरज के साथ बारिश होती है। वर्षा ऋतु ग्रीष्म ऋतु के बाद आती है। इसलिए, यह मौसम गर्मी में झुलसाने वाली पृथ्वी को राहत देता है। मानसून के दौरान तापमान सुखद रहता है। सभी जीवित चीजें बारिश के पानी में भीग कर बारिश के मौसम का आनंद लेती हैं और बारिश का स्वागत करते हैं।

वर्षा ऋतु का महत्व

वैसे तो वर्षा हर देश हर तरह के जीव के लिए आवश्यक है लेकिन भारत जैसे कृषि प्रधान देश जो अभी विकासशील है और जहाँ की कृषि बारिश पर निर्भर है। वैसे देश के लिए वर्षा ऋतु खास महत्व रखती है।

निष्कर्ष

वर्षा ऋतु एक जीवनदायनी ऋतु है इसके आने से ऐसा लगता है जैसे प्रकृति में चारों तरफ जीवन का नया संचार हुआ है है। वहीं इस ऋतु की वजह से कभी कभी समस्या का भी सामना करना पड़ता है और इस वजह से जान-माल का भी नुकसान होता है।

वर्षा ऋतु निबंध का वीडियो

वर्षा ऋतु पर निबंध 400 शब्द

प्रस्तावना

ग्रीष्म ऋतु के बाद वर्षा ऋतु का आगमन होता है। यह जून में शुरू होता है और सितंबर तक चलता रहता है। यह रोमांच से भरा होता है। यह मनुष्यों, जानवरों, पक्षियों, पौधों और पेड़ों को राहत भरा होता है। तपती हुई गर्मी के बाद, हर कोई बारिश का स्वागत करता है।

आसमान में काले और घने बादल दिखते हैं। गर्मी के कारण जो नदी और तालाब सूख जाते हैं, वे फिर से बारिश के पानी से भर जाते हैं, और जल निकायों को नया जीवन मिलता है। यह बागों और मैदानों को उनकी हरियाली देता है।

बारिश के अच्छे व बुरे प्रभाव

बारिश हमारे पर्यावरण को एक नई सुंदरता देती है, हालांकि यह एक दुखद तथ्य है कि यह सिर्फ तीन से चार महीने तक ही रहता है। कई बार एक साथ कई दिनों लगातार तक भारी बारिश होती रहती है। और तब सभी नदियाँ, बाँध, तालाब पानी से भरे हुए होते हैं जिससे बाढ़ आने की सम्भावना बढ़ जाती है और कई बार बाढ़ से बहुत ज्यादा नुकसान होता है। यह मौसम कृषि के लिए सहायक है।

इस अवधि में चारों तरफ हरियाली दिखती है। पेड़ हरे, चमकदार और सुंदर लगते हैं। कभी-कभी तो आकाश में सुंदर इंद्रधनुष आकाश में दिखता है। सूरज बादलों के साथ लूका-छुपी खेलता है। मोर और अन्य वन पक्षी अपने पंख फैलाकर पूरे जोश में नाचने लगते हैं।

इस मौसम में नदियों, नहरों, टैंकों और अन्य कम भूमि में पानी भरा होता है, तथा भू-जल का स्तर भी ऊपर आ जाता है। बारिश के मौसम में रास्ते फिसलन भरे होते हैं इससे एक जगह से दूसरी जगह जाने में काफी दिक्कतें होती हैं। घरों पर, फ़सलों पर, पेड़-पौधों पर जमी हुई कई दिनों की धूल साफ हो जाती है और सब कुछ साफ सुथरा दिखने लगता है।

उपसंहार

बारिश महत्वपूर्ण है, न केवल इसलिए क्योंकि बारिश होने के बाद धरती बहुत अधिक सुंदर और आकर्षक दिखने लगती है, बल्कि इसलिए भी क्योंकि फ़सलों की वृद्धि तथा पैदावार काफी हद तक वर्षा की मात्रा पर निर्भर करती है। अगर बारिश ज़रूरत से कम बारिश हो या ज़रूरत से ज़्यादा हो, दोनों ही हालातों में फ़सलों को बहुत नुकसान पहुँचता है।

यानी फ़सलों की अच्छी पैदावार के लिए सही मात्रा में बारिश होना जरूरी है। बारिश के अगर कई फायदे है तो कई नुकसान भी हैं। जहां एक तरफ, यह लोगों को राहत देता है, जबकि दूसरी तरफ यह कई संक्रामक रोगों को फैलाने खतरा भी पैदा करता है, जैसे डायरिया, पेचिश, टाइफाइड और पाचन तंत्र से संबंधित समस्याएं और इनके कारण शरीर की त्वचा मे बहुत सारी समस्याएं होती है।


वर्षा ऋतु पर निबंध 500 शब्द In Hindi

प्रस्तावना

वर्षा ऋतु हम सभी के लिए एक प्यारा ऋतु होता है। वर्षा ऋतु भारत के चार मुख्य ऋतुओं में से एक है। आमतौर पर यह जुलाई के महीने में आता है और सितंबर के महीने तक रहता है। यह ग्रीष्म ऋतु के गर्म दिनों के बाद आता है। यह अपने साथ साथ पृथ्वी पर मौजूद प्रत्येक जीवित जीव के लिए एक आशा और राहत ले आती है। यह अपने प्रकृति के तापमान को भी कम करती है जिसके कारण लोगों को गर्मी बहुत राहत मिलती है।

ग्रीष्म ऋतु में जो नदी और तालाब सूख जाते हैं, वे फिर से वर्षा ऋतु आने पर के पानी से भर जाते हैं, और जल निकायों को है जैसे नया जीवन मिल जाता है। यह बागों और मैदानों को उनकी ख़ूबसूरती लौटा देती है जो गर्मी के कारण नष्ट हो गई थी। बारिश हमारे पर्यावरण को एक नई सुंदरता देती है, हालांकि यह भी दुखद तथ्य है कि यह सिर्फ तीन महीने तक रहता है।

वर्षा ऋतु के महत्व

आम आदमी के जीवन के अलावा, वर्षा ऋतु का सबसे अधिक महत्व किसानों के लिए है क्योंकि उन फ़सलों की खेती के लिए जिन्हें पानी की अधिक आवश्यकता होती है फ़सलों के अच्छे पैदावार के लिए अच्छी और पर्याप्त मात्रा में बारिश होना बहुत जरूरी है, ताकि फ़सलों में पानी की कमी न हो और फसलों की पैदावार अच्छी होगी तो देश की अर्थव्यवस्था में विकास होगा।

आम तौर पर, किसान कई गड्ढों और तालाबों का रखरखाव करता है जिनका उपयोग जरूरत पड़ने पर वर्षा जल के लिए किया जा सकता है। वास्तव में, बारिश का मौसम किसानों को भगवान द्वारा दिया गया वरदान है। और जब वर्षा नहीं होती है, तो किसान बारिश के लिए भगवान इंद्र से प्रार्थना करते हैं और अंततः बारिश का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

आसमान का रंग भी बदल जाता हैं क्योंकि काले, सफेद और भूरे बादल आसमान में इधर-उधर घूमते हैं। भारत में जब मानसून के आगमन के साथ ही बारिश होती है। वर्षा ऋतु के आते ही पर्यावरण की सुंदरता बढ़ जाती है।

वर्षा ऋतु के फायदे

वर्षा ऋतु के अपने फायदे और नुकसान हैं। बारिश का मौसम सभी को अच्छा लगता है क्योंकि यह सूरज की गर्मी से राहत देता है। यह पर्यावरण से सारी गर्मी को हटा देता है, जिससे तापमान में दो से दस डिग्री तक की गिरावट आती और सभी को फिर चाहे वह मनुष्य हो, पशु-पक्षी हो, पेड़-पौधे हो सभी को अच्छा महसूस होता है।

यह पेड़, पौधों, घास, फ़सलों और सब्जियों आदि को उगाने में मदद करता है। इस मौसम को सभी जानवरों और पक्षियों द्वारा भी बहुत पसंद किया जाता है, क्योंकि उन्हें खाने के लिए पर्याप्त घास और पीने के लिए पानी मिलता है। नदियों और तालाबों जैसे सभी प्राकृतिक संसाधन पानी से फिर से भर जाते है जो ग्रीष्म ऋतु में सुख जाते है।

वर्षा ऋतु के नुकसान

कई बार जब बारिश अधिक मात्रा में होती है तब कई इलाकों में पानी भर जाता है जिससे जीवन अस्त-व्यस्त हो जाता है, फसलें खराब हो जाती हैं, जो देश की अर्थव्यवस्था पर सीधा असर करती हैं। इतना ही नहीं जब बाढ़ का पानी रिहायशी इलाकों से निकलता है तो महामारी फैलने का खतरा भी बढ़ जाता है।

उपसंहार

वर्षा आनंद देने वाली होती है। वर्षा ऋतु की पहली बारिश के मिट्टी पर गिरने से फैली वो मिट्टी की महक और बारिश के गिरने की वो मधुर आवाज़ आत्मा को तृप्त कर देती है। इसी पर अमेरिका के एक महान बिल वाटर्स कार्टूनिस्ट का एक कथन है कि-

”बारिश के दिन घर में एक कप चाय और एक अच्छी पुस्तक के साथ व्यतीत करने चाहिए।”


वर्षा ऋतु पर निबंध 1000 शब्द

प्रस्तावना

वर्षा ऋतु आनंद और उत्साह से भरा होता है। वर्षा ऋतु में तापमान भी गर्मियों के मौसम के मुकाबले थोड़ा ठंडा हो जाता है। उत्तर भारत में इसकी शुरुआत जून के मध्य में होती है, और अगस्त तक समाप्त हो जाती है वहीं दक्षिण भारत में उत्तर भारत के मुकाबले थोड़ी ज्यादा बारिश होती है। बारिश का मौसम वर्ष का सबसे आवश्यक और निस्संदेह सबसे सुखदायक मौसम है।

वर्षा ऋतु का महत्व

भारत जैसे देशों के लिए जहां बड़ी संख्या में जनसंख्या कृषि पर निर्भर करती है जिसमें वर्षा ऋतु महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसके साथ ही, भारत के GDP में कृषि लगभग 20% का योगदान देता है। इसके अलावा, यह देश के 50 करोड़ से भी ज्यादा लोगों को रोजगार मुहैया कराती है।

इसलिए, भारत जैसे देशों की आर्थिक स्थिति के लिए मानसून बहुत आवश्यक है। इसके अलावा, फसल की उपज बारिश की गुणवत्ता पर काफी हद तक निर्भर करती है। इसके अलावा, वर्षा ऋतु पृथ्वी पर जीवन को पुनर्जीवित करने वाले मीठे पानी को फिर से भरने में मदद करता है।

भारत में वर्षा ऋतु का क्या कारण है?

भारत में बारिश मानसून के कारण होती है और मानसून भूमि और महासागर के तापमान के अंतर के कारण होता है। भारत में, दक्षिण-पश्चिम गर्मी के समय में मानसून एक कम दबाव के क्षेत्र से आकर्षित होता है, जो राजस्थान के थार रेगिस्तान और गर्मियों के दौरान आसपास के क्षेत्रों में अत्यधिक गर्मी के कारण होता है।

मानसून के दौरान, हवा की दिशा उलट जाती है। हिंद महासागर से नमी से भरी हवाएँ खली जगह को भरने के लिए आती हैं, लेकिन क्योंकि वे हिमालय क्षेत्र से नहीं गुज़र सकते हैं, तो वे उठने के लिए मजबूर हो जाती हैं।

बादलों की ऊंचाई बढ़ने से तापमान में गिरावट आती है, जिससे बारिश होती है। जब दक्षिण-पश्चिम मानसून भारत पहुँचता है, तो यह दक्षिण-मध्य भारत में पश्चिमी घाट के पर्वतीय क्षेत्र के आसपास दो भागों में विभाजित हो जाता है।

जिसमें से एक हिस्सा उत्तर की ओर अरब सागर के ऊपर और दूसरा पश्चिमी घाट के तटीय हिस्से की ओर बढ़ता है। और बाकी हिस्सा बंगाल की खाड़ी के ऊपर से बहती है, जो असम से होकर निकलती है, और पूर्वी हिमालय श्रृंखला से जाकर टकराती है।

दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की वापसी राजस्थान से शुरू होती है, हवा के चलने की दिशा में फिर से बदलाव होता है। आमतौर पे यह सितंबर की शुरुआत में होता है, लेकिन इसमें देरी होना आम है, जो मानसून की अवधि को लंबा करता है।

भारत में मानसून कब और कहाँ?

दक्षिण-पश्चिम मानसून 1 जून के आसपास भारत के दक्षिणी राज्य केरल के तट पर पहुँचता है। इसके बाद यह आमतौर पर लगभग 10 दिन बाद मुंबई पहुँचता जाता है, जून के अंत तक दिल्ली पहुँचता है, और जुलाई के मध्य तक बचे हुए भारत को कवर करता है।

हर साल, मानसून के आगमन की तारीख को लेकर बहुत अधिक अटकलों लगायी जाती है। वैसे तो मौसम विभाग मानसून की तारीख लेकर बहुत सारे अनुमान लगाता है लेकिन बहुत कम बार ही ऐसा होता है की अनुमान लगाई हुई तारीख सही हो।

उपसंहार

वर्षा ऋतु फ़सलों के विकास के लिए उन्हें पर्याप्त मात्रा में पानी देकर सहायता करती है। जिससे फसल की पैदावार अच्छी होती है। इस दौरान उन फ़सलों को लगाया जाता है जिन्हें ज्यादा पानी की आवश्यकता होती है जैसे कि धान, कपास आदि।

वर्षा ऋतु के दौरान तापमान में की गिरावट दर्ज की जाती है। भू-जल का स्तर बढ़ जाता है। वर्षा ऋतु में, नदियों में में पानी बढ़ने ये कारण बाढ़ आ जाती है, पृथ्वी ठंडी और खुशनुमा हो जाती है। सभी जल निकाय जलमग्न होते हैं। जगह-जगह घास उग जाती है।

FAQs: Frequently Asked Questions on Varsha Ritu (वर्षा ऋतु पर अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)

प्रश्न.1 वर्षा ऋतु कौन से महीने में आता है?
उत्तर. भारत में वर्षा ऋतु की शुरुआत गर्मी के बाद जुलाई महीने से शुरू होकर सितम्बर महीने तक चलती है।

प्रश्न.2 बारिश के पानी में कौनसे तत्व पाए जाते हैं?
उत्तर. मानसून के दौरान वर्षा के पानी में अलग-अलग मात्रा में छोटे और बड़े आयन पाए जाते हैं, जिसके कारण यह एक मिश्रित इलेक्ट्रोलाइट होता है। इसमें सूक्ष्म तथा अतिसूक्ष्म पोषक तत्व जैसे- सोडियम, पोटेशियम, मैग्नीशियम, अमोनिया, नाइट्रेट व अन्य नाइट्रोजन यौगिक पाए जाते हैं, जो पौधों को अनेक प्रकार से लाभ पहुंचाते हैं।

प्रश्न.3 वर्षा ऋतु के समय किसान कौन-कौन सी फसलें उगाते हैं?
उत्तर. इस ऋतु में बोई जाने वाली मुख्य फसलों में चावल, मक्का, ज्वार, बाजरा, तुर,अरहर, मूँग, उड़द, कपास, जूट, मूँगफली और सोयाबीन शामिल हैं।


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बेचारा नोबिता………इसको हमेशा Test में जीरो मिलता हैं। आप इसके जैसा मत बनना। वर्षा ऋतु पर निबंध In Hindi को अच्छे से पढ़ना और Test में अच्छे नंबर लाना।😉


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अंतिम शब्द

मेरे प्यारे दोस्तों! मुझे पूरी उम्मीद हैं की मेरे द्वारा लिखा गया Varsha Ritu Essay In Hindi आपको जरूर पसंद आया होगा। आप इस वर्षा ऋतु पर निबंध को अपने करीबी दोस्तों या रिश्तेदारों को ज़रूर शेयर कीजियेगा, जिनको इस निबंध की अति आवश्यकता हो।

मैंने अपनी पूरी कोशिश की हैं आपको एक बेहतर Varsha Ritu Par Nibandh प्रदान करने की। और अगर फिर भी मुझसे जाने-अनजाने में कोई गलती हो तो गई हैं तो माफ़ बुल्कुल मत करना। नीचे दिए Comment Box💬 में मुझे जरूर डाँटना😥 ताकि अगली बार में गलतीयाँ न करूं। 😊

हम अगली बार फिर मिलेंगे, दुआओं में याद रखना!😊🙏

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