New* Water Conservation Essay In Hindi (जल संरक्षण निबंध) Best Essay on Save Water in Hindi 2020

New* Water Conservation Essay In Hindi (जल संरक्षण निबंध) Best Essay on Save Water in Hindi: जल संरक्षण अर्थात जल को सुरक्षित रखना। अगर आप अभी भी जल संरक्षण के कार्य को नहीं कर रहे तो, वह दिन दूर नहीं है जब पानी के भाव भी पेट्रोल और डीजल की तरह आसमान छूने लगेगा।

water conservation essay in hindi
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आज हम जल संरक्षण निबंध को पढ़ेंगे। जो की अलग अलग शब्द सीमा के आधार पर लिखे गए हैं। आप Essay on Save Water in Hindiको ध्यान से और मन लगाकर पढ़ें और समझें।

जल संरक्षण पर निबंध को निम्न शब्द सीमा के आधार पर लिखा गया है-

  1. Jal Sanrakshan Par Nibandh In Hindi 100 Shabd
  2. Water Conservation Essay In Hindi 150 Words
  3. जल संरक्षण पर निबंध 200 शब्दों में
  4. Jal Sanrakshan Nibandh 250 Shabd
  5. Importance Of Water Essay In Hindi 300 Words
  6. Pani Bachao Par Nibandh 400 Shabdo me
  7. Save Water Save Life Essay In Hindi 500 Words
  8. जल संरक्षण निबंध 1000 शब्दों में 

आइये! 
Water Conservation Essay In Hindi को अलग अलग शब्द सीमाओं के आधार पर पढ़ें।

नोट- यहां पर दिया गया Save Water Essay In Hindi कक्षा(For Class) 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11, 12,(विद्यालय में पढ़ने वाले) विद्यार्थियों के साथ-साथ कॉलेज के विद्यार्थियों के लिए भी मान्य हैं।

Jal Sanrakshan Par Nibandh In Hindi 100 Shabd

Jal Sanrakshan Par Nibandh In Hindi 100 Shabd
Jal Sanrakshan Par Nibandh In Hindi 100 Shabd

जल है तभी जीवन की परिकल्पना संभव है। जल के बिना जीवन संभव नहीं है। जल धरती पर ईश्वर की सबसे बड़ी देन में से एक है। जो अमूल्य है।

लेकिन आज के वर्तमान समय में ना सिर्फ भारत में अपितु पूरे संसार में बढ़ती जनसंख्या, बढ़ते प्रदूषण, ग्लोबल वार्मिंग (वैश्विक तापमान) के वजह से स्वच्छ जल का अभाव बढ़ गया है।

जो की एक वैश्विक समस्या की जगह ले रहा है। इसका निराकरण करने के लिए हम सभी को मिलकर प्रयास करने होंगे ताकि हमारी आने वाली पीढ़ी जल से वंचित ना रहे और उनके लिए भी जीवन संभव हो।

इसलिए धरती पर जीवन को बचाने के लिए जल का संरक्षण बेहद आवश्यक है। इसमें सभी की भागीदारी अनिवार्य है।

Water Conservation Essay In Hindi 150 Words

Jal Sanrakshan Par Nibandh 150 Shabd
Jal Sanrakshan Par Nibandh 150 Shabd

आज के समय में जल की कमी विकराल रूप ले रही है। और अगर ऐसा ही चलता रहा तो, आने वाले समय में इसके तो और भी गंभीर परिणाम होंगे।

जल का संरक्षण हम सभी की ज़िम्मेदारी है। सभी को अपने अपने स्तर पर जल को हमेशा स्वच्छ रखने की कोशिश करनी चाहिए। तथा जल का दुरूपयोग करने से भी बचाने की कोशिश करनी चाहिए।

विश्व के आज ज्यादातर देश जल की गंभीर कमी से जूझ रहे हैं। जिसकी वजह से पीने के लिए स्वच्छ पानी तो क्या रोज़मर्रा की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए भी पानी नहीं मिल रहा है।

धरती पर अगर जीवन संभव है तो उसका सबसे बड़ा स्रोत है ‘जल’। जल के द्वारा ही हम अपने जीवन के सभी कार्यों अर्थात स्नान करना, भोजन करना, पीने का पानी, फसल पैदा करना, नहाना, कपड़े धोना आदि जल के द्वारा ही निष्पादित किया जाता है।

‘जल प्रकृति की ही देन है’ इसलिए हम सभी की ज़िम्मेदारी है कि हम प्रकृति के इस दिए हुए वरदान को व्यर्थ ना जाने दे। जहां जितनी जरूरत हो उसका उतना ही प्रयोग करें और आने वाली पीढ़ी को ध्यान में रखते हुए उनके लिए भी जल का संरक्षण करें।

जल संरक्षण पर निबंध 200 शब्दों में

Jal Sanrakshan Par Nibandh 200 Shabd
Jal Sanrakshan Par Nibandh 200 Shabd

जल धरती पर मानव जीवन के लिए अमृत के समान है। मानव जीवन के प्रत्येक कार्य में जल आवश्यक है। जल के बिना कुछ भी संभव नहीं है।

इसलिए यह हम सभी की ज़िम्मेदारी है कि हम जल की एक-एक बूंद के महत्व को ध्यान में रखते हुए जल को बर्बाद ना करें।

पृथ्वी पर से धीरे-धीरे स्वच्छ जल का स्तर घटता जा रहा है, इसका सबसे प्रमुख कारणों में से कुछ कारण है बढ़ती जनसंख्या, बढ़ता प्रदूषण, ग्लोबल वार्मिंग आदि के कारण वर्षा का ना होना तथा भी अनेक कारण है, जिनके कारण जल का अभाव धरती पर लगातार बढ़ता जा रहा है।

आने वाले वर्षों में इसके विकराल परिणाम मानव समुदाय को झेलने ही पड़ेंगे। जल सिर्फ प्रकृति की एक देन मात्र नहीं है अपितु पृथ्वी की सबसे अच्छी धरोहर में से एक है। जो देखने में जितना सुंदर लगता है उतना ही मानव जीवन के लिए इसका महत्व है।

इसलिए धरती पर जीवन बचाने के लिए तथा आने वाली पीढ़ी को एक खुशहाल जीवन देने के लिए हमें जल की एक-एक बूंद का सदुपयोग करना होगा।

क्योंकि आपने सुना ही होगा कि “बूंद-बूंद से ही घड़ा भरता है।” जब हम जल की एक-एक बूंद के महत्व को समझेंगे तभी जाकर हम जल का संरक्षण कर पाएंगे और इस बहुमूल्य धरोहर को विलुप्त होने से बचा पाएंगे।

Jal Sanrakshan Par Nibandh 250 Shabd

Jal Sanrakshan Par Nibandh 250 Shabd
Jal Sanrakshan Par Nibandh 250 Shabd

धरती पर जीवन का अस्तित्व बचाने के लिए जन संरक्षण बेहद आवश्यक है। जल संरक्षण ना सिर्फ मानव समुदाय के लिए अपितु पृथ्वी पर जितने भी पेड़-पौधे, प्राणी रहते हैं उनके लिए भी ‘जल एक वरदान है’

‘जल धरती पर ईश्वर का एक बहुमूल्य उपहार है’ जिसे हमें ऐसे ही व्यर्थ नहीं करना चाहिए। हम अपने जीवन की सभी ज़रूरतों को पूरा करने के लिए जल का किसी न किसी रूप में जरुर उपयोग करते हैं।

लेकिन, जरा कल्पना कीजिए कि अगर जल ना हो तो क्या जीवन संभव है? बिल्कुल नहीं और उनके बारे में भी सोचिए जो लोग जल की गंभीर परेशानियों से जूझ रहे हैं।

वैसे तो धरती पर जल बहुत है। लेकिन स्वच्छ जल जिसका मानव समुदाय उपयोग करता है। वह बहुत ही कम मात्रा में उपलब्ध है।

धरती पर मौजूद जनसंख्या के मुकाबले पीने का पानी बहुत ही कम है और बढ़ते प्रदूषण ने जितने भी स्वच्छ जल के भंडार है उन्हें भी दूषित कर रहा है।

जिससे जल प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है, और जल का अभाव भी। इसलिए भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए हमें अभी से ही जल का संरक्षण शुरू कर देना चाहिए।

ताकि आने वाली पीढ़ी भी एक खुशहाल जीवन जी सके।उन्हें जल के अभाव का सामना ना करना पड़े और वे भी जल के महत्व को समझे।

धरती पर लगातार बढ़ते जल की कमी के कारण कई जीवन समाप्त हो गए हैं। और कुछ समाप्त होने की कगार पर है। दूषित पानी ने कईयों की जिंदगी खराब की है और कई गंभीर बीमारियों से जूझ रहे।

इसलिए सभी का मिलजुल कर प्रयास जल संरक्षण में मदद कर सकता है।

Importance Of Water Essay In Hindi 300 Words

Jal Sanrakshan Par Nibandh 300 Shabd
Jal Sanrakshan Par Nibandh 300 Shabd

जीवन का सबसे बड़ा स्रोत है जल।और आज हम उसी जल के स्रोत को व्यर्थ कर रहे है, सिर्फ और सिर्फ अपने स्वार्थ के लिए।

यह धरती सबकी है। हम सभी को सोचना होगा कि जल का कैसे सतत पोषणीय तरीके से इस्तेमाल किया जाए और कैसे जल का विकास किया जाए ताकि भविष्य में आने वाली पीढ़ी प्रकृति के इस अमूल्य उपहार से वंचित ना रह जाए। और धरती पर जीवन खत्म ना हो जाए।

जीवन बचाने के लिए सिर्फ एक देश, एक व्यक्ति, एक संस्था से काम नहीं चलेगा इसके लिए सभी संस्थाओं, सभी व्यक्तियों,  सभी देश के नागरिकों को साथ मिलकर धरती की धरोहर को बचाने के लिए आगे आना होगा।

जिन लोगों को जल संरक्षण के बारे में नहीं पता है उन्हें जल संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलानी होगी। अपने आस-पास हो रही जल की बर्बादी को रोकना होगा।

अपने मूलभूत कार्यों के लिए जितने जल की आवश्यकता हो उसका उतना ही उपयोग करना होगा। ना सिर्फ इतना से, बल्कि जल के अभाव को दूर करने के लिए जल प्रदूषण को भी रोकना ही होगा।

साथ-ही-साथ वर्षा के जल को भी इकट्ठा करना होगा। ताकि जल ऐसे ही व्यर्थ ना चले जाए और फिर आगे चलकर यह जीवन के लिए एक खतरा ना बन जाए।

धरती पर जीवन बचाने के लिए जल संरक्षण बेहद आवश्यक है। आज जल की कमी से विभिन्न क्षेत्रों के लोग गंभीर समस्याओं से जूझ रहे हैं। उनके पास उचित पीने का स्वच्छ जल तक नहीं है।

हमें ना सिर्फ पानी की बर्बादी को रोकना चाहिए बल्कि उसका उचित तरीके से कैसे उपयोग किया जाए यह भी सीखना चाहिए और लोगों को भी सिखाना चाहिए।

पानी की गुणवत्ता को बनाए रखने के लिए ना सिर्फ हमें, बल्कि सरकारों को भी औद्योगिक कंपनियों से निकलने वाले गंदे वेस्ट को सीधे नदियों-नालों में नहीं बहाने के लिए कुछ कदम उठाने चाहिए।

ताकि जल की गुणवत्ता बनी रहे और धरती पर जीवन संभव बना रहे।

Pani Bachao Par Nibandh 400 Shabdo me

Jal Sanrakshan Par Nibandh 400 Shabd
Jal Sanrakshan Par Nibandh 400 Shabd

‘जल जीवन की धुरी है।’ इसके बिना जीवन संभव नहीं है। आज के वर्तमान समय में जल का महत्व प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। और इसका महत्व बढ़े भी क्यों ना, लगातार स्वच्छ जल के कम होते स्रोत जल के महत्व को बढ़ाते ही जा रहे हैं।

हमारे द्वारा कि गई बर्बादी की वजह से आने वाली पीढ़ी पानी की गंभीर समस्या से जूझेगी। और शायद आगे चलकर पृथ्वी पर जीवन संभव ही ना हो, जल ना होने के कारण , वैसे वर्तमान में देखा जाए तो जल की बहुत कमी देखने को मिल रही है।

जल संरक्षण सिर्फ एक मुहिम नहीं है बल्कि यह एक जीवन है जिसे पूरी मानवता जाति को मिलकर बचाने का प्रयास करना चाहिए।

पृथ्वी पर ही जीवन संभव है। क्योंकि यहां पर मानव के जीवन का प्रमुख स्रोत जल उपलब्ध है। आप यह क्यों नहीं सोचते कि अन्य ग्रहों पर जीवन संभव क्यों नहीं है?

इसका कारण है वहां पर वातावरण तो है, लेकिन वहां पर जल नहीं है। ‘जल जीवन का अनमोल रत्न है’ जिसे संरक्षित करना हमारा कर्तव्य है।

जल की बर्बादी हमारे ही भविष्य को बिगाड़ सकती है। हमारी वजह से ही धरती पर जीवन खत्म हो सकता है। इसलिए एक को नहीं सभी को प्रयास करना होगा।

ताकि हम ईश्वर के सबसे अच्छे उपहार ‘जल’ को सुरक्षित रखकर, धरती पर मनुष्य जीवन को बचा सके। भारत में विशाल जनसंख्या के कारण जल की समस्या और भी विकराल होती जा रही हैं।

वैसे तो पृथ्वी पर पानी की मात्रा बहुत है लेकिन पीने योग्य पानी की मात्रा जनसंख्या के मुकाबले लगभग ना के बराबर है। समुद्र का पानी खारा होने के कारण यह किसी काम नहीं आ सकता है।

जल की आवश्यकता सिर्फ मनुष्य को नहीं ही नहीं, बल्कि पेड़-पौधे, जीव-जंतु सभी को होती है। इसलिए हम सभी के निरंतर प्रयास से ही जल का संरक्षण किया जा सकता है।

हम अपने आसपास हो रही पानी की बर्बादी को रोक सकते हैं और लोगों में जागरूकता फैला सकते हैं। अपने रोजमर्रा के कार्यों के लिए कम से कम तथा जितना जरूरत हो, उतना ही पानी का उपयोग करें। और इस मुहिम में भागीदार बनें।

हम वर्षा के जल को इकट्ठा कर सकते हैं। जल प्रदूषण को रोक सकते हैं। इन सब से ही स्वच्छ जल धरती पर बचेगा, क्योंकि बूंद-बूंद से ही सागर भरता है।

हम सभी को बचपन से ही, छोटे बच्चों को जल के प्रति जागरुक करना चाहिए। उन्हें जल के महत्व के बारे में बताना चाहिए और जल का संरक्षण कैसे जिया जाए, यह भी बताना चाहिए।

ताकि वह भी भविष्य में आगे चलकर इस मुहिम से जुड़ कर अपना भविष्य उज्जवल कर सकें। और धरती पर जीवन को बचा सकें।

बढ़ते जल प्रदूषण के कारण, जल संरक्षण के लिए प्रतिवर्ष 22 मार्च को ‘विश्व जल दिवस मनाया जाता है।

Save Water Save Life Essay In Hindi 500 Words

Jal Sanrakshan Par Nibandh 500 Shabd
Jal Sanrakshan Par Nibandh 500 Shabd

“जल है तो कल है” यह सब ने सुना है और सभी इसको जानते भी हैं, लेकिन सभी इसके महत्व को उतना महत्व नहीं देते हैं। लेकिन बढ़ते जल के संकट ने सभी को इसकी और सोचने को मजबूर किया है और जल संरक्षण को अपनाने के लिए प्रेरित किया है।

जल संकट सिर्फ एक देश और यहां के नागरिकों की समस्या नहीं है अपितु यह आज के समय में एक वैश्विक समस्या बन चुकी है। और यह सबसे ज्वलंत मुद्दों में से एक हैं।

कहा तो यह भी जाता है कि आगे चलकर अगर विश्व युद्ध होगा तो वह जल के लिए ही होगा। क्योंकि जल जीवन की संभावना है और कोई भी व्यक्ति इस संभावना को अपने से दूर नहीं करना चाहेगा।

इसलिए इस समस्या को रोकने के लिए सभी को मिलकर अपने-अपने स्तर पर जल का संरक्षण करना चाहिए। अगर हम ऐसा करते हैं तो, काफी हद तक जल संकट को दूर किया जा सकता है और भविष्य में आने वाली पीढ़ियों के लिए भी जल बचा कर पृथ्वी पर जीवन संभव बनाया जा सकता है।

जल सिर्फ मनुष्य के लिए ही नहीं, अपितु यह पेड़-पौधे, जीव-जंतु, पशु-पक्षियों सभी के लिए आवश्यक है। हम यहां पानी की बर्बादी करते हैं और कहीं दूर जीव-जंतु पानी ना होने के कारण अपना दम तोड़ देते हैं।

हम यहां पानी की बर्बादी करते हैं कहीं दूसरे देश, कहीं दूसरे राज्य में पानी की कमी के कारण मानव जाति हाहाकार मचा रही है वहां सूखा पड़ा हुआ है।

सभी जानते हैं कि पृथ्वी पर पीने लायक पानी बहुत कम मात्रा में है और आज के समय में तो प्रदूषण के कारण पीने लायक पानी अर्थात स्वच्छ जल लगभग ना के बराबर है।

लेकिन अगर हम व्यवस्थित ढंग से जल का सदुपयोग कर उसे बचाने का प्रयास करें तो जल का संरक्षण किया जा सकता है। लगातार बढ़ते औद्योगिकीकरण, शहरीकरण, नगरीकरण ने नदियों, तालाबों, झीलों जैसे परंपरागत जल के स्रोत को सुखा दिया है।

लगातार भूमिगत जल में भी गिरावट होती जा रही है। जो कि भविष्य में गंभीर स्थिति की ओर संकेत कर रही है। पानी की पर्याप्त मात्रा में अनु उपलब्धता ना सिर्फ दैनिक कार्यों में संकट पैदा करेगी, अपितु अगर सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध ना हुआ तो, फसल कम पैदा होंगी जिससे खाद्य पदार्थों में भी कमी आएगी।

इसका परिणाम हम मानव जाति को ही भुगतना होगा। क्योंकि हमारी लापरवाही के कारण ही यह सब संकट पैदा हुआ है। अगर अभी हमने इस संकट का उपाय नहीं सोचा तो, आने वाले समय में इसका हल निकालना हमारे हाथों से निकल जाएगा और हम सभी धरती के इस सबसे अच्छे धरोहर को धरती से विलुप्त कर अपना जीवन भी धरती से नष्ट कर लेंगे।

इसलिए सभी की जिम्मेदारी है कि जितना पानी का उपयोग हो उतना ही करें अर्थात जल की एक-एक बूंद के महत्व को समझते हुए जलधारा को व्यर्थ ना करें। और अपने साथ-साथ भविष्य में आने वाली पीढ़ियों के लिए एक ऐसे जीवन को धरती पर छोड़े ताकि वे भी अपना जीवन खुशहाल तरीके से जिए। 

जल संरक्षण निबंध 1000 शब्दों में

Jal Sanrakshan Par Nibandh 1000 Shabd
Jal Sanrakshan Par Nibandh 1000 Shabd

जल के महत्व को लेकर हमें अपनी सोच को बदलना होगा। तभी जाकर इस विकराल जल संकट को दूर किया जा सकता है। “जल ही जीवन है” जल एक प्राकृतिक संपदा है। जिसे बर्बाद करने का हक हमें बिलकुल भी नहीं है।

क्योंकि जल सबका है। इसे व्यर्थ नहीं करना चाहिए बल्कि इसका इस तरह से सतत पोषणीय विकास कर अपने लिए तो उपयोग करना ही चाहिए तथा भविष्य में आने वाली पीढ़ी भी इसका उपयोग कर सकें ऐसा करना चाहिए।

जल ना सिर्फ मानव जाति के विकास के लिए जरूरी है, अपितु जीवन के लिए भी जरूरी है। यह जीवन को संभव बनाता है। हमें सबसे पहले तो अपने अपने स्तर पर जल को व्यर्थ नहीं करना चाहिए।

सभी जानते हैं कि पृथ्वी पर पीने लायक पानी बहुत कम मात्रा में उपलब्ध है। और वही पानी अब जल संकट का रूप ले रहा है तो इसमें यह सब की लापरवाही का ही परिणाम है।

प्रतिदिन जलाशयों, झीलों, भूमिगत जल में भारी गिरावट हो रही है। जल संकट गंभीर स्थिति की ओर बढ़ गया है। हम सभी मानव जाति मिलकर ही इस संकट को दूर कर सकते हैं।

अगर हम जल संरक्षण के प्रति अभी सजग ना हुए तो इसके विकराल परिणाम हमें ही झेलने पड़ेंगे। भारत की विशाल जनसंख्या को देखते हुए जल संकट काफी भयावह है।

हम सभी को मिलकर जल का संरक्षण और संवर्धन करना ही होगा। तभी आगे चलकर धरती पर जीवन संभव बनाया जा सकता है।

हम सभी मानव जाति को इस गंभीर संकट पर गंभीरतापूर्वक विचार करके जल के संरक्षण के लिए उपाय करने होंगे। आज की 21 वीं शताब्दी में अगर सबसे बड़ी वैश्विक समस्या है तो वह है ‘जल संकट’

जल संकट ना सिर्फ मानव जाति, अपितु पूरी धरती पर जितने भी जीवन उपलब्ध है उन सभी के लिए सबसे बड़ा खतरा है। हम सभी का निरंतर प्रयास होना चाहिए कि जल को कैसे बचाया जाए!

‘घटते शुद्ध पेयजल और बढ़ता दूषित पानी’ आज की गंभीर समस्या बन गया हैं। दूषित पानी के कारण कई गंभीर बीमारियां, महामारी फैल रही है। जिसका सामना मानव जाति को ही करना पड़ रहा है।

जल का महत्व तो सभी समझते हैं पर अभी भी लोग इस पर ध्यान नहीं देते हैं। जल का सदुपयोग सही तरीके से नहीं करते। हम ही लोग नहाते हुए, कपड़े धोते हुए नल को खुला छोड़ देते हैं, पानी बहता रहता है।

हम ही लोग जरूरत से ज्यादा अपने दैनिक जीवन के कार्यों के लिए जल का उपयोग करते हैं। और ना उपयोग होने पर जल को व्यर्थ बहाते रहते हैं।

हम ही लोग नदियों, तालाबों, झीलों में कचरा फेंक कर जल को दूषित कर रहे हैं। हम ही लोग पेड़-पौधों को काटकर प्रकृति का संतुलन बिगाड़ रहे हैं।

जिसके कारण वर्षा नहीं हो रही है और पानी की समस्या से मानवजाति (धरती) को जूझना पड़ रहा है।

अगर हमने अभी सावधानी नहीं बरती तो भविष्य में बहुत सारे संकट हमें या आने वाली पीढ़ी के लिए विपत्ति पैदा करेंगे। हम सभी को अभी से ही जल के संरक्षण पर विशेष ध्यान देते हुए लोगों में भी जागरूकता फैलानी चाहिए।

तथा अपने बच्चों को भी बचपन से ही जल के संरक्षण उनके संवर्धन और सतत पोषणीय विकास का ज्ञान देना चाहिए। ताकि वह भी आगे चलकर इस धरोहर को बचाने में अपना योगदान दें, वे भी जल को व्यर्थ ना करें।

जितनी जल की आवश्यकता हो उतना ही उसका उपयोग करें। अपने बच्चों को जल संरक्षण के बारे में बताएं ताकि धरती पर जीवन इसी तरह जारी रहे और प्रकृति के वरदान जल का लाभ सभी को मिल सके।

हम सभी को अपने अपने-अपने स्तर पर मिलकर इस गंभीरता को समझ कर इसे बचाने का प्रयास अथवा निरंतर करना होगा। पाइपों के रिसाव की समस्या भी जल संकट का सबसे बड़े कारणों में से एक है।

बढ़ते औद्योगीकरण मार्गों ने धरती के भीतर बिछे पाइपों के रिसाव को बढ़ावा दिया है। और ज्यादातर लोग इस पर ध्यान नहीं देते हैं बल्कि यही जल संकट के सबसे बड़े कारणों में से एक है।

क्योंकि बूंद बूंद से ही घड़ा भरता है। अगर ऐसे ही जल व्यर्थ चलता गया तो आगे चलकर  जल संकट विकराल हो जाएगा।

जल की कीमत हमें नहीं पता है। पर जल की असल कीमत उन्हें पता है जिन्हें पीने के लिए भी शुद्ध पेयजल नहीं मिलता है।

वे महंगे जल खरीद कर पानी पीते हैं, वहीं इसका असली महत्व समझ सकते हैं। उनके लिए जल की एक-एक बूंद कीमती है। इसलिए अगर प्रकृति ने धरती पर जल के रूप में एक अमूल्य धरोहर दिया है तो कुछ जिम्मेदारी के साथ ही दिया होगा।

हमें भी अपने कर्तव्य को समझते हुए जल का संरक्षण करते हुए अपने कर्तव्यों का निर्वहन करना चाहिए और भविष्य में भी धरती पर जीवन की परिकल्पना को संभव बनाना चाहिए। “जल ही जीवन है”

जल संकट को कैसे दूर किया जा सकता है?:

1. जल बचाने के लिए सबसे पहले हम सभी को अपने अपने स्तर पर अपने घर से ही इसकी पहल करनी होगी।

2. हमें जल की एक-एक बूंद के महत्व को समझते हुए इसका संरक्षण करना होगा।

3. अपने दैनिक जीवन में जल का जितना उपयोग हो उतना ही करना चाहिए। पोछा लगाए हुए पानी या कपड़ा धोए हुए पानी को बाग़ बगीचे में डाले जिससे भूमिगत जल में भी वृद्धि हो।

4. किसी भी प्रकार के जल को व्यर्थ ना करें!

5. हमें वर्षा के जल का संरक्षण अधिक से अधिक मात्रा में करना होगा।

6. हमें कुछ ऐसी प्रणालियों को विकसित करना होगा जिससे वर्षा का जल किसी भी प्रकार से व्यर्थ ना जाए उसका संरक्षण कारके उसे अपने प्रयोग में लाएं।

7. हमें ज्यादा से ज्यादा पेड़-पौधे लगाने होंगे जिससे वर्षा में कमीं ना हो और कहीं पर भी सुखा ना पड़े। पेड़-पौधे लगाने से वर्षा होने से जलाशयों में जल की मात्रा बढ़ेगी।

8. हम सभी को कुछ ऐसी प्रणालियों विकसित करनी होगी जिससे समुद्र के जल का भी उपयोग हम सब किसी न किसी प्रकार से अपने जीवन में कर सके।

9. जल का सर्वाधिक मात्रा में उपयोग अगर कहीं होता है तो वह है कृषि कार्यों में। इसमें जल की बर्बादी भी सबसे ज्यादा होती है। इसलिए कृषि कार्यों में हमें फव्वारा सिंचाई का प्रयोग ज्यादा से ज्यादा करना चाहिए, जिससे जल को बचाया जा सके।

10. सरकार को भी कुछ ऐसी नीतियां बनानी होगी जिससे उद्योगों से निकलने वाली गंदगी सीधे नदियों-नालों में प्रवाहित ना की जा सके। ताकि जल प्रदूषित ना हो। ऐसे और भी कदम उठाने होंगे जिनसे स्वच्छ जल को बचाया जा सके।

11. धरती पर बढ़ती जनसंख्या को देखते हुए सभी को जल संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलानी होगी। जिससे सभी जल के महत्व को समझें और अपने अपने स्तर पर जल को बचाने का प्रयास करें।

12. हमें अपने आसपास बरसात के दिनों में गड्ढे खोदने चाहिए जिससे बरसात के समय वहां पानी जमा हो सके और उस जल का हम किसी और कार्य में उपयोग कर सकें।

13. हम सभी की जिम्मेदारी है कि जल का संरक्षण करें और एक बेहतर कल की संभावनाओं को संभव बनाएं।

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बेचारा नोबिता……… इसको हमेशा Test में जीरो मिलता हैं। आप इसके जैसा मत बनना। Water Conservation Essay In Hindi को अच्छे से पढ़ना और Test में अच्छे नंबर लाना।😉


यह भी पढ़ें (संबंधित लेख और निबंध):
😊👉 Jal Pradushan Par Nibandh
😊👉 Jal Hi Jeevan Hai Essay In Hindi
😊👉 Paryavaran Par Nibandh


अंतिम शब्द:
मेरे प्यारे दोस्तों! मुझे पूरी उम्मीद हैं की मेरे द्वारा लिखा गया Save Water Essay In Hindiआपको जरूर पसंद आया होगा।

आप इस जल संरक्षण निबंध को अपने करीबी दोस्तों या रिश्तेदारों को जरूर शेयर कीजियेगा, जिनको इस निबंध की अति आवश्यकता हो।

मैंने अपनी पूरी कोशिश की हैं आपको एक बेहतर Save Water Essay in Hindi प्रदान करने की। और अगर फिर भी मुझसे जाने-अनजाने में कोई गलती हो तो गई हैं तो माफ़ बुल्कुल मत करना। नीचे दिए Comment Box💬 में मुझे जरूर डाँटना😥 ताकि अगली बार में गलतीयाँ न करूं। 😊

हम अगली बार फिर मिलेंगे।

दुआओं में याद रखना!😊🙏

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