Best Vriksharopan Par Nibandh 2020 / वृक्षारोपण पर निबंध रूपरेखा सहित

Vriksharopan Par Nibandh / वृक्षारोपण पर निबंध रूपरेखा सहित: वृक्षारोपण कितना जरूरी है। यह हम सभी को अच्छी तरह से पता है, इसलिए आज हम वृक्षारोपण पर निबंध प्रस्तुत कर रहे हैं। यह वृक्षारोपण पर निबंध रूपरेखा सहित है तथा सभी निबंध में प्रस्तावना भी दी गई है।

Vriksharopan Par Nibandh
Vriksharopan Par Nibandh

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आज हम वृक्षारोपण पर निबंध पढ़ेंगे। जो की अलग अलग शब्द सीमा के आधार पर लिखे गए हैं। आप Vriksharopan Par Nibandh को ध्यान से और मन लगाकर पढ़ें और समझें।

Vriksharopan Nibandh को निम्न शब्द सीमाओं के आधार पर लिखा गया है-

  1. Vriksharopan Par Nibandh 5 Line
  2. Vriksharopan Par Nibandh Hindi Mein 10 Lines
  3. Hindi Essay On Vriksharopan 80 Words
  4. Vriksharopan Essay In Hindi 100 Word
  5. वृक्षारोपण निबंध 150 शब्द का
  6. वृक्षारोपण पर निबंध 200 शब्दों में
  7. वृक्षारोपण पर निबंध रूपरेखा सहित 250 शब्दों में
  8. Vriksharopan Nibandh 300 Words
  9. वृक्षारोपण पर निबंध प्रस्तावना सहित 400 शब्द
  10. Vriksharopan Par Nibandh 500 Shabd me
  11. वृक्षारोपण पर निबंध 600 शब्दों का

आइये! 

Vriksharopan Par Nibandh को अलग अलग शब्द सीमाओं के आधार पर पढ़ें।

नोट- यहां पर दिया गया वृक्षारोपण निबंध कक्षा(For Class) 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11, 12,(विद्यालय में पढ़ने वाले) विद्यार्थियों के साथ-साथ कॉलेज के विद्यार्थियों के लिए भी मान्य हैं।

Vriksharopan Par Nibandh 5 Line

Vriksharopan Par Nibandh 5 Line
Vriksharopan Par Nibandh 5 Line

वृक्षारोपण हम सभी का कर्तव्य होना चाहिए, क्योंकि अगर हमें अपने भविष्य में धरती पर जीवन को बचाना है, तो अधिक से अधिक मात्रा में वृक्षों का रोपण करके ही बचा सकते हैं।

वृक्ष हमें हमारी मूलभूत जरूरत वाली चीजों को आसानी से उपलब्ध कराते हैं। वृक्ष हमारी संस्कृति का एक अहम हिस्सा रहा है।

भविष्य हमारा खुशहाल बनेगा, अगर आज से वृक्ष बचेगा।

Vriksharopan Par Nibandh Hindi Mein 10 Lines

Vriksharopan Par Nibandh Hindi Mein 10 Lines
Vriksharopan Par Nibandh Hindi Mein 10 Lines

वृक्ष धरती पर जीवन का सबसे बड़ा कारक है। अगर धरती पर जीवन संभव है, तो वह वृक्ष के कारण ही हैं। जिस प्रकार हमारे जीवन में जल और वायु महत्व रखता है, उसी प्रकार वृक्ष भी हमारे जीवन का एक अहम हिस्सा है।

लेकिन आधुनिकता में हमने वृक्षों को बहुत नुकसान पहुंचाया है। वनों की अंधाधुंध कटाई की है, जिससे जीव-जंतुओं के आश्रय स्थान समाप्त हो गए हैं।

वनों की अंधाधुंध कटाई के कारण लगातार धरती के तापमान में बढ़ोतरी होते जा रही है। प्रदूषण फैलने के कारण तरह-तरह की बीमारियां धरती पर जन्म ले रही है। वर्षा नहीं होने के कारण फसलों की उपज कम भी होते जा रही है।

Hindi Essay On Vriksharopan 80 Words

Hindi Essay On Vriksharopan 80 Words
Hindi Essay On Vriksharopan 80 Words

वृक्ष हमारी मूलभूत जरूरत को पूरा करता है। मानव समुदाय शुरू से ही पेड़-पौधों पर बहुत आश्रित रहा है, लेकिन बढ़ती जनसंख्या और विकास की दौड़ ने हमें अंधा कर दिया।

पर्यावरण के संतुलन को अनदेखा करते हुए हम सभी अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए पर्यावरण को नुकसान पहुँचाते आ रहे हैं। जिसके गंभीर परिणाम, ग्लोबल वॉर्मिंग के रूप में आज दिखाई पड़ रहे हैं।

वृक्ष जीवन देते हैं, जबकि हमने उसी जीवन को नष्ट करने में अपना योगदान दिया! इसलिए, एक नारा बनाओ,

हर एक आदमी एक पेड़ लगाए।
जरा सोच लो कितनी है आबादी,
ऐसा करने से फिर से हरियाली आ जाए।।

Vriksharopan Essay In Hindi 100 Word

Vriksharopan Essay In Hindi 100 Word
Vriksharopan Essay In Hindi 100 Word

वृक्षारोपण आज के समय में इंसान की जरूरत बन गया है, क्योंकि जिस तरह से इंसान ने प्रकृति के साथ खिलवाड़ किया है, उसे अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए अंधाधुंध उपयोग किया है।

बढ़ते ग्लोबल वार्मिंग में वृक्षों की कटाई की भूमिका को देखते हुए अब सभी का ध्यान वृक्षारोपण की तरफ विशेष रूप से गया है।

वृक्षारोपण से तात्पर्य सिर्फ यह नहीं है कि ‘हम वृक्षों को लगाए’, वृक्षारोपण का सही अर्थ यह है कि हम ‘वृक्षों की कटाई को रोके, उसे संरक्षण दे।’ जिससे, प्रकृति का संतुलन बना रहे, और इंसानी जीवन भी इस धरती पर संभव बनी रहे।

वृक्ष ना सिर्फ हमारी ज़रूरतों को पूरा करते हैं, बल्कि वृक्ष हमें जीवन देते हैं।

वृक्षारोपण निबंध 150 शब्द का

वृक्षारोपण निबंध 150 शब्द का
वृक्षारोपण निबंध 150 शब्द का

वृक्ष धरती के पारिस्थितिक तंत्र का अहम हिस्सा है। इसी पारिस्थितिक तंत्र के कारण धरती पर जीवन संभव है, लेकिन जिस तरह से आधुनिकता के युग में अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए हमने वृक्षों की बे-लगाम कटाई की हैं।

इसके गंभीर परिणाम हमें बढ़ते प्रदूषण और ग्लोबल वार्मिंग के रूप में मिल रहे हैं। जिसने, पर्यावरण के संतुलन को बिगाड़ने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

मानव प्राचीन समय से ही वृक्षों पर बहुत अधिक निर्भर रहा है, और अभी भी वृक्ष हमें बहुत कुछ प्रदान करते हैं।

सबसे बड़ी बात वृक्ष हमें जीवन प्रदान करते हैं। लेकिन, अपनी इच्छाओं की लालसा में इस बात को भी भूल कर हमने अपने जीवन को ही कम करना शुरू कर दिया।

वृक्षों की कटाई ना सिर्फ भारत अपितु विश्व के सभी देशों के लिए आज एक गंभीर समस्या बनी हुआ है। इसलिए, हम सभी को समझना होगा कि,

जागरूक बनिए, वृक्षों को काटने से बचिए।

वृक्षारोपण पर निबंध 200 शब्दों में

वृक्षारोपण पर निबंध 200 शब्दों में
वृक्षारोपण पर निबंध 200 शब्दों में

प्रस्तावना:

आज के समय में वृक्षारोपण बहुत जरूरी हो गया है। जिस तरह से धीरे-धीरे पर्यावरण अपना विकराल रूप दिखा रहा है, उसे अधिक से अधिक वृक्षारोपण करके कम किया जा सकता है, क्योंकि ग्लोबल वॉर्मिंग को बढ़ाने में सबसे बड़ी भूमिका वृक्षों की रही है।

वृक्ष के कम होने से ही पर्यावरण में प्रदूषण फैलता है, वर्षा कम होती है, मृदा अपरदन होता है। वृक्ष मानव जीवन का रक्षक होते हैं, जबकि हम ही उस जीवन को कम करने पर तुले हुए हैं।

वृक्षों का महत्व:

मनुष्य के जीवन में वृक्षों का बहुत महत्वपूर्ण स्थान रहा है। आदिकाल से ही हम वृक्षों पर बहुत अधिक आश्रित रहे हैं, और अभी भी हम अपने ज्यादातर आवश्यकताओं के लिए वृक्षों पर ही निर्भर रहते हैं।

वृक्ष के कारण ही हम सभी धरती पर जीवन जी रहे हैं। वृक्ष हमें ऑक्सीजन देते हैं, और कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा को कम करते हैं।

वृक्षों से तरह-तरह की तरह-तरह की दवाइयों का निर्माण किया जाता है। वृक्ष हमें फल-फूल आदि देते हैं। जिस कागज पर हम लिखते हैं वह भी वृक्षों से ही हमें प्राप्त होता है।

पृथ्वी पर जो वर्षा होती है, उसमें वृक्षों की बहुत महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। वृक्ष ही वर्षा के कारक होते हैं।

निष्कर्ष:

इसलिए यह हम सब की जिम्मेदारी है, कि हम वृक्षारोपण के महत्व को समझते हुए इसे आगे बढ़ाएं, और इसमें सब की भूमिका को भी दर्ज करवाएं।

ताकि इस धरती पर जीवन संभव हो, जिससे भविष्य में आने वाली पीढ़ी भी धरती पर एक स्वस्थ जीवन जी सके। क्योंकि,

वृक्षारोपण पर निबंध रूपरेखा सहित 250 शब्दों में

वृक्षारोपण पर निबंध रूपरेखा सहित 250 शब्दों में
वृक्षारोपण पर निबंध रूपरेखा सहित 250 शब्दों में

प्रस्तावना:

प्राचीन समय से ही प्रकृति और मानव का बहुत घनिष्ठ संबंध रहा है। मानव अपनी समस्त आवश्यकताओं के लिए प्रकृति और वनों पर निर्भर था। भोजन से लेकर आवास तक सभी उसे वृक्षों से ही प्राप्त हुआ।

वृक्षों के पत्ते से मानव ने अपना तन ढका, उसे खाने के लिए मीठे फल प्राप्त हुए, लकड़ी के रूप में ईंधन प्राप्त हुआ, पत्ते और लकड़ी से उसने अपने लिए आवास की व्यवस्था की, और इस प्रकार मानव अपना विकास करता गया तथा प्रकृति एवं वनों की अंधाधुंध कटाई पर लगाम नहीं लगाया, जिसके गंभीर परिणाम हमें आज पर्यावरण असंतुलन के रूप में मिल रहे हैं।

जो, वृक्ष हमें जीवन देते हैं, वही वृक्ष को हम अपनी लालसा के लिए काट रहे हैं। इसलिए,

“जहां हरियाली वहां ख़ुशहाली।“

वन प्रकृति का एक अनमोल गहना है। जिसका, संरक्षण हम सभी का कर्तव्य है। वृक्षों के बिना मानव अपने जीवन की कल्पना तक नहीं कर सकता है। मानव के जन्म से लेकर मृत्यु तक लकड़ी पर उसकी निर्भरता कम नहीं होती है।

वृक्षारोपण जरूरी है:

अधिक से अधिक मात्रा में वृक्षों का रोपण आज के समय में जरूरत बन गया है, क्योंकि वृक्षों की कटाई के कारण पर्यावरण पूरी तरह असंतुलित हो गया है। वर्षा नहीं हो रही है, प्रदूषण फैलते जा रहा है, पृथ्वी का तापमान कार्बन डाइऑक्साइड के बढ़ने के कारण बढ़ता जा रहा है।

पृथ्वी का तापमान बढ़ने के कारण ग्लेशियर पिघलते जा रहे। ग्लेशियर पिघलने के कारण कई देशों के डूबने की आशंका बढ़ती जा रही है।

पारिस्थितिक तंत्र पूरी तरह नष्ट होते जा रहा है, इन सभी गंभीर परिणामों को संतुलित रखने के लिए, भविष्य में धरती पर अपने जीवन की संभावनाओं को बनाए रखने के लिए वृक्षारोपण आज के समय में मानव जीवन का एक अहम हिस्सा बनना चाहिए।

निष्कर्ष:

वृक्षारोपण करना ही केवल हमारा कार्य नहीं है, हमें वृक्षारोपण करने के बाद सभी छोटे-छोटे पौधों को बड़े होने तक उनकी देख-रेख करनी चाहिए उनको आवारा पशुओं से बचाना चाहिए। तभी वह पौधे आने वाले समय में हमारी मदद करेंगे।

वृक्षों को नष्ट होने से बचाओ, चलो अपना अब फर्ज निभाओ।

Vriksharopan Nibandh 300 Words

Vriksharopan Nibandh 300 Words
Vriksharopan Nibandh 300 Words

प्रस्तावना:

वर्तमान समय में वृक्षारोपण क्यों जरूरी है?, वृक्षारोपण की जरूरत हमें क्यों पड़ी? यह कुछ महत्वपूर्ण प्रश्न है, जो सबके दिमाग में आते है और आना भी चाहिए। क्योंकि, यह एक-दो ऐसे सवाल हैं, जिसके कारण भी हम ही हैं और जिस का हल भी हम ही निकाल सकते हैं।

विकास की अंधी दौड़ में हमने पर्यावरण को बहुत नुकसान पहुंचाया हैं। पर्यावरण का मानवीय जीवन में महत्व तो बहुत हैं, लेकिन उसी महत्व को नजरअंदाज करते हुए जीवन का सबसे बड़ा कारक वृक्षों की अंधाधुंध कटाई को हमने जारी रखा और आज इसके गंभीर परिणाम सबके सामने है।

वृक्ष जीवन का सबसे बड़ा कारक ऑक्सीजन:

यह तो सभी जानते हैं कि वृक्ष हमें जीवन देते हैं। अगर धरती पर जीवन संभव है तो वृक्षों के कारण ही हैं। लेकिन, हम उसी जीवन के कारक को नष्ट करते जा रहे हैं। इसलिए आज मुझे एक बात याद आ रही है-

सोचिए अगर पेड़ पौधे भी वाई-फाई सिग्नल देने लगते तो हम ना जाने कितने वृक्षों को लगाते और इस ग्रह को बचाने की कोशिश करते।

यह दुखद भी है और हास्यास्पद भी है। आधुनिकता और औद्योगिकीकरण की दौड़ में हमने अपना विकास तो किया लेकिन प्रकृति का बहुत नुकसान किया।

हमने पर्यावरण से अपनी आकांक्षाओं को पूरा किया, लेकिन उन से होने वाले हानिकारक प्रभावों को बिल्कुल अनदेखा करते चले गए, और आज हम सब अर्थात मानव जाति एक ऐसी परिस्थिति में आकर खड़े है, जहां हमें वृक्षारोपण के कार्यक्रम चलाने पड़ रहे हैं।

धरती पर अगर स्वस्थ जीवनयापन करना है, तो अधिक से अधिक पेड़-पौधों का होना बहुत आवश्यक है। जिस तरह से पर्यावरण लगातार प्रदूषित होते जा रहा है, वह वृक्षों की कटाई के कारण है।

हमारे आसपास का वातावरण जितना अधिक हरा-भरा होगा, स्वच्छ हवा भी हमारे चारों तरफ उतने ही अच्छी मात्रा में होगी और हम अच्छा जीवन यापन कर पाएंगे।

निष्कर्ष:

पेड़-पौधे हैं मानव के लिए वरदान, मत करो इनका अपमान।

यह सिर्फ एक पंक्ति नहीं बल्कि यह मानव जीवन का अर्थ है, इसे हम सभी को समझना होगा और अपने आसपास चारों तरफ हरियाली रखने के लिए अधिक से अधिक मात्रा में पेड़ों को लगाना होगा और पेड़ों की कटाई पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगाना होगा, क्योंकि वृक्ष जीवन का आधार होते हैं।

वृक्षारोपण पर निबंध प्रस्तावना सहित 400 शब्द

वृक्षारोपण पर निबंध प्रस्तावना सहित 400 शब्द
वृक्षारोपण पर निबंध प्रस्तावना सहित 400 शब्द

प्रस्तावना:

वृक्ष मानव जीवन का आधार होते हैं। जिस तरह से लगातार पर्यावरण में प्रदूषण फैल रहा है, ग्लोबल वार्मिंग की घटनाएं बढ़ती जा रही है, पर्यावरण का संतुलन ठीक नहीं है। यह सब वृक्षों की कटाई के ही गंभीर परिणाम है।

पर्यावरण को स्वस्थ और इसका संतुलन बनाए रखने में वृक्षों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। वृक्ष वातावरण में शुद्ध हवा के कारक होते हैं, धरती पर वर्षा होने के भी कारक होते हैं, वृक्ष धरती के तापमान को संतुलित बनाए रखते हैं, तथा जलवायु नियंत्रण में मदद करते हैं।

वृक्ष मिट्टी की गुणवत्ता तथा उसकी शक्ति को बनाए रखते हैं। इस तरह से वृक्ष धरती के पूरे पारिस्थितिक तंत्र का अग्रणी होता है, और इसे संरक्षित रखने में अपनी बड़ी भूमिका निभाता है।

स्कूली स्तर व शिक्षा में वृक्षारोपण का महत्व:

आज के समय में भारत के अधिकतर विद्यालय, विश्वविद्यालय में वृक्षारोपण को विशेष महत्व दिया जाता है। उसे एक दिन का कार्यक्रम नहीं बल्कि साल भर की दिनचर्या के रूप में स्कूली छात्र-छात्राओं को जागरूक किया जा रहा है।

उन्हें वृक्षारोपण के महत्व, इसे क्यों संरक्षित रखना चाहिए, यह क्यों जरूरी है? के बारे में बता कर अधिक से अधिक वृक्ष का रोपण किया जाता है।

समय-समय पर स्कूलों में वृक्षारोपण से संबंधित कार्यक्रम, इनसे जुड़ी गतिविधियों का आयोजन किया जाता है, और सभी छात्र छात्राओं को इस में भाग लेने के लिए प्रेरित किया जाता है।

यह जरूरी भी है, क्योंकि छात्र आगे चलकर भविष्य होते हैं। तो, उन्हें वृक्षारोपण के प्रति संवेदनशील बनाया जाता है। वे आगे चलकर अभी से ही पर्यावरण को संतुलित करने में अपना योगदान दे सकें।

स्वच्छता मिशन के साथ-साथ वृक्षारोपण को भी महत्व देते हुए छात्र-छात्राओं से भी वृक्षारोपण के बारे में विचार पूछे जाते हैं। वृक्षारोपण अब प्रत्येक स्कूल में सप्ताह की गतिविधि में शामिल हो गया है, क्योंकि सभी को पता है कि वृक्ष मानव जीवन के लिए क्यों आवश्यक है!

वृक्षारोपण सबकी जिम्मेदारी:

ऐसा नहीं है, कि वृक्षारोपण सिर्फ कुछ लोगों या कुछ संगठनों की जिम्मेदारी है। वृक्षारोपण हम सभी का कर्तव्य होना चाहिये। क्योंकि, विकास की अंधी दौड़ में हमने विकास तो बहुत किया लेकिन अब वह विकास मानव जाति पर काफी भारी पड़ रहा है।

इस स्थिति को सुधारने के लिए हम सभी को मिलकर आगे आना होगा और पर्यावरण को फिर से स्वस्थ, हरा-भरा और साफ-सुथरा बनाना होगा। तभी जाकर पर्यावरण के गंभीर परिणाम से पृथ्वी को बचाया जा सकता है, और भविष्य में भी धरती पर जीवन की संभावना देखी जा सकती है।

भविष्य हमारा खुशहाल बनेगा, अगर आज से वृक्ष बचेगा।

पर्यावरण अथवा वृक्षारोपण के कार्यक्रमों में ज्यादा बढ़ चढ़कर एन.जी.ओ. शामिल होती है, वह भी गैर सरकारी संगठन वाली एन.जी.ओ. और आम लोग भी इस एन.जी.ओ. के माध्यम से जुड़कर वृक्षारोपण में अपना योगदान दे रहे हैं।

निष्कर्ष:

हम सभी को मिलकर अपने आसपास अधिक से अधिक पेड़ पौधों को लगाना चाहिए, और दूसरों को भी वृक्षारोपण के महत्व को बताते हुए ऐसा करने के लिए प्रेरित करना चाहिए।

ताकि धरती को बचाने की दिशा में कम से कम हम सब मिलकर कुछ कर सके। अन्यथा हमने पर्यावरण से लिया ही है, उसे नुकसान पहुंचाया ही है।

Vriksharopan Par Nibandh 500 Shabd me

Vriksharopan Par Nibandh 500 Shabd me
Vriksharopan Par Nibandh 500 Shabd me

प्रस्तावना:

प्राचीन समय से ही वृक्ष मानव जाति को अनेक प्रकार के लाभ पहुंचाते हैं, और पहले के समय में मानव भी प्रकृति का ध्यान रखता था, उसे बहुत अधिक महत्व देता था। हमारे समाज में बहुत सारे पेड़-पौधों को भगवान का दर्जा दिया जाता है, उनकी पूजा की जाती है।

जिसके, कारण उनका महत्व और बढ़ जाता है। पेड़-पौधे ना सिर्फ ऑक्सीजन देकर हमें जीवन देते हैं, बल्कि यह मानवीय जरूरतों को पूरा करने के लिए और भी बहुत कुछ देते हैं।

जिन से धरती पर जीवन संभव हो पाता है, लेकिन आधुनिकता की अंधी दौड़ ने पर्यावरण और मानव के बीच बहुत बड़ा अंतर ला दिया है, जिसे भरा जाना बहुत जरूरी है, नहीं तो गंभीर विनाशकारी परिणाम हमें ही झेलने होंगे।

वृक्ष से किसी राष्ट्र का क्या लाभ है?:

वृक्ष किसी राष्ट्र की अर्थव्यवस्था में बहुत बड़ी भूमिका निभाते हैं, क्योंकि मानव अपने अधिकतर वस्तुओं के उत्पादन के लिए वृक्षों पर ही निर्भर हैं। पेड़ से हम विभिन्न तरह के कच्चे माल, लकड़ी, रब्बर आदि प्राप्त करते हैं,

जिसका उपयोग हम फर्नीचर बनाने में, बर्तन बनाने में, कागज, सजावटी सामानों को बनाने में करते हैं। घरों के निर्माण में भी इसका ज्यादातर उपयोग होता है।

पेड़ पौधों से मनुष्य भोजन भी प्राप्त करते हैं फल प्राप्त करते हैं, जिसे हम सब संसाधित करके विभिन्न प्रकार के जूस, जेली, जेम आदि बनाते हैं।

किसी देश के व्यवसाय में और उस देश की अर्थव्यवस्था को अच्छा बनाए रखने में पेड़ विशेष योगदान देते हैं। पेड़ से निकलने वाले और भी कई प्रकार के कच्चे माल का दूसरे देशों में निर्यात कर अर्थव्यवस्था को मजबूत किया जाता है।

जिस बंजर भूमि पर है मायूसी,
हर उस कोने में हरियाली लाएं,
आओ मिल कर वृक्ष लगाएँ। 

वनों का महत्व:

वनों का जीवन में विशेष महत्व है। वनों से प्राप्त सामग्रियों से हम अपनी विभिन्न प्रकार की जरूरतों को पूरा करते हैं। मसलन, भवन बनाने के लिए हम वनों से प्राप्त सामग्री का उपयोग करते हैं, और दवाइयां और औषधि बनाने के लिए वनों से ही हम जड़ी-बूटी प्राप्त करते हैं।

जानवरों के लिए चारा, रब्बर, गोंद यह सब हमें वनों से ही प्राप्त होते हैं। वनों से हमें फर्नीचर, कागज, लकड़ी, दवाइयां इत्यादि बनाने के लिए कच्चा माल प्राप्त होता है।

पेड़-पौधे हमारे लिए जीवन दायक होते हैं। वन के रहने से हमें स्वच्छ हवा प्राप्त होती है। वन मानव जीवन के अस्तित्व के लिए बेहद जरूरी है। वृक्ष, भूमि की गुणवत्ता को बनाए रखता है तथा भूमि को बंजर होने से रोकता है।

धरती पर वर्षा का कारण भी वृक्ष ही होते हैं। वृक्ष, जलवायु को नियंत्रित करते हैं। वृक्ष, धरती पर कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा को नियंत्रित करता है, जिससे धरती का तापमान सामान्य बना रहता है। इसलिए, वृक्षारोपण सभी जगह बेहद आवश्यक हैं जीवन के लिए।

निष्कर्ष:

पेड़ों के महत्व को देखते हुए हमें अपने आसपास अधिक से अधिक मात्रा में वृक्षों को लगाना चाहिए। उनकी देखभाल करनी चाहिए, और आसपास सब लोगों को भी वृक्षारोपण करने के लिए प्रेरित करना चाहिए।

अपने बच्चों को वृक्षारोपण का महत्व बताना चाहिए, ताकि वे भी आगे चलकर एक सभ्य समाज बना सके। इसलिए,

जागरूक बनिए, वृक्षों को काटने से बचिए।

वृक्षारोपण पर निबंध 600 शब्दों का

वृक्षारोपण पर निबंध 600 शब्दों का
वृक्षारोपण पर निबंध 600 शब्दों का

प्रस्तावना:

भगवत गीता में श्री कृष्ण कहते है, 

“मूलतः ब्रह्मा रूपाय मध्यतो विष्णु रुपिनः अग्रतः शिव रूपाय अश्वव्याय नमो नमः.” 

इसका अर्थ यह है कि इसके मूल रूप में भगवान ब्रह्मा, मध्य में भगवान विष्णु, और अग्रभाग की ओर भगवान शिव का वास होता है। इसी महत्व को देखते हुए अश्व्यय नामधारी वृक्ष को नमन किया जाता है, उनकी पूजा-अर्चना की जाती है।

वृक्षों की रक्षा हमारी संस्कृति:

वृक्षों का हमारे संस्कृति में विशेष महत्व रहा है, क्योंकि हम एक ऐसे देश में रहते हैं अर्थात भारत जहां की संस्कृति हमेशा से ही प्रकृति की गोद में विकास मान हुई है।

प्राचीन समय में भी हमारे यहां पेड़-पौधों को विशेष महत्व दिया जाता था और तभी से ही पेड़-पौधों की भी पूजा-अर्चना चली आ रही है।

हमारे यहां जितने भी ऋषि मुनि हुए हैं, सभी ने वृक्षों की ठंडी छाँव में ही बैठकर अपना ध्यान किया, और अपने ज्ञान को दूसरों में बांटा। पहले के समय में गुरुकुल भी वृक्षों के नीचे ही होता था, जिसमें सभी शिष्य शिक्षा ग्रहण करते थे।

हमारे यहां के कवि भी प्रकृति प्रेमी रहे हैं, उन्होंने प्रकृति, वृक्षों, पक्षियों की चहचहाहट, फूलों का खिलना के बारे में अनेक कविताएं लिखी है, क्योंकि पेड़-पौधे हमारे समाज का एक मूलभूत हिस्सा रहा है, जिसने मानव जाति के विकास में बड़ी भूमिका अदा की है।

वृक्षों की कटाई के नुकसान:

वृक्षों से प्राप्त होने वाले लाभ को तो हमने जाना, लेकिन जिस तरह मानव अपनी आधुनिकता, अपनी विकास की भागम दौड़ में वृक्षों की कटाई करते गया, और पर्यावरण के असंतुलन को अनदेखा करते गया, तो इसके विनाशकारी परिणाम सभी के सामने हैं। अगर अब भी इन विनाशकारी परिणामों को नजरअंदाज किया गया तो धरती पर मानव जीवन का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा।

बढ़ती जनसंख्या विस्फोट के कारण, अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए मानव लगातार वनों को काट रहा है। जिससे, कभी चहचहाने वाले वन आज वीरान पड़े हुए है।

जीव-जंतु, पक्षी विलुप्त होते जा रहे है, क्योंकि उनका आवास उनसे छीन रहा है, और जंगली खूंखार जानवर भीड़भाड़ वाले इलाकों में जाकर मानव को नुकसान पहुंचा रहे हैं।

पेड़-पौधों की कटाई से वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा बढ़ती जा रही है। जिससे, पृथ्वी का तापमान भी लगातार बढ़ते जा रहा है। इस कारण ग्लेशियर पिघल रहे हैं, और समुद्र का जल स्तर बढ़ते जा रहा है।

वनों की कटाई से धरती का पारिस्थितिक तंत्र पूरी तरह बिगड़ गया है। वनों की कटाई ने धरती पर प्रदूषण फैलाने में बहुत बड़ी भूमिका निभाई है। वृक्षों की कटाई से उपजाऊ भूमि बंजर होते जा रही है।

पेड़ों की कटाई ने धरती के जल चक्र को भी बुरी तरह से प्रभावित किया है, जिसके कारण वर्षा बहुत कम हो रही है। इस तरह वृक्षों की अंधाधुंध कटाई ने धरती पर जीवन के अस्तित्व के सामने एक प्रश्न खड़ा कर दिया है।

वनों की कटाई रोकने के लिए चिपको आंदोलन:

एक छोटी सी कविता के माध्यम से समझे वृक्षारोपण का महत्व

यूं ही अंधाधुन पेड़ कटते रहे,
तो पर्यावरण का क्या होगा।
हमें इसे बचाने के लिए,
वृक्षारोपण करना होगा।।

वर्ष 1974 में उत्तराखंड में वृक्षों की अंधाधुंध कटाई को रोकने के लिए “चिपको आंदोलन की शुरुआत” की गई थी। इसका नेतृत्व सुंदरलाल बहुगुणा ने किया। इस आंदोलन में गोरा देवी और चंडी प्रसाद भट्ट की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही।

यह आंदोलन पेड़ों को काटने से बचाने के लिए शुरू किया गया था। इसमें जब भी कोई पेड़ों को काटने के लिए आता था, तो गांव के लोग पेड़ों से चिपक जाया करते थेे, और उन्हें पेड़ों को नहीं काटने देते थे। इस कारण इस आंदोलन का नाम चिपको आंदोलन पड़ा था।

इस आंदोलन की शुरुआत चमोली से हुई, और इस आंदोलन ने बाद में पूरे देश में एक बड़ी सीख दी और वृक्षारोपण के प्रति लोगों को प्रेरित किया, और वनों की कटाई को रोकने के लिए लोगों को जागरूक भी किया। इस आंदोलन के कारण राजनीति भी हुई।

अंत में वन संरक्षण अधिनियम भी केंद्र सरकार के द्वारा बनाया गया। हमारे देश में वृक्षों की कटाई को रोकने के लिए और भी कई महत्वपूर्ण आंदोलन हुए हैं।

निष्कर्ष:

सूरज की आग ये सहते, ठंडी छाँव हमें देते, पेड़ ही है जो मरकर भी हमें जीवन देते। 

ऊपर दिए गए पंक्ति के महत्व को समझते हुए हम सभी को अपने-अपने स्तर पर पेड़ पौधों को अधिक मात्रा में लगाना चाहिए। उनकी कटाई को रोकना चाहिए। ताकि धरती पर जीवन को बचाने में हम सभी अपना योगदान दे सके, और लोगों को भी इसके प्रति जागरूक करना चाहिए।

EssayToNibandh-funny-image

बेचारा नोबिता………इसको हमेशा Test में जीरो मिलता हैं। आप इसके जैसा मत बनना। Vriksharopan Par Nibandh को अच्छे से पढ़ना और Test में अच्छे नंबर लाना।😉


यह भी पढ़ें (संबंधित लेख और निबंध):
😊👉 Essay on Tree in Hindi
😊👉 Varsha Ritu Par Nibandh
😊👉 Vayu Pradushan Par Nibandh


अंतिम शब्द:

मेरे प्यारे दोस्तों! मुझे पूरी उम्मीद हैं की मेरे द्वारा लिखा गया वृक्षारोपण पर निबंध आपको जरूर पसंद आया होगा।

आप इस वृक्षारोपण पर निबंध रूपरेखा सहित को अपने करीबी दोस्तों या रिश्तेदारों को ज़रूर शेयर कीजियेगा, जिनको इस निबंध की अति आवश्यकता हो।

मैंने अपनी पूरी कोशिश की हैं आपको एक बेहतर वृक्षारोपण निबंध प्रदान करने की। और अगर फिर भी मुझसे जाने-अनजाने में कोई गलती हो तो गई हैं तो माफ़ बुल्कुल मत करना। नीचे दिए Comment Box💬 में मुझे जरूर डाँटना😥 ताकि अगली बार में गलतीयाँ न करूं। 😊

हम अगली बार फिर मिलेंगे।

दुआओं में याद रखना!😊🙏

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