Vidyarthi Jeevan Par Nibandh 2022 | student life essay in hindi

आदर्श विद्यार्थी वही कहलाता है जो शिक्षा में तो उत्तम होता है, परंतु साथ ही साथ यह पाठ्यक्रम में भी हमेशा अच्छा होता है। उसका व्यवहार ही स्पष्ट करता है कि वह एक आदर्श विद्यार्थी है अथवा नहीं। विद्यार्थी का अर्थ होता है, विद्या + अर्थी अर्थात् विद्या चाहने वाला। विद्यार्थी को आदर्श बनने के लिए अपनी शिक्षा के क्षेत्र में विस्तार करना होता है। उसे क्या, कब, कैसे पढ़ना है, इसकी एक योजना बनानी होती है।

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Vidyarthi Jeevan Par Nibandh

Table of Contents

विद्यार्थी जीवन पर निबंध (50 शब्द)

एक आदर्श के अंदर अनेक गुण होते हैं। लेकिन उस का सबसे बड़ा व महत्वपूर्ण गुण अनुशासन होता है, क्योंकि अनुशासन ही सफल जीवन की नींव है। एक विद्यार्थी को आज्ञाकारी होना चाहिए। उसे सब की सहायता करनी चाहिए। उसमें ज्ञान को अर्जित करने के लिए उत्साह होना चाहिए।

“श्रद्धा” ज्ञान देती है,
“नम्रता” मान देती है,
योग्यता स्थान देती है।
पर तीनो मिल जाए तो,
व्यक्ति को हर सम्मान देती है।

उसमें इतनी क्षमता होनी चाहिए कि वह सभी विषयों को आसानी से समझ सके। उसे सभी प्रकार के खेलकूद में भाग लेना चाहिए। एक आदर्श विद्यार्थी समय का पाबंद, परिश्रमी, सादा जीवन उच्च विचार की भावना वाला, धैर्य पूर्ण, देशभक्त तथा सभी सामाजिक गतिविधियों में सहभागिता वाला होना चाहिए।

Essay On Vidyarthi Jeevan (100 Words)

विद्यार्थी जीवन एक स्वतंत्र जीवन होता है। यह बाल्यकाल से शुरू होता है और युवावस्था में संपन्न होता है। यही छात्र के भविष्य का मूलाधार भी होता है।

विद्यार्थी इन दिनों जितना भी कठिन परिश्रम करता है, उसका फल उसे जरूर प्राप्त होता है और ऐसे ही विद्यार्थियों को संसार में प्रतिष्ठा और सम्मान मिलता है।

अगर सफलता पानी है दोस्त,
तो कभी वक्त और हालात पर रोना नहीं।
मंजिल दूर ही सही पर घबराना मत दोस्तों,
क्योंकि नदी नहीं पूछते कि समंदर कितना दूर है।

एक आदर्श विद्यार्थी मे ये पांच लक्षण अवश्य होना चाहिए-

  1. कौवे की तरह हर चीज जानने की चेष्टा। 
  2. बगुले की तरह ध्यान केंद्रित करना।
  3. कुत्ते की तरह सोना।
  4. अल्पाहारी अर्थात जितनी आवश्यकता हो उतना ही खाना खाना चाहिए।
  5. गृह त्यागी होना चाहिए।

महानता कभी ना गिरने में नहीं,
बल्कि गिर के टूट जाने में है।

एक विद्यार्थी को आदर्श विद्यार्थी बनने के लिए- काम, क्रोध, लोभ, स्वादिष्ट पदार्थों का भोजन, श्रंगार, हर वक्त हंसी मजाक, आवश्यकता से अधिक निद्रा और अपने शरीर की सेवा में अधिक समय देना आदि आदतों को त्यागना चाहिए। यह आदते उसके विकास के मार्ग की सबसे बड़ी बाधा है।

Essay On Vidyarthi Jeevan (150 Words)

विद्यार्थी जीवन में खेल कूद तथा अभ्यास का महत्व

एक विद्यार्थी के जीवन में जितना महत्व शिक्षा तथा अनुशासन का है, उतना ही उसके जीवन में खेल कूद का महत्व है। जो विद्यार्थी अपनी पढ़ाई के साथ-साथ खेलों को भी बराबर का महत्व देते हैं, वे प्रायः कुशाग्र बुद्धि के होते हैं। विद्यार्थियों के जीवन में मानसिक और शारीरिक थकान को कम करने का एक अच्छा साधन है खेलकूद।

जब हौसला बना लिया ऊंची उड़ान का,
फिर देखना फिजूल है कद आसमान का।

खेलों के द्वारा हम दिन भर की थकान को ऊर्जा मे बदल सकते हैं। खेलकूद के साथ-साथ अभ्यास भी हमारे जीवन का एक महत्वपूर्ण एवं अहम हिस्सा है। एक विद्यार्थी के जीवन में अभ्यास की एक अहम भूमिका है।

अभ्यास के द्वारा विद्यार्थियों को ज्ञान अर्जित करने में सरलता होती है। निरंतर अभ्यास करने से विद्यार्थियों का ज्ञान बढ़ता है। परंतु यदि विद्यार्थी निरंतर अभ्यास करना छोड़ दें, तो अभ्यास के अभाव में उनका ज्ञान धीरे-धीरे करके कम होने लगेगा। 

ज्ञान का घमंड,
सबसे बड़ी अज्ञानता है।
एवं अज्ञानता की सीमा को जानना ही,

सच्चा ज्ञान है।

अभ्यास असंभव कार्य को भी संभव बना देता है। अभ्यास करने की कोई सीमा नहीं होती। यदि कोई व्यक्ति किसी भी चीज को पाना चाहता है और वह उसके लिए निरंतर अभ्यास करता है, तो वह उसे अवश्य ही प्राप्त होती है।

प्रत्येक विद्यार्थी शिक्षा के साथ-साथ यदि खेलकूद और अभ्यास पर भी ध्यान दें, तो वह निश्चित ही एक सफल एवं आदर्श विद्यार्थी बन सकता है।

कोई भी लक्ष्य बड़ा नहीं,
जीता वही जो डरा नहीं।

Vidyarthi Jeevan Par Nibandh (200 Words)

राष्ट्र को शक्तिशाली बनाने में विद्यार्थी का कर्तव्य

आचार्य चाणक्य को सभी जानते हैं। वह कुशल राजनीतिज्ञ, शिक्षक तथा अत्यंत बुद्धिमान मनुष्य थे। उन्होंने विद्यार्थियों को सफल होने के लिए कुछ चीजों को त्यागने के निर्देश दिए हैं। वे चीजें निम्न प्रकार हैं-

1. क्रोध

चाणक्य का कहना था कि क्रोध प्रत्येक व्यक्ति का सबसे बड़ा शत्रु है। यह विद्यार्थियों के लिए और भी हानिकारक है, क्योंकि क्रोध के कारण विद्यार्थी सही – गलत में फर्क नहीं कर पाते और उनके सोचने समझने की शक्ति नष्ट हो जाती है। क्रोधी विद्यार्थी कभी भी अपना मन पढ़ाई में नहीं लगा पाता।

ऊंचे ख्वाबों के लिए,
दिल की गहराई से काम करना पड़ता है।
यूं ही नहीं मिलती सफलता किसी को भी,

मेहनत की आग में दिन रात जलना पड़ता है।

2. लोभ

लालच विद्यार्थी को कमजोर करता है और लालची विद्यार्थी कभी भी अपने जीवन में आगे नहीं बढ़ पाता।

3. मीठे पदार्थ

चाणक्य ने बताया यदि विद्या अध्ययन में अच्छे से ध्यान लगाना है, तो विद्यार्थियों को संतुलित आहार लेना चाहिए और सभी प्रकार के मीठे पदार्थ, ज्यादा मसाले वाले पदार्थ या फिर जंग फूड इन सभी से विद्यार्थियों को दूर रहना चाहिए।

4. श्रृंगार

चाणक्य ने बताया है कि छात्रों को जीवन में साधारण रहने की आदत डालनी चाहिए। अगर उनका ध्यान श्रृंगार में रहेगा तो वह पढ़ाई में ध्यान नहीं लगा पाएंगे और परीक्षा में अच्छे परिणाम प्राप्त नहीं कर पाएंगे।

5. आवश्यकता से अधिक खेल

चाणक्य ने बताया कि आदर्श विद्यार्थी को सभी काम एक व्यवस्थित व उचित समय के हिसाब से करना चाहिए। उन्होंने बताया है कि खेलकूद एक विद्यार्थी को शारीरिक रूप से स्वस्थ बनाता है, किंतु उसे मानसिक रूप से स्वस्थ होने के लिए अध्ययन करना पड़ता है।

जिंदगी में रिस्क लेने से कभी मत डरो!
या तो जीत मिलेगी,

और हार गए तो सीख मिलेगी।

यदि एक विद्यार्थी जरूरत से ज्यादा खेलकूद में ध्यान देगा, तो वह अपने आप को मानसिक रूप से स्वस्थ नहीं बना पाएगा। विद्यार्थियों में शारीरिक विकास के साथ मानसिक विकास भी आवश्यक है और मानसिक विकास पढ़ाई से ही आता है।

इसलिए विद्यार्थियों को आवश्यकता से अधिक खेलकूद नहीं करना चाहिए।

6. ज्यादा सोना

विद्यार्थियों को अपने सोने का समय निर्धारित करना चाहिए। उन्हें उतना ही सोना चाहिए जितना भी शरीर को आवश्यकता है, अधिक सोना उन्हें आलसी बना सकता है। उन्हें 6 से 8 घंटे से ज्यादा नींद नहीं लेनी चाहिए।

7. ज्यादा सेवा करना

चाणक्य के अनुसार विद्यार्थियों को केवल अपने अध्ययन में ध्यान लगाना चाहिए। यदि वह सब की सेवा करने लगे तो केवल सेवक ही बनकर रह जाएंगे।

आवश्यकता से अधिक सेवा करने वाले विद्यार्थियों का मन पढ़ाई में नहीं लगता, इसलिए आवश्यकता से अधिक सेवा विद्यार्थियों के जीवन के लिए हानिकारक हो सकती हैं।

निष्कर्ष

यदि विद्यार्थी अपना उज्जवल भविष्य चाहते हैं, तो उसे क्रोध, काम, लोभ, श्रृंगार आदि आदि छोड़ना होगा। विद्यार्थी का केवल एक ही काम है, विद्या प्राप्त करना और उसे इसी काम  को महत्व देना चाहिए।

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Vidyarthi Jeevan Essay In Hindi (250 Words)

प्रस्तावना

एक आदर्श विद्यार्थी बनने के लिए प्रत्येक विद्यार्थियों को सुबह की दिनचर्या में कुछ बातों का आवश्यक रूप से पालन करना चाहिए। यह बातें उनके जीवन को एक नया आयाम देती हैं, ताकि वह अपने समय का सही उपयोग कर पाए।

हर विद्यार्थी को सुबह 7:00 बजे से पहले इन कार्यों को अवश्य समाप्त कर लेना चाहिए।

1. सुबह जल्दी उठकर व्यायाम करना

प्रत्येक विद्यार्थी को सुबह जल्दी उठने की आदत डालनी चाहिए, क्योंकि सुबह जल्दी उठने से शरीर तथा दिमाग को सकारात्मक ऊर्जा मिलती हैं, जो स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होती है। सुबह उठने वाले विद्यार्थियों की स्मृति और सीखने की क्षमता अच्छी होती है।

व्यायाम से उनका मानसिक तनाव भी कम होता है और दिन का काफी समय भी बचता है। नियमित व्यायाम से मन को खुशी मिलती है और शरीर की ऊर्जा बढ़ती है, अच्छी नींद आती है, शरीर स्वस्थ रहता है तथा कमजोरी नहीं होती। व्यायाम की लगातार आदत से विद्यार्थियों मैं बीमारी की समस्या काफी कम हो जाती है।

जिंदगी में रिस्क लेने से कभी मत डरो,
या तो जीत मिलेगी और हार गए तो सीख मिलेगी।

2. अच्छा नाश्ता करें

नाश्ता दिन का सबसे अहम हिस्सा है। यह मस्तिष्क व शरीर को ऊर्जा देता है। नाश्ते में हमें अच्छे पदार्थ, जैसे- चना, दलिया, सोया, बादाम, अंडे, दूध आदि का सेवन करना चाहिए। यह आपको दिनभर ऊर्जा प्रदान करेंगे और आपको कमजोरियां थकावट नहीं होने देंगे।

3. खुद को उत्साहित करें

नाश्ते के बाद कुछ ऐसी किताबें या उद्धरण पढ़ना चाहिए जो आपको नया लक्ष्य बनाने और उसे  पूरा करने में मदद करें। आप को सकारात्मक सोच के साथ अपने कार्य को करने की निष्ठा और आत्मविश्वास को बढ़ाना चाहिए।

4. लक्ष्य बनाएं

प्रत्येक विद्यार्थी को रोज अपना एक लक्ष्य बनाना चाहिए और उसे निर्धारित समय पर पूरा करना चाहिए, इससे उसका आत्मविश्वास बढ़ जाता है और वह परिश्रम करने में एक उत्साह का महसूस सा महसूस करता है, जो उसने लक्ष्य को पूरा करने के लिए किया था।

हमेशा शुरुआत में छोटे लक्ष्य बनाएं और फिर धीरे-धीरे करके बडे लक्ष्य बनाना शुरू करें।

अगर आप कमाई से ज्यादा, मेहनत करते हैं।
तो एक दिन मेहनत से ज्यादा, कमाई करेंगे।

5. अपने कार्य को शुरू करें

आपने सुबह उठ कर, फ्रेश होकर, व्यायाम के बाद नाश्ता करके, लक्ष्य का निर्धारण तो कर लिया। पर अब उस लक्ष्य को पूरा करने की तैयारी करनी बाकी है।

शुरुआत थोड़े से करें अपने लक्ष्य को पाने के लिए आपको जो पढ़ाई करनी है, जो भी आपने लक्ष्य बनाया है, उसे पूरा करने के लिए उसे कई भागों में विभाजन करें।

जो विषय आपको सबसे सरल लगे सबसे पहले उसे खत्म करें। इससे आपका आत्मविश्वास बढ़ेगा और निर्धारित समय में अपना लक्ष्य पूरा कर ले। यदि विद्यार्थियों को और भी अच्छे से उस विषय को समझना हो, तो उसे ऑडियो, वीडियो के जरिए या फिर ग्राफ के जरिए समझे। यह एक बेहतर तरीका है पढ़ाई का।

निष्कर्ष

विद्यार्थी को आदर्श विद्यार्थी बनने के लिए कुछ आदतें डालनी ही पढ़ती हैं। जो विद्यार्थी उपस्थित होकर अपना कार्य करता है, उसे अवश्य ही सफलता मिलती है। सुबह की आदतें एक विद्यार्थी के जीवन को काफी अच्छा और सफल बनाने में सहायक है।

विद्यार्थी जीवन पर निबंध (300 शब्द)

प्रस्तावना

विद्यार्थियों का जीवन बहुत ही संघर्षशील व कठिन होता है। जीवन के हर क्षेत्र में उन्हें चुनौतियां मिलती हैं और उन्हें डटकर सभी प्रकार की चुनौतियों का सामना करना होता है।

एक विद्यार्थी को शिक्षा प्राप्त करने के लिए दिन-रात कड़ी मेहनत करनी पड़ती है। एक अच्छे विद्यार्थी का सबसे अच्छा गुण माना जाता है, उसका अनुशासन।

एक आदर्श विद्यार्थी के गुण

हर व्यक्ति अपने जीवन में विद्यार्थी अवश्य ही होता है, परंतु हर व्यक्ति आदर्श विद्यार्थी नहीं होता। विद्यार्थी अपने पढ़ाई के तरीके, अपने अनुशासन और अपनी कड़ी मेहनत से आदर्श विद्यार्थी बनने के सफर को पूरा करते हैं। एक आदर्श विद्यार्थी के अंदर कई गुण होते हैं, जो उसे सफल बनाते हैं। 

महानता कभी ना गिरने से नहीं,
बल्कि गिर के उठ जाने में हैं।

1. एक बड़ा लक्ष्य बनाना

एक सफल विद्यार्थी को इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि कौन क्या कर रहा है। वह अपना एक बड़ा लक्ष्य बनाता है और उसी को को पूरा करने के लिए एक योजना बनाता है।

वह अपनी कक्षा की शुरुआत से ही यह लक्ष्य बनाता है, कि उसे अव्वल आना है और वह पहले दिन से ही परीक्षा की तैयारी थोड़ी-थोड़ी करके शुरू कर देता है।

जब परीक्षा का समय आता है, तो वह केवल दोहराता है और अव्वल आता है। इस प्रकार का अपना लक्ष्य पूरी मेहनत ईमानदारी और लगन से पूरा कर लेता है।

2. अनुशासित रहता है

वैसे तो मैं अनुशासन छात्रों के बेहतरी के लिए बनाया जाता है, मगर बहुत कम छात्र ऐसे होते हैं जो अनुशासित होते हैं। एक अच्छा विद्यार्थी हमेशा अनुशासन में रहकर अपने सभी कार्यों को पूरा करता है और सभी क्रियाओं में सहभागिता दिखाता है।

वह अपना टाइम टेबल स्वयं बनाता है और उनका पालन करता है। वह काम के समय काम, पढ़ाई के समय पढ़ाई और खेलकूद के समय खेलकूद करता है। इस प्रकार अपना समय बर्बाद भी नहीं करता और सभी चीजों का आनंद भी ले लेता है।

3. सकारात्मक सोच और खुद को प्रेरित करना

एक आदर्श विद्यार्थी हमेशा सकारात्मक सोच रखता है, ऐसा करने से वह खुद को कई तरह की टेंशन व मुसीबतों से बचा लेता है। वह अपनी पढ़ाई के प्रति, सभी के प्रति और खुद के प्रति हमेशा सकारात्मक सोच रखता है, इसलिए वह बुरे से बुरे समय में भी नहीं भटकता और सही राह पर चलता है।

वह जो शोर मचाते हैं भीड़ में,
भीड़ ही बनकर रह जाते हैं।
वही पाते हैं जिंदगी में सफलता,

जो खामोशी से अपना काम कर जाते हैं।

वह हमेशा स्वयं को ही प्रेरित करता है। आदर्श विद्यार्थी अपने आप को पढ़ाई से भटकने नहीं देता, वह अच्छी किताबें पढ़ता है, अच्छी म्यूजिक सुनता है और हमेशा अपनी एकाग्रता बनाए रखता है। वह खुद को मोटिवेट करने का कोई न कोई जरिया ढूंढ ही लेता है।

4. रोजाना अध्ययन के साथ नई चीजें सीखना

एक विद्यार्थी का पहला काम है, अपनी पढ़ाई का ध्यान देना। उसे सबसे ज्यादा समय और महत्व अपनी पढ़ाई को ही देना चाहिए। इसलिए आदर्श विद्यार्थी अपनी रोजाना अध्ययन की आदत बनाते हैं और सिर्फ रोजाना अध्ययन ही नहीं बल्कि वह नई-नई चीजों को भी सीखते हैं।

ऐसे विद्यार्थी अपनी पढ़ाई करने के बाद अपने समय नई चीजों को सीखने के लिए लगाते हैं।

ताकि उनकी बुद्धि का विकास हो सके और खुद को और बेहतर बना सके। आदर्श विद्यार्थी हमेशा अच्छे लोगों की संगति में रहना पसंद करते हैं। वे अपने लिए बुद्धिमान दोस्तों का चयन करते हैं।

वे हमेशा बुरी संगत के लोगों से दूरी बनाए रखते हैं और हमेशा अच्छी बाते सीखने में विश्वास रखते हैं। वे ज्यादातर समय अकेले बिताते हैं, ताकि खुद की योग्यता को समझ कर सके और उससे अपने जीवन में सफलता प्राप्त कर सके।

5.खुद को बे हतर बनाना

आदर्श विद्यार्थी अपने जीवन को बेहतर बनाने के लिए खुद के मोटिवेशन के जरिए तलाशते रहते हैं। वह उन लोगों की बातें जरूर सुनते हैं, जो उन्हें सही तरह से सभी चीजों के विषय में जानकारी देकर उनका हौसला हमेशा बढ़ाते हैं।

वह हमेशा किसी एक ऐसे व्यक्ति का अनुसरण अवश्य करते हैं, जो उन्हें हर कदम पर प्रेरित करता हो। 

निष्कर्ष

ऐसे विद्यार्थी अपने जीवन को कामयाबी तक पहुंचाने में दिलो जान से मेहनत करके आखिरकार कामयाबी पाते ही हैं। अगर कोई भी विद्यार्थी इन 5 टिप्स को अपनाता है, तो वह अवश्य एक बेहतर विद्यार्थी बन जाए बन जाएगा और सभी के लिए प्रेरणा बन जाएगा। वह हमेशा अपने माता-पिता तथा शिक्षकों का गर्व बन जाएगा। 

Student Life Essay In Hindi (400 Words)

प्रस्तावना

आदर्श विद्यार्थी वही कहलाता है जो शिक्षा में तो उत्तम होता है, परंतु साथ ही साथ यह पाठ्यक्रम में भी हमेशा अच्छा होता है। उसका व्यवहार ही स्पष्ट करता है कि वह एक आदर्श विद्यार्थी है अथवा नहीं।

विद्यार्थी का अर्थ होता है, विद्या + अर्थी अर्थात् विद्या चाहने वाला। विद्यार्थी को आदर्श बनने के लिए अपनी शिक्षा के क्षेत्र में विस्तार करना होता है। उसे क्या, कब, कैसे पढ़ना है, इसकी एक योजना बनानी होती है।

अगर आप कमाई से ज्यादा मेहनत करते हो,
तो एक दिन मेहनत से ज्यादा कमाई करोगे।

विद्यार्थी के पढ़ाई में ध्यान लगाने के तरीके

यदि विद्यार्थियों को समय से अपना पाठ्यक्रम पूरा करना है और उसे अच्छे से समझ कर अच्छे नंबर लाने हैं, तो उसे अपनी पढ़ाई के तरीकों को व्यवस्थित करने की जरूरत है। निम्न तरीकों द्वारा हम अपनी पढ़ाई को बेहतर कर सकते हैं। 

1. पढ़ते समय मन शांत रखना

इसका सबसे अच्छा तरीका है कि हम मेडिटेशन करना शुरू करें। मेडिटेशन करने से हमारा मन शांत होता है और जिस भी चीज पर हम फोकस करना चाहते हैं, उस पर हम अच्छे से ध्यान लगा पाते हैं।

मन शांत होने पर जब हम पढ़ने बैठते हैं, तो हमारा सारा ध्यान केवल पढ़ाई पर होगा साथ ही साथ हम उसे अच्छे से समझ पाएंगे और हमारा ध्यान भी नहीं भटकेगा।

2. पढ़ने का सही तरीका

कुछ विद्यार्थियों की आदत होती है कि वह जब भी पढ़ने बैठते हैं, तो एक साथ कई सारे सब्जेक्ट पढ़ने बैठ जाते हैं। जबकि यह पढ़ने का सबसे गलत तरीका है।

जब भी हम एक साथ सब कुछ याद करने की सोचते हैं या फिर काफी सारे विषय लेकर बैठ जाते हैं, कि आज हमें सब कुछ याद कर लेना हैं, तो इसके कारण हमारा दिमाग ब्लॉक हो जाता है।

अगर सफलता पानी है दोस्त,
तो कभी वक्त और हालात पे रोना नहीं,
मंजिल दूर ही सही पर घबराना मत दोस्तों,
क्योंकि नदी नहीं पूछती कि सागर कितनी दूर है!

साथ ही साथ दिमाग भी काम करना बंद कर देता है। क्योंकि उसमें एक्स्ट्रा प्रेशर की वजह से समस्या उत्पन्न हो जाती है।

इसलिए जब भी पढ़ने बैठे कोई एक सब्जेक्ट का चुनाव करें और उसे ही पढ़ें, यह आपको काफी लंबे समय तक याद भी रहेगा और आपका दिमाग ही इसे जल्दी समझ लेगा। पढ़ाई करते समय अनुशासन में होना अत्यंत ही आवश्यक है।

इससे विद्यार्थी अपने कामों को समय पर पूरा कर लेते हैं और हर मुश्किल का सामना आसानी से कर पाते हैं।

एक और तरीका है और वह है एकाग्रता। इसको अपना कर विद्यार्थियों के पढ़ाई करने की गति और तीव्र हो जाती है और वह काफी देर तक एक ही चीज के विषय में गहन अध्ययन कर पाते हैं और उसे अच्छे से समझ पाते हैं।

3.पढ़ाई करने के लिए सही वक्त और सही जगह का चुनाव

पढ़ाई करने का कोई ऐसा समय तो नहीं बनाया गया कि उस समय पढ़ने से सब समझ मे आ जाए,  फिर भी विद्यार्थियों को ध्यान रखना चाहिए, कि जिस समय उनका मन पढ़ाई में ज्यादा लगता है, उन्हें उस समय का चुनाव करना चाहिए। फर्क नहीं पड़ता कि वह समय दिन का है या रात्रि का।

पढ़ने के लिए यह भी जरूरी है कि हम किस जगह पर पढ़ रहे हैं, क्योंकि हर चीज का एक अनुकूल वातावरण होता है। जैसे- हम खाना पकाने के लिए रसोई घर, खाना खाने के लिए डाइनिंग टेबल, सोने के लिए बिस्तर और कपड़े रखने के लिए अलमारी का प्रयोग करते हैं।

वैसे ही हमें पढ़ाई करने के लिए भी कुर्सी मेज का उपयोग करना चाहिए और साथ ही साथ हमें उस जगह बैठ कर पढ़ाई करनी चाहिए। जहां आसपास किसी प्रकार का शोर ना हो केवल शांति का माहौल हो और वहां सभी किताबें भी व्यवस्थित ढंग से रखनी चाहिए।

ऐसे माहौल में रहने से आपका दिमाग सक्रिय होगा और आप पढ़ाई में ध्यान केंद्रित कर पाएंगे।

विद्यार्थी जीवन पर भाषण

आदरणीय प्रधानाचार्य जी समस्त शिक्षक एवं शिक्षिकाओं और मेरे प्यारे दोस्तों। आज मैं आप सभी को विद्यार्थी जीवन के कुछ कर्तव्यों के बारे में बताऊंगी।

विद्यार्थी जीवन में प्रत्येक विद्यार्थी का मुख्य कर्तव्य सीखना होता है। विद्यार्थी इस अवस्था में गीली मिट्टी के समान होता है, जिसे जिस रूप में ढाल दो वह  वैसा ही हो जाता है।

विद्यार्थी जीवन में विद्यार्थियों की ग्रहणशीलता, मन और बुद्धि के विकास के साथ-साथ शारीरिक विकास भी होता है। ऐसे में उन्हें जो भी सिखाया जाता है, वह उसे अच्छे से और बड़ी तीव्रता से सीख लेते हैं।

विद्यार्थी जीवन में विद्यार्थी अपने माता-पिता, शिक्षकों तथा समाज पर निर्भर होता है। उसका पहला कर्तव्य है माता-पिता तथा गुरु की आज्ञा का पालन करना।

खौफ और खून हमेशा आंखों में रखो…
क्योंकि हथियारों से सिर्फ दुश्मनों की,
हड्डियां टूटती है हौसले नहीं।

विद्यार्थी का दूसरा कर्तव्य है, विद्याध्ययन। जिसका अर्थ होते हैं, शारीरिक तथा मानसिक विकास। विद्यार्थी विद्याध्ययन करता है, तो उससे उसका विकास होता है।

विद्यार्थी के और भी कर्तव्य है और उसे निभाने की अत्यंत आवश्यकता होती है।  एक विद्यार्थी के और भी कर्तव्य है, कि वह सभी के साथ उचित व्यवहार करें। 

एक विद्यार्थी को व्यायाम, खेलकूद, मनोरंजन के द्वारा शरीर को बलवान व स्वस्थ बनाना चाहिए। उसे अपनी शारीरिक व मानसिक विकास के लिए भी प्रयासरत होना चाहिए।

विद्यार्थियों को सदा पहनावे, सात्विक भोजन जैसी आदतें डालनी चाहिए। उन्हें आलस्य को त्याग कर अपना काम समय से और स्वयं ही पूरा करना चाहिए। जिससे उनमें आत्मविश्वास बढ़ेगा और वो अच्छे भविष्य का निर्माण भी कर पाएंगे। 

निष्कर्ष

अच्छा विद्यार्थी अपने सभी कर्तव्य का पालन पूरी निष्ठा से करता है और सभी बड़ों का सम्मान करता है। वह हमेशा अनुशासित होकर अपने पढ़ाई के तरीकों को और बेहतर बनाता है।

विद्यार्थी में आत्मविश्वास होना, उसे मानसिक रूप से मजबूत बनाता है। यदि प्रत्येक विद्यार्थी अपने जीवन के प्रत्येक क्षण को अमूल्य मानकर सभी कर्तव्य का पालन करें, तो वह भी आदर्श विद्यार्थी कहलाएगा।

विद्यार्थी जीवन पर निबंध रूपरेखा सहित 500 Words

प्रस्तावना

कहते हैं मनुष्य का जीवन अत्यंत कठिनाइयों से मिलता है और यदि यह मिल जाए तो हमें इसका अवश्य ही सही ढंग से उपयोग करना चाहिए। मनुष्य के जीवन से मृत्यु के बीच कई पड़ाव हैं, जिनमें सबसे ज्यादा मुख्य है विद्यार्थी का जीवन। यह मनुष्य के जीवन का सबसे अहम हिस्सा होता है। 

सपने वो नहीं है, जो हम नींद में देखते हैं।
सपने वो है जो हमको, नींद आने नहीं देते।

यह मनुष्य के जीवन का सबसे अच्छा व कठिन व परिश्रम से भरा समय होता है, जब वह सभी चीजों के बारे में जानता है और ज्ञान अर्जित करता है। विद्यार्थी जीवन प्राथमिक विद्यालय से लेकर विश्वविद्यालय तक के सफर के बीच का जीवन है। वास्तव में यही वास्तविक जीवन है, मनुष्य के जीवन जीने की यही नींव है।

अच्छे विद्यार्थी के आवश्यक गुण

यूं तो सभी विद्यार्थी का जीवन अवश्य ही जीते हैं, मगर एक सफल और अच्छा विद्यार्थी बनने के लिए कुछ गुण ऐसे हैं जो अति आवश्यक है।  एक अच्छे विद्यार्थी को हमेशा अनुशासन में रहना चाहिए। उसके मन में हर चीज जानने की जिज्ञासा तथा श्रद्धा भी होनी चाहिए।

हीरे को परखना है तो,
अंधेरे का इंतजार करो।
धूप में तो कांच के,

टुकड़े भी चमकने लगते हैं।

उसे पढ़ाई के साथ-साथ खेल कूद और स्कूल में होने वाली सभी प्रकार की प्रतियोगिताओं में भाग लेना चाहिए और सभी की सहायता भी करनी चाहिए।

एक विद्यार्थी को कभी भी संघर्ष करने से घबराना नहीं चाहिए और अपनी जिंदगी खुल के जीनी चाहिए। एक सफल विद्यार्थी को आत्मनिर्भर होना चाहिए और कभी भी अपना कोई भी काम कल के ऊपर नहीं डालना चाहिए।

वर्तमान समय में विद्यार्थी जीवन

वर्तमान समय में विद्यार्थी का जीवन अत्यंत ही परिवर्तित हो गया है। अब विद्यार्थियों का जीवन प्राचीन समय की अपेक्षा काफी सुविधाजनक व सरल हो गया है।

आज के समय में विद्यार्थियों को पढ़ने के लिए अच्छे स्कूल – कॉलेज व संस्थान दिए गए हैं। यहां शिक्षकों को पढ़ाने के पैसे दिए जाते हैं और छात्रों को पढ़ने के लिए फीस देनी पड़ती है।

आज के विद्यार्थियों में ना तो समर्पण की भावना है और ना ही विद्यार्थी कड़ी मेहनत  करना चाहते यहां तक की शिक्षकों ने भी शिक्षा को व्यवसाय बना कर रख दिया है। प्

राचीन समय में लोग शिक्षा ग्रहण करते थे, कुछ नया सीखने के लिए और आज लोग पढ़ाई करते हैं, नौकरी के लिए, एग्जाम में पास होने के लिए। आज के छात्र बलिदान से भागकर, सुखद जीवन की ओर भागते हैं।

लेकिन केवल छात्र इसके जिम्मेदार नहीं है, बल्कि लोगों का बदलता व्यवहार, परिवार का बच्चों पर ध्यान ना देना और विज्ञान के आविष्कार (जैसे मोबाइल गेम्स, टीवी आदि) भी इस के बराबरी के जिम्मेदार हैं।

छात्र जीवन भविष्य के लिए प्रशिक्षण का जीवन है, फिर भी आदेशों का पालन, कर्तव्य, विनम्रता, सच्चाई, संयम और भक्ति प्रदर्शन धीरे-धीरे छात्रों में कम होते जा रहे हैं।

विद्यार्थी जीवन पर कविता

संघर्ष ही जीवन का हिस्सा है,
मंजिल ही जीवन का किस्सा है।
विद्यार्थी बन मंजिल को पाना है,

राही बन मंजिल तक जाना है।
असफलता भी इनके जीवन का हिस्सा है,

सफलता ही इनके जीवन का किस्सा है।
मां के सपनों को पूरा करना है,

पिता की उम्मीदों पर खरा उतरना है।
दूसरों से पहले इन्हें खुद को जीतना है,

दूसरों से पहले इन्हे लक्ष्य को भेदना है।
रातों में इन्हें लड़ना पड़ता है,

खुद को इन्हें जीतना पड़ता है।
संघर्ष ही जीवन का हिस्सा है,

मंजिल ही जीवन का किस्सा है।

विद्यार्थी जीवन का महत्व

हर इंसान के जीवन का सबसे महत्वपूर्ण समय तब होता है, जब वह विद्यार्थी जीवन मे होता है। वह अपने विद्यार्थी जीवन में ही शिक्षा के महत्व को ठीक प्रकार से समझता है। एक विद्यार्थी जब विद्यालय में जाता है, उस वक्त उसका केवल एक ही लक्ष्य होता है, कि यहां उसे ज्ञान अर्जित करना है।

विद्यालय में एक विद्यार्थी को सब कुछ नया दिखाई देता है, नया पर्यावरण, सहपाठी, नये शिक्षक, नई किताबें आदि। विद्यालय विद्या का घर होता है, इसलिए विद्यालय में विद्यार्थी एकत्रित होकर पढ़ाई कर पाते हैं और वहाँ का वातावरण भी बहुत सुन्दर और शांतिपूर्ण होता है, जो उन्हें पढ़ाई करने में मदद करता है।

ना संघर्ष ना तकलीफ,
तो क्या मजा है जीने में।
बड़े-बड़े तूफान थम जाते हैं,

जब आग लगी हो सीने में।

जब मनुष्य विद्यार्थी जीवन में होता है, तो उसका हृदय अत्यंत चंचल और कोमल होता है और उसके मन में तरह-तरह के नए-नए विचार रोज उत्पन्न होते रहते हैं।

इनमें से कुछ विचार सकारात्मक होते हैं, जो उसे अच्छे भविष्य की ओर ले जा सकते हैं और कुछ विचार नकारात्मक होते हैं, जो उसके भविष्य को खराब कर सकते हैं।

इसलिए शिक्षकों और माता-पिता के द्वारा विद्यार्थियों को सही और गलत में फर्क करना सिखाया जाता है। मगर जो विद्यार्थी, विद्यार्थी जीवन के महत्व को ना समझकर, नकारात्मक मार्ग पर चलने लगते हैं। तो भविष्य में उन्हें अनेक कठिनाइयों का सामना भी करना पड़ता है।

विद्यार्थी जीवन पर भाषण

आदरणीय अतिथि गण प्रिय प्रधानाचार्य जी समस्त शिक्षक एवं शिक्षिकाओं और मेरे प्यारे दोस्तों। आज मैं आप सभी को विद्यार्थी जीवन के बारे में, उसके महत्व और लक्ष्य तथा कर्तव्य के बारे में बताऊंगी। विद्यार्थी जीवन मानव के जीवन का सबसे अच्छा पहलू है, जब वह विद्यालय जाता है, कुछ नया सीखता है।

जब वह विद्यालय जाता है तो उसका केवल एक ही लक्ष्य होता है, कि वहां पर उसे नया सीखने को मिलेगा और वह वहां से ज्ञान की प्राप्ति करेगा और अपने अच्छे भविष्य का निर्माण करेगा।

विद्यार्थी जीवन को सफल बनाने के लिए प्रत्येक विद्यार्थी को काफी कठिन परिश्रम करना पड़ता है, नींद त्याग नहीं पड़ती है, समय का महत्व समझना होता है और सबसे बड़ी बात उसे अनुशासन में रहने की आदत डालनी होती है।

प्राचीन काल में विद्या प्राप्त करने के लिए विद्यार्थियों को गुरुकुल जाना होता था और अपना घर त्याग कर वहीं पर रहना पड़ता था, वही अपने शिक्षकों की सेवा करनी होती थी।

परंतु आज शिक्षा का नजरिया बदल गया है। आज बच्चों के लिए विद्यालय खोले गए हैं, जहां बच्चे रोज जाते हैं, अपनी पढ़ाई पूरी करते हैं और अपने घर आ जाते हैं।

“श्रद्धा” ज्ञान देती है,
“नम्रता” मान देती है,
योग्यता स्थान देती है।
पर तीनों मिल जाए तो,
व्यक्ति को हर जगह सम्मान देती है।

तो आज के विद्यार्थियों को काफी सारी सुविधाएं प्राप्त हैं। पहले जहां विद्यार्थी आश्रम में पढ़ा करते थे, वही पहले की अपेक्षा अब उन्हें पढ़ने के लिए अच्छी कक्षाएं मिलती है।

विद्यार्थी जीवन ज्ञान प्राप्ति का समय कहलाता है। कहते हैं यदि एक सफल विद्यार्थी बनना है, तो एक विद्यार्थी के अंदर यह 5 गुण अवश्य ही होने चाहिए। 

उसे ज्ञान प्राप्त करने के लिए कौवे की तरह, बगुले की तरह ध्यान लगाना चाहिए, कुत्ते की तरह नींद रखनी चाहिए, अल्पाहारी होना चाहिए तथा घर त्यागी होना चाहिए।

सफल विद्यार्थी बनने के लिए प्रत्येक विद्यार्थी को आलस्य त्यागना होगा और मानसिक तथा शारीरिक परिश्रम  भी करना होगा। उन्हें सभी का आदर करना चाहिए तथा अनुशासन का पालन करना चाहिए। यही अच्छे विद्यार्थी के जीवन की नीव होती है।

निष्कर्ष

राष्ट्र के भाग के निर्माणकर्ता विद्यार्थी ही होते हैं और अच्छे विद्यार्थी अनुशासित, संयमी, आज्ञाकारी, परिश्रमी तथा संघर्षशील होते हैं और वे सभी प्रकार की क्रिया में भाग भी लेते हैं तथा ज्ञान को प्राप्त करने के लिए हमेशा कड़ी मेहनत करते रहते हैं।

विद्यार्थी जीवन के महत्व को जो विद्यार्थी समझ लेता है, वह अपना भविष्य संवार लेता है और एक आदर्श विद्यार्थी कहलाते हैं।

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